अकेले में चुपचाप सुन क्योंकि वह नहीं चाहते तुम यहां तक पहुंच सकूं

मेरे प्यारे बच्चे आज के समय में

नकारात्मक सोच मनुष्य के जीवन को घेरे हुए

हैं और यह जीवन प्रगति में बाधा उत्पन्न

करती है मनुष्य ईर्ष्या द्वेष के जाल में

बंधता जा रहा है और यह सभी भाव मनुष्य की

प्रगति में बाधक हैं मनुष्य निरंतर इस तरह

की सोच में अपने आप ही जीवन के स्वर्णिम

पलों को खत्म कर रहा है मेरे प्यारे बच्चे

जब तुम किसी के बारे में ऐसी धारणा बना

लेते हो कि तुमको केवल उसके अंदर बुरा ही

नजर आता है तो ऐसी सोच को ही नकारात्मक

सोच जन्म देती है क्योंकि यह केवल एक

व्यक्ति तक ही सीमित नहीं होती तुम यह हर

उस व्यक्ति के लिए सोचोगे जिसे तुम कहीं

ना कहीं पसंद नहीं करते हो या कम पसंद

करते हो जब तुम अपने आसपास ऐसी चीजों को

देखते हो जिससे तुमको ईर्ष्या होती है

वहीं से नकारात्मक सोच बनती है शुरू हो

जाती है तुम्हारे मन में उस चीज या उस

व्यक्ति के प्रति नकारात्मकता पैदा होने

लगती है यानी उसके बारे में आप बुरा सोचने

लगते हैं यदि तुम इसे अपने बस नहीं करते

हो तो फिर धीरे-धीरे

नफरत में परिवर्तित हो जाती है जो

तुम्हारे लिए दुखदायक होता है मेरे बच्चे

इस नकारात्मकता को समझे कि क्या वह गलत

विचार है या सही और इसे स्वीकारने में

हिचके नहीं यह तुलना अपने तक ही सीमित

रहकर कर सकते हैं मेरे बच्चे तुम्हें

नकारात्मक भाव से दूर होने के लिए स्वयं

के अलावा किसी की जरूरत नहीं है सामने आई

कोई भी वस्तु जैसे भोजन अथवा वस्त्र आदि

में बुराई ढूंढना ऐसे और भी कई कारण हो

सकते हैं जो मनुष्य को नकारात्मक जीवन का

गुलाम बना देती है मेरे प्यारे बच्चे जब

तुम किसी चीज के बारे में सोचते हो तो

तुम्हारा दिमाग उस चीज को सुरक्षित रखता

है कि इस चीज से तुम्हें कुछ भी नुकसान

नहीं होने वाला है लेकिन जब कुछ बुरा होता

है या कुछ बुरी चीज होती है तो तुम्हारा

दिमाग सक्रिय हो जाता है वह इसलिए क्योंकि

दिमाग को लगता है कि यह उनके शरीर के लिए

नुकसानदायक है इसलिए उसके मन में

नकारात्मक सोच घर करने लगती है मेरे

प्यारे बच्चे नकारात्मक सोच से सबसे बड़ा

नुकसान तुम्हारे जीवन पर पड़ता है तुम

नकारात्मक सोच के कारण अपने जीवन को भगवान

का दिया हुआ श्राप मानने लगते हो लेकिन

तुमको ऐसा नहीं सोचना चाहिए क्योंकि भगवान

का दिया हुआ जीवन यदि तुम नकारात्मक सोच

में व्यतीत कर दोगे तो जीवन तुमको दोबारा

नहीं मिलेगा नकारात्मक सोच वाले लोग वे

होते हैं जिन्हें कभी किसी की अच्छाई नहीं

दिखती वे हमेशा सभी की खामियां ही ढूंढते

रहते हैं भले ही उसके अंदर लाख अच्छाई

क्यों ना हो लेकिन उनके अंदर यदि एक खामी

है तो नकारात्मक सोच वाले व्यक्ति को वह

एक खामी ही नजर आती है तुम्हें जीवन को

सही दिशा देनी होगी मेरे बच्चे तुम्हें

अपने अंदर की कमी को स्वीकार करते हुए

अपने आप की मदद करो गीता में भी लिखा गया

है कि मनुष्य सर्वप्रथम खुद के प्रति

उत्तरदाई होता है तुम्हारा पहला कर्तव्य

स्वयं के प्रति होना चाहिए इसका मतलब यह

नहीं है कि तुम स्वार्थी बन जाओ लेकिन जब

तक तुम अपने आप से प्यार नहीं करोगे तब तक

किसी को खुश नहीं रख सकते हो किसी का भी

जीवन सामान्य नहीं है लेकिन अपने दुखों के

लिए व्यक्ति की नकारात्मक सोच जिम्मेदार

होती है संघर्ष जीवन का एक अभिन्न हिस्सा

है इसे भार और दुख की तरह लेंगे तो भगवान

का दिया यह सुंदर जीवन अभिशाप की तरह

प्रतीत होगा आवश्यक है तो तुमको अपने भीतर

झांक कर देखने की और अपनी तकलीफों को दूर

करने की जैसे सिक्के के दो पहलू होते हैं

वैसे ही हर परिस्थिति के भी दो पहलू होते

हैं अगर मन में नकारात्मक भाव है जो तुम

में गुस्सा पैदा कर रहा है तब उसे शांत

करो और दूसरे के नजरिए से परिस्थिति का

अवलोकन करो तुम्हारे पास जो है जैसा है

अगर तुम मोटे पतले या शारीरिक रूप से तुम

में कोई भी कमी है तो उसे प्यार से

स्वीकार करो हमेशा उसके बारे में ना सोचो

जीवन में सबको सब कुछ नहीं मिलता है जो

तुम्हारे पास है वह कईयों के पास नहीं है

अगर तुम्हारे सामने कुछ नया काम करने का

मौका है तो उसे नकारात्मक हिस्से को ना

सोचो हमेशा सकारात्मक भाव से किसी भी काम

को करो अपने आप को अकेला या दुखी ना समझो

क्योंकि अगर आप खुद के लिए सहानुभूति का

भाव चाहते हैं तो यह सबसे बड़ा नकारात्मक

गुण है परिस्थिति के अनुरूप डाल लेना

अच्छी बात है लेकिन उसके लिए सदैव दुखी

रहना सही नहीं ऐसी सोच से खुद को दूर रखो

अपने आप को समझाएं क्योंकि यह एक अंधेरा

है इससे बाहर सुकून की जिंदगी है इसलिए

ऐसे भाव को मन में ना आने दें हमेशा अपने

आप को शक्तिशाली एवं हिम्मत वाला बनाएं और

खुद को याद दिलाएं कि आप बहुत मजबूत है

मेरे बच्चे दिन की शुरुआत प्रसन्न चित मन

से करो जिसके लिए सुबह जल्दी उठे पर्यावरण

का वह समय जब सूर्य पूर्व की ओर होता है

और पक्षियों की आवाज से आकाश गुंजा मान

होता है उस वक्त घर से बाहर निकलकर घास पर

नंगे पैर चले और जीवन के सुखद पलों को याद

करें बच्चे बहुत ही प्यारे होते हैं अगर

तुम्हारे घर में कोई बच्चे हैं तो उनके

साथ खेलें बातें करें उनके सवालों का जवाब

दें और उनकी बातों को उनके नजरिए को सुने

समझे तब तुम्हें एहसास होगा कि दुनिया में

कितना भोलापन भी है मेरे प्यारे बच्चे तुम

अपनी खुशी के लिए जो करना चाहे वह करो

मेरा आशीर्वाद सदैव तुम्हारे साथ है सदा

खुश रहना

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