किसानों ने दिल्ली कर दी सील ! | Noida | Delhi Police | Top News |News18 Punjab

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इंडिया बड़ी खबर आई दिल्ली से किसानों के
दिल्ली कूज से पहले पुलिस ने दिल्ली की
घेरे बंदी कर दी अलग-अलग राज्यों से लगने
वाली दिल्ली के सभी बॉर्डर पर पहरा बढ़ा

दिया गया 12 मार्च तक पूरी दिल्ली में
धारा 144 लगा दी गई दिल्ली पुलिस ने
राजपुर बॉर्डर टकरी बॉर्डर सिंघु बॉर्डर
और शंभू बॉर्डर को छावनी में तब्दील कर
दिया बॉर्डर पर नजर रखने के लिए ड्रोन
कैमरे तक तैनात कर दिए गए अलग-अलग किसान
संगठनों ने न्यूनतम समर्थन मूल्य समेत

खेती से जुड़ी कई दूसरी मांगों को लेकर
दिल्ली घेरने की तैयारी कर ली है 2020 में
भी किसानों ने करीब 1 साल तक दिल्ली के
अलग-अलग बॉर्डर पर धरना प्रदर्शन किया था
और करीब 1 साल बाद वह वहां से हटे थे एक
बार फिर किसानों ने ऐलान किया है कि
केंद्र सरकार पर दबाव बनाने के लिए वह

दिल्ली को घेर लेकिन किसानों के दिल्ली
कूच को रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेड
लगाने के साथ सड़क पर लोहे की कीलें बिछा

दी दिल्ली में दाखिल होने वाले रास्तों पर
भारी संख्या में पुलिस और अर्ध सैनिक बल
के जवानों को तैनात कर दिया गया दिल्ली और
हरियाणा के बीच सिंघु बॉर्डर पर तो 4 फीट
ऊंची दीवार बना दी

गई और सड़क पर बिछाने के लिए खास तरह की
लोहे की बड़ी-बड़ी पट्टियां मंगवा ली गई
इन पट्टियां में पहले से ही नुकीली कीलों
को वेल्डिंग के जरिए जोड़ दिया गया था ये
बैरी गड तो होगा ही लेकिन ये जो कील बैरी
गटिंगिया
के अलावा पुलिस ने सिंघु बॉर्डर पर भारी

मात्रा में कटीले तार भी मंगवा लिए ड्रोन
से बनाए गए वीडियो में सिंघु बॉर्डर पर
किसानों को रोकने के लिए की गई तीन लेयर
की बैरिकेडिंग दिखाई दी सबसे पहले सीमेंट
के बैरिकेड और उसके बाद लोहे के बैरिकेड
रखे हुए दिखाई दिए उनके ऊपर कटीली तार भी

रखी नजर आई इसके बाद सबसे आखिर में
बड़े-बड़े कंटेनर को एक कतार में रख दिया
गया किसान अपने ट्रैक्टरों से इन कंटेनर
को हटा ना दें इसका भी इंतजाम कर दिया गया
आप देखिए तस्वीरों में कि इतना आसान नहीं
होगा जब इनके अंदर मिट्टी भर जाएगी तो आप

समझ सकते हैं कि यह कितनी वजनी हो जाएंगे
और यह इनको हिलाया नहीं जा सकता है यानी
कि किसानों को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस
ने सिंघु बॉर्डर को पूरी तरह सील करने का
इंतजाम कर दिया और किसानों के दिल्ली कूज
को रोकने के लिए दिल्ली और उत्तर प्रदेश
के बीच गाजीपुर बॉर्डर पर भी सिंघु बॉर्डर
जैसे ही इंतजाम दिखे किसानों के आंदोलन को

देखते ही पूरी दिल्ली में 12 मार्च तक
धारा 144 लगा दी गई गाजीपुर बॉर्डर पर
उत्तर प्रदेश पुलिस और दिल्ली पुलिस ने
मुस्तैदी बढ़ा
दी और उत्तर प्रदेश से दिल्ली की तरफ जाने
वाले रास्ते के एक हिस्से को बंद कर दिया
गया वहां मौजूद ट्रैफिक पुलिस के सिपाही

लोगों से दूस दूसरा रास्ता लेने की अपील
करते दिखे गाजीपुर बॉर्डर पर इस तरह से यह
ट्रैफिक डाइवर्ट किया गया है कुछ लोग हैं
जो डाइवर्ट होते हुए रास्ता भी पूछ रहे
हैं गाजीपुर बॉर्डर पर पुलिस के साथ भारी
संख्या में रैपिड एक्शन फोर्स के जवान भी

मुस्तैद दिखाई दिए ऐसा लगा जैसे वहां
रैपिड एक्शन फोर्स की कोई छावनी हो
किसानों को रोकने के लिए लगाए गए बैरिकेड
के पास तैनात आरएफ जवानों के हाथों में
आंसू गैस के गोले दागने वाली बंदूक भी नजर
आई यानी प्रशासन की तैयारी किसानों को

किसी भी हाल में दिल्ली की सीमा पर ही रोक
देने की है खबरों के मुताबिक उत्तर प्रदेश
हरियाणा और पंजाब के अलावा मध्य प्रदेश और
उत्तराखंड से भी कुछ किसान दिल्ली कूज की
तैयारी में लेकिन किसान संगठन दिल्ली में
एंट्री ना ले सकें इसके लिए राजधानी को
पहले ही किसी अभेद्य किले में तब्दील कर

दिया गया क्योंकि पुलिस प्रशासन को इस बात
की आशंका है कि अगर किसानों के संगठन
दिल्ली में घुसे तो हंगामा बढ़ सकता है
हरियाणा और दिल्ली के हरियाणा और पंजाब के
बीच शंभू बॉर्डर पर भी पुलिस ने पैरा बढ़ा

दिया लेकिन किसानों को रोकने के लिए की गई
पुलिस की मॉक ड्रिल के दौरान हालात बिगड़
गए और अफरातफरी मच गई
क्योंकि किसानों को रोकने के लिए की गई
बैरिकेडिंग के पास पुलिस ने आंसू गैस के
गोले दाग दिए पुलिस की तरफ से छोड़े गए

आंसू गैस के गोलों की वजह से वहां तेज
धमाके जैसी आवाजें सुनाई
दी इसके बाद वहां भगदड़ जैसे हालात हो गए
वहां मौजूद लोग इधर-उधर भागते दिखाई दिए
थोड़ी ही देर में वहां चारों तरफ सफेद
धुआं फैल गया वहां खड़ी मीडिया कर्मियों

की गाड़ियों के पास भी सफेद धुआं उठता
दिखाई दिया इसके बाद पुलिस की एक टीम वटर
कैनन की मदद से पानी छिड़क नजर आई पुलिस
ने इस मॉक ड्रिल की जानकारी पहले ही दे दी
थी लेकिन इसके बाद भी धमाके की आवाज सुनते
ही अफरातफरी मच गई हरियाणा की तरफ से
किसान दिल्ली में दाखिल ना हो सके इसके
लिए शंभू बॉर्डर को बैरिकेड और पुलिस के

जवानों से पाट दिया गया दिल्ली के अलग-अलग
बॉर्डर पर किसानों को रोकने के लिए किए गए
इंतजामों ने 3 साल पहले हुए किसानों के
आंदोलन की याद दिला
दी

 

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