काशी-मथुरा की तैयारी, अब भोजशाला की बारी ? Dhar | MP News | Election 2024 | Zee MPCG

नमस्कार बहुत स्वागत है आपका मैं हूं आपके
साथ प्रेरणा मिश्रा और अब वक्त हो गया है
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के साथ-साथ देश
और दुनिया की उन तमाम खबरों का जो आज पूरे
दिन सुर्खियों में रही हम आपको दिखाएंगे
वो स्पेशल रिपोर्ट जिसमें होंगी देश और

दुनिया की तमाम बड़ी खबरें तो चलिए शुरू
करते हैं स्पेशल
रिपोर्ट और स्पेशल रिपोर्ट में आज धार
जिले की भोजशाला का इतिहास जानेंगे मध्य

प्रदेश के धार में एक मंदिर की तलाश के
लिए अदालत से एएसआई सर्वेक्षण करवाने की
मांग की गई है धार की भोजशाला मंदिर है या
फिर मस्जिद यह विवाद कई दशकों पुराना है

के बाद अब धार की भोजशाला में भी हिंदू
पक्ष ने एएसआई सर्वे की मांग कर दी है
क्या है भोजशाला का विवाद स्पेशल रिपोर्ट
में
देखेंगे

ज्ञानवापी के बाद अब भोट
शलाला काशी मथुरा की तैयारी भोट शलाला की
बारी सर्वे से सच आएगा
सामने
यहां पर नमाज बंद होना चाहिए लंदन में जो
मां सरस्वती की मां वागदेवी की मूर्ति है
उसे लाकर यहां स्थापित गर्भ ग्र में करना
चाहिए धर्म की धार पर
धार भोट साला मंदिर बना मस्जिद पर

संग्राम ज्ञानवापी के बाद मध्य प्रदेश के
धार में बनी भोजशाला भी इस वक्त सुर्खियों
में है जहां एएसआई सर्वे को लेकर आने वाले
दिनों में बड़ा फैसला आ सकता है आज आपको
हम अपनी स्पेशल रिपोर्ट में भोजशाला का

इतिहास बताएंगे और यह भी बताएंगे कि दो
समुदायों के बीच दशकों से क्यों यह लड़ाई
जारी
है ज्ञानवापी के बा धार की भोजशाला
मंदिर या मस्जिद बताएगा एएसआई

सर्वे धर्म पर धार मांगे पूजा का पूरा
अधिकार
काशी मथुरा की तैयारी अब भोजशाला की बारी
मध्य प्रदेश का एक जिला धार जहां मौजूद है
भोजशाला और इसी भोजशाला को लेकर एक बार
फिर माहौल गर्म है देश में धार्मिक स्थलों
को लेकर आमतौर पर विवादित स्थिति पैदा हो

जाती है फिर चाहे वह काशी विश्वनाथ मंदिर
और ज्ञानवापी मस्जिद हो या फिर मथुरा में
श्री कृष्ण जन्मभूमि मंदिर और शाही ईदगाह
भोजशाला विवाद भी नया नहीं है करीब तीन

दशकों से भोजशाला मंदिर है या मस्जिद इसको
लेकर यहां कई बार सांप्रदायिक माहौल भी
गर्म हो चुका है मामला एक बार फिर
सुर्खियों में है लेकिन क्यों यह आपको

बताएंगे पहले यह बताते हैं कि भोजशाला का
इतिहास क्या
है भोजशाला क्या है इतिहास हजार साल पहले
धार में परमार वंश का श
राजा भोज सरस्वती देवी के अनन्य भक्त थे
राजा ने सरस्वती सदन और वागदेवी मूर्ति की

स्थापना की थी जिसे बाद में भोजशाला के
नाम से जाना जाने लगा हिंदू इसे सरस्वती
मंदिर भी मानते थे कहा जाता है अलाउद्दीन
ने भोजशाला को ध्वस्त किया दिलावर खान ने
भोजशाला के एक हिस्से में मस्जिद बनवा दी
इसके बाद महमूद शाह खिलजी ने दूसरे हिस्से

में भी मस्जिद बनवा दी साल 18 57 में
सरस्वती सदन की खुदाई में वाग देवी की
मूर्ति मिली साल 1880 में मेजर किनकेड इस
मूर्ति को लंदन ले गया फिलहाल यह प्रतिमा
लंदन के संग्रहालय में है आजादी के बाद यह
पुरातत्त्व विभाग के अधीन हो गया 6 फरवरी

2003 बसंत पंचमी का व दिन जब नमाज को लेकर
भोजशाला में विवाद हुआ तनाव बढ़ा और 18
फरवरी को दंगों का दौर शुरू हो गया लेकिन
ऐसा क्यों हुआ हुआ आखिर क्या वजह थी जो
दोनों संप्रदाय एक दूसरे की जान के दुश्मन

बन गए इसको जानने के लिए यह जानना जरूरी
है कि आखिर दशकों से भोजशाला को लेकर
क्या-क्या बदलाव और नियम जारी किए
गए भोजशाला मंदिर या मस्जिद साल 1935 धार

रियासत ने शुक्रवार को नमाज पढ़ने की
अनुमति दी साल 1952 भोजशाला में सरस्वती
जन्मोत्सव की शुरुआत साल 190 91 भोजशाला
की मुक्ति के नाम पर हर मंगलवार सत्याग्रह
सत्याग्रह में हनुमान चालीसा का पाठ किया
जाता था साल

1997 धार कलेक्टर ने भोजशाला में प्रवेश
पर प्रतिबंध लगाया भोजशाला में प्रतिबंध
के बाद बैरिकेट्स के बाहर पाठ साल
1998 पुरातत्त्व विभाग ने आम लोगों के
प्रवेश पर रोक लगा दी साल 2003 बसंत पंचमी
के दिन नमाज को लेकर भोजशाला में में
विवाद 18 फरवरी को तनाव बढ़ा और धार में
दंगे हुए 8 अप्रैल 2003 मंगलवार को हनुमान
चालीसा का पाठ करने की इजाजत
मिली भोजशाला के भी इतिहास में दंगों की

आंच है अब माहौल को काबू में रखने के लिए
नियमों का पालन जरूरी था नहीं तो समाज फिर
उसी दंगे की आग में जलने को मजबूर हो
जाता अब क्या है हालात मंगलवार को हिंदू
करते हैं पूजा श वार को नमाज की अनुमति

अन्य दिनों पर सशु आम जन की अनुमति धार की
गोशाला 1034 में बनाई गई थी राजा भोज ने
इसे बनाया था संस्कृत पाठशाला का इसे नाम
दिया गया था बाद में कई शासकों का यहां पर
काल रहा और फिलहाल पिछले तीन दशकों से
लगातार जो ये भो शलाला का मॉन्यूमेंट है
इसको लेकर हिंदू संगठन लगातार सत्याग्रह

करता रहा लगातार आंदोलन करता रहा और
आखिरकार पिछले कुछ साल पहले यहां पर हिंदु
हिंदुओं को पूजा के लिए और मुस्लिम के
मुस्लिम्स के लिए नमाज के लिए दिन मुकर्रर
किया गया वक्त मुकर्रर किया गया और बाकी

दिनों में आम लोग यहां पर एसआई के एक
मॉन्यूमेंट को विजिट करने के नाते यहां पर
लोग आ सकते हैं कोर्ट के निर्देशों के बाद
हर मंगलवार को पूजा की अनुमति तो मिली
लेकिन अभी भी भोजशाला को लेकर मंदिर
वर्सेस मस्जिद पर संग्राम जारी है ब्यूरो
रिपोर्ट जी
मीडिया धार में हिंदू संगठन ने जबलपुर हाई

कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में याचिका दाखिल
कर धार की भोजशाला में एएसआई सर्वे कराने
की मांग की कोर्ट ने इस पर सुनवाई के बाद

अपना फैसला सुरक्षित रख लिया अब दोनों
समुदायों को पूरा अधिकार चाहिए लेकिन
अधिकार कैसे मिलेगा यह तो कोर्ट तय करेगा
इस रिपोर्ट में
देखिए शाला पर लड़ाई अभी भी जारी है दोनों

समुदायों को पूरा हक चाहिए मामला कोर्ट
में पहुंच गया मई 2022 में हिंदू संगठन की
तरफ से एक याचिका लगाई गई थी जिसमें

भोजशाला को मंदिर बनाए जाने वागदेवी की
प्रतिमा स्थापित करने और विधिवत पूजा
अर्चना करने के साथ ही नमाज बंद करने की
मांग की गई
थी इसी याचिका के दौरान एक अंतरिम आवेदन
देते हुए हाल ही में हिंदू फ्रंट फॉर
जस्टिस ट्रस्ट ने भोजशाला का व्यापक
सर्वेक्षण एएसआई से कराए जाने की मांग की

हालांकि दूसरे पक्ष ने इस अंतरिम आवेदन पर
आपत्ति दर्ज कराई अब हिंदू फ्रंट का मानना
है कि सर्वेक्षण के दौरान खुदाई के बाद यह
साफ हो जाएगा कि भोजशाला मंदिर ही है और
उन्हें उनका हक भी मिल

जाएगा देखिए भोजशाला को लेकर के 7 अप्रैल
2003 में आर्कलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने
एक आदेश पारित किया था जिसमें ये कहा था
उन्होंने कि कि मुस्लिम पक्ष के लोगों को
शुक्रवार की दोपहर की नमाज अदा करने की
इजाजत दी जाती है हिंदू पक्ष के लोगों को

मंगलवार को पूजा अर्चना करने की इजाजत दी
जाती है और बसंत पंचमी का वार्षिक उत्सव
साल में एक बार मनाया जाएगा और चौथी बात
यह रख थी कि साल के बाकी दिनों में पर्यटन
स्थल के रूप में इसका उपयोग किया जा सकेगा
माननीय उच्च न्यायालय की इंदौर खंड फिट

में हिंदू फ्रंट फॉस जस्टिस ने एक याचिका
मई 2022 से दायर की थी उसी के परिपेक्ष
में जो आगे कारवाई चल रही है तो उसमें एक
इंट्रोडक्टरी
लेटर जो होता है वह हमने अभी माननीय
न्यायालय जी के सामने प्रस्तुत किया है और
एक एप्लीकेशन लगाई है जिसमें हमने मांग की
है कि पूरे भोजशाला परिसर का वैज्ञानिक
सर्वेक्षण साइंटिफिक सर्वे किया जाए जिससे
कि मां सरस्वती मंदिर भोजनशाला के सारे

प्रमाण सभी के सामने आ गए गौरतलब है कि
पिछले तीन दशकों से धार की भोजशाला को
लेकर हिंदू संगठन कई सत्याग्रह और आंदोलन

कर चुके
हैं इस दौरान धार में कई बार हिंसा की
घटनाएं और कर्फ्यू जैसे हालात भी बने
लेकिन फिर भी भोजशाला की मुक्ति के लिए

लगातार सत्याग्रह जारी
रहा संविधान के अंतर्गत हमारी मांग है कि
इसका जो राजा भोज के काल में जो स्वरूप था
इस स्थान का उसी स्वरूप में राजा हिंदू

समाज का स्वामित्व मिले इसके लिए जो भी
जिस प्रकार का भी रणनीति बनेगी सत्याग्रह
के रूप में जिस रूप में उसको हम फॉलो
करेंगे उसके लिए होगा संगठन के अंदर
वरिष्ठ लोग बैठेंगे तय होगा अभी तो हम
सत्याग्रह के माध्यम से मांग कर रहे जैसा
जैसी परिस्थिति बदलेगी वैसा हिंदू समाज
उसके लिए साथ तैयार है धार की भोजशाला का
सर्वे कराने वाली मांग पर इंदौर हाई कोर्ट

में सुनवाई हुई करीब 50 मिनट तक चली
सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने फैसला
सुरक्षित रख लिया ऐसा क्या कहना है कि

उन्होंने 1902 1903 में सर्वे किया था और
वो सर्वे रिपोर्ट हाई कोर्ट में लगाई गई
है लेकिन फिर से एक बार एएसआई के सर्वे की
बात कही जा रही है ताकि दूध का दूध और
पानी का पानी हो सके इसको लेकर अब जो है
हाई कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि अभी तक
की जितनी भी पिटीशन है उन पिटीशन को

सूचीबद्ध किया जाए साथ ही इस पिटीशन के
तमाम जो एविडेंसेस है उनके आधार पर कोर्ट
जो है जल्दी फैसला करने वाली है अब इस
कोर्ट के फैसले की तरफ हर किसी की निगाह
हैं भोजशाला वाग देवी का मंदिर या कमाल

मौलाना मस्जिद जरा भोजशाला के अवशेष को
देखिए इसमें सुंदर नक्काशी दार ख
और कलाकृतियां आपको साफ तौर पर दिख जाएंगी
इसकी सुंदरता और डिजाइन अभिभूत करने वाली
है लेकिन यह भोजशाला अब पुरातत्विक विभाग
के पास होने के बावजूद दो समुदायों की

लड़ाई में फंस कर रह गया है किसे हक मिलता
है और कौन अपना हक खोएगा यह फैसला तो अब
कोर्ट में ही होगा ब्यूरो रिपोर्ट जी
मीडिया तो यह सुना आपने अब भोट साला की

चुनावी धार क्या है यह भी हम आपको समझा
देते हैं दरअसल धार में अगर आबादी की बात
की जाए तो वहां
93.8 4 प्र आबादी हिंदू है जबकि सिर्फ
5.32 फीदी आबादी ही मुस्लिम है ऐसे में
धार में वोट साला को लेकर फैसला चुनाव में

भी बेहद अहम साबित हो सकता है एमपी में
जहां 29 लोकसभा सीटें हैं पिछले चुनाव में
बीजेपी ने इसमें से 28 सीटें जीती थी और

है यह जरूर देखना होगा लेकिन चुनावी लिहाज
से मुद्दा बहुत महत्त्वपूर्ण माना जा रहा
है भोजशाला ऐसी पहली जगह नहीं है जहां इस
तरह के विवाद हैं इससे पहले अयोध्या के
राम मंदिर जन्मभूमि पर विवाद था जिसका
फैसला लंबी लड़ाई और सुप्रीम कोर्ट के
आदेश के बाद हिंदू पक्ष के हित में दिया
गया और वहां अब राम मंदिर का निर्माण हो

चुका है इसके अलावा वाराणसी की ज्ञानवापी
मस्जिद का सर्वे पूरा हो चुका है और उस पर
फैसला आना अभी बाकी है मथुरा में भी शाही
ईदगाह के सर्वे की मांग लगातार की जा रही
है तो धार में भोजशाला के मामले पर सर
कराने को लेकर फैसला सुरक्षित रख लिया गया
है

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