किसानों ने कर दी Jayant Chaudhary और अकाली दल पर स्ट्राइक |

4 पीएम न्यूज नेटवर्क में दोस्तों आपका
स्वागत है मैं हूं आपके साथ राशिद जहीर एक
मिसाल आपने सुनी होगी कि आसमान से टपके
खजूर में अटके जैंत चौधरी इस बात को नहीं
जानते थे कि जहां मैं जा रहा हूं दो दिन

बाद ही आसमानी मुसीबतें आ जाएंगी और ना ही
यह बात पंजाब के जो सुखबीर सिंह बादल हैं
वह जानते थे दोनों ने ही एनडीए में जाने
का फैसला क्या एक तो विधिवत चले गए दूसरे
का जाने का मूड था लेकिन किसान सड़क पर आ

गए अब हैरत यह हो रही है कि लोग जाएं तो
कहां जाएं क्योंकि जिनके बिहाव पर किसान
पंजाब के हैं किसान उत्तर प्रदेश के हैं
किसान राजस्थान के हरियाणा के नुक्कड़ के

हैं यह तमाम लोग ही इनका वोट बैंक है अब
उनको नाराज करके अगर एनडीए में यानी कि
मोदी जी के पास चले जाते हैं तो अब यह
बताइए कि इनको मिलेगा क्या अपनी अपनी
सीटों पर लड़ाई चल रही है जैन चौधरी

उम्मीद यह कर रहे थे दोस्तों कि जब संभल
में प्रधानमंत्री जी आएंगे तो उनका विधिवत
सम्मान पूर्वक एंट्री एनडीए में होगी ना

तो प्रधानमंत्री जी मिले और अब पेच ये फस
गया है दोस्तों कि उनको सीट कहां की मिले
क्या वह कमलनाथ तो नहीं बन गए कमलनाथ समझ
रहे हैं भाई मध्य प्रदेश में एक ही सीट

निकला करती थी कमलनाथ की छिंदवाड़ा जहां
से उनके बेटे हैं अब वो आने के बावजूद भी
दरवाजे पर खड़े हैं चूंकि भारतीय जनता
पार्टी के पास इंटरनल रिपोर्ट ये है कि
उनके बेटे छिंदवाड़ा की सीट हार रहे हैं

भारतीय जनता पार्टी जीत लेगी ऐसे ही जैन
चौधरी मुजफ्फरनगर से लड़े जहां पर ऑलरेडी
संजीव बालियान है जो उनके पिता श्री को
हरा करके मुजफ्फरनगर की लोकसभा सीट जीती
थी या फिर बागपथ में लड़े वह खुद हार गए

थे तो कौन सी ऐसी सीट है दोस्तों जहां से
जैन चौधरी अपना दावा पेश कर सके और अभी तक
उन्होंने मांगा भी कुछ नहीं है और मांगे
तो किससे मांगे अमित शाह को क्या दरवाजा

खटखटाया जाएगा कि साहब बहुत जमाना हो गया
आए हुए अब कहां जाएं तेरे दर से उठा तो
किधर जाऊंगा मैं कदा छोड़ दूंगा तो मर
जाऊंगा तो जैन चौधरी क्या कमलनाथ बन गए
चलिए सुखबीर सिंह बादल के बारे में तो यह

कहा जा सकता है कि अभी वह विधिवत रूप से
एनडीए में आए ही नहीं थे अब आए नहीं थे तो
रुक जाएंगे कुछ देर या फिर अकेले लड़

विधायक ऑलरेडी वहां पर विद्रोह जैसी
स्थिति है जैन चौधरी अपनी सफाई देते देते
पेश कर गए हैं अखिलेश यादव का इनडायरेक्ट
वे में मैसेज चला गया है कि जो रूठे हैं
वो आ जाएंगे नहीं तो उनके प्रतिद्वंदी आ
जाएंगे तो कहने का मतलब दर्शकों यह है कि

भारतीय जनता पार्टी यानी कि एनडीए में जैन
चौधरी आ तो गए लेकिन ना तो प्रधानमंत्री
जी से मिले कहा यही जा रहा था कि
प्रधानमंत्री जी उनको विधिवत सम्मान
पूर्वक उनको एनडीए मिलेंगे लेकिन वह तो

संभल आए चले भी गए जैन चौधरी को किसी ने
नहीं पूछा अब पेच ये फस रहा है दोस्तों
जानकार लोग यह कह रहे हैं कि जैन चौधरी के
लिए क्या एक सीट भी नहीं है ऐसा हो सकता

है चकि भारतीय जनता पार्टी जब ऑलरेडी वहां
पर सीटें जीत चुकी है उनके विनिंग
कैंडिडेट केंद्रीय मंत्रालय संभाले हुए
हैं अब बताइए कि वह सीटें छोड़े तो कैसे

छोड़े उनसे यह कहा जा सकता है कि साहब राय
बरेली चले जाओ
भाई अमेठी तो स्मृति रानी ने जीत ली थी आप
रायबल चले जाओ या फिर कन्नौज में सेफाई
में कहीं चले जाओ अब मजबूरी है कि वहां

जाट नहीं है और जाट अगर होते भी तो
मुजफ्फरनगर में इन्हीं जाटों ने अजीत सिंह
को हरा दिया था इन्हीं जाटों ने बागपत में
इनको हरा दिया था इन्हीं जाटों ने इनके

 

पिता को बागपत में सोमपाल शास्त्री के समय
हरा दिया था तो वह तो ऑलरेडी ऑलरेडी भाजपा
का बैंक कह सकता हूं वोट बैंक है जाट
समुदाय में पहले जमाने से कहता आया हूं
आपसे कि ये एक जमाने से बीजेपी को वोट
करता है हां कुछ कार्यकर्ता लोकदल वगैरह
के कुछ मुस्लिमों मिलके कुछ कमजोर मिलके
संगठन के रूप में वोट आ जाते हैं अब जैन
चौधरी की समझ में यह नहीं आ रहा हू आ रहा
है कि जाएं तो कहां जाएं मैंने आपसे कहा
ना बड़ी अजीब विडंबना में फंस गए जैन

चौधरी और अब उनको ना तो दो सीटें बताई जा
रही हैं जब अखिलेश यादव और तमाम लोग अपनी
सीटों का पैचअप जबरदस्त करते जा रहे हैं
और यूपी के अंदर अखिलेश यादव कांग्रेस का
समीकरण ब ने के बाद सीटों के बंटवारे के
बाद एक सीरियस लड़ाई इन फ्रंट ऑफ द बीजेपी
मानी जा रही है ऐसे समय में जैन चौधरी

अपने को कहां पा रहे हैं उनके विधायकों
में विद्रोह है वह गए नहीं थे राम मंदिर
आपको एक तो मुस्लिम है वह क्या कहते हैं
मेरठ की सीट थी शिवाल खास व बेसिकली है तो

बेसिकली समाजवादी पार्टी के कैंडिडेट
लेकिन लड़े थे वह लोकदल से आपस में पैचअप
था ना उस वक्त तो मामू फूपी के एक हो रहे
थे अब बात यह है कि अपने अपने मुफद को
देखते हुए जैंत चौधरी अगर एनडीए में आ गए
कि साहब राज्यसभा मिल जाएगी और कुछ एक दो

मंत्री एक दो सीटें मिल जाएंगी और केंद्र
में भी पद मिल जाएगा य तमाम चीजें हैं
लेकिन अब उनको लड़ने के लिए सीट तो है ही

नहीं उनके कार्यकर्ताओं में विद्रोह बताया
जाता है उनके विधायकों में विद्रोह बताया
जाता है तो कहां जाएं ऐसे ही सुखबीर सिंह

बादल का किसान जो आए हैं क्योंकि वोटर्स
यही हैं भाई जाट समुदाय गुर्जर समुदाय जो
भी किसान लोग हैं वेस्ट यूपी की पट्टी पर
दो ढाई सीटों पर असर है लोकदल का वहां पर
वो जाएंगे तो वो कहेंगे साहब हमारी एमएसपी

प हम तो जो है शहादत दे रहे हैं और आप उसी
व्यक्ति के लिए वोट मांगने आए हो जिसने
एमएसपी का वादा पूरा नहीं किया तो दोस्तों

एक ऐसी स्थिति फस फस गई इधर कुआ इधर खाई
लेकिन एक बात मैं आपको बताऊं जो कुआ जो है
अखिलेश यादव का यह बेहतर है वह ले सकते
हैं क्योंकि लोकसभा का जो समय है चुनाव का
जो समय होता है ना तो नीतीश कुमार को भी
बिल्कुल करीबी मान लिया जाता है नीतीश

कुमार की चवन्नी पा रप में चल रही है वहां
पर तो जाहिर सी बात है लोकसभा है अखिलेश
यादव हो सकता मान जाए कांग्रेस हो हो सकता

मान जाए क्योंकि वक्ती तौर पर अपना हित
साधना है हर किसी को यही वजह है दोस्तों
कि जब नेता अपनी डिग्निटी अपनी मैं कह
सकता हूं सेल्फ अपने वकार उसको छोड़कर जब
मुफद परस्ती में आते हैं छोटे-छोटे फायदे
में आते हैं तो कुदरत की तरफ से भी

कभी-कभी पहिया घूम जाता कि किसान दो दिन
बाद ही अवतरित हो गए और आकर के कैसा
आंदोलन चला दिया कि इसकी धमक पूरी दुनिया
में जा रही है और अगर दिल्ली वो आ गए तो
कितना बड़ा मसला बन जाएगा कि लोग तो छोड़ो

जैन चौधरी तो छोड़ो भारतीय जनता पार्टी के
लिए मुश्किल हो जाएगी क्योंकि इसमें कोई
दोराई नहीं कि एमएसपी की अगर मांग पूरी
होती है तो तो बिहार के किसान को भी फायदा

पहुंचाएगी ना अब उनको अलग थलग करने की
कोशिशें की जा रही है किसान तो आतंकवादी
है किसान तो उरवादी है किसान तो

खालिस्तानी है चलिए वो एक अलग विषय है
लेकिन मैं तो रोना यह रोना आया हूं आपके
सामने कि जैन चौधरी का क्या होगा शोले
फिल्म का मुझे वो डायलॉग याद आ जाता है
कालिया तेरा क्या होगा तो अब बात यह है
जैन च चौधरी का क्या होगा आप सोच लीजिए
दर्शकों लेकिन पलपल हालात बदलते जा रहे
हैं उत्तर प्रदेश के हालात यह हैं कि मिनट

में 10 दिन पहले हालात कुछ और थे जैसे ही

कांग्रेस और समाजवादी के सीटों का
डिस्ट्रीब्यूशन हुआ है इसकी धमक बहुत दूर
तक जा रही है कर्मा फिल्म देखी है वो इसकी
गूंज बहुत दूर तक जाएगी डॉक्टर जेलर से
कहते हैं वो डॉक्टर रन कहते हैं तो ऐसे ही
अब वो आम आदमी पार्टी भी सही रास्ते पर आ
गई है उधर जनाबे मन महाराष्ट्र के अंदर

सीटों का बंटवारा बढ़िया करके हो रहा है
शरद उसने उनके जो एनसीपी के हैं वो उ शरद

पवार साहब उन्होंने भी कह दिया 39 सीटों
पर मामला हल हो गया दो पांच सीटें बची हैं
कर लेंगे अब भारतीय जनता पार्टी के लिए
दिक्कत हो रही है वहां शिंदे भी लड़ रहे
हैं एनसीपी के जो पवार साहब है वह भी हैं
और इधर दिल्ली में केजरीवाल भी जो है मैं
कह रहा हूं कि कांग्रेस से फैसला लगभग हो

चुका है चार तीन का मामला तो इनकी तो
उलझने सुलझ जा रही है लेकिन भारतीय जनता
पार्टी एनडीए जैन चौधरी और इनके लोगों की
उलझने उलझती जा रही हैं एक शेर याद आ जाता
है जब उलझनों की बात आई वक्त मिला तो
सुलझा दूंगा तेरी जुल्फें वक्त मिला तो
सुलझा दूंगा तेरी जुल्फें अभी तो उलझा हुआ

हूं अपनी उलझने सुलझाने में तो अभी तो
उलझे अपनी उलझाने सुलझाने में आपको खबर
कैसी लगी अपनी राय कमेंट्स बॉक्स में जरूर
दीजिए चैनल को सब्सक्राइब कीजिए शेयर
कीजिए नेक्स्ट टाइम में किसी खबर के साथ
हाजिर होता हूं जय
हिंद
h

 

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