ऐसी जीत होगी तुम्हारी की लोगों के होश उड़ जाएंगे

मेरे प्रिय बच्चे वह लोग जो बात-बात पर

तुम्हारा उपहास उड़ाया करते हैं तुम्हारे

पीठ पीछे तुम पर हंसा करते हैं तुम्हें

नीचे गिराने का प्रयत्न करते हैं वह लोग

जिन्होंने अपने चेहरे पर दिखावे का एक

मुखा वटा पहना हुआ है जो केवल अपने कार्य

की सिद्धि के लिए तुमसे रिश्ता बनाए रखे

हैं ऐसे लोगों पर प्रिय बच्चे तुम्हें

अपनी बहुमूल्य करने की आवश्यकता नहीं है

तुम्हारे निर्मल निश्चल आंसू बहुमूल्य और

इन आंसुओं को तुम्हें ऐसे लोगों पर व्यर्थ

नहीं करनी चाहिए ऐसे लोग केवल व्यक्ति के

सुख में ही उसके साथ होते हैं और जैसे ही

उन पर दुख आता है वह सबसे पहले अपनी नजरें

मोड़ लेते हैं तुम्हारे पास शक्तियों का

भंडार है जैसे सुंदर फलों से लदा हुआ पेड़

स्वयं नहीं जानता कि उसका मूल्य क्या है

वैसे ही तुम नहीं जानते कि तुम्हारा क्या

मूल्य है जैसे समुंदर की कोख में छुपा

मोती यह नहीं जानता कि उसकी क्या कीमत है

वैसे ही तुम्हें भी इसका आभास नहीं कि

तुम्हारी क्या कीमत है लेकिन तुम्हारे

जीवन में अब तक जीत की दस्तक नहीं दे सकी

लेकिन अब वह समय बदल रहा है क्योंकि अब

तुम मेरी शरण में आ चुके हो इसलिए

तुम्हारा इस संदेश को सुनना बहुत आवश्यक

है हर हाल में इस संदेश को पूर्ण सुनना

इसे बीच में छोड़कर जाने की भूल ना करना

मेरे प्रिय कोई साधारण व्यक्ति आखिर

तुम्हें कैसे हानि पहुंचा पाएगा जब तुम पर

मेरी कृपा है यह तो तभी संभव है कि जब तुम

ही स्वयं किसी को पीड़ा देने के अधिकारी

बन जाओ मेरे प्रिय तुम्हें वह चीजें अब

एकएक करके प्राप्त

होंगी जिनकी तुमने चाहत की है और वह सभी

लोग जो तुम्हारी पीठ पीछे तुम्हारा उपहास

करते हैं उन्हें अपने कर्मों का फल मिलने

का समय आ रहा है वो जो तुम्हारे पीछे

तुम्हारा दुष्प्रचार करते हैं जो तुम्हें

पीड़ा देते हैं और जो तुमसे लाभ लेना

चाहते हैं उनका बुरा समय आ गया है प्रिय

मुझे पता है कि कई बार तुम्हारे मन में यह

सवाल आता है जब ईश्वर मेरे साथ है तो वह

सब कुछ मुझे एक पल में क्यों नहीं दे देते

लेकिन मनुष्य की हर उपलब्धि के पीछे एक

सीख छुपी होती है और वह सीख उसे परिपक्व

बनाने ही आती है फिर चाहे वह पीड़ा के रूप

में आए या अभाव के रूप में आए मैं तो

तुम्हे सभी चीजें एक साथ दे दो तो तुम

उससे कुछ भी सीख ना पाओगे वह भी ना सीख

पाओगे इसे सीखने के लिए तुमने यह मनुष्य

का जन्म लिया है मैं तुम्हारी नियति जानता

हूं मैं जानता हूं कि यदि तुम्हें सब कुछ

प्रारंभ से ही मिल गया होता तो तुम कभी

अध्यात्म की राह पर अपने कदम बढ़ा ही नहीं

पाते तुम्हारे मन की कमजोरी और तुम्हारी

ताकत दोनों को ही मैं जानता हूं इसलिए मैं

जानता हूं कि तुम्हारा भविष्य कैसा होगा

मैं जानता हूं कि अतीत की किन गलतियों से

तुम सीखे हो और किन से नहीं सीख पाए हो

इसलिए तुम्हारे जीवन में जो भी आ रहा है

उसे ईश्वर की मर्जी मानकर स्वीकार कर लेने

में ही भलाई होती है मेरे प्रिय बच्चे

तुम्हारे आसपास आनंद ही आनंद है तुम सदैव

खुशी में ही रहते हो लेकिन तुम्हारे भीतर

बसा में और कुछ बनने की चाह तुम्हारे खुशी

को छुपा दे रहे हैं मैं आनंद रहना चाहता

हूं इस तरह के भाव तुम्हें चाहत के ही

आपबीती में फंसाए हुए हैं और मैं की भावना

तुम्हारे भीतर के अहंकार को मरने नहीं दे

रही है इसलिए कुछ बनने की चाह या कुछ होने

की चाह को अपने मन से मिटा दो और जो है

उसे स्वीकार करो अनिवार्यता की ओर बढ़ो

जीत तो तुम्हारे कदमों में स्वत ही बिच

जाएगी जिस प्रेम की तुम आकांक्षा करते आए

हो वोह तो निश्चित तौर पर किसी व्यक्ति से

है और यही अपेक्षा तुम रे दुख का कारण

बनती है जब तुम किसी से उम्मीद लगाते हो

वह आशा निराशा के अतिरिक्त कुछ भी नहीं

होती मेरे प्रिय जब तुम अपने आप को साक्षी

भाव में ना देखकर दृष्टा की भावना देखकर

कर्म करने वाले प्राणी के रूप में देखते

हो तब तुम्हारे जीवन में समस्याओं का जन्म

होता है यह समस्याएं तुम्हारे विचारों का

ही परिणाम है यह समस्याएं तुम्हारे अपने

ही विचार से उत्पन्न हुई है ऐसा नहीं है

कि मैं तुम्हारे जीवन में इन्हें भेजता

हूं ऐसा नहीं है कि परिस्थितियां इसके लिए

उत्तरदाई है यह तुम्हारे अपने विचार हैं

जो इन समस्याओं को जन्म दे रहे हैं यह वही

अहंकार है जिस पर तुम काबू पाना चाहते हो

तुम बाकी मनुष्यों से बहुत आगे आ चुके हो

तुम अहंकार को समाप्त करने की राह में

बहुत आगे आ चुके हो लेकिन अभी कुछ चीजें

हैं जिनसे पार पाना तुम्हारे लिए अत्यंत

आवश्यक है मनुष्य का मन कभी भरा नहीं उसे

जितना दिया गया उससे ज्यादा की ही उसकी

चाहत रही है लेकिन क्या तुम्हें ज्ञात है

कि मैं किसे प्रदान करता हूं वह सारी जीत

जिसकी उसे चाहत होती है मेरे प्रिय जो

व्यक्ति आभार के भाव में रहता है जो

व्यक्ति सदैव कमियों का विचार नहीं करता

है जो शिकायतों के बजाय स्वयं को मजबूत

बनाने पर जोर देता है जो यह समझता है कि

संसार में उसका कुछ भी नहीं फिर चाहे वहां

कोई निर्जीव चीज हो उत्स जीी हो या फिर

उसके अपने ही क्यों ना हो जब वह यह जान

जाता है कि यह सब कुछ केवल उपकरण मात्र है

उसका शरीर भी उसके लिए केवल उपकरण मात्र

है तब वह उन सभी जीत को हासिल कर लेता है

जो एक समान मनुष्य के लिए पाना अत्यंत

मुश्किल होता है तुम उस राह में आगे बढ़

रहे हो तुम जीत की राह में आगे बढ़ रहे हो

लेकिन विचार करो कि तुम्हारे जीवन में ऐसी

कौन सी बात बाधाएं आ रही हैं जिसकी वजह से

तुम जीत को अपने पूरे मनोभाव से स्वीकार

नहीं कर पा रहे हो प्रिय बच्चे यह समय हो

चला है तुम्हें जीत प्राप्त करने का बहुत

लंबे अरसे से तुमने प्रतीक्षा की है बहुत

लंबे समय काल से तुम इसी समय के इंतजार

में रहे हो लेकिन अब जब यह तुम्हें प्रदान

किया जा रहा है तो ऐसे कौन से अवरोध है जो

इसे हासिल करने से तुम्हारे हाथों को बांध

रही है मेरे प्रिय बच्चे तुम अपने साथी से

जिस प्रकार के प्रेम की आशा रखते हो वह

आशा ही गलत है वह आशा निराशा का ही दूसरा

पहलू मात्र है वह निराशा से बढ़कर कुछ भी

नहीं है तुम जिस प्रकार के बंधनों में बधे

हुए हो उसका विचार करो कि वह कौन सी

जंजीरे हैं वह आदर्श जंजीरे जिनसे तुम बंद

चले हो मेरे प्रिय बच्चे इसका विचार करो

यह विचार जो तुम्हारे मन में पनप रहा है

वह नकारात्मक है और तुम्हें इसे सकारात्मक

विचारों से बदलना होगा तुम्हें अपने

विचारों पर नियंत्रण लाना होगा तुम्हारे

विचार जो किसी भी दिशा में भटक रहे हैं

क्योंकि तुम ध्यान के मार्ग में नहीं आ पा

रहे हो वास्तव में वास्तविक धन ध्यान ही

है जिस मनुष्य का ध्यान क्षण भर के लिए भी

लग जाता है वह इस संसार में विजय को

प्राप्त कर लेता है जब मैं तुमसे ध्यान की

बात कर रहा हूं तो मेरा यह अर्थ नहीं है

कि तुम किसी एकांत कमरे में बैठकर बंद आंख

से कुछ विचार करो मैं ध्यान हर चीज में

करने को कह रहा

हूं मैं बात कर रहा हूं होश पूर्वक जीवन

जीने की मैं बात कर रहा हूं ऐसा कार्य

करने की जो तुम्हारी सु इच्छा से हुआ हो

जो तुम्हारी चाहत से हुआ हो इस संसार में

तुम बहुत से कार्य केवल अवचेतन मन के कारण

करते हो तुम बैठे रहते हो तुम्हारे पैर

हिलने लगते हैं तुम्हें इसका आभास भी नहीं

होता कि ऐसा क्यों हो रहा है कई बार तुम

शांति से बैठे रहते हो और और तुम्हारे हाथ

अनावश्यक ही कुछ कर रहे होते हैं तुम्हें

इसका विचार भी नहीं होता कि तुम ऐसा क्यों

कर रहे हो वास्तव में उस समय तुम होश में

नहीं होते तुम्हारा अवचेतन मन तुमसे जो

चाहे वह कार्य करा रहा होता है जब तुम होश

पूर्वक जीवन जीते हो तो तुम हर कार्य को

दृष्टा की भाति देख रहे होते हो तब तुम यह

समझ जाते हो कि यह शरीर एक उपकरण मात्र है

और ईश्वर मेरे शरीर के द्वारा विभिन्न

कार्य संपन्न करवा रहे हैं और तब वह कार्य

महत्व के कार्य होते हैं क्योंकि तब

तुम्हें इसका आभास होता है कि तुम जो कर

रहे हो वह निरर्थक नहीं है वह अनावश्यक

नहीं है तुम्हारे आसपास चीजों का जो ढेर

लगा है उसमें बहुत सी अनावश्यक चीजें

मौजूद है जिनकी तुम्हें कोई आवश्यकता नहीं

है किंतु तुमने प्रकृति से इतनी ज्यादा

चीजें इकट्ठा कर ली है जिसका तुम्हारे लिए

कोई महत्व नहीं है और जब तुम प्रकृति से

चीजें इस प्रकार से लेने लगते हो जैसे वह

तुम्हारे अलमारी में पड़ी हुई कोई वस्तु

हो तो तुम्हें प्रकृति में उससे भी ज्यादा

चीजें लौटाने पड़ती है और फिर सब दुखों का

जन्म होता है तुम्हारे जीवन में बहुत से

दुख केवल इस कारण से है क्योंकि तुमने

प्रकृति से जरूरत से ज्यादा चीजें इकट्ठा

कर ली है बहुत से अनावश्यक चीजें जिनका

तुम्हारे जीवन में कोई महत्व नहीं है

तुमने उसे अपने पास रख रखा है बहुत सारी

चीजें जो तुम्हारे महत्व की हैं वो तुमसे

छूट सी जा रही हैं और अनावश्यक चीजें और

विचारों को तुम अपने मन में पाल रहे हो

तुम्हें उन विचारों से छुटकारा चाहिए केवल

इसलिए कि तुमसे किसी ने कह दिया कि ऐसा

होता है परखो केवल विश्वास के दम पर चीजों

को मान मत लो मानने से पहले जानना सीखो

स्वीकारने से पहले यह समझना सीखो कि तुम

उसे क्यों स्वीकार रहे हो ईश्वर के नाम पर

भी बहुत भ्रांतियां फैलाई गई हैं तुम्हें

सब कुछ स्वीकार नहीं करना है तुम्हें

समझना है अपने जीवन के अनुभवों से और

तुम्हारे जीवन में क्या लाभप्रद है इन

बातों से तुम जीवन में प्रगति को प्राप्त

करने वाले हो और जब मनुष्य के जीवन में

प्रगति आती है तो उस पर बहुत बड़ी

जिम्मेदारियां भी होती है क्योंकि यदि

किसी के जीवन में राजयोग फैला दिया जाए और

वह राज्य करने के योगी ही ना हो तो बहुत

दुर्दशा होती है

मैं नहीं चाहता कि तुम्हारे जीवन में किसी

प्रकार की दुर्दशा हो मैं नहीं चाहता कि

तुम्हारे जीवन में किसी प्रकार की विपत्ति

आए शुरुआत हो चला है तुम्हारी जीत का

इसलिए स्वयं पर नियंत्रण लाओ होश पूर्वक

जीवन जियो किसी के कुछ कह देने मात्र से

जीवन बिल्कुल भी नहीं

जीना पहले जांचना परखना जानना उसके बाद ही

किसी बात को मानना मेरे प्रिय बच्चे अब जब

तुम्हारी जीत का समय आ गया है तो तुम्हें

अपनी जिम्मेदारी उठानी

होगी अपने जीवन को वास्तविक अनुशासन की ओर

ले जाना होगा वास्तविक अनुशासन से मेरा

तात्पर्य है यह अनिवार्य चीजों को देना वो

जो करना तुम्हारे लिए बेहद जरूरी है वह

तुम्हारे लिए अनिवार्य है और अनिवार्य

चीजों को तुम्हें हर हाल में संपन्न करना

है फिर चाहे तुम्हारी इच्छा हो या

तुम्हारी इच्छा ना हो फिर चाहे तुम्हारा

मन लगे या तुम्हारा मन ना लगे बहते जल की

भांति तुम्हें उस राह पे बढ़ चलना है जिस

ओर जीवन की नदी तुम्हें लेकर जाए और जब

जीवन की नदी की धारा में तुम बहते जल की

भाती सहज रूप में बहने लगते हो उसी प्रकार

से कार्य करने लगते हो तो एक दिन परमात्मा

रूपी समुंदर में तुम्हारा मिलन हो ही जाता

है इस मिलन को कोई टाल नहीं

सकता वास्तव में यही वास्तविक मिलन होता

है जीवन मरण के चक्र से ऊपर जीवन का

वास्तविक मिलन ऐसा मिलन जहां के बाद केवल

परम आनंद प्राप्त होता है

जहां के बाद दुख मनुष्य को कभी छूब भी

नहीं सकता तुमने जिस दिन से आध्यात्मिक पद

पर अपने कदम बढ़ाया है तुम उस दिशा की ओर

बहने लगे हो तुम परम चित्त आनंद में

समाहित होने लगे हो और अब जबक तुम इस राह

में आगे बढ़ चले हो तो तुम्हें भयभीत नहीं

होना है तुम्हें राह में आ रही चुनौतियों

से घबराना नहीं है बल्कि स्वीकार करना है

अपनी आदतों को तुम्हें ठुकराना नहीं है

बल्कि स्वीकार करना है क्योंकि जब तुम

चीजों को स्वीकार कर लेते हो तब तुम जान

जाते हो कि उसका महत्व कुछ भी नहीं है तब

तुम जान जाते हो कि तुम जिस चीज के लिए

परेशान थे वह तो तुम्हें सहज रूप में

स्वतः ही मिल जाता जिसके लिए तुम इतने

विलाप कर रहे थे उसका वास्तविक महत्व क्या

है तुम यह समझ जाते हो और तब तुम्हारे

भीतर का सारा भय निकल जाता है और उस परम

चित आनंद में तुम समाहित हो जाते हो तुम

मेरे अंश हो परमात्मा के अंश हो मेरे

प्रिय बच्चे अब मैं तुम्हारी जीत

सुनिश्चित कर रहा हूं भय निकाल फेंको और

एक बात सदैव याद रखना मेरा आशीर्वाद हर

हाल में तुम्हारे साथ है सदा सुखी रहो

तुम्हारा कल्याण हो

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