चंद्रघंटा साधना | बाधाओ के निराकरण तथा अकिस्मक धन प्राप्ति के लिए |

चंद्रघंटा की साधना नवरात्रि के तीसरे दिन
की जाती है चंद्रघंटा देवी रोध स्वरूपा है
जो साधक के समस्त दोष तथा पाप का क्षय कर
उसके जीवन की सभी बाधाओं को समाप्त करती
है भगवती चंद्रघंटा की कृपा प्राप्त कर

साधक अपने आप में अत्यंत समृद्धि शली और
ऐश्वर्य वान हो जाता है आकस्मिक धन

प्राप्ति और गुप्त धन प्राप्ति के लिए यह
प्रयोग अत्यंत श्रेष्ठ और आदित्य है देवी
का चंद्र रूप जो मन का स्वामी है यहां
घंटा नाथ का प्रतीक है इन्हें मन और वाक्य
का संयम करने वाली देवी के नाम से जाना

जाता है मानव जब तपस्या के द्वारा मन और
वाणी को संयम कर अनाहत की ध्वनि सुनता है
तब चंद्रघंटा की कृपा का व्यवहारिक अनुभव
होता है इनकी कृपा से मानव संयत और शांत

 

होता है यह देवी मानव को ब्रह्मानंद की
अनुभूति के लोक तक सहज ही ले जाती है इनके
ध्यान के विषय में कहा जाता है

व्या ग्र छाल और गज चर्म उनकी भेष भूषा है
जो क्रूर है मुंडो की माला धारण करती है
भीषण है जल हीन सरोवर जैसा जिनका उदर है

खडक और पाश धारण करती हैं बहुत ही भीषण
भवनी खटवांग धारनी दत्य कालरात्रि जैसी
भीषण विस्तीर्ण बदन निरंतर जीवा चलाने
वाली विस्तृत

जंगनाओ के सेन का हनन किया था वे देवी
चंद्रघंटा है इनके साथ धना का विधान है
अपने सामने लकड़ी के बाजोट पर लाल रंग का
वस्त्र बिछाकर उस पर किसी ताम्र पात्र में
चंद्र घंटा दुर्गा यंत्र स्थापित कर

चंद्रघंटा देवी का ध्यान करें अखंड प्रवरा
रोड़ा ंड कोपाल भट्ट यता प्रसादम तनतम
महिम चंद्र घंटे दि विश्रुता ध्यान के
पश्चात साध यंत्र का संक्षिप्त पूजन कर
कोई भी लाल रंग का फल अर्पित करें इसके
बाद 51 लाल पुष्प अर्पित करते हुए निमन
मंत्र का जप

करें प्रयोग समाप्ति के बाद आरती करें यह
नवरात्रि आपके लिए मंगलमय हो जय गुरुदेव

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