” करोड लोगों में से मेरे दिव्य दृष्टि केवल

मेरे बच्चे मैं आज तुमसे बहुत प्रसन्न हूं और मैं तुम्हें कुछ खास बात बताना चाहती हूं जिन बातों को आज तक मैं तुमसे छुपाती रही

तुम्हें कभी बताया नहीं उन बातों को जानने का समय अब आ चुका है कि तुमने वह एक ऐसा कार्य किया है किया जिसको करके

तुमने मेरे दिल को बहुत प्रसन्न किया है मैं तुम्हें उसे बात को बताना चाहती हूं चाहती हूं जिसे जानने के बाद लेकिन तुम्हारी आंखें भी

किस चिंता में पड़े हुए हो सब इस बात का ध्यान रखो इस प्रकार तुम्हारी मां होते हुए नहीं छुपाना चाहती तो मैं वैसे ही बहुत ज्यादा

प्रसन्न हूं गाना नहीं बल्कि तुम्हें ऐसा कुछ बताना चाहती हूं आज तक कभी कभी बात नहीं सकी बच्चा इतना नादान और भोला है

भोला है काहे कुछ बातों को समझ नहीं पाएगा आज मुझे कुछ बातें स्पष्ट रूप से बात जिनका ध्यान पूर्वक सुना और समझना

समझना मेरे बच्चे यदि तुम ध्यान से नहीं सुनोगे तो तुम्हें बातें नहीं आएंगे और तुम्हें लगेगा कि पता नहीं मैं तुम्हें क्या बताया है उसमें जो बताया है वह कुछ खास नहीं है आभास होगा इसलिए मैं तुम्हें स्पष्ट रूप से इस बात को बता देना चाहती हूं चाहती हूं कि हर

इंसान के अंदर अंदर एक अच्छा ही होती है

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