किसान आंदोलन पर गोदी मीडिया की बेहूदगी!बीजेपी का खुलकर एजेंडा चलाया!युवा किसान के साथ घटी घटना छुपाई

किसान आंदोलन की खबरों में भारतीय जनता
पार्टी किस तरह से मीडिया को कंट्रोल करती
है ना कल उसकी आदर्श मिसाल सामने उभर कर
आई आप सब जानते हैं दोस्तों 22 साल के

शुभकरण सिंह एक युवा किसान की गोली लगने
से मौत हो गई क्या आप जानते हैं प्राइम
टाइम में किसी भी न्यूज चैनल पर इस खबर का

जिक्र तक नहीं था अरे मैं तो यह कहता हूं
उस खबर का जिक्र कर देते दोष किसानों पर
ही मर देते मगर वो खबर ही गायब कर दी गई
सबसे शॉकिंग बात हरियाणा पुलिस यह दावा कर
रही थी कि किसी की मौत नहीं हुई है अब भी
वह वही दावा कर रहे हैं अपने ट्विटर हैंडल
पर मगर सबसे पहले दोस्तों भारतीय जनता

पार्टी किस तरह से कंट्रोल करती है गोदी
मीडिया की उसकी मिसाल मैं आपके सामने पेश
करना चाहूंगा दो चीजों पर गौर कीजिएगा
गोदी मीडिया का एजेंडा और एक भी खबर में

शुभकरण सिंह की मौत का जिक्र तक नहीं आपके
जहन में सवाल होगा ऐसा क्यों क्योंकि अगर
एक भी किसान की मौत की खबर सामने उभर कर
आती है तो पुलिसिया जुल्म को लेकर जनता
में संदेश जाता है और आप भी जानते हैं
हरियाणा पुलिस किसके कंट्रोल में है
पैरामिलिट्री फोर्सेस किसके कंट्रोल में

है एक-एक करके जो शर्मनाक चेहरा गोदी
मीडिया का देखा गया आपके सामने मैं पेश कर
रहा हूं सबसे पहले टीवी9 भारतवर्ष किसानों
का दिल्ली कूछ का प्रोग्राम जाम से जनता
परेशान मैं आपसे फिर सवाल पूछना चाहता हूं

किसान तो पहुंचे भी नहीं वो तो शंभू
बॉर्डर पे थे बार-बार इस बात की मिसाले
सामने उभर कर आई कि दिल्ली और नोएडा पुलिस
खुद ट्रैफिक को धीमा कर रही थी तो फिर
किसानों पर इसका दोष क्यों मरना बार-बार
आगे
देखिए सड़क पर प्रदर्शन 6 करोड़ लोगों को

टेंशन शुभकरण सिंह का जिक्र तक नहीं फिर
देखिए जेसीबी पोकलेन मास्क तलवार
प्रदर्शनकारियों का इरादा ठीक
नहीं मैं समझना चाहता हूं अगर किसान

पुलिस अर्ध सैनिक बल बल प्रयोग कर रहे हैं
तो किसान तो सिर्फ उस बैरिकेट्स को तोड़ना
चाहते हैं ना कल मैंने आपको बाकायदा बताया
कि शंभू बॉर्डर पर और
कन्नौरमई छोड़े जा रहे थे वो अपने आप में

शॉकिंग थे वो वीडियो बेशक मैंने आपको नहीं
दिखाया था मगर बाकायदा तस्वीरों के जरिए
मैंने आपको बतलाया था पुलिसिया जुल्म की
दास्तान और दोष यहां पर जी न्यूज किस पर
मर रहा है किसानों पर मर रहा है आगे देखिए

साहब इंडिया टीवी इलेक्शन आया तो आंदोलन
भी लौटाया किसानों का कंधा किसका छिपा
एजेंडा अब ये न्यूज़ चैनल्स आंदोलन का
अपराधीकरण कर रहे हैं यानी कि आंदोलन करना
यानी देश के
खिलाफ इस देश की रीड इस देश की आत्मा
आंदोलन है जी हां हमेशा से 2014 से पहले
जब भी हमने अपनी बात मनवाने की कोशिश की

है सत्ता को कटघरे में रखने की कोशिश की
है तो आंदोलन के जरिए और यहां पर देखिए
इंडिया टीवी आंदोलन का अपराधीकरण कर रहा
है उसे क्रिमिनलाइज कर रहा है आगे देखिए
साहब टाइम्स ना न भारत इसने तो

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ही जितवा
दिया
यह वही पत्रकार है याद कीजिए
दोस्तों जब अनिल मसीह लोकतंत्र की चोरी कर
रहा था चंडीगढ़ मेयर चुनावों में यह वही
पत्रकार है जिसने कहा था कि भा अनिल मसी
ने कुछ गलत नहीं किया उसने सिर्फ आठ बैलेट
पेपर्स नहीं सभी बैलेट पेपर्स पर टिक
मार्क किए थे जबकि खुद अनिल मसीह अदालत
में जाकर कहता है कि मैंने आठ बैलेट

पेपर्स पर जो है टिक मार्क किए यह क्या कह
रहा है यह देखिए क्या किसानों के प्रदर्शन
का लोकसभा चुनाव पर असर
पड़ेगा ऑप्शंस दे रहा है हां बिल्कुल

सिर्फ 5 फीसद नहीं मोदी ही जीतेंगे 94
फीदी खेला खत्म चुनाव क्या करवाने यहां तो
घोषणा हो गई है ना 94 फीदी सिर्फ मोदी को
वोट
देंगे आप खबर तक नहीं पहुंचा रहे हैं आपने
यह तक खबर नहीं पहुंचाई कि एक किसान की
मौत हो गई है गोलीबारी में आपने यह तक खबर
नहीं पहुंचाई किसान जो दावा कर रहा है कि

उसके ट्रैक्टर्स को पुलिस तोड़ रही थी यह
भी दावा किया जा रहा है कि कई वहां पर
सिविल क्लोज्स में लोग पहुंचे थे जो अपनी
पहचान नहीं बता रहे थे ये मुद्दे हैं ना
इनकी जांच होनी चाहिए ना कि क्या पुलिस के

अलावा भी वहां पर लोग थे जो शायद पुलिस ना
रहे होंगे फिर देखिए साहब रिपब्लिक भारत
एमएसपी की लड़ाई उपद्रव तक आई फिर तिहाड़
नरेश किसान और पुलिस टकराव पर आंखें खोलने
वाला विश्लेषण अभी ये दो ही दिन पहले ये

खबर चला रहा था कि पुलिस को लेकर जो
एग्जाम होना है उसमें जो पेपर लीक हुआ है
उसको लेकर लोग इतने क्यों नाराज हैं
क्योंकि लोग तो पुलिस को गाली देते हैं और
गाली देने के बावजूद वो पुलिस जवाइन करते

हैं तर्क देखिए इस आदमी का फिर देखिए पेन
किलर पत्रकारिता का नाम रोशन करने वाला
माननीय काग भुषी ट्रैक्टर या टैंकर इरादा
क्या बंकर और मास्क ये कौन है न्यूज़ 18
बॉर्डर पर बंकर टक्कर भयंकर 14000 लोग
2000 ट्रैक्टर कौन डायरेक्टर नहीं मान रहे
किसान पीछे भगवंत

मान भगवंत मान पर दोष मर दो डायरेक्टर पर
दोष मर दो मगर यह नहीं बताओगे कि तुम जो
यह कचरा चला रहे हो इसके पीछे दरअसल कौन
है दोस्तों आपकी स्क्रीन पर डीजीपी

हरियाणा
पुलिस मैं इंतजार कर रहा हूं कि इन्होंने
जिक्र किया होगा उस एक किसान की मौत का
कहीं पर भी इस बात का जिक्र नहीं है कहीं
पर भी इस बात का जिक्र नहीं है अब मैं
आपको दिखला चाहता हूं कि इस मुद्दे पर
हरियाणा पुलिस क्या कह रही है हरियाणा
पुलिस के भी पूरे

के घायल होने की सूचना है जो उपचाराधीन है
खुलेआम गलत बयानी करना यह हरियाणा पुलिस
कर रही है बल प्रयोग तो उन्होंने किया ही

साथ ही इस तरह की हरकतें की जा रही है मैं
आपको बतलाना चाहता हूं एक और बयान दाता
सिंह खनौरी बॉर्डर पर प्रदर्शनकारियों ने
पराली में मिर्च पाउडर डालकर पुलिस का
चारों तरफ से किया घेराव पथराव के साथ
लाठी गंडा से इस्तेमाल करते हुए पुलिस

कर्मियों पर किया गया हमला लगभग 12 पुलिस
कर्मी गंभीर रूप से घायल आप पुलिस हैं
आपका यह फर्ज है सबको सुरक्षा देना आप
पहले ऐलान कर देते हैं कि एक भी किसान की
मौत नहीं हुई है मैं समझना चाहता हूं
खनौरी बॉर्डर पर या शंभू बॉर्डर पर

अत्याधिक बल प्रयोग की क्या वजह
है वहां पर माहौल बिल्कुल युद्ध जैसा था
मैं समझना चाहता हूं आखिर क्यों दोस्तों
गांव सवेरा के पत्रकार गर्वित गर्ग ने
किसान नेता सरवन सिंह पंढेर का यह बयान
पेश मैं चाहूंगा आप उस बयान को सुने इसमें
वो कह रहे हैं कि खनौरी बॉर्डर पर कई
नौजवान मिसिंग है और पैरामिलिट्री फोर्सेस

ने पंजाब में घुसकर एक बुजुर्ग को बोरे
में डालकर उनके हाथ पांव तोड़कर खेत में
फेंक दिए क्या यह दावा सही है क्या
हरियाणा पुलिस इसका जवाब देगी क्या
पैरामिलिट्री फोर्सेस इस बात का जवाब
देंगे सुनिए सरवंत सिंह पंढेर क्या कह रहे

हैं बर्बरता से यह दोनों बॉर्डर के ऊपर
खनौरी और शंभू के ऊपर सरकार ने टियर गैस
और हाई इजिक जो इस्तेमाल किए उसकी निंदा
करनी चाहिए खनौरी बॉर्डर के
ऊपर शुभकरण
सिंह जो 23 22 साल का नौजवान उनकी मौत हो
गई है और तीन और गंभीर जख्मी है जिनमें से
अभी मिसिंग पर्सन भी बहुत ज्यादा है और जो
केंद्र के अर्ध सैनिक फोर्स है उन्होंने
पंजाब की हद में घुसकर
खनौरी के ऊपर 25 से अधिक ट्रैक्टर ट्रलियो
को जो नुकसान किया है और एक बुजुर्ग को जो
हरियाने का था बोरी में डालकर उनके लात
पांव तोड़कर उनको खेतों में फेंका गया है
और पूरी बरबत्ता से कारवाही की कांग्रेस
ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी है 21
जनवरी 1924 में अंग्रेजों ने जिस तरह का
जुल्म निहत सिख जत्त पर किया था उसका
जिक्र पवन खेरा यहां पर कर रहे हैं उसकी
तुलना वो कर रहे हैं क्या कह रहे हैं पवन
खेरा आइए सुनते हैं आज से 100 साल पहले 21
फरवरी 1924 पंजाब में एक मोर्चा जैतो द इस
नाम से बड़ा मशहूर एक मोर्चा निकाला गया
था इस मोर्चे को रोकने के लिए अंग्रेजों
ने तमाम षड्यंत्र रचे अलगाववादी बताया उन
सिखों को उनके रास्ते में कंटीले तार लगा
दिए पूरी फौज पुलिस सब तैनात कर दिया उनको
रोकने के लिए लेकिन वो आगे बढ़ते चले गए
गोलियां चलाई गई उन पर और सैकड़ों सिख उस
मोर्चे में जो शामिल थे वह शहीद हुए आज
100 साल बाद फिर से हम देख रहे हैं ना
केवल हमारे सिख किसानों को और किसानों को
रोका जा रहा है दिल्ली के भीतर आने से
बल्कि उनको अपमानित किया जा रहा है उनके
खिलाफ तरह-तरह के षड्यंत्र रचे जा रहे हैं
उनके बारे में सोशल मीडिया पर वाहियात
बातें लिखी जा रही हैं मोर्चा ज तो जब हुआ
तो नेहरू जी से रहा नहीं गया नेहरू जी ने
उस तरफ कुछ कर दिया पंजाब की तरफ उन्हें
भी रोका गया उन्हें गिरफ्तार किया गया
लेकिन नेहरू जी ने खुलकर सिख भाइयों का उस
वक्त समर्थन किया उनके सहयोग में वह खड़े
रहे आज एक ऐसे व्यक्ति प्रधानमंत्री हैं
इस देश के जो मुकाबला तो नेहरू जी से करते
हैं है उनके पांव की धूल के बराबर भी नहीं
लेकिन मुकाबला करने की एक शौक है इनको
नेहरू जी से भी ज्यादा बड़ा इनका नाम हो
वो नाम कमाना पड़ता है उसको कमाने के लिए
बड़ा दिल रखना पड़ता है
ऐसे जिस तरह से आप किसानों को रोक रहे हैं
उनका अपमान कर रहे हैं आपकी आईटी सेल जो
उनके लिए कर रही है इस तरह से आप बड़े
नहीं बन सकते इस तरह से तो आप बने ही दिखो
ग जो हो तो अगर आपको अपने बने पन को कम
करना है खत्म करना है नरू जी के तो आप भूल
जाइए सपना भी मत देखिए कि नेहरू जी का आप
मुकाबला कर पाएंगे लेकिन अपने बौने पन को
अगर आप थोड़ा ठीक करना चाहते हो दुरुस्त
करना चाहते हो तो दिल बड़ा कीजिए किसानों
से मिलिए उनको बदनाम करने की कोशिश मत
कीजिए उन पर कोई कहर मत बर पाइए पुलिस का
उससे कोई लाभ नहीं होगा मिलिए उनसे बात
कीजिए मैं प्रधानमंत्री आपसे एक सवाल
पूछना चाहता हूं आपको कौन रोक रहा है कि
आप इन किसानों को बुलाइए अपने दफ्तर में
अपने घर में और उनसे मुलाकात कीजिए कब तक
आप चीजों को आउट ऑफ कंट्रोल होने देंगे
पिछले किसान आंदोलन में भी 700 किसानों की
मौत हो गई थी 700 एक कम आंकड़ा नहीं है
प्रधानमंत्री 700 किसान और फिर आपने
सत्यपाल मलिक को यह कहा था कि क्या यह
मेरी वजह से मरे प्रधानमंत्री मैं आपको
याद दिलाना चाहूंगा 2014 से पहले एमएसपी
के मुद्दे पर और किसानों के बारे में आपने
खुद ने क्या कहा था आप आज उसी बयान से पलट
गए हैं आपका ये बयान आपके स्क्रीन पर
व्हाई शुड आवर फार्मर्स नॉट गेट द राइट
प्राइस फार्मर्स आर नॉट बेगि दे वर्क
हार्ड फॉर इट एंड शुड गेट गुड प्राइस
हिंदी में इसका अनुवाद बहुत आसान है
दोस्तों प्रधानमंत्री ने 6 अप्रैल 2014
यानी प्रधानमंत्री बनने से पहले कहा था कि
हमारे किसानों को सही कीमत क्यों नहीं मिल
रही हमारे किसान भिखारी नहीं है उन्होंने
मेहनत की है उन्हें सही और उचित दाम मिलना
चाहिए यह आपका बयान
प्रधानमंत्री आज आप अपने उसी बयान से मुकर
रहे हैं आप जानते हैं आज की तारीख में
प्रधानमंत्री जितनी भी कार्रवाई करते हैं
या जो भी उनकी हरकतें होती हैं उनकी हर
हरकत को कांट्रडिक्ट उसके बिल्कुल उलट
उनका इतिहास में दिया गया एक बयान होता है
मैंने फिर आपके सामने उस बात को प्रमाणित
किया बार-बार किया लगातार किया मैं फिर
आपसे कह रहा हूं दोस्तों किसान जो मांग कर
रहे हैं हम उससे इत्तेफाक रखें या ना रखें
सीधा सा सवाल है उन्हें प्रदर्शन करने का
अधिकार है उन्हें अपनी बात रखने का अधिकार
है उन्हें ना तो अपनी बात रखने की इजाजत
दी जा रही है उल्टा उन पर जुल्म किया जा
रहा है और सबसे शॉकिंग बात गोदी मीडिया ने
परम पूजनीय जोशी जी के आदेश के बाद उस खबर
को ही दबा दिया अब आप बताइए दोस्तों जब
किसान इस गोदी मीडिया से नाराज होता है जब
गोदी मीडिया एक एजेंडे के साथ किसान
आंदोलन में रिपोर्टिंग करने जाता है तो
आपने कई मिसाले देखी होंगी जब किसान जो है
उन्हें दौड़ा हैं उनसे नाराज होते हैं
उनकी नाराजगी की वजह को समझिए जब उनके
मालिक इस तरह की कचरा खबरें चलाएंगे तो
उनमें नाराजगी होगी
ना मैं फिर आपसे कह रहा हूं क्या किसान को
अपनी बात कहने का अधिकार तक नहीं
है यह लोकतंत्र है आंदोलन हमारी रीढ रही
है सत्याग्रह हमारी आत्मा रही है जो भारत
की आत्मा बनाता है भारत की रीड बनाता
है आप समझे या नहीं समझे
अभिसार शर्मा को दीजिए इजाजत नमस्कार
स्वतंत्र और आजाद पत्रकारिता का समर्थन
कीजिए सच में मेरा साथी बनिए बहुत आसान है
दोस्तों इस जॉइन बटन को दबाइए और आपके
सामने आएंगे ये तीन विकल्प इनमें से एक
चुनिए और सच के इस सफर में मेरा साथी बनिए

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