किसानों का ऐलान: काला दिवस, ट्रैक्टर मार्च | Farm Unions announce next steps

नमस्कार मैं रवीश कुमार हरियाणा और पंजाब
के बीच शंभू बॉर्डर पर आज शांति रही युवा
किसान शुभकरण सिंह की मौत के बाद किसान
नेताओं ने तय किया कि दो दिनों के लिए
दिल्ली कूछ का अभियान स्थगित किया जाता है

इस दौरान वे आपस में विचार विमर्श करेंगे
कि आगे बढ़ने की रणनीति क्या होनी चाहिए
शुभकरण छोटा किसान था ढाई एकड़ की जमीन
बताई जा रही है और बाकी जमीन किराए पर
लेकर खेती कर रहा
था

यह शुभकरण का घर है क्या गोदी मीडिया का
संपादक आकर बता सकता है कि यह किसी
करोड़पति किसान का घर है जो लोग इस आंदोलन
को बड़े किसानों का आंदोलन बता रहे हैं
क्या वे शुभकरण के घर की हालत देखकर कुछ
कहना चाहेंगे अगर यह बड़े किसानों का घर

है तब खेतिहर और भूमिहीन किसानों की क्या
हालत होगी शुभकरण के माता-पिता के बीच
तलाक हो गया था शुभकरण को उसके दादा ने
बड़ा किया शुभकरण पर उसकी दो बहनों की भी
जिम्मेदारी थी वह अपने परिवार का इकलौता
बेटा था अविवाहित था गोली लगने से उसकी
मौत की खबर ने किसान नेताओं को और उसके
गांव के लोगों को सखते में डाल दिया है

शुभकरण के गांव के लोगों ने मांग की है कि
उसके परिवार को एक करोड़ का मुआवजा मिले
बहन को नौकरी मिले और उसके सारे कर्जे माफ
कर दिए जाएं पंजाब सरकार ने शंभू बॉर्डर
पर आंखों के डॉक्टरों को भेजने का फैसला
किया है क्योंकि आंसू गैस और पैलेट गन के
कारण आंखों को नुकसान हो रहा
है यह शंभू बॉर्डर का वीडियो है जिस तरह

से आंसू गैस के गोले दागे जा रहे हैं पता
चल रहा है कि 21 फरवरी का दिन यहां किस
तरह से गुजरा होगा दनादन आंसू गैस के गोले
गिरते चले जा रहे हैं और किसान उन पर
बोरियां फेंककर बुझाने का प्रयास कर रहे

हैं आंसू गैस के धुएं के कारण कई किसानों
की तबीयत खराब होने की खबर
है आंसू गैस का हमला इतना जोरदार था कि
किसानों की जेसीबी धरी की धरी रह गई
मीडिया जिसे फर्जी तरीके से मेकशिफ्ट टैंक

बता रहा था वह भी काम नहीं आया किसान
जहां-तहां भागते नजर आए मौके पर मौजूद
पत्रकार अपनी रिपोर्ट में बता रहे हैं कि
ड्रोन से भी आंसू गैस के गोले गिराए जा
रहे थे और सामने से भी दागे जा रहे थे
किसानों का पूरा दिन इधर-उधर खुद को बचाते

हुए भागते दौड़ते गुजरा
है खनौरी बॉर्डर पर कई किसानों ने आरोप
लगाया है कि 25 से अधिक ट्रैक्टर ट्रॉली
को नुकसान पहुंचाया गया है किसान अपने
ट्रैक्टर दिखाकर बता रहे हैं कि हरियाणा

की तरफ से सुरक्षाकर्मी आए और उन लोगों ने
नुकसान पहुंचाया हमारे पास उनके दावों की
पुष्टि नहीं है किसान नेता सर्वं सिंह
पंडेर ने दावा किया कि कई युवा किसानों का
पता नहीं चल रहा है हरियाणा पुलिस ने दावा

किया है कि खनौरी बॉर्डर पर किसानों ने
पराली में मिर्च पाउडर डालकर आग लगा दी
पुलिस पर पत्थर चलाए पुलिस का दावा है कि
छह पुलिसकर्मी घायल हुए हैं किसान दावा कर
रहे हैं कि 177 किसान घायल हुए

हैं प्रदर्शनकारियों से यह अपील की जाती
है कि वे ऐसा ना करें क्योंकि जहरीले धुए
से विजिबिलिटी कम हो जाती है और पुलिस
कर्मियों द्वारा कानून व्यवस्था बनाए रखने
का प्रयास ना केवल बाधित होता है बल्कि

ऐसा करने से दोनों पक्षों के लिए जोखिम
बढ़ जाता है और किसी भी प्रकार की आकस्मिक
दुर्घटना होने की संभावना बनी रहती है
बर्बरता से यह दोनों बॉर्डर के ऊपर खनौरी
और शंभू के ऊपर सरकार ने टियर गैस और हाई
कोजिक जो इस्तेमाल किए उसकी निंदा करनी
चाहिए नौरी बॉर्डर के

ऊपर शुभकरण
सिंह जो 23 22 साल का नौजवान उनकी मौत हो
गई है और तीन और गंभीर जख्मी है जिनमें से
अभी मिसिंग पर्सन भी बहुत ज्यादा है और जो
केंद्र के अर्ध सैनिक फोर्स उन्होंने
पंजाब की हद में घुसकर खनौरी के ऊपर 25 से

अधिक ट्रैक्टर ट्रलियो को जो नुकसान किया
है री की हम घटना सामने आई तो हमने कहा इस
समय इस हालात में वार्ता को जारी रखना
उचित नहीं है इसलिए हमने अब दो दिन आगे के
विश्राम कर लिया है और खनौरी के जितने भी
इंजर्ड है मिसिंग है शहीद परिवार से मिलकर

और जिस तरह से सरकार बुलेट चला रही है
हमारे ऊपर उस सभी का विचार विचार विमर्श
करके सभी अपने यूनियन के और दो बड़े
फर्मों की ओर से आगे का हम निर्णय लेंगे
इसमें देखिए जो हमने देखा एक खालसा एड था
उधर उसका कैंप था दवाई का उसके ऊप उसको

भी
लूट कर ले गए और इधर लाइफ केयर फाउंडेशन
के हमारे पास डॉक्टर बैठे इनके कैंप के
ऊपर भी शेलिंग की गई मानना है भी कभी भी
जहां प्रेस हो जहां मेडिकल सेवाएं हो

कभी भी सरकार उनके ऊपर शेलिंग नहीं करती
तो उनको मालूम था सारा इसलिए किया गया
किसान आंदोलन की तरफ से पंजाब एंड हरियाणा
हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है कि
शुभकरण की मौत की जांच हाई कोर्ट के

रिटायर्ड जज से कराई जाए अदालत से यह भी
कहा गया है कि हरियाणा सरकार हाई कोर्ट को
सारे आंकड़े उपलब्ध कराए कि पुलिस की तरफ
से आंसू गैस के कितने गोले दागे गए हैं
पुलिस इंडिस्क्रिमिनेट शेलिंग कर रही है
टियर गैस डाल रही है और पैलेट गन यूज कर
रही है डायरेक्ट फायरिंग कर रही है उसकी
भी जांच हो सके इसके लिए हमने जुडिशियस की
डिमांड की है सेकंड हमारी डिमांड है कि जो
हरियाणा गवर्नमेंट और पैरामिलिट्री यह
डाटा सरकार को प्रोवाइड करें कि कितने
टियर गैस शल उन्होंने आज तक यूज किए हैं
कितनी पैलेट गन यूज की है कितने राउंड
फायर हुआ है व सारा डाटा दिया जाए हाई
कोर्ट को और हमने हाईलाइट किया कि जो
ट्रैक्टर की वाली बात थी कि ट्रैक्टर कैसे
यूज हो सकते हैं तो हमने उसमें बताया कि
ग्रीस ग्रीस जर्मनी और कितने मुल्क हैं जो
यूरोप के वहां पर फार्मर सेम डिमांड को
लेकर प्रोटेस्ट कर रहे हैं और सब में कॉमन
बात यह है कि वोह ट्रैक्टर का यूज कर रहे
हैं तो हमने कहा कि ट्रैक्टर जो है किसान
का दूसरा बेटा है तो इसको लेकर कोई इशू
होना नहीं चाहिए तीसरा हमने जो हाईलाइट
किया कि एक तरफ गवर्नमेंट जो है वह बात कर
रही है कि हम किसानों से बात करने को
तैयार हैं एट द सेम टाइम किसानों के जो
सोशल मीडिया हैंडल ब्लॉक किए जा रहे हैं
जो सपोर्टर है उनके सोशल मीडिया हैंडल
ब्लॉक किए जा रहे हैं दूसरी तरफ गवर्नमेंट
के आईटी सेल जो है वह बाकायदा एक
विलीफिकेशन कैंपेन चला रहा है जिससे जो
प्रोटेस्टर्स हैं उनको भी सेपरेटिस्ट कह
के खालिस्तानी कह के एक माहौल क्रिएट करने
की कोशिश कर रही है जिसका इंपैक्ट हमने
रिसेंटली देखा कि प्रोटेस्ट में बीजेपी के
जो लीडर ऑफ अपोजिशन है वेस्ट बंगाल ने
उन्होंने एक आईपीएस ऑफिसर को खालिस्तानी
कह के कमेंट किया जस्ट बिकॉज वो टर्बन
सिकता तोमने इंसीडेंट कोट किया है तो हमने
इन सबको कहा है कि हमें पंजाब पुलिस पर
भरोसा नहीं है इस केस की जांच रिटायर्ड
हाई कोर्ट जज से होनी चाहिए इस मामले पर
सुनवाई 29 फरवरी को होगी लेकिन जिस तरह से
21 फरवरी को शंभू बॉर्डर पर हालात बन गए
थे साफ पता चल रहा था कि संवाद हीनता और
अविश्वास ने किसानों और सरकार के बीच की
खाई गहरी कर दी है जब सरकार बातचीत का
दावा कर रही थी ट्वीट कर रही थी प्रयास कर
रही थी तब तक शंभू बॉर्डर पर आंसू गैस के
गोलों की बरसात कुछ कम भी की जा सकती थी
रोका भी जा सकता था यह वीडियो चंडीगढ़ का
है इसमें आप संयुक्त किसान मोर्चा के घटक
दलों के नेताओं को देख रहे हैं आज उनकी
यहां बैठक थी और बैठक में शुभकरण सिंह को
श्रद्धांजलि दी गई यह वही नेता है जिनके
नेतृत्व में पिछली बार नवंबर 2020 से लेकर
नवंबर 2021 के बीच किसान आंदोलन चला शहीद
साथी अमर रहे अमर रहे अमर रहे श साथी अमर
रहे अमर रहे अमर रहे इसी आंदोलन के दौरान
सा 700 से अधिक किसानों की मौत हुई थी इस
बार संयुक्त किसान मोर्चा इस आंदोलन से
अलग है वह किसानों की मांगों के साथ तो है
मगर इस आंदोलन के साथ नहीं राकेश टिकैत की
बात से भी लग रहा है कि पंजाब के किसान
संगठनों ने अपने स्तर पर आंदोलन करने का
फैसला ले लिया यह लड़ाइयां लंबी है एक
मोर्चे से नहीं दिल्ली को जैसे चारों तरफ
से पहले गिरा था उसी तरह से दिल्ली गिरेगी
और वह कितने दिन बाद में मानेगी व सबका है
सब किसानों को इकट्ठा रहना चाहिए अकेले
नहीं लड़ना चाहिए
अकेला लाभ और हानि हो तो
सबको बताओ कहां जाओ ऐसे कैसे जाओगे हा अभी
रे पिछले
समय गलत है कारवाई करनी गलत है और भी
हमारी लीडरशिप है उनको फ्रंट पर रह के
बच्चों को रोकना चाहिए जहां एक बार स्टे
हो गया वहां पर जमना चाहिए अभी वही लंगर
और वो डाल दे सब जमे और फिर जब बातचीत हो
जाना हो भा देश में किसान तो इतने अगर आपस
की जत्थे मंदिर खास करके देखो पूरा देश
पंजाब पर चलता है हमने कभी पंजाब को नाई
नहीं करा पंजाब की 40 जत्थे बंदी है ये
इकट्ठी हो जाए तो पूरा देश इकट्ठा हो
जाएगा कह रहे बर्डर पनीस आगे लान नहीं
करना चाहिए अरे फोर्स तो चलो यहां की
फोर्स है तो सोनीपत में उधर है यूपी में
है वे हैं उनसे तो दिल्ली नजदीक है यहां
वाले तो पीछे रहे पंजाब वाले तो आगे बहुत
लोग हैं लेकिन आपस की सहमति एक जगह बन जाए
और लड़ाई को मजबूती से लड़ा जाए यह भी
किसान की लड़ाई लड़ रहे हैं जो उस उन्होने
उठाए हैं और पूरे देश में माहौल को गर्म
करा है तो इन लोगों का पंजाब के लोगों का
खास कर का धन्यवाद है इनका सभी किसानों का
इन जत्थे बंदियों का लेकिन ये इकट्ठे हो
जाए लड़ाई का टाइम आ गया कि इकट्ठे हो गए
और इस लड़ाई को आगे बढ़ाए क्या होता अगर
संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में ही
आंदोलन चलता संयुक्त किसान मोर्चा गैर
राजनीतिक ने आखिर क्या हासिल किया हम नहीं
जानते कि गैर राजनीतिक मोर्चे को क्यों
मजबूर होना पड़ा आखिर जब दोनों पाले के
लोगों की मांग एक ही है 700 किसानों की
जान पहले चरण के आंदोलन में जा चुकी है तो
क्या हर संगठन को एक साथ नहीं आना चाहिए
था बेशक संयुक्त किसान मोर्चा किसानों के
मुद्दे से समर्थन जता रहा है मगर आंदोलन
से दूर भी
है मुर्बाद
मुर्बा सरकार मुर्दाबाद मुर्दाबाद
मुर्दाबाद
आज शंभू करण की मौत के विरोध में गुरनाम
सिंह चढी के संगठन ने हरियाणा में कुछ
जगहों पर धरना प्रदर्शन किया चढ़ी नवंबर
2020 से नवंबर 2021 के बीच के आंदोलन में
सक्रिय नेता के रूप में देखे गए उनके
संगठन ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया था मगर इस
बार वे अलग से हरियाणा के अलग-अलग इलाकों
में प्रदर्शन कर रहे हैं जबकि शंभू बॉर्डर
और टोह बॉर्डर पर जो हालात हैं वहां नजर
नहीं आ रहे इस बात को लेकर गुरनाम सिंह
चढ़ी की भी आलोचना हो रही है आम किसान
कंफ्यूज हैं कि उनकी मांगों को लेकर गंभीर
कौन है जो शंभू बॉर्डर पर जमा है या जो
जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन की
औपचारिकताएं पूरी कर रहे हैं लाठी ग की
सरकार जिंदाबाद लाठी गो की सरकार जिंदाबाद
चंडीगढ़ में संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक
के बाद कुछ अहम फैसले लिए गए हैं यह वह
मोर्चा है जिसके नेतृत्व में 1 साल तक
आंदोलन चला था संयुक्त किसान मोर्चा ने तय
किया है कि छह सदस्यों की एक कमेटी बनाई
जाएगी जो अलग-अलग किसान संगठनों से तालमेल
बनाने का काम करेगी तो क्या संयुक्त किसान
मोर्चा इस आंदोलन में औपचारिक रूप से
उतरने जा रहा है या आने वाले समय में
जल्दी पता चल जाएगा इस कमेटी में डॉकर
दर्शन पाल बलबीर सिंह
राजेवाडी सिंह हन्नान मोल्ला और रमेंद्र
पटियाला सदस्य होंगे यही नहीं संयुक्त
किसान मोर्चा ने ऐलान किया है कि 26 फरवरी
को ट्रैक्टर मार्च होगा और 13-14 मार्च के
आसपास दिल्ली में महापंचायत बुला जाएगी
संयुक्त किसान मोर्चा ने हरियाणा के
मुख्यमंत्री और गृहमंत्री के खिलाफ हत्या
का माम मामला चलाने की मांग की है 23
फरवरी को देश भर में काला दिवस मनाया
जाएगा इस प्रदर्शन में सेंट्रल ट्रेड
यूनियन भी हिस्सा लेने जा रही है पंजाब और
हरियाणा हाई कोर्ट में एक पीआईएल दाखिल
हुई है कि किसानों का प्रदर्शन आम
नागरिकों के जीवन और उनकी आजादी के लिए
खतरा बन गया है इसलिए उन्हें आगे जाने से
रोका जाए लेकिन इसी हाई कोर्ट की बार
एसोसिएशन ने घोषणा की है कि शुभकरण सिंह
की मौत के विरोध में वकील शुक्रवार को काम
नहीं करेंगे बार एसोसिएशन ने पुलिस की
जाती को शुभकरण की मौत का जिम्मेदार माना
है बीकेयू रावाल और कति किसान यूनियन ने
टोल नाकों पर धरना प्रदर्शन किया पंजाब
में कई भाजपा नेताओं के घरों के बाहर भी
प्रदर्शन चला है घेराव चल रहा है इसके
अलावा कपूरथला और होशियारपुर के डिप्टी
कमिश्नर के दफ्तर पर भी प्रदर्शन हुए हैं
पटियाला में कैप्टन अमरिंदर सिंह जालंधर
में मनोरंजन कालिया फगवाड़ा में सोमप्रकाश
अबोहर में सुनील जाखड़ और और अन्य नेताओं
के घरों के बाहर प्रदर्शन हुए कुछ नेताओं
के घरों पर 17 फरवरी से ही प्रदर्शन चल
रहा है संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर
पंजाब में 59 जगहों पर हरियाणा सरकार की
कार्रवाई के विरोध में प्रदर्शन हो रहा है
आज भी किसानों ने अपने प्रेस वार्ता में
पंजाब पुलिस और सरकार की तैयारी और नियत
पर सवाल उठाए पंजाब पुलिस ने एक और जो
हरकत की है जब कल हमको यहां से
बुलाकर यह जो पुलिस चेक पोस्ट में मीटिंग
के लिए बुलाया गया तो आप आपके भी साथी
यहां पर मौजूद थे कोई भी किसानों का
व्यक्ति आगे नहीं बढ़ा बावजूद उसके उ वहां
से प्रोवोकेशन हुई वहां से शेलिंग हुई और
जब हमने वहां पर अधिकारियों के आगे यह बात
रखी कि यह ड्रोन आप कह रहे थे कि ड्रोन या
हरियाणा पुलिस हमारे क्षेत्र में नहीं
आएगी बावजूद उसके ड्रोन कल यहां पर दोबारा
सेलिंग करके गया है तो कहीं ना कहीं यह
पंजाब के जो मुख्य मंत्री है मैं उनसे भी
सवाल पूछना चाहता हूं एक तरफ तो आप बहुत
वाहवाही लूट रहे हैं कि आप पंजाब के बेटे
हैं आप पंजाब के और किसानों के हक के लिए
खड़े हैं लेकिन यह जो कल जो दो घटना हुई
हैं कैसे पंजाब की टेरिटरी में घुसकर कोई
अन्य फोर्स ऑपरेशन करती है या कोई भी
एक्टिविटी करती है तो क्या इससे मान लिया
जाए कि पंजाब पुलिस इसमें पार्टनर है
भागीदारी है
दूसरी बात राजपुरा में और यहां के
सराउंडिंग एरियाज में पंजाब हमारे पास जो
रिपोर्ट आई है पंजाब पुलिस ने गांव-गांव
में अनाउंसमेंट की है कि आप लंगर भी मत
लेकर जाइए और काफी लोगों को पीछे रोक दिया
गया ऐसा ही पातड़ा और खनौरी में भी हुआ है
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने
कहा है कि शुभकरण मामले में जांच के बाद
जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर की जाएगी
उधर केंद्र सरकार किसान आंदोलन से अपने
तरी तरीके से लड़ रही है उस पर भी गौर
करना चाहिए सड़कों को बंद कर दिया गया
कांटे बिछा दिए गए इंटरनेट बंद कर दिया
गया किसानों से बातचीत भी चलती रही मगर
अखबारों में किसानों से जुड़ी योजनाओं के
विज्ञापन भी आने लगे हैं इन गतिविधियों से
यही लगता है कि प्रधानमंत्री के खिलाफ कुछ
किसान हैं मगर ज्यादातर किसान उनके ही साथ
हैं शायद सरकार ऐसा बताने की कोशिश कर रही
है अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुग्ध
उत्पाद न से जुड़े सवा लाख किसानों को
संबोधित किया इतना बड़ा जमावड़ा इसी बीच
कर लिया गया यह भी हैरत की बात है मौका था
गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन महासंघ का
स्वर्ण जयंती समारोह गुजरात के 18000 से
अधिक गांवों से दुग्ध उत्पादन से जुड़े
किसानों को यहां बुलाया गया अगर शंभू
बॉर्डर पर जमा किसानों की भीड़ किसानों की
लग रही थी तब फिर इसे आप क्या कहेंगे
प्रधानमंत्री के लिए अन्नदाता के भी कई
वरायटी है पंजाब वाले अन्नदाता सड़कों पर
बैठे हैं तो गुजरात वाले अन्नदाता नरेंद्र
मोदी स्टेडियम में बिठाए गए हैं गांधी जी
कहते थे कि भारत की आत्मा गांवों में बसती
विकसित भारत के निर्माण के लिए भारत की
ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सशक्त होना जरूरी
है पहले केंद्र में जो सरकारें रही वो
ग्रामीण अर्थव्यवस्था की जरूरतों को
टुकड़ों में देखती थी हम गांव के हर पहलू
को प्राथमिकता देते हुए काम को आगे बढ़ा
रहे हैं हमारा फोकस है छोटे किसान का जीवन
कैसे बेहतर हो शंभू बॉर्डर पर तो इसी बात
को लेकर किसान जमा है कि हमारी जिंदगी
बेहतर हो इसलिए एमएसपी की गारंटी दीजिए
जिसके लिए प्रधानमंत्री ने ही कमेटी बनाने
की बात की जिस कमेटी का 19 महीने में कोई
रिजल्ट नहीं आया अब देखिए गुजरात के
स्टेडियम में प्रधानमंत्री अन्न दाताओं को
संबोधित कर रहे हैं अन्न दाताओं का आह्वान
कर रहे हैं मगर उन्हीं अन्न दाताओं का एक
बड़ा हिस्सा शंभू बॉर्डर और खनौरी बॉर्डर
पर जमा बैठा है वह कई तरह के आंसू गैस के
गोलों का सामना कर रहा है मगर उनकी मांगों
पर उन्हें आश्वासन देने के लिए भरोसा देने
के लिए गुजरात के अन्य दाताओं के बीच से
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पंजाब और दूसरे
राज्यों के अन्नदाता उं को भरोसा नहीं
देते हैं तो एक तरह से शंभू बॉर्डर पर
जहां किसान अपनी जिंदगी बेहतर करने की
लड़ाई लड़ रहे हैं प्रधानमंत्री उनका
जिक्र गुजरात में नहीं करते गुजरात जाकर
किसानों को दूसरे प्रकार के किसानों को
सपने दिखाते हैं यह सही है कि खेती किसानी
में केवल अनाज का उत्पादन नहीं होता
पशुपालन भी है दुग्ध उत्पादन भी है मछली
पालन भी है और मधुमक्खी पालन भी है और इन
सभी से लाखों किसान जुड़े हैं अगर अनाज के
उत्पादन से जुड़े किसान अपनी मांगों को
लेकर उठेंगे तो क्या मधुमक्खी पालन से
जुड़े किसानों को जमा किया जाएगा यह सब
दिखाने के लिए कि सारे किसान विरोध में
नहीं है सारे किसान सड़क पर नहीं
है किसान शक्ति प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन
क्या सरकार को भी यही करना चाहिए सड़कों
पर कांटे गाड़ दिए गए सीमेंट की दीवारें
बना दी गई शक्ति प्रदर्शन की इच्छा क्या
इससे पूरी नहीं होती पिछली बार भी यही सब
किया गया था आप याद कीजिए जब किसान सड़कों
पर बैठे महीनों धरने पर बैठे तब नए-नए
तरीके के संगठनों के किसानों को बुलाकर
उन्हें असली किसान के रूप में दिखाया जा
रहा था सरकारी योजनाओं का प्रचार शुरू हो
गया था यही सब इस बार भी हो रहा है
नमस्कार मैं रवीश कुमार

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