क्या सवारी वाले व्यक्ति अंतिम संस्कार कर सकते है | पैर छू सकते है | व अन्य जानकारी ..

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मित्रों मेरे पास बहुत सारे ऐसे प्रश्न है
जिनका में उत्तर नहीं दे पाती तो उसके लिए

मैं आपके प्रश्नों के उत्तर लेकर आई हूं
यह प्रश्न ऐसे हैं कि यह सभी व्यक्तियों
के लिए लाभकारी सिद्ध होंगे साथ ही यह
सामान्य प्रश्न है जो बहुत से लोगों के
होते हैं तो सबको अलग-अलग रिप्लाई देने के

बजाय मैं आपको केवल इस वीडियो के माध्यम
से रिप्लाई देती हंसी तो उसमें जो मैं
पहला प्रश्न ले रही हूं वह प्रश्न है दीपक
पाठक जी का इन्होंने मुझसे पूछा है जिन
लोगों के ऊपर सवारी आती है क्या व्यक्ति
मुर्दा जला सकते हैं

जो पहली बात तो यह दीपक जी कि कोई भी
व्यक्ति मुर्दा जलाता नहीं है मुद्दा या
कोई भी जो अनुसार होता है मृत शरीर होता
है उसको मृत शरीर बोलते हैं और उसका अंतिम
संस्कार किया जाता है

है तो ऐसी परिस्थिति में जिन व्यक्तियों
पर सवारी आती है क्या वह अंतिम संस्कार कर
सकते हैं देखिए जिन व्यक्तियों पर किसी भी
प्रकार की सवारी आती है वह सभी कार्य कर
सकते हैं कोई भी ऐसा कार्य नहीं है जिसे

वह नहीं कर सकते क्योंकि आपको यह मानव
जीवन और मानव जीवन में व्यक्ति को अपने
उत्तरदायित्व पूरे करने पड़ते हैं तो यह
उसका कर्तव्य होता क्योंकि आपको जो है वह
अपने कर्तव्य की पूर्ति के लिए ही तो आप

अंतिम संस्कार कर सकते हैं
है अगला प्रश्न है जतिन योगी जी का
इन्होंने पूछा है जिन लोगों में सवारी आती
है उन लोगों को किसी दूसरे व्यक्ति के चरण
स्पर्श करने चाहिए या नहीं मेरा
मार्गदर्शन करें अ

कि जिन व्यक्तियों को सवारी आती है वह
अनोखे उपयोग कर लेते हैं उनके अंदर ऊर्जा
का वास होता है तो वह सब कि सम्मान जनक
व्यक्ति हो जाते हैं उनका सम्मान करते हैं
इसी कारण से क्योंकि उनकी तपस्या साधना

भगवती स्वीकार करती हैं या देवी-देवता
स्वीकार करते हैं तो वह वाकई इस दुनिया से
अलग हो जाते हैं विलय हो जाते हैं लेकिन
क्योंकि उन्होंने मानव-जीवन प्राप्त किया
है मनुष्य धारण की है तो ऐसी परिस्थिति

में वह अपने माता-पिता के गुरुजनों के चरण
छू सकते हैं लेकिन हां आप हर किसी व्यक्ति
के चरण छुए यह जरूरी नहीं होता है
कि आप अपने बड़ों के गुरुजनों के जो भी
आदरणीय हैं उनके चरण छू सकते हैं

है अगला प्रश्न है राहुल जयसवाल जी का और
साथी यही प्रश्न सुनीता कुमारी जी कभी है
इन्होंने पूजा जय माता दी गुरु मां अगर
किसी के ऊपर तंत्र हुआ है और उसके घर पर

भी तंत्र उठा है तो क्या उसकी पूजा घर में
देवताओं के पास जाती है और क्या उसके ऊपर
भी सवारी आ सकती है प्लीज़ बताएं गुरु
मार्गदर्शन करें देती है जिन व्यक्तियों
के घर पर तंत्र होता है सबसे पहले तो वह

तंत्र क्या करता है आपके घर में यह कार्य
कराता है कि आपके घर में पूजा-पाठ ना हो
क्योंकि पूजा-पाठ से आपके घर में
सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है और वह यही

कार्य करता है कि आपके परिवार के जितने भी
सदस्य हैं उनको नास्तिक बनाता है उनके मन
से ईश्वर के प्रति आस्था को खत्म करता है
क्योंकि यह इसका प्रभाव होता है लेकिन उस
पर भी अगर कोई व्यक्ति पूजा पाठ करता है

है तो उसकी पूजा में तस स्वीकार करते हैं
क्योंकि पूजा-पाठ अपनी अलग जगह होता है और
तंत्र अपनी अलग जगह होता है दोनों का
प्रभाव अलग-अलग होता है तो ऐसे परिस्थिति
में अगर कोई व्यक्ति पूजा पाठ करता है तो

देवता उसको स्वीकार करते हैं साथ ही
सकारात्मक उर्जा आपके घर में प्रभाव
प्रसार होता है और अगर आप की पूजा इस
स्थिति की होती है यानी कुल इस कोटि की
होती है तो देवता उसको स्वीकार भी करते
हैं और आपके शरीर पर सवारी भी आती है

क्योंकि इसका उदाहरण यह है कि आपके शरीर
में दो ऊर्जाओं का एक साथ वहां सो सकता है
यानी नकारात्मक ऊर्जा का भी और सकारात्मक
ऊर्जा का भी जब ऐसी परिस्थिति में दोनों

ऊर्जाएं काम करते हैं तो तंत्र वाली
परिस्थिति में भी दोनों ऊर्जा एक साथ काम
करती है
हैं तो यह आपके प्रश्न का उत्तर है अगला
प्रश्न है सिर्फ गुलेरिया जी का इन्होंने
पूछा है आप बताइए मुझे कि जिन पर मां की

सवारी आती है वह लोग सपने में दिखाई देते
हैं तो क्या मतलब होता है जिन व्यक्तियों
पर सवारियां दिया गया किसी भी देवी-देवता
की सवारी और आपको उनके दर्शन होते हैं तो
इसका अर्थ यह होता है कि यह जो देवता उनके

शरीर पर आ रहा है वह उनके माध्यम से आपको
दर्शन दे रहा है यानी रूप उन्होंने उसी
गुरु धारण किया है जिस पर सवार व्यक्ति को
धारण किया लेकिन वह दर्शन होते हैं वह उस
दिव्य ऊर्जा के दर्शन होते हैं देवी-देवता

के दर्शन होते हैं उनके रूप में क्योंकि
जो दर्शन देते हैं वह दो प्रकार से
प्रत्यक्ष से अप्रत्यक्ष रूप से प्रत्यक्ष
रूप में वह आपको किसी भी रूप में दे सकते
हैं के रूप में किसी रिश्तेदार के रूप में

के रूप में किसी अनजान व्यक्ति अपने भी
दिखाई दे सकते हैं और प्रत्यक्ष रूप में
तो आप देख ही सकते हैं वह कैसे होते हैं
है तो ऐसे में वह आपको उनके माध्यम से

दर्शन देते हैं अपने दर्शकों का लाभ आपको
देते हैं
है अगला प्रश्न है मखाने भगत का माता जी
मेरा एक सवाल है अगर सवारी आती है और हम
पूछा लेना चाहते हैं तो मूर्ति स्थापना की

आवश्यकता होती है प्राण प्रतिष्ठा के साथ
या बिना मूर्ति स्थापना भी सवारी पूछा
देती है तो देखिए
हमारी जो आती है

कि वह किसी भी चीज की मोहताज नहीं होती
यानी उसको किसी की आवश्यकता नहीं होती
सवारी जंगल में भी बैठकर पूछा दे सकती है
क्योंकि सवारी जो है वह दैवीय ऊर्जा होती

है और ऊर्जा यह नहीं कि आप किसी मूर्ति के
सामने बैठे थे तभी उठ जाओ उपस्थित होगी या
अगर आप मंदिर में जाएंगे तो ही और जाएगी
आप कहीं भी किसी भी स्थान पर बैठते हैं और
दही पढ़ाती है क्योंकि ऊर्जा आपके शरीर से
जुड़ी हुई है वह स्थान से भी नहीं जुड़ी

आपके शरीर से जुड़ी है क्योंकि आपका शरीर
उसका माध्यम है तो अगर आप जंगल में भी बैठ
करके अपनी सवारी लेकर आते हैं यानी अपना
ध्यान लगा करके देवता को याद करते हैं तो

वह आपके सामने तुरंत प्रकट होते हैं और
आपकी जो भी समस्या है अगर पूछा है पूजा
चाहते हैं तो पूछा कि देते हैं तो ऐसी कोई
आवश्यकता नहीं है कि प्राण प्रतिष्ठा हो

मूर्ति की तबीयत सवाल पूछा देती है है
अगला प्रश्न है
और ज्योति खंडागले का नमस्ते मां मुझे
पहले मां दुर्गा और मां काली माता की

सवारी आती थी अब सिर्फ मुझे काली मां की
सवारी आती है मुझे फिर से दुर्गा मां की
सवारी चालू करनी है तो क्या करना पड़ेगा
प्लीज कुछ सलूशन बताओ ना

जो पहली बात तो यह अगर आपको मां दुर्गा की
सवारी आती थी यानी सबसे पहले आपको सुनने
सांवरिया रिक्ता तिथि जो मां दुर्गा की थी
मां दुर्गा की सौम्य सवारी है और मां काली

किरोधर सवारी है अर्थात प्रचंडता के साथ
आती है मां और उनका कार्य भी प्रचंड ही
होता है लेकिन कभी-कभी ऐसा होता है कि अगर
दो देवी की सवारी आपके ऊपर आते हैं यानी
मां दुर्गा की भी आती है और मां काली की
आती है तो इसमें अगर जिसका प्रभाव ज्यादा

होता है तो वह सवारी ज्यादा आती है जैसे
कि मां काली का प्रभाव ज्यादा होता है
यानी वह सबसे पहले यानि प्रथम रूप में वह
अपने आपको चाहती है मां दुर्गा उनके पीछे
भी चल सकती हैं
कि ऐसा जरूरी नहीं कि मां की ही चले तो
मां काली अगर अपना प्रथम स्थान चाहती हैं

तो वह पहले आती है
है तो ऐसी परिस्थिति में अगर मां काली
आपके पास आती है तो अति उत्तम है और नहीं
बात मां दुर्गा को बुलाने की कोई भी चीज
है आपके अंदर वह क्षमता होनी चाहिए आपके
पुकार में इतनी सामर्थ्य होनी चाहिए कि
जिस देश को आप पुकारो वह आपके पास ही
सवारी के रूप में लेकिन अगर आप यह इसका
कोई सलूशन बता दो कुछ सलूशन कुछ नहीं होता
बच्चे सलूशन केवल आपके भाव होते हैं आपकी
भक्ति होती है सब चीज का एक ही मूल मंत्र
है आपकी भक्ति और आपके भाव अगर वह उच्च
कोटि के होंगे तो देवता आने को मजबूर हो
जाएंगे क्योंकि भक्त के वश में है भगवान
होते हैं
हैं तो इस प्रकार से आप अगर चाहते हैं
मधुर गश्त बढ़ाए तो आप अपनी भक्ति को
बढ़ाएं अपने ध्यान को बढ़ाएं अपनी भावनाओं
को उच्च कोटि की करें
मैं अभी प्रश्न है करुणा भी आईजी
की मां हम गंदी लगाना नहीं चाहते अगर
सवारी आई है तो वह बोले गद्दी लगानी तो
क्या करना चाहिए लेकिन जो बच्चे अधीन
लगाना नहीं चाहते और उनको सवारी आती है और
सवाई गंधर्व मांगते हैं तो ऐसी परिस्थिति
में आप उनसे वचन ले करके क्षमा प्रार्थना
कर सकते हैं अगर आपके घर की परिस्थिति ऐसी
नहीं है यह स्वयं की भी ऐसी परिस्थिति
नहीं है कि आप यदि लगा सके तो आप उनसे
क्षमा मांग सकते हैं समा प्रार्थना कर
सकते हैं तो वह आपको शर्मा करेंगे और यदि
के लिए आपको किसी भी प्रकार से मजबूर नहीं
करेंगे क्योंकि शक्तियां जो है वह शर्मा
पर और प्रार्थना पर ही चलती है और वचन पर
चलती है तो आप उनसे क्षमा प्रार्थना करें
तो आपको शमा करेंगे और यदि के लिए आप से
किसी भी प्रकार की मांग नहीं करेंगे
है अगला प्रश्न है पुनित प्रजापति का जय
मां भद्रकाली मां मुझ पर 2 साल से मां
काली की शक्तियां आती है प्लीज बताइए कि
क्या मैं किसी के उद्यापन व्यापिनी खा
सकती हूं जय माता दी पलक फ्रॉम यूपी मेरठ

है लेकिन जिन पर मां काली की शक्तियां आती
हैं किसी भी प्रकार के सवारी आती है किसी
भी देवता की सवारी आती है वह अध्यापन का
भोजन खा सकते हैं और जो पीने की बात आप
करें हमारे यहां इसको कढ़ाई बोलते हैं
यानी देवी की कढ़ाई इसको बोला जाता है और
कढ़ाई का भोग किसी को भी जिनको शक्तियां
आती है सवारी आती है क्योंकि मां का भोग
आप ग्रैंड कर सकते हो उसमें किसी भी
प्रकार का परहेज नहीं किया जाता और मां का
भोग ग्रहण करने के लिए आपको कोई विचार
करने की भी आवश्यकता नहीं है इसलिए आप वह
भोग ग्रहण कर सकते हैं
है अगला प्रश्न है कि रथ कोण जी का जय
माता दी मां मत जिनको सवारी आती है वह
सवारी पर कंट्रोल कैसे रखी प्लीज बताएं जय
मां काली की
यह देखिए जिनको सवारी आती है जो प्रथम रूप
से सवारियां थीं हुए नियंत्रित होती है
उसका कोई नियंत्रण नहीं होता आप उसको
नियंत्रित नहीं कर सकते लेकिन इस प्रकार
की सवारियां बहुत सारे बच्चों को आती हैं
हैं और उनके पास कोई तरीका नहीं होता इसको
नियंत्रित करने का आ है लेकिन सवारी को
नियंत्रित करने का एक ही तरीका होता है कि
सवारी वचनों द्वारा नियंत्रित की जाती है
है और प्रार्थना के द्वारा नियंत्रित की
जाती है लेकिन यह तरीका हर कोई नहीं जानता
ना ही कोई वचन देना जानता है ना ही कोई
प्रार्थना लेना जानता है कि किस प्रकार
प्रार्थना की जाती हैं तो उसके लिए मैं
आपको एक्सेप्ट वीडियो बना कर दूंगी जिसमें
मैं आपको बताऊंगी कि सवारी से किस प्रकार
वचन लिए जाते हैं बाकी जो नियंत्रण होता
है वह वचनों के द्वारा ही होता है
है अगला क्वेश्चन है मंजूषा देवी का जय
मां दुर्गा क्या कभी शक्ति अपने आप किसी
भी शक्तिपीठ पर चली जाती है कृपया
मार्गदर्शन करें देखिए बच्चे आपने पूछा
शक्ति शक्तिपीठ पर चली जाती है क्या
शक्तिपीठ से शक्तियां होती है
को शक्तिपीठ से ही शक्तियां होती हैं
क्योंकि वह शक्तिपीठ होते हैं और जिन
शक्तियों के अब बात करने हैं उनको कोई
बांध नहीं सकता वह स्वतंत्र होती हैं तो
वह कहीं भी जा सकती हैं किसी भी शक्तिपीठ
पर जा सकती हैं किसी भी धर्म स्थल पर वह
जा सकती हैं
इस पूरे ब्रह्मांड में वह कहीं भी भ्रमण
कर सकती हैं तो यह कहना कि कहीं भी जा
सकती है शक्तिपीठ पर कहां जा सकती है यह
बात बहुत अजीब लगती है क्योंकि वह सकती
हैं वह मानव रूप में नहीं है वह ऊर्जाएं
हैं वह कहीं भी भ्रमण कर सकती हैं और उनके
माध्यम से वह आपकी चेतन अचेतन में मन को
भी कहीं भी लेकर जा सकती हैं आपके इतने
शरीर को कहीं भी भ्रमण करा सकती हैं जो कि
स्वप्न कर माध्यम से आप देख सकते हैं
है अगला और अंतिम प्रश्न है कमला
मोहनपुरिया जी का जय माता दी शक्ति आती है
तो बस में क्यों नहीं रहती आप ही बताएं ल
कि बच्चे जो भी कोई शक्तियां आती हैं किसी
भी प्रकार की जो सवारियां आती है वह
अनियंत्रित रूप से ही आपके शरीर में
प्रवेश करती हैं
उनके ऊपर आपका कोई भी नियंत्रण नहीं होता
इसका कारण यह होता है क्योंकि जिस प्रकार
से बालक को समय लगता है किसी भी चीज को
सीखने में ऐसे ही आपको भी समय लगता है
किसी भी चीज को सीखने में और सवारी ही
आपको धीरे-धीरे मार्गदर्शन करती हैं वहीं
आपको हर चीज समझाती है धीरे-धीरे अगर आपका
गुरु भी नहीं है तो भी ऐसी परिस्थिति में
सवारी ही आपका मार्गदर्शन करती है लेकिन
मार्गदर्शन उन्हीं को प्राप्त होता है जो
सही तरीके से पूजा करते हैं सही प्रकार से
भक्ति करते हैं यह नहीं कि केवल आपके पास
सवारी आती है आप केवल ज़ूम लिए खेल लिए
हाजरी आ गई और चली गई उसके बाद आप किसी भी
प्रकार का पूजा पाठ नहीं कर रहे हैं और
अगर आप पूजा-पाठ नहीं करते हैं तो सवारी
आपकी खुलती नहीं है और ना ही उसकी कि जो
ऊर्जा होती है उस में वृद्धि होती है ना
ही आपके सामर्थ्य में वृद्धि होती है ना
ही आप पूछा दे सकते हैं ना ही आपको कुछ
दिखाई देता है नहीं आपको किसी प्रकार के
दर्शन होते हैं केवल बुक खेलती है हाजरी
आती है चली जाती है तो उसके लिए आपको पूजा
करनी पड़ती है क्योंकि पूजा ही वह मार्ग
है जिसके द्वारा आप अपनी शक्ति में वृद्धि
कर सकते हैं
है तो मित्रों आशा करती हूं आपको अपने
प्रश्नों के उत्तर मिले होंगे और जो लोग
यह वीडियो सोएंगे उनके मन की जिज्ञासा यह
ऊंगली वह भी शांत होंगे अगर इसके अलावा भी
आपके कोई भी प्रश्न है या कोई भी
जानकारियां आप लेना चाहते हैं तो आप मेरे
वीडियो के माध्यम से ले सकते हैं मैंने इस
सवाल पर बहुत सारी वीडियो अपलोड की हैं
प्रार्थी मैं आपसे एक अनुरोध और करती हूं
कि जिस विषय पर मैंने वीडियो अपलोड कर रखी
है आप उन वीडियोस को ध्यान से सुने
क्योंकि आप बहुत सारे ऐसे प्रश्न करते हैं
जिन पर ऑलरेडी वीडियो अपलोड की जा चुकी है
तो मैं उन प्रश्नों के उत्तर बिल्कुल नहीं
देती हूं मैं केवल वही प्रश्न लेती हूं
जिन पर मैं वीडियो नहीं बना पाई हूं इसलिए
अगर आप प्रश्न करने हैं तो सबसे पहले एक
बार मेरे चैनल पर चेक कर ले कि उस पर
मैंने वीडियो को अपलोड की है या नहीं की
है
है मित्रों मां भगवती से यही प्रार्थना
करती हूं कि वह आपके भंडारे बढ़ती रहे
आपकी सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करते रहे
मैं आपसे फिर मिलूंगी अपने अगले विडियो
में तब तक के लिए जय महाकाली जय महाकाल
हुआ है

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