चमारों से भेदभाव पर भड़के ब्रह्मप्रकाश बुलाकी बोले जूते मारों इन नेताओं को जो हमारी आवाज़ नहीं उठाते

यह विशेष ध्यान द क्योंकि हमारे पास जो
रोटिया बनी है रोटियां हमारी ऐसी बनी है
कि हम यहां कुछ खश है कुछ रीजन है इसलिए
हमने अलग-अलग बनाई है कष्ट ना समझे बैठने
का और हमें ये बड़ी दिक्त आ रही है इसलिए
हमने बीच में लाइन खींची है तो लाइन से
परे

इनको परे बैठ जाना और लाइन से अरे को आप
लोग बैठ
जाए साथियों नमस्कार मैं हूं मनोज जनतानी
और आज मैं हूं दिल्ली में मेरे साथ बुलाकी
जी हैं लगातार पिछले तीन दशकों से व बहुजन

समाज की आवाज को उठा रहे बुलाकी जी अभी जो
आपने वीडियो देखी जिसमें मंच पर यह कहा जा
रहा है कि हरिजन जो समाज है वो लाइन के
उधर बैठेगा उनके लिए अलग से रोटियां बनाई
गई है और जो स्वर्ण समाज है वो अलग बैठेगा

उनके लिए अलग से रोटी बनाग कैसे देखते हैं
इस मामले को आजादी के 75 वर्ष बाद भी यह
हालत है आपकी देखिए यह बहुत गंभीर मसला है
जी इस पर देखिए भारत में जाति प्रथा इस
तरीके से गरग में घुसी हुई है जाति कभी ना

जाती जी जाति एक ऐसा मसला है उनके दिमाग
में जितना भी डाल द लेकिन जाति को व भूलते
नहीं है और जिस प्रकार से यह घटना घटी है
कि दलित एक तरफ बैठेंगे और स् हरिजन हरिजन
बोला है हरिजन एक तरफ बैठेंगे और स्वर्ण

एक तरफ बैठेंगे यह बहुत ही गलत है इनके
ऊपर ऐसी एक्ट दर्ज होना चाहिए और कठोर से
कठोर कारवाई होनी चाहिए और इतना नहीं जो
हमारे राजनीतिक पार्टियों के हमारे समाज
के दलित नेता हैं उसको अपनी अपनी
विधानसभाओं में संसद में यह आवाज उठानी

चाहिए कि इस प्रकार के जो मसले हैं ऐसे
मसलों से देश के अंदर सामाजिक एकता कभी
नहीं आ सकती एक तरफ जहां हम सामाजिक एकता
की बात करते हैं और दूसरी तरफ इस तरह की
घटनाएं होती हैं मूछ रखने पर दलित को मार
दिया जाता है घोड़ी पर नहीं चढ़ने जाता एक

राजस्थान के आईएस को घोड़ी पर चढ़ने के
लिए कितनी कर पड़ कितनी मशक्कत उनको करनी
पड़ी पुलिस में सुरक्षा लेनी पड़ी है ना
इस प्रकार के अनेकों अनेकों घटनाएं आज भी
घट रही है यह बड़े दुर्भाग्य की बात है और

हम तो यह कहते हैं कि अगर सरकार सही मायने
में दलितों की हरिजनों का नाम लेते हैं व
अगर हिमायती है तो जो पार्टियों के नेता
हैं जो वोट मांगने जाते हैं हमारे दलित

भाई भी जो नेता लोग हैं उनको सबसे पहले
हमारे समाज के लोगों को चौराहे पर खड़ा
करके उन्हीं पर उसको जूता मारना चाहिए
जूता इसलिए मारना चाहिए जब तुम हमारा दलित
हरिजन के नाम से या दलित के नाम से वोट

लेने के लिए तुम कहते हो कि हम दलितों के
नेता हैं तो दलितों की आवाज अगर तुम नहीं
उठाओगे तो कौन उठाएगा यह बात है पिछले तीन
दिन से लगातार वीडियो वायरल हो रही है
लेकिन उसके बावजूद एक भी दलित संगठन का
संज्ञान इस मामले पर नहीं है नहीं हमारी

श्री गुरु रविदास जन्म उत्सव कमेटी दिल्ली
इसकी घोर निंदा करती है और मैं आपने मुझे
आज ही संज्ञान में डाला है अभी मैं इसके

ऊपर अपने यहां पर बैठ के सिस्टम पर बैठक
अभी प्रधानमंत्री को राष्ट्रपति को गृहम
मंत्री को इसका लेटर लिखता हूं इसकी थोड़ी

सी हमें जानकारी मिल जाए ये घटना कहां की
है और तुरंत हम इसके ऊपर अपना जो है पत्र
जरूर लिखेंगे परसों यानी 24 फरवरी को आप
बड़ी ऐतिहासिक रैली शोभा यात्रा निकाल रहे
हैं दिल्ली के अंदर परमिशन है देखिए हमें
लालकिला ग्राउंड की परमिशन मिल चुकी है जी

और जो हमारी परमिशन है वो कुछ थानों से
देरी के कारण वहां पुलिस पीएच की पहुंची
है कल हमें ई बजे उन्होंने टाइम दिया है
दिल्ली पुलिस हेड क्वार्टर ने हमें ई बजे

कल परमिशन मिल जाएगी तो परमिशन हमें
मिलेगी अवश्य मिलेगी पूछिए क्योंकि बहुत
से लोग भ्रांति फैला रहे हैं किसान आंदोलन
के चलते आज भी कुछ दलित संगठनों को अरेस्ट
किया गया जंतर मंतर से और बहुत से रूट को
चेंज किया गया है जो आने वाले लोग हैं
क्योंकि इस शोभा यात्रा में दिल्ली नहीं
पूरे एनसीआर से लोग आते हैं तो उनको कहीं
ना कहीं रूट की दिक्कत ना हो परेशानी ना

हो मैंने इसलिए पूछा देखिए मैं आपको बताता
हूं जब दिल्ली के अंदर कोरोना था और सभी
कार्यक्रम सभी समाज के कार्यक्रम पर
प्रतिबंध था यह गुरु महाराज की कृपा है य

हमारे समाज की ताकत है दोनों वर्ष हमने
गुरु रविदास जयंती की जो जो है शोभा
यात्रा निकली और अभी भी हमारे लिए कोई
दिक्कत नहीं है शोभा यात्रा हमारी अवश्य
निकलेगी जो भी इस तरीके का भ्रम फैला रहे
हैं वो किसी भी भूल में ना रहे हैं शोभा

यात्रा 100% निकलेगी और वो निर्धारित
मार्ग से ही निकलेगी अच्छा बुलाकी जी आप
कई वर्षों से गुरु रविदास जी के ऊपर
कार्यक्रम करते आ रहे हैं उनकी वाणी को
जनजन तक पहुंचाते आ रहे हैं एक सवाल है
हमारे दर्शक दर्शकों ने पूछा है गुरु
रविदास उस समय में कह रहे हैं ऐसा चाहू

राज में वो राज की बात कर रहे हैं यानी कि
कहीं ना कहीं सत्ता परिवर्तन की बात कर
रहे हैं उन्हें भक्ति काल का कवि क्यों
कहा जाता है देखि वो भक्ति

काल भक्ति तो उनके में नहीं दिखती है वो
निर्गुण उपासक थे जी निर्गुण उपासक थे और
उनको भक्ति के साथ जोड़ दिया जाता है जोड़
दिया उन्होने पाखंड का तो कभी समर्थन ही
नहीं किया ब्राह्मणवाद का समर्थन नहीं
किया नहीं किया उन्होंने जो है अपनी वाणी

आप उनकी वाणी को पढ़िए उनकी वाणी में
स्पष्ट संदेश है उन्होंने जैसा कहा कि ऐसा
चाह राज में जहां मिले सबन कुवन छोट बड़ो

सब सम बसे रविदास रहे प्रसन्न जिव्या से
ओंकार जब हत कार् राम मिले क परिवर्तन की
बात हां भक्ति कहीं नहीं है उन्होंने
भक्ति को उन्होंने जहां उन्होंने सामाजिक
समानता की बात कही उन्होंने जीवन में शर्म
को बड़ा महत्व दिया उन्होंने कहा शर्म कर

खैयो जोलो पार बसाए नेक कमाई जो करे कभी
ना निष्फल जाए उन्होंने तो ईमानदारी की
बात 600 साल पहले की है लोग तो आज राजनेता
जो है कहते हैं कि भ्रष्ट मुक्त होना

चाहिए भ्रष्टाचार को तो मुक्त उन्होंने
600 साल पहले कल्पना की थी और शर्म करके
खाने की बात की थी आज भी देख लो कौन सा
संत है जो श्रमजीवी संत है एक भारत के
अंदर संत गुरु रविदास महाराज जी और संत
कबीर हुए हैं जो श्रमजीवी संत थे

जिन्होंने आजीवन शर्म करके खाया और शर्म
की अपनी कमाई में से और अन्य संतों की
सेवा भी की तो कहीं ना कहीं गुरु रविदास

को हम भक्ति काल का नाम मानकर राजनीतिक या
वो स समाज सुधारक समाज सुधारक संत है जी
समाज सुधारक उसके बावजूद जिस व्यवस्था का
विरोध करते रहे उसी व्यवस्था के प्रत्यक
चिन्ह रविदास मंदिरों में क्यों है

देखिए जितने भी मंदिर हैं उनकी कुछ ना कुछ
मजबूरियां है आप समझते हैं
कि जितने भी मंदिर हैं कोई हमारे
प्रॉपर्टी खरीद कर तो बनाए नहीं है अगर
प्रॉपर्टी खरीद के मंदिर बनाए हो तो उनका

एक अधिकार होता है हम किसी की लगाए ना
लगाए अगर उन मंदिरों में वह थोड़ा सा कारण
है कि वो उसको बचाने के लिए क सा कहां ये
तो पूरी पूरा वैचारिक नहीं वो बचार अलग है
मैं तो यह कहता हूं कि जितने भी मंदिर हैं
उसमें अगर गुरु रविदास जी का मंदिर है तो
गुरु रविदास जी की प्रतिमा होनी चाहिए
हमारे दलित महापुरुषों की होनी चाहिए बाबा

साहब की अब देखिए गुरु रविदास जी के जितने
मंदिर होंगे उसमें बाबा साहब की हर मंदिर
के अंदर आपको चित्र या प्रतिमा मिलेगी
महात्मा बुध की मिलेगी ऐसा नहीं है ऐसी

क्या वजह होई जिस जिस जगह पर हम खड़े हैं
देवनगर का रविदास मंदिर का प्रांगण है जी
60 61 में बाबा साहब यहां पर आए थे उस समय
उन्होंने कहा था कि यहां पर एक जगह ऐसी
बनाओ जहां पर समाज अपनी वैचारिकी कर सके

तो उस उस उस समय जमीन घेरी गई थी तो बाबा
साहब जिन विचारों का समर्थन नहीं करते मैं
ब्रह्मा विष्णु महेश को भगवान नहीं
मानूंगा बाबा साहब के कहने पर समाज में

जगह तो ली लेकिन उन्हीं प्रति को क्यों
डाल दिया और ये अकेले आपके नहीं दिल्ली
नहीं मैंने जितने भी रविदास टेंपल देखे उ
हर रविदास टेंपल में हालांकि मुझे इस बात
के ऊपर कनाडा से और पंजाब से तो कितने
धमकी भरे आ चुके कि तुम ऐसी रिपोर्टिंग
क्यों करते हो देखिए

इतना ही नहीं बाबा साहब जब दिल्ली में थे
तो दिल्ली के अंदर एक मात्र श्री गुरु

रविदास जन्मोत्सव कमेटी थी और गुरु रविदास
जन्म उत्सव कमेटी ही के लोग बाबा साहब
प्रत्येक वर्ष गुरु रविदास जयंती में एक
दिन शोभा यात्रा निकलती थी उसके दूसरे दिन
गुरु रविदास जयंती पर सभा होती थी य
से पहले होती थी ये देवनगर में खालसा जो
कॉलेज है यहां पर खाली मैदान था और बाबा
साहब कहते थे कि इस जगह पर आप सरकारी जमीन
है इस जमीन पर आप अपना कोई स्थल इसको
बनाइए लेकिन समाज में विकटन के कारण वह

जमीन हम नहीं कब्जा कर पाए धीरे धीरे धीरे
धीरे फिर उसके बाद उसके बाद फिर अंबेडकर
भवन पे बाबा साहब गुरु रविदास जयंती पर

सवा करते रहे जब तक जीवित रहे और इतना ही
नहीं श्री गुरु रविदास जन्मोत्सव कमेटी के
माध्यम से ही बाबा साहब की जब 6 दिसंबर को
अंतिम परि निर्माण हुआ तो उनकी शभ यात्रा
भी श्री गुरु रविदास जन्म उत्सव कमेटी के
माध्यम से ही निकाली गई थी वो हमारे पास
आज भी दस्तावेजों में उपलब्ध है और सरकार

से भी हमने कई जगह आरटीआई लगा के पूछा है
लेकिन वहां से हमें कोई रिप्लाई नहीं मिला
कि हमारे पास कोई रिकॉर्ड नहीं है तो श्री

गुरु रविदास जन्म उत्सव कमेटी के माध्यम
से ही उनकी शव यात्रा निकाली गई थी तो 24
तारीख को ऐतिहासिक आप रैली निकाल रहे हैं
ऐतिहासिक उसके अंदर बाबा साहेब के पर
पोत्र को मुख्य अतिथि के रूप में आपने
आमंत्रित किया है क्या अपील आप दिल्ली
वासियों से एनसीआर वासियों से पूरे देश से

जो लोग आ रहे हैं उनको करना चाहेंगे देखिए

 

यह बड़ा हर्ष का विषय है कि जो हमारा 1956
में बाबा साहब के जाने के बाद बाबा साहब
जब चले गए तो कोई बाबा साहब के परिवार का
हमारे कार्यक्रम में नहीं आया यह बड़ी
खुशी की बात है कि 1956 के बाद आज लगभग 67
साल बाद 6757 67 साल बाद दोबारा से वो
पुनः इतिहास को दोहराया जा रहा है कि बाबा
साहब के पुत्र यशवंत राय जी इस कार्यक्रम
में मुख्य अतिथि हैं सारा समाज हर्षित है
और खुशी की लहर है पूरे समाज के अंदर और
भारी संख्या में दिल्ली के लोगों से मैं
अपील करूंगा कि आप बाबा साहब के पुत

ओजस्वी विचार सुनने के लिए भारी से भारी
संख्या में लालकिला ग्राउंड में पहुंचे ये
मेरी समय तारीख स्थान ये गुरु रविदास
जयंती 24 फरवरी 2024 को शनिवार को मनाई जा
रही है और लालकिला ग्राउंड में 12 बजे
कार्यक्रम आरंभ हो जाएगा और 12:00 बजे के

बाद दो घंटे वहां सभा चलेगी 2 बजे से वहां
से शोभा यात्रा आरंभ हो जाएगी शोभा यात्रा
लाल किला से आरंभ होकर कोडिया पुल पुरानी
दिल्ली रेलवे स्टेशन फतेहपुरी खारी बावली
सदर बाजार अ ईस्ट पार्क रोड रानी झांसी

रोड आर्या समाज रोड से गुरु रविदास मंदिर
होते हुए प्रभात पोट गुरु रविदास भवन पर
समाप्त होगी तो साथियों 24 तारीख को समाज
की चौपाल दिल्ली में लग रही है यह आपको तय
करना है कि घर बैठकर टीवी देखना है या

सड़कों पर आकर अपने समाज की यूनिटी को
आपको तय करना है आपको सिद्ध करना है कि हम
सब एक हैं जिस तरीके से वर्तमान में
व्यवस्थाएं चल रही हैं और कहीं ना कहीं
षड्यंत्र तो किसी छुपा नहीं है कि हमारे

समाज के साथ किस तरीके से षडयंत्र वर्तमान
में भी जारी है यह आपको तय करना है घर से
निकलिए 24 तारीख को लाल किला पहुंच है और
अपनी जो संगठन है उसको ताकत प्रदान कीजिए
मैं हूं मनोज जनतानी आज दिल्ली से इस खास
खबर के लिए
धन्यवाद

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