कोई नहीं जानता लेकिन आज से ही तुम्हारी किस्मत बदल रही

मेरे प्रिय बच्चे आज तुम्हारे जीवन में एक बहुत महत्त्वपूर्ण दिन होने वाला है आज जो

घटना घटने वाली है तुमने यह कभी अपनी कल्पनाओं में भी सोचा नहीं होगा और आज यही

कारण है कि तुम तक यह दिव्य संदेश पहुंचाया जा रहा है वास्तव में यह दिव्य

संदेश अनंत ब्रह्मांड की गहराइयों से उत्पन्न हुआ है यह मनुष्य की सकारात्मक

ध्वनियों और विचारों के परिणाम स्वरूप एकत्रित होकर उत्पन्न हुआ है जब मनुष्य

जाति अंधकार के गर्भ में डूब रही है ऐसे क्षण में उसे सहारे की नियमित उम्मीद रहती

है तुम जो कि सत्कर्म करते हुए भी अच्छी राह पर चलते हुए भी निराशा की बादलों से

घिरे हुए हो तुम भी निरंतर सहारे की उम्मीद करते हो लेकिन इस क्षणों में भी कभी ऐसा नहीं हुआ कि तुम्हें वह सहारा

प्राप्त हो सके मेरे प्रिय जब मनुष्य अच्छी राह पर चलता है तो उसे ऐसा प्रतीत

होता है कि उसके जीवन में अत्यधिक मात्रा में चुनौतियां आ रही है लेकिन ऐसा कुछ

कारणों से होता है इसके पीछे उसकी विचारधारा उसकी मानसिकता और उसका भय

महत्त्वपूर्ण स्थान रखते हैं इसीलिए आध्यात्मिक मार्ग पर चल रहा व्यक्ति स्वयं

को ज्यादा निराश महसूस करने लगता है लेकिन वास्तव में ऐसा होता नहीं है है वास्तव

में निराशा आध्यात्मिक व्यक्ति को छू भी नहीं सकता मेरे प्रिय तुम तक यह दिव्य

संदेश पहुंचाना ब्रह्मांड की योजना का एक बहुत महत्त्वपूर्ण हिस्सा है और अब जब तुम

तक यह पहुंच रहा है तुम्हें इसे किसी भी परिस्थिति में बीच में नहीं छोड़ना है अंत

तक इसे पूरा सुनना है इसमें उपस्थित संकेत तुम्हारे लिए महत्त्वपूर्ण स्थान रखते हैं

प्रिय बच्चे जब मनुष्य निराशा से घिरा हुआ होता है उसी क्षण में उसे उम्मीद की किरण

भी दिखाई देने लगती है वास्तव में वह पहले से ही वहां मौजूद होती है लेकिन कुछ कारण

होते हैं जिनकी वजह से वह उन्हें स्पष्ट रूप से नहीं दिख पाता लेकिन अब समय आ गया

है कि तुम उन कारणों से मुक्त होकर अपने जीवन की गहराइयों में उतर कर उसे देख सको

और उसे समझ सको मेरे प्रिय बच्चे तुम पर मेरा दिव्य आशीर्वाद बरकरार रहेगा

तुम्हारे जीवन में जो भी मुश्किलें आ रही हैं अब वह समाप्त होंगी क्योंकि मैं अनंत

काल से ही मनुष्य जाति की सेवा करते आई हूं किंतु यह मनुष्य की विचारधारा पर

निर्भर करता है कि वह मुझे किस रूप में देखता है यदि तुम मुझे उस रूप में समझ पाए

जो रा वास्तविक स्वरूप है तो तुम यह जान पाओगे कि मैं कौन हूं और कब मैं तुम्हारे

माता के रूप में तुम्हारा मार्ग दर्शन करती हूं कब तुम्हारे गुरु के रूप में

तुम्हारी उंगलियां पकड़कर तुम्हें आगे ले चलती हूं और कब तुम्हारे मित्र के रूप में

तुम्हारे कंधे पर हाथ रखकर तुम्हें प्रगति की राह पर ले जाती हूं मेरे प्रिय तुम्हें

मेरे महत्व को समझना है मेरे स्वरूप को जानना है और फिर तुम यह जल्द ही पाओगे कि

तुम्हारे जीवन में सब कुछ बहुत तेजी से बदलने लगा है प्रिय बच्चे मेरी बातों को

ध्यानपूर्वक सुनो जो मैं कह रहा हूं यह रहस्य से भरा हुआ संदेश है यह तुम्हारे

लिए बहुत कीमती है इसमें छुपे एक-एक संकेत तुम्हें प्रगति की ओर ले जाएंगे तुम्हें

धन की ओर ले जाएंगे और वास्तव में तुम्हारे जीवन को उस प्रेम से भर देंगे

जिसकी कामना तुमने सदा से ही की है वास्तव में यह तुम्हें परम सच्चाई से अवगत करा

देंगे प्रिय बच्चे समय हो चला है कि तुम अपनी जीत को स्वीकार कर लो और तुम्हारे

राह में उत्पन्न हो रही बाधाओं को समाप्त कर तुम आगे बढ़ चलो जो लोग तुम्हें पीछे

धकेलना चाहते हैं तुम उनका विचार त्याग दो क्योंकि वह कभी भी तुम्हें पीछे नहीं ढकेल

सकते वह कभी भी तुम्हें अपनी ओर नहीं खींच सकते हैं यदि तुम्हारे मन में निराशा

संदेह और भय उत्पन्न ना हो वही मनुष्य पीछे जाता है जिसके मन में निराशा भय

संदेह उत्पन्न हो होने लगता है तुम्हारे लिए मैं विभिन्न आयामों से उत्पन्न हो रही

जीत को खोल कर रख दूंगी तुम्हारे लिए मैं नया सवेरा कर दूंगी ऐसा सवेरा जिसकी तुम

कल्पना नहीं कर रहे हो लेकिन जो तुम्हें केवल और केवल जीत की ओर ही लेकर जाएगा

मेरे प्रिय इस जीत को सहर्ष अपने जीवन में उतर जाने दो इसकी सच्चाई को स्वीकार कर लो

और यह मान लो कि तुम्हें यह जीवन एक विशेष उद्देश्य की पूर्ति के लिए मिला हुआ है

प्रिय बच्चे आगे संदेश में तुम्हारे लिए बहुत ऊर्जा छिपी हुई है बहुत दिव्य संकेत

छिपे हुए हैं इसलिए तुम्हें इसे पूरा सुनना ही है अब जब तुम तक यह पहुंच गया है

तो तुम्हें अपनी जीत की पुष्टि करनी है इसी क्षण संख्या लिखकर अपनी जीत की

पुष्टि कर दो यह दर्शा दो कि तुम जीतने के लिए ही बने हो कोई तुम्हें पीछे नहीं खींच

सकता और फिर मैं तुम्हारे जीवन को अनंत प्रेम से भर दूंगी तुम जिसके लिए छटपटाते

आए हो जिसे खोने से डरते आए हो उसे मैं तुम्हारे इतने करीब कर दूंगी उसके मन में केवल

तुम्हारा विचार उत्पन्न होगा और तुम्हारा जीवन में उन लोगों के साथ पूर्णत खुशियों

से भर दूंगी मैं तुम्हारे जीवन को निराशा के बादलों से हटाकर उम्मीद की उन किरणों

तक ले जाऊंगी जहां दिव्य फूल खिलेगा जहां तुम्हारे सपनों का फूल खिलेगा जहां

तुम्हारी वास्तविकता तुम्हारी कल्पना से भी बेहतर होगी जहां खुशियां ही खुशियां और

बिखरी मिलेंगी जहां तुम्हारी इच्छाएं पूर्ण होंगी जहां कोई तुम्हें निराश ना कर

सकेगा जहां कोई बादल काले नहीं होंगे मेरे प्रिय तुम्हारे लिए यह दिव्य संदेश बहुत

महत्त्वपूर्ण है इसे अपने से दूर ना होने देना इसकी सच्चाई को खोने ना देना यह

तुम्हारे लिए अत्यंत आवश्यक है तुम्हें आगे भी संदेश पुष्टि करनी होगी इसलिए

स्वयं को तैयार रखना और जो चुनौतियां आने वाली हैं उनसे बिल्कुल भी मत घबराना

चुनौतियां मनुष्य को तोड़ने के लिए नहीं होती बल्कि उसे अंदर से इतना मजबूत बना

देने के लिए होती हैं कि यदि उसके सामने कोई मुश्किल भी आ जाए तो वह घबराए नहीं वह

विपत्ति में ना आ जाए और घबराहट में कहीं अपने लिए गड्ढे ना खोद ले स्वयं का बुरा

ना कर डाले जो मनुष्य विपत्तियों में नहीं घबराता भयभीत नहीं होता बिना डर बिना

संदेह के बस अपने कर्म करता है उसे ऊपर उठाने का दायित्व मेरा हो जाता है फिर मैं

उसे कभी भी झुकने नहीं देता फिर मैं उसे कभी भी गिरने नहीं देता तुम जो अनंत

ऊंचाइयों को छूने वाले हो तुम्हें भी अब घबराना नहीं है तुम्हें भी डरना नहीं है

तुम्हारे सामने जो आने वाला है यह तुम्हारी नियति का हिस्सा है लेकिन यह अब

जब तुम्हारे सामने आएगा तो तुम विचलित नहीं होगे तुम डरो ग नहीं और फिर जब तुम

उस अंधेरे से बाहर निकलोगे तो चारों तरफ रोशनी रोशनी होगी चारों तरफ खुशहाली होगी

और तुम्हारा जीवन समृद्धि से भर चुका होगा धन इतनी ज्यादा मात्रा में होगा जिसका तुम

विचार भी नहीं कर सकते अब यह उन्नति का समय है अब यह प्रगति का समय है इस प्रगति

को स्वीकार करो और आगे बढ़ते चलो मेरे प्रिय बच्चे क्या तुम्हें पता है कि अब तक

इस जन्म में तुम्हें इतना संघर्ष आखिर क्यों करना पड़ा है छोटी से छोटी चीज के

लिए भी तुम्हें अपने जीवन में तरसना पड़ा है जो घबराहट तुम्हारे मन में उत्पन्न हुई

है जो चीजें दूसरे मनुष्यों के लिए प्राप्त करना साधारण सी बात रही है कई बार

उसे प्राप्त करने में भी तुम्हें लोहा लेना पड़ा है संघर्षों की सीढ़ियां चढ़ने

पड़ी है आखिर ऐसा क्या है जिसकी वजह से तुम्हारे जीवन में समस्या बनी रही कभी धन

की कभी प्रेम की कभी सामाजिकता की कभी महत्वाकांक्षा की हर तरफ से कोई ना कोई

समस्या आती ही गई कई बार इतनी जिम्मेदारियां आ गई कि तुम उसके बोझ तले

चले गए धन तुम्हा पास कब आया और कहां चला गया तुम यह तक समझ नहीं पाए लेकिन आज

तुम्हारी सभी समस्याओं को मैं दूर करूंगी और इसलिए तुम्हें संदेश को पूरा सुनना है

किसी भी परिस्थिति में तुम्हें इसे बीच में छोड़कर नहीं जाना है तुम दूसरों के

अपेक्षा कम उम्र में ही जिम्मेदारियों को उठाना सीख गए थे धीरे-धीरे संघर्ष ऐसा हुआ

कि तुम्हारे जीवन का एक अभिन्न हिस्सा बनता चला गया यदि तुम्हें आज यह संदेश

मिला है तो इसके पीछे एक बहुत बड़ा कारण छुपा हुआ है और यही वजह है कि मैं चाहती

हूं कि तुम इस संदेश को पूरा सुनो ताकि तुम अपने संघर्षों से निजात पा सको ताकि

तुम जीवन का लाभ उठा सको ताकि तुम आनंद को समझ सको तुम्हारे लिए मैं सफलता के रहस्य

भी अवश्य बताऊंगी इतना ही नहीं तुम्हारे मार्ग को मैं इतना सुनियोजित कर दूंगी कि

तुम्हारी सभी समस्याएं एक-एक करके स्वतः ही समाप्त हो जाएंगी जिस तरह से मनुष्य

प्रतिदिन आगे बढ़ता है अपने जीवन को जीता है उस तरह से तुम्हारे जीवन में चीजें सही

नहीं चल रही है लेकिन अब उसके सही होने का समय आ चुका है अब वह समय चला गया जब तुम

मुश्किलों में अपनी रातें गुजारा करते थे जब तुम्हें समझ नहीं आ रहा था कि तुम्हारे

साथ क्या होगा आखिर तुम्हारे साथ यह सब क्यों हो रहा है अब वह दिन जा चुके हैं अब

संघर्षों के दिन जा रहे हैं अब तुम्हारे लिए प्रसन्नता से भरे खुशियों के दिन

प्रेम से भरे रोमांचकारी दिन आ रहे हैं इस जन्म से पहले पिछले कई जन्मों में भी तुम

ऐसे ही संघर्षों से जूझते आए हो तुम अपने शरीर को कभी प्रेम नहीं दे पाए तुम कभी

अपनी मूल धारणा को समझ नहीं पाए ब्रह्मांड ने तुम्हें आवश्यक ज्ञान और पर्याप्त

संसाधन दिए हैं लेकिन उसका प्रयोग कैसे करना है उसका तुम्हारे जीवन में उपयोग

कैसे करना है तुम यह नहीं समझ पाए कई बार तुम्हें आवश्यकता से अधिक ही प्रदान किया

गया लेकिन वह सब इतना अस्तव्यस्त रहा कि तुम उसे कभी एक क्रम में बिठा ही ना सके

तुम कभी उसे एक क्रम में समझ ही नहीं पाए कभी तुम उसके मूल्य को नहीं समझ पाए और

अपने आप को कोसते रह गए तुम कुएं के उस मेंढक की भाति हो गए जिसे वह कुआ ही सागर

लगने लगा जिसे लगा कि इसके आगे कोई दुनिया ही नहीं है जिसे अपनी क्षमताओं पर संदेह

हुआ जिसे अपने काबिलियत पर संदेह हुआ जिसे लगता कि उसके पास कोई काबिलियत ही नहीं है

लेकिन तुम में काबिलियत कूटकूट के भरी है केवल आवश्यकता है तो ऐसे गुरु की जो उस

काबिलियत को समझकर व्यवस्थित रूप से सुनियोजित ढंग से क्रमबद्ध कर सके ताकि

तुम अपने जीवन भर के अनुभव और ज्ञान का सदुपयोग कर पाओ जितना अनुभव तुम्हें मिला

है वह अनुभव तुम्हारे जीवन के लिए पर्याप्त है अभी तुम दूसरों से अपेक्षाकृत

ज्यादा ही अनुभव हो क्योंकि तुमने ज्यादा जिम्मे दारिया उठाई है तुम्हें इसका आभास

नहीं किंतु तुम एक बेहद ही जिम्मेदार व्यक्तित्व के स्वामी हो तुम दूसरों की

पीड़ा भी समझते हो तुम दूसरों के चालबाजी को भी कई बार समझ जाते हो और यही वजह है

कि तुम में नेतृत्व करने की क्षमता विद्यमान है जिसका भी तुम्हें पूर्णता आभास नहीं है और इसका कारण यह है कि आत्म

संशय आत्म संदेह आत्मविश्वास की कमी होना जो तुम्हारे भीतर है तुम उस बास के बच्चे

की तरह हो जो मुर्गों के झुंड में पला बढ़ा है जिसे अपनी काबिलियत का ज्ञान नहीं

जिसे यह ज्ञान नहीं कि वह कितनी ऊंचाई तक उड़ सकता है वह अपने आप को मुर्गों की

भाति समझकर समस्याओं से बचता रहता है दूसरे बाजों को देखकर छुपता रहता है किंतु

उसे जिस दिन यह ज्ञान हो गया कि वह स्वयं भी बा समान है वह स्वयं भी बहुत ऊंची

उड़ान उड़ सकता है वह स्वयं भी इतना ताकतवर है कि वह जिसे चाहे अपना शिकार बना

सकता है जिस दिन वह समझ गया कि उसमें इतना आत्म बल है कि वह स्वयं को हानि पहुंचाकर

भी स्वयं की प्रगति कर सकता है उस दिन तुम्हें स्वयं पर नाज होगा तुम दूसरों की

सहायता का महत्व समझ गए हो लेकिन उसका उपयोग कैसे करना है कहां करना है यह नहीं

समझ पाए हो किसकी सहायता करनी है किसकी नहीं करनी है यह नहीं समझ पाए हो और यही

वजह है कि कई बार लोग तुमसे लाभ भी उठाते हैं और तुम उनके लाभ को समझकर भी उन्हें

जवाब नहीं दे पाते कई बार तुम उनके लाभ को समझ नहीं पाते लेकिन ज्यादातर समय ऐसा

होता है कि तुम उनके इरादों को स्पष्ट रूप से समझ जाते हो लेकिन खुद पर ही संशय

उत्पन्न करते हो और झिझक बस तुम अपनी सभी बातें स्पष्टता रख नहीं पाते हो तुम

प्रसन्नता के भाव में बहुत सी बातें बोल जाते हो लेकिन जब तुम में दुख उत्पन्न

होता है तो तुम अपनी बातों को स्पष्ट रूप से कह नहीं पाते खासकर उन लोगों के सम

जिनको तुमने जरूरत से ज्यादा आदर और सम्मान दे दिया है जबकि वह इसके लायक नहीं

थे मेरे प्रिय तुम्हें आत्म शिक्षा की आवश्यकता है वह शिक्षा नहीं वह विद्या

नहीं जो संसार ने समाज ने तुम्हें दी है बल्कि वह विद्या जो तुम में स्वयं से ही

विराजमान है वह विद्या जो तुम्हारे जन्म के साथ ही तुम्हें मिल गई थी तुम्हें अपने

भीतर झांकना है जब कोई चीज मनुष्य से दूर होती है तब मनुष्य के मन में उसके प्रति

चाहत उसके प्रति वासना उत्पन्न होती है लेकिन जब वह चीज उसे प्राप्त हो जाती है

तब वह उसके महत्व को भूल जाता है ऐसी ही बहुत सी चीजें जो उसे प्राप्त है किंतु

उसे उसका ज्ञान नहीं है वह उसके भी महत्व को समझ नहीं पाता है तुम जो ढूंढ रहे हो

वह तुम्हारे अलावा संसार में कहीं मौजूद नहीं है जिसे तुम बाहर ढूंढ रहे हो वास्तव

में वह तुम्हारे भीतर ही मौजूद है उसे ढूंढने का प्रयत्न करो अपने पिछले कई

जन्मों में तुमने जितना धन अर्जित किया था इस जन्म में तुम्हें उससे ज्यादा ही

प्राप्त होगा इतना ज्यादा कि अभी तुम उसकी कल्पना नहीं कर सकते लेकिन तुम्हें अपने

आत्मविश्वास को बढ़ाना होगा मैं तुम्हारे लिए सभी मार्ग को खोल दूंगी सारे रास्ते

प्रशस्त कर दूंगी रास्तों पर मैं फूल भी बिछा दूंगी लेकिन अपने कदम तो तुम्हें बढ़ाना ही पड़ेंगे एक कदम आगे रखना पड़ेगा

और हर एक कदम के साथ एक और कदम तुम्हें आगे रखना पड़ेगा और तब तुम अपने उस मंजिल

तक आ जाओगे जिस मंजिल को तुम बहुत पहले से जाना चाहते थे एक बार अपने भीतर झांक लो

अपने भूत में नहीं अपने भविष्य में नहीं बल्कि अभी इसी वर्तमान में तुम वह प्राप्त

करोगे जो तुम्हारी कल्पना से भी परे हैं ऐसी मानसिक शांति जो कभी समाप्त ना हो

आनंद से भर देने वाला ऐसा दिन जो कभी समाप्त ना हो खुशियों की ऐसी बरसात जो सदा

बरसती ही रहे एक ऐसा मौसम एक ऐसी ऋतु जिसमें प्रसन्नता के ही बादल छाए हो जो

कभी परिवर्तित ना हो जब तुम यह समझ जाओगे कि जीवन उस सिक्के की भाति है जिसके एक

पहलू पर सकारात्मकता और दूसरे पहलू पर नकारात्मकता है तो तुम जीवन को गंभीरता से

लेने के बजाय उसके आनंद में डूब जाओगे जब तुम यह जान जाओगे कि सुख और दुख क्षण भर

की बातें हैं वास्तविक खुशी तो परमानंद में ही है वास्तविक खुशी तो उस परमानंद

में है जिसे तुमसे कोई छीन नहीं सकता ना जाति ना देश ना काल ना समय ना कोई मनुष्य

ना कोई ही जीव जंतु ना कोई आत्मा ना ही कोई शैतान जिसे तुमसे कोई छीन नहीं सकता

जो तुम्हारे मन में बसा ही हुआ है उसे तुमसे अलग नहीं किया जा सकता ना जन्म उसे

अलग कर सकता है ना मृत्यु उसे अलग कर सकती है यह वह है जो सदा से तुम्हारे भीतर है

और मैंने तुम्हें बताया जो चीज पहले से ही प्राप्त होती है मनुष्य का उसके प्र वासना

समाप्त हो जाता है जब तक प्रेमी मिला नहीं होता वह उसी प्रेम के लिए छटपटा आता रहता

है दिन रात संगीत सुनता है दिन रात स्वयं को दुख में डालता है विभिन्न प्रकार की

कल्पनाएं बुनता है वह उससे कैसे बात करेगा वह अपनी बात उसके सामने स्पष्ट रूप से

कैसे कहेगा यदि वह उसे प्राप्त हो जाए तो उसके साथ अपना जीवन कैसे व्यतीत करेगा इस

तरह की कोरी कल्पनाएं वह बुनता रहता है लेकिन जिस दिन उसे वह प्रेमी प्राप्त हो

जाता है जिस दिन वही उसका साथी बन जाता है वह धीरे-धीरे करके उसके महत्व को भूलने

लगता है उसका उससे मोह रह जाता है लगाव रह जाता है लेकिन प्रेम कहीं ना कहीं क्षीण

होने लगता है वास्तव में प्रेम कभी समाप्त हो ही नहीं सकता लेकिन जब उसमें कमी आने

लगे तो तुम्हें तत्काल यह समझ जाना चाहिए कि प्रेम का रूप धारण करके तुम्हारे मन

में बसा हुआ यह शत्रु तुम्हारा मोह है एक ऐसा लगाव जिससे तु छूट नहीं पा रहे बंधन

का लगाव जिसे तुम निकलना तो चाहते हो लेकिन तुम निकल नहीं पा रहे हो मेरे प्रिय

बच्चे जो मैं कह रहा हूं उसकी गंभीरता में जाओ जो मैं तुम्हें बताना चाहता हूं उसके

रहस्य को समझो केवल तभी तुम जान पाओगे कि वास्तविक रूप से तुम कौन हो वास्तविक रूप

से तुम्हें क्या चाहिए वास्तविकता में तुम्हें यह जन्म क्यों मिला है वास्तविकता

में तुम्हें प्रकृति में इतनी शांति का अनुभव क्यों होता है आखिर क्यों तुम कभी-कभी अकेलेपन में डूब जाते हो तो कभी

लोगों के साथ समज होने को भाव विभोर हो जाते हो कभी तुम्हें एकांत पसंद आता है तो

कभी वही एकांत तुम्हें काट खाने दौड़ता है अपने भीतर चल रहे

प्रतिद्वंदी और तब तुम्हारे ऊपर ऐसा प्रकाश बरसेगा जो रंगों से युक्त होगा जो

प्रसन्नता से युक्त होगा जो ऊर्जा से भरा होगा जो भंडार होगा जो स्तंभ होगा जो

केंद्र होगा तुम उसे प्राप्त कर लोगे तुम अपने भीतर चल रही विडंबना को समझ जाओगे

तुम उस दुविधा से पार पा जाओगे क्योंकि तब तुम्हारे पास में रहूंगा तब तुम्हारे पास

परमात्मा होगा तब तुम ही परमात्मा होगे तब तुम ही सूत्रधार होगे तुम ही कर्णधार होगे

तुम ही सृष्टा होगे तुम ही पालन करता होगे वास्तविक रूप में तुम ही संघार भी होगे सब

कुछ तुम्हारे ही हाथों में है बस देर है तो नजरिए की वह नजरिया जो अभी तुम विकसित

नहीं कर पा रहे हो वह न जिसके विकास की तुम्हें आवश्यकता है तुम यह समझ जाओगे कि

समस्त ब्रह्मांड में जितने भी पदार्थ उपस्थित है जितने भी तत्व उपस्थित हैं

जितने भी कण उपस्थित हैं वह तुमसे ही है वह तुमसे भिन्न नहीं है वो ऊर्जा जो एक

टूटते हुए तारे में विद्यमान है वो ऊर्जा जो एक मरते हुए सितारे में विद्यमान है वो

ऊर्जा जो सूरज की लौ में है वही ऊर्जा जो चांद को रोशन कर रही है वो ऊर्जा जो धरती

पर जीवन को बनाए रखी है वो ऊर्जा जो लाखों करोड़ों वर्ष पहले जो लाखों करोड़ों वर्ष

दूर किसी पिंड में विद्यमान है वही ऊर्जा तुम में भी है तुम किसी दूर बैठे सितारे

की ऊर्जा से अलग नहीं हो तुम और वह तुम और मैं हम सब अलग नहीं है जब तुम भेद को समझ

जाओगे उसके बाद तुम में प्रश्न नहीं बचेंगे लेकिन इसे समझने के लिए तुम्हें

अपने भीतर झांकना होगा मेरे प्रिय बच्चे तुम उसे ढूंढो जो एक है तुम उसे समझने का

प्रयत्न करो जो कहीं और नहीं है तुम में ही है किसी जल में यदि नमक के एक पूरे के

पूरे भंडार को डाल दिया जाए तो क्या उससे नमक को पुनः अलग कर पाना संभव है ऐसा संभव

नहीं क्योंकि वह उसी में घुल जाता है तुम्हारे भी जीवन में जो कुछ भी हो रहा है

वह तुम में ही घुल जाता है वह तुमसे अलग नहीं होता चाहे क्रोध हो चाहे प्रेम हो

चाहे कोई मनुष्य हो चाहे हीन भावना हो चाहे श्रेष्ठता का भाव हो चाहे कोई विदु

की बात हो चाहे मरता की बात हो वह सब कुछ तुम ही हो तुम उसी सबसे तो बन रहे हो तुम

निरंतर निर्मित हो रहे हो भोजन के हर उस एक अंश से जो तुम्हारे भीतर जा रहा है तुम

उससे निर्मित हो रहे हो सूर्य के हर उस प्रकाश के कण से जो तुम्हारे भीतर जा रहा

है तुम उससे निर्मित हो वह वायु जो तुम अपने भीतर ले रहे हो तुम उससे निर्मित हो

वह वायु जो तुम इस संसार में छोड़ रहे हो तुम उससे निर्मित हो वह सब कुछ जो

तुम्हारे आसपास है वही तो तुम्हारा संसार है तुम्हें अपने संसार को समझना है

तुम्हें समझना है कि तुम्हारे जीवन में तुम्हारे संसार में क्या महत्त्वपूर्ण है

दूर किसी देश काल में क्या घटना घट रही है यदि तुम उस पर अपना समय व्यर्थ करोगे उसका

तुम्हें कोई लाभ नहीं होगा ना तुम्हारे आध्यात्मिक जगत में ना तुम्हारे सामाजिक

जगत में ना इस लोक में ना उस लोक में इसलिए व्यर्थ के समाचार की खबरों को अपने

भीतर ना जाने दो यदि वह आ भी जाए तो एक पहरेदार की भाति उन्हें द्वार पर ही रोक

दो यदि अनावश्यक बातें तुम्हारे भीतर जाएंगी तो तुम्हारे मन में अनावश्यक चीजें

ही चलेंगी वह अनावश्यक चीजें जिनका तुम्हारे लिए कोई महत्व नहीं है जो

तुम्हारे लिए पूर्णता महत्वहीन है तुम उन्हें अपने भीतर ना पनपने दो मेरे प्रिय

बच्चे अपने भीतर केवल और केवल विद्वता लाओ अपने तर अनावश्यक बातों को छोड़कर अपने

संसार को समझो और केवल उससे जुड़ी चीजें ही प्रवेश करने दो तुम्हारे लिए क्या

महत्त्वपूर्ण है परिवार का वह कौन सा सदस्य है जो तुम्हारे लिए महत्त्वपूर्ण है

तुम्हारा प्रेम तुम्हारे लिए कितना महत्त्वपूर्ण है लगाव की सीमा से दूर पकड़ने छोड़ने के झंझट से दूर वह क्या है

जिससे तुम्हें सच्चा प्रेम है तुम कुछ बनना चाहते हो तुम कुछ करना चाहते हो यह

भाव त्याग कर एक बार यह समझ लो कि इस जीवन में इस संसार में तुम्हारा जीवन काल सीमित

है जिसका तुम्हें ज्ञान भी नहीं है इस सीमित जीवन काल में यह बनना यह करना इस

तरह के भाव का त्याग कर इस जीवन को जीना कैसे है इस पर विचार करो मनुष्य सोचता है

कि मृत्यु एक मात्र सत्य है वास्तविकता में इस संसार में कोई भी चीज कभी मरती ही

नहीं मृत्यु सत्य नहीं है मृत्यु यथार्थ नहीं है मृत्यु समझ का एक धोखा है मृत्यु

ना समझी है मृत्यु स्वयं को कमजोर मान बैठना है मृत्यु एक बेहद कीी से ज्यादा

कुछ भी नहीं है वास्तविकता में इस संसार में कुछ भी सच्चाई है तो वह है जीवन जीवन

यथावत सत्य है जीवन है संसार के चलने का नाम जब कुछ नहीं था तब भी यह संसार था जब

कुछ नहीं रहेगा तब भी यह संसार रहेगा आज तुम हो कल तुम ना रहो यह संसार सदा ही

रहेगा वास्तविकता में अंधकार का इस संसार में कोई स्थान ही नहीं है अंधकार तो बस

इतना है कि जहां प्रकाश ना हो वहां अंधकार हो जाता है प्रकाश की अनुपस्थिति अंधकार

है वास्तव में अंधकार का अपना कोई अस्तित्व नहीं है और यह संपूर्ण संसार

प्रकाशमान है यह संपूर्ण संसार प्रकाश का एक पूरा पिटारा है किंतु इसे प्रकाश मिलता

कहां से है इसका वह प्रकाश स्तंभ वह केंद्र बिंदु कौन है तुम्हारे संसार का

प्रकाश स्तंभ तुम हो तुम वह केंद्र हो जो तुम्हारे संसार को प्रकाश दे रहे हो तुम्हें इस बात को समझना है इसकी गहराई को

समझना है तुम किसे महत्व दे रहे हो तुम किसे महत्व नहीं दे रहे हो किसका विचार कर

रहे हो किसका विचार नहीं कर रहे हो इसका मूल्यांकन करना है जिस भी चीज के बारे में

तुम ज्यादा सोचोगे फिर चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक फिर चाहे वह घटा हो या ना

घटा हो यदि तुम उसका निरंतर विचार कर रहे हो तो वह तुम्हारे संसार में बढ़ ही जाएगा

मेरी बात को ध्यान पूर्वक सुनना मैं तुम्हारे संसार की बात कर रहा हूं वह

संसार जो तुम निर्मित कर रहे हो वह संसार जिसके प्रकाश के केंद्र बिंदु तुम हो तुम

इस संसार में जिसे महत्व दोगे वह अपने आप ही बढ़ता चला जाएगा यह इस प्रकृति का नियम

है यही धारणा है और यही सच्चाई है और जो चीज तुम्हारे लिए आवश्यक है लेकिन तुम उस

पर विचार नहीं करते वह स्वतः ही घटती चली जाएगी इसलिए तुम्हें पूर्णता निर्णय लेना

है कि तुम्हारे लिए क्या सही है और क्या गलत तुम्हें निर्णायक होना होगा फिर यदि

तुम्हारे लिए फैसले गलत भी साबित होते हैं तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता मैं तुम्हारे

फैसलों को सही साबित कर दूंगा जब तुम प्रयास करोगे तो मैं आगे आऊंगा मैं तुम

में ही तो हूं मुझे अलग जानने की भूल ना करना मुझे अलग देखने की भूल ना करना मैं

तुम्हारा विवेक हूं मैं तुम्हारी चैतन्य अवस्था हूं मैं वह हूं जो तुम्हें बचाता

है जब तुम्हारे पास कोई चीज आती है तुम्हारी आंखें स्वतः ही ढक जाती हैं

तुम्हारी पलके तुम्हारी आंखों का बचाव करती हैं वह बचाव मैं हूं उन सभी

उत्कृष्टता में जब तुम में प्रेम जन्मा उन सभी उत्कृष्टता में जब तुम में आगे बढ़ने

की ललक आई वहां मैं ही था और मैं ही रहूंगा मैं ही यथार्थ हूं मैं तुमसे अलग

नहीं हूं इसकी गहराई में उतरना ऊपर सथी छिछली बातों पर मत जाना लोग क्या कहते हैं

लोग क्या कहेंगे इसका विचार ना करना वह लोग तुम्हारे द्वारा निर्मित तुम्हारे इस

संसार में जन्म लेते हैं मेरे प्रिय अपने आप को उन विचारों उन धारणाओं उन मान्यताओं

से ऊपर रखना जो तुम्हें नुकसान पहुंचाते हैं फिर चाहे वह विचार वह धारणा तुम्हें

परमात्मा का भय दिखाकर ही क्यों ना तुम्हारे भीतर भरा गया हो फिर चाहे वह समाज ने दिया हो तुम्हारे माता-पिता ने

दिया हो तुम्हारे बुजुर्गों ने दिया हो इस समाज के वि जानकार विभिन्न गुरुओं ने

क्यों ना दिया हो जो तुम्हारे राह में बाधक बन रहा है जो तुम्हें परम आनंद तक

पहुंचने से रोक रहा है उन सभी धारणाओं का तिरस्कार कर देना बहिष्कार कर देना और

पूर्णता अपने मन बुद्धि बल का प्रयोग कर यह सोचना कि ऐसा क्या है इस संसार में जो

तुम्हारे लिए उपयोगी है मैं तुम्हें बताना चाहता हूं कि संसार में कुछ भी अनुपयोगी

नहीं है सब कुछ मुझ द्वारा ही निर्मित है सब कुछ मुझसे ही निर्मित है सब कुछ मेरे

ही द्वारा जन्मा है जब सब परमात्मा ने ही जन्मा है फिर चाहे वह क्रोध हो ईर्षा हो

द्वेष हो प्रेम हो राग हो या फिर कोई बुरा शब्द ही क्यों ना हो कोई बुरा कृत ही

क्यों ना हो यह सब कुछ मैंने ही उत्पन्न किया है जब यह सब कुछ परमात्मा ने ही

उत्पन्न किया है तो इसमें से कुछ भी बुरा नहीं है किंतु किसका प्रयोग कहां करना है

यह महत्त्वपूर्ण है और तुम्हें देखना है कि तुम्हारे संसार के लिए क्या महत्त्वपूर्ण है तुम्हें देखना है कि ऐसा

क्या है जो तुम्हारे संसार को बेहतर बनाएगा और ऐसा क्या है जो तुम्हारे संसार

का सर्वनाश कर डालेगा ऐसा क्या है जो तुम्हारे कर्मों का सटीक सही उचित परिणाम

देगा और ऐसा क्या है जो तुम्हारे कर्मों का अनुचित बुरा परिणाम देगा जो तुम्हें

रुचिक ना लगे जो तुम्हें सही ना लगे तत्क्षण उसका त्याग कर देना और जो तुम्हें

तार्किक सही वास्तविक लगे केवल उसे ही अपनाना बाकी यह संसार तुमसे कुछ भी कहता

रहे उस पर अनावश्यक ध्यान मत देना मेरे प्रिय बच्चे गहराई में उतरो जीत को

आकर्षित करो तुम इतने करीब हो इतने करीब कि बस एक कदम की दूरी है उसके बाद समस्त

संसार तुम्हारे चरणों में होगा लेकिन उसके पहले तुम्हें झांकना होगा अपने भीतर देखना

होगा कि तुम्हारे लिए क्या वास्तविकता आवश्यक है तुम्हारे लिए कौन सा प्रेम

महत्त्वपूर्ण है तुम्हारे जीवन में तुम्हें किस प्रकार के सुकून की तलाश है

कोई सदैव धन के ही पीछे भागता है और धन को ही प्राप्त नहीं कर पाता कोई धन का विचार

छोड़कर कौशल के पीछे भागता है और धन को प्राप्त कर लेता है कोई कौशल का विचार

छोड़कर परोपकार की बातें सोचता है और सुकून को प्राप्त कर लेता है कोई सुकून का

विचार कर परमात्मा के बारे में सोचता है और शांति को पा जाता है कोई शांति का

त्याग कर जीवन के महत्व को समझ जाता है और परम आनंद को प्राप्त हो जाता है और जो परम

आनंद को प्राप्त हो जाता है उसे फिर धन भी प्राप्त होता है उसे फिर यश भी प्राप्त

होता है उसे फिर वह सब कुछ प्राप्त होता है जो उसके विचारों ने छोड़ दिया था वह सब

कुछ प्राप्त होता है जो इस संसार में प्राप्त होने योग्य है वह कौशल अ कौशल इन

सबसे ऊपर उठ जाता है वह सुख शांति प्रेम तिरस्कार निंदा मोह लगाव धारणा मान्यता इन

सब चीजों से ऊपर उठ जाता है उसके भीतर फिर कुछ शेष क जाता है तो केवल परमात्मा और

केवल परमात्मा तुम उसी राह पर हो तुम उसी मार्ग पर हो और इस मार्ग पर अब तुम्हें

जीतने से कोई रोक नहीं सकता संसार की चाहे कोई भी ताकत आ जाए चाहे वह ताकत मायावी हो

चाहे वह ताकत देवीय हो चाहे वह लौकिक हो चाहे वह पारलौकिक हो चाहे तुम्हारे

पूर्वजों की हो चाहे किसी देवदूत की हो चाहे किसी देवता की हो चाहे किसी दानव की

हो चाहे राक्षस की हो चाहे शत्रु की हो चाहे मित्र की हो चाहे गुरु की हो दुनिया

की कोई भी ताकत अब तुम्हें रोक नहीं सकती केवल तुम्हारा समर्थन कर सकती है और जो

ताकत तुम्हारा समर्थन नहीं करती मैं उसे तुम्हारे मार्ग से ही हटा दूंगा मैं उसका

वजूद ही समाप्त कर दूंगा क्योंकि तुम मुझे प्रिय हो क्योंकि तुम सत्य को जानने के

उत्सुक हो क्योंकि तुम इस मार्ग पर आगे बढ़ना चाहते हो और जो सत्य को जानने का

इच्छुक हो जाता है मैं उसे सत्य से परि चित अवश्य ही करा देता हूं मैं उसे सत्य

तक पहुंचा ही देता हूं फिर वह उस बौद्ध पुरुष के समान हो जाता है जिसे ज्ञान

अज्ञान से कोई फर्क नहीं पड़ता जिसके पास वह सब कुछ आ जाता है जो उसके पास हो जाना

चाहिए था तुम भी उसी मार्ग पर हो तुम भी वैभव के मार्ग पर हो प्रसन्नता आनंद के

मार्ग पर हो तुम्हें अपने भीतर झांकना है और तुम्हें जो कमी स्पष्ट रूप से तुम्हारे

भीतर नजर आ रही है उसे समाप्त करने का विचार करना है अपने आप पर नियंत्रण रखना

है जीत को सदैव आकर्षित करते रहना है अपने बारे में ना कभी बुरा बोलना है ना ही कभी

बुरा सोचना है कोई तुम्हें हरा नहीं सकता तुम्हारी मुश्किलों को कोई बढ़ा नहीं सकता

केवल तुम हो जो अपनी मुश्किल बढ़ा सकते हो इसलिए उसका विचार ना करो अपनी मुश्किलों

का त्याग कर दो मेरे प्रिय अपने जीत की पुष्टि करो संख्या लिखकर अपनी जीत की

पुष्टि करो यह आवश्यक है तुम जितना ज्यादा अपनी जीत की पुष्टि करोगे तुम उतना ही

ज्यादा अपनी जीत के करीब आ जाओगे तुम्हारा अपनी जीत के पास पहुंचना अत्यंत आवश्यक है

इसलिए पुष्टि करो अपने जीत की अभी इसी क्षण संख्या लिखकर यह लिखो कि मैं

जीत को प्राप्त करने के उत्सुक हूं मैं जीत को अपनाना चाहता हूं जीत मेरी सच्चाई

है जीत ही मेरा परम मित्र है धन मेरा साथी है धन मुझे सहजता प्रदान करने के लिए मुझे

मिलता रहता है धन मेरा वास्तविक साथी है मेरे जीवन में मेरे भाग्य में हर तरफ से

केवल और केवल जीत लिखी है मेरे प्रिय ऐसा विचार करो ऐसी बातें लिखो यह करना

तुम्हारे लिए आवश्यक है तुम प्रगति के मार्ग पर हो वास्तविक मार्ग पर हो और इस

मार्ग पर कोई तुम्हारा साथ दे या ना दे कोई तुम्हारे साथ खड़ा रहे या ना खड़ा रहे

चाहे तुम्हारे परिवार का सदस्य हो चाहे तुम्हारा मित्र हो चाहे तुम्हारा साथी हो

चाहे प्रेम हो चाहे शत्रु हो कोई तुम्हारे आसपास हो ना हो कोई तुम्हारे साथ हो ना हो

मैं सदैव तुम्हारे साथ रहूंगा मेरी ऊर्जा शक्ति सदैव तुम्हारे साथ रहेगी तुम्हारा

मार्ग दर्शन करती रहेंगी मेरे प्रिय मेरा आशीर्वाद स्वीकार करो जीत का आशीर्वाद

स्वीकार करो परमात्मा का आशीर्वाद स्वीकार करो तुम्हारी जीत तय हो चुकी है सदा सुखी

रहो मेरे आने वाले संदेशों की प्रतीक्षा में रहना मैं अवश्य आऊंगा तुम्हारा हाथ

पकड़कर तुम्हें जीत के मार्ग पर आगे ले जाने के लिए हमेशा खुश रहो खुशियां बांटो

तुम्हारा कल्याण होगा

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