किसानों ने नहीं माना केंद्र सरकार का प्रस्ताव

इंडिया आप देख रहे हैं न्यू 18 इंडिया मैं
हूं आपके साथ पंकज भार्गव बड़ी खबर किसान
दिल्ली कूच पर फिर से अड़ गए हैं किसानों
ने केंद्र सरकार का पांच फसलों पर एमएसपी
गारंटी का प्रस्ताव नहीं माना है किसानों

के साथ पिछली बैठक में केंद्र की ओर से
किसानों को पांच फसलों पर न्यूनतम समर्थन
मूल्य गारंटी का प्रस्ताव दिया गया था
केंद्र के प्रस्ताव पर बात ना बनने के बाद
किसानों ने कल देर रात एक बार फिर से

दिल्ली कूछ का ऐलान कर दिया है यानी कल
फिर दिल्ली की तरफ कूछ करेंगे किसान
उन्होंने साफ-साफ ये कह दिया है कि पांच
फसलों पर जो एमएसपी है जो सरकार की तरफ से
उसके लिए गारंटी दी गई है वो प्रस्ताव

उन्हें मंजूर नहीं है और पिछली बैठक में
ये प्रस्ताव रखा गया था और कहा यह भी जा
रहा था कि अ सकारात्मक तरीके से यह बातचीत
हुई है यह बात किसानों ने भी कही थी और
किन सरकार के जो तीन-तीन मंत्री गए थे

उन्होंने भी यह बात कही थी कि बहुत अच्छे
माहौल में सकारात्मक माहौल में बातचीत हुई
है और लगता है कहीं ना कहीं बर्फ पिघले गी
लेकिन कल देर रात बैठक हुई किसान संगठनों

की और उस उसके बाद यह निर्णय लिया गया कि
पांच फसलों पर जो न्यूनतम समर्थन मूल्य
गारंटी की बात सरकार कर रही है वह
प्रस्ताव सरकार का किसानों को मंजूर नहीं

है लिहाजा वह दिल्ली कूछ करेंगे किसान
नेता सरवंत सिंह पंडेर ने एक बार फिर से
दिल्ली कूछ का ऐलान कर दिया पंडेर ने कहा
कि सरकार के पास फैसला करने के लिए 21
फरवरी तक का वक्त है यह ऐलान कर दिया गया
है उनकी तरफ

से प हमार साथ हैं क्या हुआ कि आप लोग
सरकार के प्रस्ताव को ठुकरा रहे हैं वो
प्रस्ताव जिसमें यह कहा गया था कि पांच
फसलों पर सरकार एमएसपी गारंटी देगी आपको
देखिए उस प्रस्ताव में बहुत सी समस्याएं
थी तो माननीय मंत्री महोदय ने जो बोला कि

हम इसके ऊपर डेढ़ लाख करोड़ रुपया खर्च
करेंगे तो जो अभी अभी स्टडी आई है जो अन्य
अन्य बुद्धिजीवियों बोल रहे हैं अगर
एमएसपी लीगल कंटी कानून बनाए तो यह 23 की
23 फसलों पर इतना खर्च भी नहीं आएगा तो आप
पांच फसलों प इतना पैसा लगा रहे तो 23 प
लीगल गारंटी कानून बना दे दूसरा वो बोल

रहे हैं अगर दान गेहूं जो किसान छोड़ेंगे
वो इसमें आएंगे तो पहले जो यह फसले बो रहे
हैं तो वो अपने आप इससे बाहर हो जाएंगे अब
पाम ऑइल जो है सरकार

175000 करोड़ सा बाहर से मंगवा है अगर
लीगल छोटी घंटी कानून बना दे यह पैसा
हमारे ऊपर लगा दे बाहर से पैसा भी बचेगा
और किसान भी खछ होगा अब सरकार की नीति पर
संदेश होता है इसलिए हमने यह प्रस्ताव

रद्द कर दिया कितने संगठन इसके समर्थन में
थे कितने विरोध में आए बातचीत के दौरान
क्या निकला नहीं कोई भी विरोध में नहीं है

सबने वो सब सबकी जो मुझे रिपोर्ट है हमारे
दो 250 संगठन है सबों ने मिलकर कहा कि यह
प्रस्ताव उचित नहीं है तो उचित प्रस्ताव
केंद्र को लाना चाहिए चारों बैठकों के

भी पॉजिटिव थी भगवंत मान उनके चीमा जी
उनके कृषि मंत्री सब पॉजिटिव थे फिर
नेगेटिव न्यूज़ क्यों सुनने को मिल रही आप
लोग के लिए पॉजिटिव हो सकती है यह न्यूज
लेकिन अब मोर्चा तो बैठा रहेगा सड़क पर

देखिए ये तो मंत्री जी को पूछना चाहिए
मिटिंग के अंदर आन्य प्रदास होता है और जब
पीसी में जाके अलग बात बोलते हैं तो वो
बात में फर्क तो पड़ेगा ही हम तो आज भी
पॉजिटिव है नेगेटिव नहीं है आखरी सवाल

क्या आखरी सवाल ये है कि अब आगे क्या होगा
क्योंकि आप लोग कह रहे हैं कि दिल्ली कुछ
करेंगे 21 तारीख को ही कुछ करेंगे 19 को
फैसला ले लिया या 20 को ही कुछ कर जाएंगे
देखिए ऐसा नहीं 20 को नहीं करेंगे 21 का

समय है केंद्र के आप आप आप गेंद केंद्र के
पाले में उन्होंने कहा हम भी दिल्ली जाके
अन्य मांगों के ऊपर जैसे कर्ज माफी की बात
है तो आप सरकार को 21 फरवरी तक का समय दे
रहे हैं देखिए ब देख रहे मैं पंडित जी को
आप सुन रहे थे कह रहे हैं सरकार को 21

फरवरी तक का समय दे रहे हैं सुबह 11 बजे
तक का नहीं अगर सरकार उनकी मांग मानती है
तो यह किसान आंदोलन दिल्ली की तरफ पूछ
करेगा आज तमाम किसान संगठनों की बैठक हुई
जिसमें संयुक्त किसान मोर्चा गैर राजनीतिक
और किसान मजदूर मोर्चा इन दोनों ही

मोर्चों ने यह तय किया है कि सरकार ने जो
पांच फसलों पर एमएसपी गारंटी की बात कही
थी उस प्रस्ताव को ठुकरा दिया किसानों ने
कहा कि उस कानून में हमारे लिए माफ

कीजिएगा उस प्रस्ताव में हमारे लिए कुछ भी
नहीं है और इसीलिए उन्होंने इस प्रस्ताव
को स्वीकार नहीं किया है कैमरा पर्सन यूगल
ठाकुर के साथ मैं मानव यादव न्यूज़ 18
इंडिया शंभू बॉर्डर तो सरवन सिंह पंढेर को
आपने सुना उन्होंने साफ-साफ यह कह दिया कि
पांच फसलों पर जो एमएसपी की बात हो रही है
गारंटी की बात हो रही है वो उन्हें मंजूर
नहीं है यानी 23 से कम मंजूर नहीं है

उन्हें तो आखिर पांच फसलों पर ही गारंटी
की बात क्यों सरकार की तरफ से कही गई है
जरा वो समझाने की कोशिश करें तो बात दरअसल
यह है कि पंजाब में धान की खेती से नीचे
चले गए भूजल स्तर में सुधार लाने की एक
तरह से कोशिश होगी इसलिए यह इंपॉर्टेंट है

दूसरा कम पानी में उगने वाली फसलों की खे
को प्रोत्साहन देने की कोशिश की जाएगी
दूसरा पॉइंट ऐसे में यह है उसके अलावा
दालों के साथ मक्का और कपास की खेती को भी
बढ़ावा देने की एक तरह से कोशिश होगी धान
की खेती से हटने वाले किसानों को एमएसपी

की गारंटी का प्रस्ताव जो है वह रखा गया
है उसके अलावा पंजाब में बंजर हो रही जमीन
को फिर से उपजाऊ बनाने की एक तरह से कोशिश
होगी तो लिहाजा पांच फसलों पर न्यूनतम

समर्थन मूल्य की बात सरकार की तरफ से कही
गई है लेकिन अभी किसान नेता सरवन सिंह बेर
को आपने सुना देर रात ये तमाम संगठन
इकट्ठे हुए और उसके बाद उस बैठक के बाद यह
फैसला लिया गया कि अगर 23 23 फसलों पर जो
एमएसपी गारंटी की बात वो कर रहे हैं वो
नहीं माना गया सरकार के द्वारा तो वो

दिल्ली कुछ करेंगे और कल 11:00 बजे तक 21
तारीख को 11 बजे तक का वक्त दिया गया है
अगर सरकार ने उस वक्त तक कुछ नहीं किया तो
वो दिल्ली कुछ करेंगे बर्फ पिघलती हुई नजर
आ रही थी जो चार बैठकें हुई दो बैठकें

बेनतीजा रही लेकिन तीसरी बैठक और फिर जब
चौथी बैठक हुई तो उसके बाद मंत्रियों को
हमने सुना तीन-तीन मंत्री केंद्र सरकार की
तरफ से गए थे पियूष गोयल नित्यानंद राय और
कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा थे और किसान

नेता थे सरवंत सिंह पंडेर और दल्ले वाल ये
तमाम लोग थे लेकिन भगवंत मान भी थे पंजाब
के सीएम लेकिन उसके बाद भी कोई समाधान
निकलता हुआ अब नहीं आ रहा मानव यादव
लगातार पलपल की अपडेट हमें दे रहे हैं
शंभू बॉर्डर से जहां किसान डटे हुए हैं

मानव अभी आप सरवंत सिंह पंढेर से बातचीत
कर रहे थे उन्होंने साफ यह कह दिया कि 23
फसलों पर एमएसपी गारंटी से कम कुछ भी
मंजूर नहीं है बर्फ पिघलती हुई नजर आ रही
थी आपने किसान नेताओं से बात की हमने

कुछ सकारात्मक माहौल में हो रहा है लेकिन
बात वहीं की वहीं रह गई है पेज कहां फंस
गया है
आखर हां देखिए जब चौथे दौर की बैठक हुई थी
पंकज तो उसमें चाहे पंजाब सरकार के
मुख्यमंत्री हो उनके कृषि मंत्री हो देश
के तीन केंद्रीय मंत्री हो या फिर 14

किसान नेता हो सभी ने बैठक के बाद ये कहा
था कि बहुत ही सकारात्मक रूप से ये बैठक
हुई है सभी बहुत पॉजिटिव नजर आ रहे थे
किसान नेताओं ने भी कहा कि सरकार का जो
प्रस्ताव है हम उस पर अपने बाकी दूसरे
संगठन जो हैं उनसे बातचीत करेंगे और उसके
बाद एक से डेढ़ दिन में ही सरकार के सामने

अपना पक्ष रख देंगे लेकिन जिस तरीके से कल
किसान नेताओं ने इस पूरे प्रस्ताव को
खारिज किया जिसमें पांच फसलों पर एमएसपी
गारंटी की बात सरकार ने की थी 5 साल तक के
लिए तो उससे एक बात साफ झलकती है कि किसान

ये लगातार किसान नेता यह कह रहे हैं कि जो
हमने मांगा उसके उलट सरकार ने हमें दिया
है और सरकार जो हमको दे रही है व हमारे
किसी काम का नहीं है और उन्होंने यह भी
कहा कि सरकार जितना खर्चा पांच फसलों पर

एमएसपी गारंटी देकर करेगी उतना ही खर्चा अ
सभी फसलों पर एमएसपी गारंटी देकर भी उतना
ही खर्चा आएगा तो यह दावा किसान नेता कर
रहे हैं इनकी तरफ से यह भी कहा गया कि
सरकार 175 हज करोड़ का पाम ऑयल इंपोर्ट
करती है और उतने उतना ही पैसे में आप सभी

फसलों पर एमएसपी गारंटी दे सकते हैं तो एक
तरीके से तकरार जो शुरुआत में हम 13 तारीख
को देख रहे थे तो हम कहीं ना कहीं उसी जगह
पर आके आज खड़े हुए हैं मान सरकार की तरफ
से जो त दिए गए थे यानी किस तरह से जो देश
का बजट है वो कितना है रक्षा बजट
इंफ्रास्ट्रक्चर उस पर कितना खर्चा आता है

आम आदमी की जेब पर कैसे बोझ बढ़ जाएगा
उसका क्या जवाब मिलता है इनकी तरफ
से देखिए बैठक में तो क्योंकि किसान नेता
और केंद्रीय मंत्री होते हैं लेकिन किसान
नेताओं ने यह कहा कि बैठक के भीतर कृषि
मंत्री द्वारा यह बताया गया कि 135000\

करोड़ का खर्च 5च फसलों की एमएसपी गारंटी
पर आएगा तो इसी बात को आगे बढ़ाते हुए
किसान नेता ये कह रहे हैं कि अगर सभी
फसलों पर आप देते हैं तो इनका आकलन यह
कहता है कि

175000 करोड़ का खर्च आएगा लेकिन अगर आप
देखें तो किसान नेता यह भी कह रहे हैं कि
बैठक के अंदर सरकार ने कुछ और कहा बाहर
आकर मीडिया के सामने कुछ और कहा तो इस
तरीके से एक तरीके से आरोप भी सरकार के

ऊपर लगाया गया है पिछली बैठक में केंद्र
सरकार की तरफ से किसान नेताओं को यह भी
समझाया गया कि किस तरीके से कितना मुश्किल
है सभी फसलों पर एमएसपी देना क्योंकि
सरकार ने इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में भी
2018 में यह कहा था कि यह बहुत मुश्किल है

सरकार के ऊपर बहुत ही वित्तीय बोझ आ जाएगा
और सभी फसलों पर एमएसपी गारंटी नहीं दी जा
सकती पंकज बिल्कुल तो केवल एक दिन है यानी
आज ही का दिन है और किसानों की तरफ से साफ

यह कह दिया गया जो सरकार की तरफ से
प्रस्ताव दिया गया है यानी पांच फसलों पर
एमएस एमएसपी गारंटी की बात सरकार कर रही
वो किसान संगठनों को मंजूर नहीं है 23
फसलों पर एमएसपी गारंटी की बात वोह कर रहे

हैं उससे कम कुछ भी मंजूर नहीं है और अगर
सरकार उनकी मांगे आज तक नहीं मानती कल
1100 बजे तक का वक्त है उसके बाद वह
दिल्ली कुछ वापस से करने की तैयारी कर
देंगे

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