गुप्त नवरात्रों# में करके देखो पता चलेगा कि कितना प्रभावशाली है

मंत्र शब्द मन और त्रा शब्द से बना है
मंत्र शब्द मन और त्रा शब्द के सहयोग से
बना है अर्थात मनन करना मन का अर्थ है सोच
विचार और त्रा का अर्थ है त्राण यानी
दुखों से बचाने वाला मंत्र अर्थात जो मन
के त्राण हरे तो मंत्र हमें शारीरिक

मानसिक भावनात्मक ऊर्जा प्रदान करता
है म अपने आप में असीमित ऊर्जा को समेटे
हुए होता है ऊर्जा का एक ऐसा भंडार होता
है जो अपनी कल्पना से भी परे होता है उस
ऊर्जा को अपने से कनेक्ट करना होता है
यानी सही जगह संग्रहित करना होता है जय
माता दी दोस्तों

नमस्कार दोस्तों कैसे हो आप
सभी उम्मीद करती हूं खुश होंगे स्वस्थ
होंगे मंगल होंगे माता रानी की असी कृपा
आप सभी पर बनी रहे माता रानी अन्य धन के
भंडार आपके घरों में भरे रहे ऐसी मां से
मेरी प्रार्थना

है अगर मेरी जानकारी आपको अच्छी और सही
लगती है हो तो चैनल को सब्सक्राइब और
वीडियो को लाइक जरूर
करना ना भूले आज हम इस वीडियो में एक बात
करेंगे मां दुर्गा की दो प्रिय दिव्य

मंत्रों के बारे में जो दुर्गा सस्ती में
दिए गए हैं जो कि अपने आप में बहुत
शक्तिशाली हैं और नवरात्रों में आपको इनका

विधान अवश्य उठाना चाहिए इसके अलावा आपको
अपनी रोज की पूजा में इन मंत्रों का
उच्चारण करना चाहिए 1121 108
बार भी एक मंत्र का उच्चारण करना चाहिए
नवरात्रों के समय यह मंत्र और शक्तिशाली
हो जाते हैं इसलिए आपको नवरात्रों में

इसका विधान जरूर उठाना चाहिए नवरात्रों के
समय दोनों मंत्रों में से आप एक मंत्र का
विधान उठा सकते हैं अगर किसी कारण वर्ष
आपसे पहले नवरात्रि नहीं कर पाए हो तो आप

ऐसा बिल्कुल भी नहीं सोचिए कि पहले दिन
नवरात्री के समय नहीं कर पाए हो तो आप इस
विधान का विधान को उठा नहीं पाओगे आप
दूसरे तीसरे छठा या सातवा या आखिरी
नवरात्रा ही क्यों ना हो आपको इसके विधान

उठा सकते हैं दोनों में से एक मंत्र का जब
आपको जरूर करना चाहिए और आपको यह इतना
प्रभावशाली
है कम से कम एक एक माला आपको जरूर करनी
चाहिए और जितना आप कर सको ज्यादा से
ज्यादा कर सको उतना ही आपको लाभदायक है
ज्यादा से ज्यादा बेहतर होगा तो आइए जानते
हैं प्रथम मंत्र के बारे में उसका उच्चारण
आप ध्यान से

सुनिए ओम जयंती मंगला काली भद्र काली
कपालिनी दुर्गा शमा शिवा धात्री सुभ स्वधा
आप हो इन प्रसिद्ध नामों से आपको मेरा
जगदंबे नमस्कार है इस जयंती सबसे
शक्तिशाली
उत्कृष्ट विजय शली देवी

है मंगला अर्थात जो अपने भक्तों को जन्म
मरण से दूर कर देती है मोक्ष दयनी देवी का
नाम मंगला है जो संपूर्ण सृष्टि को अपना
ग्रास बना लेती हैं वह मां काली है जो

अपने भक्तों को देने के लिए भद्र सुख या
मंगल स्वीकार करती हैं वह मां भद्र काले
हैं जिन्होंने कल कपालिनी अर्थात गले में
मुंडो की माला धारण की है वह
कपालिनी है जो अष्टांग योग एवं उपासना योग
जो साध से प्राप्त है वह जगदंबा मां
दुर्गा है संपूर्ण जगत ज जननी होने के

कारण अत्यंत करुणामय जो सभी के अपराधों को
क्षमा कर देती हैं वो
मां देवी का नाम शमा है सबका कल्याण करने
वाली देवी जगदंबा ही शिवा है संपूर्ण
धारण संपूर्ण प्रवचन धारण करने वाली भगवती

नाम दात्री हैं सभ रूप में यज्ञ ग्रहण
करके देवताओं का पोषण करने वाली देवी स्वा
है और श्रद और तप करने वाली और पितरों को
पोषण दे करने वाली देवी स्वधा है दोस्तों
मां का यह मंत्र अद्भुत चमत्कारी है भ का

नाश करने वाला है सभी प्रकार के दुखों और
शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने वाला
है यह मंत्र मन को साहस प्रदान करता है
मंत्र का निरंतर जप करने
से साधक किसी प्रकार की बाधा को पार कर
जाता है कैसी भी बाधा हो दोस्तों इस मंत्र
के प्रभाव से जो जप करता है व्यक्ति उस

बाधा कैसी भी बाधा दूर हो जाती है इस
मंत्र का जप आपको नित्य 108 बार करना
चाहिए जो भी भक्त इस मंत्र का जब 11 21
108 बार करते हैं

मां की कृपा से वह व्यक्ति हर समस्या हर भ
से मुक्त हो जाता है अब जानते हैं दूसरा
मंत्र मैं उच्चारण कर रही हूं ध्यान से
सुनिए ओम सर्वि मंगल
मांगल्य शिवे सर्वार्थ साधि के शरण
त्रयंबक गोरी नारायणी
नमोस्तुते अर्थात हे नारायणी तुम सब

प्रकार से मंगल प्रदान करने वाली हो दयामय
हो कल्याण दई शिवा हो सब पुरुषार्थ का
सिद्ध करने वाली हो शरणागत वत सला तीन
नेत्रों वाली गोरी हो हे मां दुर्गे आपके
श्री चरणों में मेरा नमस्कार है दोस्तों
यह मंत्र सर्व मंगल कामना और स्वयं की
मंगल कामना वाला मंत्र है इस मंत्र के

द्वारा भक्त मां से प्रार्थना करता है हे
मां आप संपूर्ण संसार में व्याप्त हो आप
कण कण में व्याप्त हो पूरे विश्व का
कल्याण करो पूरे विश्व के साथ और मेरे
मेरे परिवार का कल्याण करो हे देवी मां

आपके चरणों में मेरा कोटि कोटि नमन जगत
जननी मां दुर्गा का इतना स्वरूप इतना
ऊर्जा मई है इतना

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