इंडिया गठबंधन की मजबूती से भाजपा में बढ़ती बौखलाहट |

कि दिल्ली का रास्ता लखनऊ से जाता है
उत्तर प्रदेश से जाता है उत्तर प्रदेश में
सबसे अधिक सांसद हैं लोकसभा के 80 सांसद
चुन के आते हैं उत्तर प्रदेश से और फिर यह
कांग्रेस की परंपरागत

जनाधार वाला इलाका भी रहा है वहां
समाजवादियों का इलाका है बहुजन समाज के
लोगों का भी काफी असर है और देखिए बात यह
है कि कभी कांग्रेस के साथ दलित मुस्लिम
और ब्राह्मण यह इसका परंपरागत जनाधार होता
था हाल के वर्षों में दलित छिटक गए थे
ब्राह्मण बीजेपी के साथ चले गए थे दलित

कांशीराम जी या बहुजन समाज पार्टी की
राजनीति में चले गए थे और मुस्लिम जो है
जो बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद कहिए
जो भी कहिए तो समाजवादी पार्टी के साथ या
बहुजन समाज के बीच में इधर उधर आते जाते
रहते थे हा इधर के वर्षों में दलित और

ब्राह्मण खास तौर से जी बीजेपी से तो काफी
नाराज है खासतौर से उत्तर प्रदेश में जिस
ढंग से ब्राह्मणों के साथ अत्याचार की
घटनाएं हुई है उनकी हत्याएं हुई है
ब्यूरोक्रेसी में भी जिस तरह से उनको
नेपथ्य में हास्य पर रखा जा रहा है उसको

लेकर के उनके अंदर एक बेचैनी है और उनके
लिए कुछ खास किया नहीं सरकार ने चाहे योगी
जी की सरकार हो चाहे मोदी जी की सरकार हो
और दलितों पर जितने अत्याचार उत्पीड़न
उत्तर प्रदेश में हुए हैं शायद इस देश के
किसी अन्य इलाके में उतना नहीं हुआ होगा
संभव है कि बगल में मध्य प्रदेश में भी

उतना हो रहा हो तो नहीं है तो उनके अंदर
भी बेचैनी है लेकिन अब वो जाए तो कहां जाए
कांग्रेस के पास अपना कुछ था ही नहीं
जिसके चलते कुछ उसके साथ लोग जुड़ सके अब
जो गठबंधन बन गया है इससे दलितों को भी

सोचने का एक मौका मिलेगा कि समाजवादियों
के साथ चक अंबेडकर लोहिया का पुराना भी एक
रहा है तो समाजवादियों के साथ कांग्रेस आ
जाएगी उसके चलते कम से कम माइनॉरिटी के
सारे वोट और दलितों का बड़ा हिस्सा और जब

यह दोनों जुड़ने जाएगा तो फिर ब्राह्मण भी
जो भाजपा से नाराज है या उपेक्षित महसूस
कर रहे हैं उनका भी बड़ा तबका इधर आएगा
रविकांत बहुत सही कह रहे थे मेरी एक ही
शर्त है अगर यह गठबंधन ईमानदार रहा

उम्मीदवारों का चयन जीतने की क्षमता और
योग्यता और अनुभव के आधार पर हो टिकटों
में हेराफेरी नहीं होना चाहिए एक दूसरे को
नीचा दिखाने की कोशिश नहीं होना चाहिए अगर
य गठबंधन ईमानदार रहा तो आधी सीट से
ज्यादा हो सकता है कि इंडिया एलायस को
उत्तर प्रदेश दे देगा और इसमें जो

चंद्रशेखर आ गए हैं देखि मायावती जी किधर
जाएंगी किधर नहीं
जाएंगी बहुत रहस्यमय है कब क्या उनका
फैसला होगा इसके बारे में लेकिन उनकी इसी
उहापोह की स्थिति के कारण खास तौर से दलित
समाज का जो युवा वर्ग है वो कुछ तो

समाजवादियों के साथ जड़ना शुरू कर दिया था
दूसरा शेखर आजाद जो है वो पश्चिम उत्तर
प्रदेश से लेकर के पूर्वी उत्तर प्रदेश के
भी दलित युवाओ में एक तरह से आइकन बनते जा
रहे हैं उनका काफी एक आकर्षण बना है तो
अगर वह किसी बड़े गठबंधन का हिस्सा बन
जाते हैं तो मुझे लगता है कि वोह भारी चंक

जो है लेकर के वो आएंगे जैसे यूपी में
दिया है कि 63 सीट लड़ेंगे समाजवादी
पार्टी और 17 कांग्रेस लड़ेगी तो उसमें
जैसे हो सकता है कि पल्लवी पटेल की जो ये
अपना दल है कमेरा बादी है उसको एक एक दो

सीट दे सकते हैं हो सकता है कि धर ये
चंद्रशेखर आजाद को एक दो सीट दे सकते हैं
और भी छोटे मोटे दल है जो बीच-बीच में आते
जाते रहते हैं तो उसमें से किसी को दे
सकते हैं लेकिन सबसे बड़ी बात जो है जैसे

आपने कहा कि हमारा मीडिया जो है इंडिया
एलायस को लेकर के जितना चिंतित रहता है
जितना परेशान रहता है हाय अब टूटा हाय कल
टूटा अब टूट जाएगा कल टूट जाएगा अब ये

नहीं जुड़ रहा है तो वो नहीं जुड़ रहा है
तो सीट शेयरिंग नहीं हो रहा हमने किसी
टीवी चैनल प ऐही बात हो रही थी मीडिया मेन
मीडिया में तो हमने ने पूछा कि भाई आप लोग
इतना जो बेचैन रहते हैं कभी आपने एनडीए के

बारे में चिंता क्यों नहीं की आप लोग तो
इसका मतलब मोदी जी बहुत बेरुखी दिखा रहे
हैं ऐसे तो उनके प्रति आपका प्रेम है
ममत्व है सब कुछ उस पर निछावर करते हैं
लेकिन एनडीए अलायंस में किस पार्टनर को

कितनी सीट मिलने जा रही है कभी आप चर्चा
ही नहीं करते हैं अब जैसे यूपी में ही ले
लीजिए भाई बीजेपी है अब ओम प्रकाश राज
भर्म की साथ जुड़ गए हैं निषाद पार्टी

उनके साथ जुड़ी हुई है जयंत चौधरी उनके
साथ जुड़ गए हैं और भी एक दो लोग हैं उनके
बीच में कितना कितना सीट किसको मिलेगा कभी
मीडिया में चर्चा नहीं होगी बिहार में
पिछली बार 40 में से 39 सीट एंडिए जीता था

उसमें 17 सीट नीतीश कुमार के जनता दल ने
जीती थी और 17 सीटें भाजपा ने जीती थी और
छ मिला था लोक जन शक्ति राम विलास पासवान
जी की पार्टी को उसमें से पांच सीट
उन्होंने जीती थी अब उसमें उपेंद्र
कुशवाहा की पार्टी भी आ गई है अब उसमें
जीतन मा जी की पार्टी भी आ गई है अब लोक

जनशक्ति पार्टी दो फाड़ हो गई है पशुपति
पारस और ये चिराग पासवान अलग-अलग खेमे में
हो तो इनमें कितना सीट किसको मिलेगा कभी

इस पर कोई चर्चा हुई है क्या एनडीए में कब
किस गठबंधन में कहां जाएंगे महाराष्ट्र है
महाराष्ट्र में पिछली बार अधिकतम सीट जीत
लिया था एनडीए ने उस समय बीजेपी और
शिवसेना एक साथ थे अब शिवसेना दो फाड़ हो

गई है एनसीपी का भी एक बड़ा गुट जो है वो
बीजेपी के साथ एनडीए में आ गया है उनको
कितना सीट देंगे कितना नहीं देंगे कितनी
बीजेपी लड़ेगी इसके बारे में कोई चर्चा

नहीं करेंगे लेन दूसरी बात जो अभी आपने
कहा है कि बहुत जल्दी देखिए हम लोग तो
शुरू से ही इस बात के रहे मानने वाले रहे
हैं कि इंडिया एलायस बहुत मजबूत रहेगा और
उसम ऊपर से चाहे जो कुछ भी दिखाई दे हो
सकता है कि इनको खुश करने के लिए इनको ओवर

कॉन्फिडेंट बनाने के लिए भी इस तरह की
बातें होती रहे वो अपने समय समय आने पर सब
एक एक करके आप देखिएगा सारे एकजुट हो
जाएंगे और पंजाब और दिल्ली में जो आपने
कहा आम आदमी पार्टी के साथ तो उसका सबसे

बड़ा श्रेय किसी को है तो बीजेपी को है
बीजेपी ने जिस ढंग से चंडीगढ़ में
कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के अलायंस के
आदमी को हराने के लिए सारी ताल तिकड़म
फर्जी बेईमानी धांधली सब कुछ करवाया उसने

इन दोनों दलों की एकता को और मजबूत कर
दिया उनको लगा कि भाई अगर हम दोनों मिलकर
के रहेंगे तभी हम पंजाब भी जीत लेंगे और
दिल्ली की दिल्ली भी जीत लेंगे हम बिल्कुल

और मुझे लगता है कि सही आप कह रहे कि एक
दो दिन में कभी भी ये हो सकता है राहुल
गांधी को जिस तरह का सपोर्ट बेस मिल रहा
है अब उनके सामने कम से कम उस तरह की कोई
चुनौती भी दिखाई नहीं दे रही है कम से कम

अपोजिशन के अलायंस में कि कोई उनको उस तरह
का करे तो एक बड़ा तबका युवाओं का और
सामाजिक संतुलन भी जिस ढंग का खड़ा हो रहा
है ना चाहे वो दलित ब्राह्मण ओबीसी
माइनॉरिटी अगर एक साथ एकजुट हो गए जैसे वो

जिस तरह से गिना रहे थे वो अपनी रैली में
वहां पर कि भाई 80 पर 85 पर तो आप लोग हो
लेकिन 90 पर आप लोग हो लेकिन आप सोए हुए

हो अगर जि दिन जग जाओगे और उसी में वो
बारबार आज उन्होंने नहीं कहा हो सकता है
कि लंबा भाषण किया उसम कहा भी हो कि इसके
साथ जो सवर्ण जातिया है उसमें भी जो गरीब
लोग हैं जो उसके अंदर भी जो गरीब तबका है

वो भी तो इन्हीं में है उसका भी तो कोई
ख्याल नहीं किया जाता है तो वो भी अगर
जुड़ गए तो फिर तो आप टिकें कहां अगर ये
सारे लोग एकजुट हो कर के अपने अधिकारों की

मांग करना शुरू कर दए और मैदान में आ जाए
तो फिर ईवीएम टीवीएम और वो जो बलेट पेपर
रद्द करने वाला खेल जो है लंबा नहीं चल
सकता है अगर जनता निकल पड़ेगी सड़कों पर

तो फिर भाजपा के लोग और एनडीए के लोग पनाह
मांगते फिरेंगे और सबसे बड़ी बात क्या है
दूसरी बात मैं कहना चाहता था यह बेसर्म
राजनीति का सबसे कुख्यात अध्याय लिखा जा
रहा है इस समय भारतीय राजनीति में हमारे
देश का प्रधानमंत्री जिसको कहता है कि
भ्रष्टाचार से लिप्त है उसको हम जेल

भेजेंगे जो कहता है कि हमारे पुरुष
सैनिकों की विधवाओं के साथ जो बलात्कार
किया मतलब भ्रष्टाचार किया आदर्श ससा
घोटाले में बलात्कार मेरे मुह से गलत निकल

गया भ्रष्टाचार किया आदर्श भूमि घोटाले के
के मामले में उसको तो हम जेल भेजेंगे और
वोह पार्टी कांग्रेस में एक दिन पहले
शामिल होता है दूसरे दिन राज्यसभा में चला
जाता है भोपाल में रैली में प्रधानमंत्री
कहते हैं कि साहब 66000 करोड़ 67000 करोड़

रुपए का सिंचाई घोटाला अजीत पवार छोड़ेंगे
नहीं छोड़ेंगे नहीं मतलब जेल नहीं भेजेंगे
अपने साथ कर लेंगे

जी देवेंद्र फनस कहते हैं कि अजीत पवार
चकी जेल में चक्की पिसिंग चक्की पिसिंग अब
उनके ऊपर बैठ कर के उ मुख्यमंत्री बन गए
बराबरी के दर्जे पर इस तरह के तमाम जितने
भ्रष्ट चेहरे हो सकते हैं जितने परिवार
वादी चेहरे हो सकते हैं व सारे परिवार
वादी

चेहरे भाजपा के साथ उठ कर के बैठ रहे हैं
उनके साथ जुड़ रहे हैं और उसके बाद भी
प्रधानमंत्री हमारे परिवारवाद परिवारवाद
की राजनीति को गाली देते हैं सारे
परिवारवाद उनके
साथ जी पासवान से लेक पशुपत पारस ये सारे

के सारे लोग तो हमारे कहने का मतलब है कि
ये ऐसा है इस इस बेशर्म राजनीति के अध्याय
को दुरुस्त करने का काम अगर कोई कर सकता
है तो राहुल गांधी के नेतृत्व में इंडिया

एलायंस ही कर सकता है और मुझे लगता है कि
उस लोग काम में लगे हुए हैं बहुत सही
रविकांत क रहे कि व क्रांतिवीर की तर से
उस आदमी को कोई चिंता नहीं है वो निर्भय
जैसे कहा भी भाई अगर निर्भय हो जाओगे तो
फिर कोई दिक्कत ही नहीं है उनको चिंता
नहीं है कि प्रधानमंत्री पद मिलेगा नहीं
मिलेगा सरकार नहीं आएगी जाएगी क्या होगा
लेकिन हम जिस बात पर खड़े हैं जि जिन
मसलों को लेकर के हम लड़ रहे हैं उससे हम
पीछे नहीं हटेंगे और यह बात हमारे जैसे
लोगों को बहुत बड़ा आश्वासन देती है
जयशंकर
जी 70 पार या 400 पार जो है वो मोदी जी का
जुमला है उसको बाद में अमित शाह जी कहेंगे
जब हार जाएंगे लोग तो अमित शाह जी कहेंगे
अरे भाई चुनाव में सब जुमले बहुत बोले
जाते हैं तो इसलिए उसमें कोई खास बात नहीं
है देखिए पश्चिम बंगाल का जब जब विधानसभा
का चुनाव हो रहा था तो क्या नारा दिया था
अबकी बार 200 के
पार सीट कितनी
आई तो इस तरह के नारे उछलते रहते हैं लोग
इसमें कहीं कोई बहुत महत्व नहीं है ठीक है
व साइकोलॉजिकल मनोवैज्ञानिक युद्ध है
लड़ाई है चुनावी राजनीति है मैं कह रहा
हूं कि देखिए अगर जो अंदर खाने की बातें
जो चल रही है हालांकि पिछली बार भी हुई थी
लेकिन अब किसी ने उसम रोड़ा अटका दिया था
अलग बात हो सकती है अगर इंडिया एलायंस
इंडिया जो है गठबंधन
जी इस चुनाव में लोकसभा के चुनाव में
संयुक्त रूप से चुनाव अभियान चलाता
है अगर एक मंच पर कोलकाता में बंबई में
पटना में लखनऊ में जयपुर में भोपाल में
रायपुर में देश की तमाम राजधानियों में और
बड़े शहरों में बनारस में अगर सारे इंडिया
एलायंस के मुख्यमंत्री और सारे बड़े नेता
सोनिया गांधी अगर स्वस्थ है तो वो रहे
मलिकार्जुन खरगे हैं राहुल गांधी है तीनों
में से कोई ना कोई एक रहेगा शरद पवार है
अखिलेश यादव
है तेजस्वी यादव है एम के स्टालिन है
रेवंत रेड्डी है सिदर मैया है यह सारे लोग
अगर एक मंच पर जाकर बात करें यह बात पहले
भी तय हुई थी भोपाल में तो कमलनाथ जी ने
नहीं होने दिया था एक अलग बात हो सकती है
लेकिन अगर वो आप सोचिए कि चुनावी का
परिदृश्य कैसा होगा उसको आप जो भी मोदी
मीडिया कहिए चाहे जो भी मीडिया कहिए उसको
इग्नोर नहीं कर सकता है कि अगर दर्जन भर
मुख्यमंत्री एक साथ बैठ कर के बातें करें
या दर्जन भर बड़े नेता कि दलों के एक साथ
बैठ कर के बातें करो एक कॉमन एजेंडे के
साथ तय करके आए कि भाई हम क्या-क्या करने
वाले हैं ये तो जो कर रहे हैं गलत हो रहा
है वो सब तो ठीक बात है लेकिन हम जो आएंगे
तो हम क्या-क्या करेंगे अगर ये बातें जब
सामने आने लग जाएंगे तो इनका कोई ठौर
ठिकाना नहीं दिखाई देगा इसलिए राज राजीव
जी बेचैनी तो है बेचैनी
इसके पहले से भी है क्योंकि मोदी जी को भी
अंदर से मालूम है बीजेपी के रणनीतिकारों
को भी मालूम है कि इंडिया एलायंस एक
सच्चाई है एक हकीकत है कितने भी खुरपे कर
लीजिए कोशिश कर लीजिए उसम जोड़ तोड़ लगाने
की वह तो होके रहेगा इसीलिए नीतीश कुमार
को साथ लेने की जो मजबूरी थी क्यों गए
उनके पास इसीलिए
गए क्यों जाके अशोक चौहाण से भी कह रहे
भाई ठीक है चलो अद घोटाला सब कुछ तुमने कर
दिया विओ के नाम पर सब लूट लिया खा लिया
लेकिन आ जाओ आ जाओ हमारे पास और आ ही नहीं
जाओ भाई इतना होता तो कहते भाई लोकसभा का
चुनाव लड़ो े से ना ना आ जाओ तुम राज्यसभा
में चले जाओ सीधे राजसभा में जाओ तो ये कर
रहे हैं लगातार और एक पाखंडी हमारे यहां
का बाबा है क्या नाम है उसका कौन कृष्ण
मुम क्या कलकी पीठ बनाता है जो भी करता है
उसके पास चले गए कि भाई तुम ही आ जाओ बाबा
हमारे साथ आ जाओ तुम हमारा कुछ कल्याण कर
दोगे पिछली बार लखनऊ से कांग्रेस का
उम्मीदवार था वो और क्या क्या भाषण क्या
क्या कर रहा था तो उसके पास भी चले गए
दौड़े दौड़े तो यह सारी चीजें मतलब बेचैनी
और बौखलाहट जो है दिखा रही है कि एक 375
और 400 के नारे के पीछे का जो सच है वो
कितना भयानक है कि आप ऐसे ऐसे लोगों के
पास जा रहे हैं जिनको कभी कोई पूछता नहीं
था कांग्रेस में कोई नहीं पूछ रहा है और
उसके पास आप जाकर पहुंच रहे हैं तो बौखला
है अंदर अंदर कहीं ना कहीं एक बेचैनी है
और यूपी का जो गठबंधन है आप देखिएगा
अखिलेश यादव राहुल गांधी की एकता हो गई है
पल्लवी पटेल उसमें शामिल होने जा रही है
अपना दल की जो कमेरा वादी है मुझे जो
सूचना मिल रही है हो सकता है वो जो
जनसत्ता दल है राजा भैया का वो लोग भी
सामने साथ आ रहे हैं इसी गठबंधन में साथ आ
रहे हैं राज्यसभा के चुनाव में उसके बाद
भी अगर मान लीजिए ये लोग साथ हो गए तो फिर
तो अमेठी रायबरेली प्रतापगढ़ कौशांबी चार
जो पांच सीटें हैं इन सीटों पर तो बीजेपी
पनाह मांगते फिरेगी कहीं कुछ रह नहीं
जाएगा इनका
तो लेकिन इस तरह की अंदर खाने बहुत सारी
चीजें हो रही है बहुत सारे डेवलपमेंट हो
रहे हैं लेकिन वो एक साथ अगर सामने आ
जाएंगे तो बहुत ही लोग बेचैन हो जाएंगे और
ज्यादा बौखला जाएंगे और ईडी और सीबीआई
एकदम प्रक्ष रूप से घूमना शुरू कर देगी इन
लोगों के घर हालांकि अभी भी घूम ही रही है
लेकिन तब और ज्यादा बढ़ जाएगा क्योंकि हर
किसी के पास कुछ भी कहने के लिए आप किसी
को उठाकर बंद कर दीजिए किसी को समन दे
दीजिए बाद में जो होगा अदालत आज तक ईडी के
मामलों में 4 पर भी कामयाबी नहीं मिली है
उसको लेकिन कितने लोगों को गिरफ्तार कर कर
के बंद कर दिया अब आम आदमी पार्टी के
लोगों को कब से जेल में रखा हुआ है ना कोई
सबूत ना कोई सुनवाई ना कहीं कुछ हो ही
नहीं रहा है कहीं कुछ पता ही नहीं चल रहा
है सन को देखिए हेमंत सोरेन को उठा कर के
बंद कर दिया मतलब आप एक मुख्यमंत्री को अ
कहीं आपके पास कोई सबूत नहीं है सारा कुछ
देखने के बाद भी कहीं कुछ साबित करने की
स्थिति नहीं हो रही है किसी मामले में अभी
तक कोई फैसला नहीं हुआ कि हां जी ये गलत
बात है और जिनके जिनके खिलाफ ज्यादातर खुद
ही आप बोलते रहे वो सब आपके साथ बगल गीर
हो गए सबको आपने बैठा लिया महाराष्ट्र तो
एकदम ताजा उदाहरण है जहा अजीत पवार से
लेकर के छगन भुजबल नारायण राणे हसन मुशरी
नवाब मलिक कितने नाम गिनाए अच्छा उसम कुछ
तो कह देते हैं सब भाई अब हमारे पास डीडी
नहीं आने वाला भाजपा में शामिल हो गए
पब्लिकली मंच पर कोई सांसद अगर कहे हा साब
हमारे सपने में हमारे घर पर कोई ईडी
सीबीआई नहीं आने वाला है क्योंकि हम तो
भाजपा में शामिल हो गए हैं इस तरह का मजाक
चलने लगा सोशल मीडिया पर कि जो ईडी वाले
जा रहे हैं किसी दुकानदार के पास या किसी
इसके पास जा रहे हैं भाई हम ईडी से है
तुम्हारे खिलाफ यह आरोप लगा है तो उसने
कहा अच्छा अच्छा तो अपना पट्टा निकाल के
दिखाता भैया हम तो शामिल हो चुके हैं
भाजपा में तो ये इस ंग का मजाक का विषय
बना दिया मतलब आप सोचिए कि संवैधानिक
संस्थाओं का को प्रहसन का विषय बना दिया
इस तरह से बना दिया है इसको अगर बदला नहीं
गया तो भारत की जो छवि होगी दुनिया भर में
जो जिस तरह से पेश होगी उसम क्या लोग कैसा
लोकतंत्र जिसके लिए गांधी ने लड़ा जिसके
लिए नेहरू रहे लोहिया रहे जयप्रकाश रहे
इंदिरा गांधी ने शहादत दी राजीव गांधी ने
अपनी शहादत दी उस देश का लोकतंत्र इस
चौराहे पर आकर खड़ा हो गया है हमारी जांच
एजेंसियों के बारे में लोगों के इस तरह के
कमेंट हो रहे हैं इसलिए अंडर करेंट जो है
छात्रों में युवाओं में किसानों में
बेरोजगारों में महिलाओं में सब में एक तरह
का गुस्सा एक तरह का आक्रोश है लेकिन खुल
कर के अभी कोई बोलने की स्थिति में नहीं
है मैं इसको विजुलाइज करता हूं 19 77 के
चुनाव से लोग दबे थे सहमे थे लेकिन जब
चुनाव की घोषणा हो गई जब कार्यक्रम फिक्स
हो गए लोग सड़कों पर आने लग गए जिस ंग की
आज की रैलियां राहुल गांधी को रही उसी तरह
की रैलियां उस समय विपक्ष के नेताओं की
रैलियां होती थी और चुनाव नतीजे आपने आपको
पता ही है कि क्या हो गया तो इसी तरह का
हमको तो लग रहा है कि 2024 में भी अब इनके
पास देखिए लेकिन एक चीज है जैसा भारतीय
जनता पार्टी के नेता अभी तक वो नेता है
भारतीय जनता पार्टी के
पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक जी जो कहते
हैं बारबार यह कुछ भी कर सकते हैं किसी की
हत्या भी करवा सकते हैं फिर कोशिश कर सकते
हैं कहीं कोई सांप्रदायिक दंगा हो जाए उस
ंग का खेल हो जाए जिसके चलते हालाकि अब
लोग समझ चुके हैं पुलवामा के बाद लोगों की
समझ में आ चुका है कि भाई अगर पुलवामा का
हमला वास्तविक था तो जांच में अभी तक
उसमें कुछ निकल के क्यों नहीं आया कोई तो
गुनाहगार होना चाहिए था कोई तो क उसके लिए
जिम्मेदार होना चाहिए था सतपाल मलिक तो
खुल कर के बोलते ही है इसलिए लोगों को अब
समझ में आ गया है कि अगर इस तरह का भी कुछ
गोरक धंधा करते हैं लोग तो उस पर लोग
भरोसा नहीं करेंगे और इंडिया एलायस बस यही
है जो बारबार मैं वार्न करना चाहता हूं कि
ईमानदार होना चाहिए गठबंधन को ईमानदार रना
चाहिए एक दूसरे को नीचा दिखाने का या एक
दूसरे के ऊपर हावी होने की कोशिश किसी को
नहीं करनी चाहिए जैसे मध्य प्रदेश में भी
कहा ना खजुराहो की सीट शायद समाजवादी
पार्टी को दे रहे हैं कांग्रेस के दे रहे
हैं लड़ने के लिए खजुराहो दे रहे हैं तो
उसी तरह से अन्य राज्यों में मेरा कहना कि
अगर एक संवेद रूप से संयुक्त रूप से अगर
चुनाव अभियान चलाएगा इंडिया एलायंस जिसकी
बात लगभग तय हो चुकी है तो आप देखिएगा
चुनावी नजारा क्या होगा जी राजीव जी जी
बिल्कुल आप सही कह रहे हैं बहुत बहुत
इंपॉर्टेंट बातें आप यहां बता रहे थे आने
वाले समय की जो भविष्य की जो तस्वीर है वो
आप यहां

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