चुनाव से ठीक पहले यूपी में फंसा पेंच, मोदी खुद मैदान में उतरे, भाजपा के छूटे पसीने!

नमस्कार मैं हूं संजय शर्मा आप देख रहे
हैं 4 पीएम न्यूज नेटवर्क प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी जी ने कहा था कि हर साल दो
करोड़ नौकरी देंगे नौजवानों को 2014 में

नौजवानों ने भी कहा कि इतना बढ़िया प्राइम
मिनिस्टर आया है कि दो करोड़ नौकरिया
मिलेंगी और नौजवानों ने कसके वोट कर दिया
कुछ सालों बाद जब नौकरी नहीं दे पाए तो

प्रधानमंत्री जी ने कहा कि पकौड़े तलना भी
तो एक रोजगार होता है पकोड़े लो
नाले के पानी से गैस
बनाओ नौजवान भड़के गुस्से में आए मैंने
सर्दियों के 4 बजे लोगों को देखा है दौड़
लगाते हुए पश्चिमी उत्तर प्रदेश में

पूर्वी उत्तर प्रदेश में हजारों नौजवान
ऐसे हैं जिनका सेना में जाने का सपना था
जाड़ों के सुबह सुबह चार बजे दौड़ लगाते
थे कि भाई सेना में जाना है प्रधानमंत्री
जी ने एक झटके में अग्नि भी लाए और उनके

सपने खत्म कर दिए मतलब देश में एक लंबी
चौड़ी बेरोजगारों की फौज खड़ी कर दी गई
आजादी के बाद से इतनी लंबी चौड़ी फौज आज
तक भारत में नहीं हुई इतना बुरा हाल नहीं
हुआ और प्रधानमंत्री जब बनारस में भाषण दे
रहे थे तो ऐसे ही बेरोजगारों में योगी
सरकार नौजवानों पर लाठियां बरसा रही थी

100 हज भर्ती निकली उत्तर प्रदेश में 70
80 लाख लोगों ने भरा फॉर्म और बताया जाता
है कि पेपर लीक हो गया एक आदमी के नौजवान
के आत्महत्या कर ने की भी खबर सामने आई
मैं अभी पुश नहीं बेरहमी से बढ़ती हुई
लाठियां नौकरी के बजाय लाठियां जब पेपर हो

तो पेपर लीक करा दी जाए मुझसे एक बेरोजगार
था नेता था बेरोजगारों का वह कह रहा था कि
जानबूझ के लीक करा दिया जाता है जिसे
नौकरी देनी ना पड़े नौकरी देने के नाम पर
नाटक होता है सोचिए आप बेरोजगार कहीं से
100 लेकर फॉर्म भरता है लखनऊ आने के लिए

00 400 की जुगाड़ करता है स्टेशन की बेंच
पर सोता है सड़क पर सोता है इन हालात में
पेपर देने जाता है पेपर लीक हो जाता है
प्रधानमंत्री लंबी चौड़ी बातें करते हैं
कि हमने यह मंदिर बना दिया हमने वो मंदिर

बना दिया हमने यहां दिए जला दिए वहां दिए
जला दिए और नौजवान लाठी खाता है पेपर लीक
हो जाते
हैं राजनीति बहुत बदल रही है जो केजरीवाल

लगता था गठबंधन नहीं करेंगे उनसे समझौता
लगभग कांग्रेस का तय हो गया और फिर इधर
गिरफ्तारी भी केजरीवाल की शुरू होने जा
रही है आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया कि
कहा गया था कि अगर तुमने समझौता किया तो
जेल तैयार है लेकिन केजरीवाल की पार्टी ने

कह दिया हमारा नेता जेल जाने को तैयार है
हम लड़ेंगे तुमसे लड़ेंगे तुमसे बंगाल में
भी ममता बनर्जी और कांग्रेस की गाड़ी पटरी

पर आ रही है उत्तर प्रदेश में समझौता हो
गया मतलब साहब का 400 तो छोड़ो 272 की
घड़ी की स भी मामले पर अटकने लग 272 नहीं

पार कर करेंगे साहब तो फिर क्या हाल होगा
और फिर हम अभय दुबे से हमने आज चर्चा करी
कि राम मंदिर और विश्व हिंदू परिषद ने
करोड़ों का खेल कैसे किया बड़ी सार्थक और

बहुत रहस्य खोलने वाली आज बातें बताई
प्रोफेसर अव दुवे ने जाने माने पत्रकार
जिनको आप बड़े-बड़े टीवी चैनलों पर देखते
हैं कई किताबें लिखी है बहुत शानदार
पत्रकार है और आज की बातचीत में आपको बहुत

सारे रहस लेंगे देखिएगा जरूर पूरा
इंटरव्यू उससे पहले चैनल को जवाइन कीजिएगा
सब्सक्राइब करिएगा शुक्रिया स्वागत है अभय
जी 4 पीएम न्यूज नेटवर्क में आपका और आप
का शो जो है लोग सुनने को बड़ा बेताब रहते
हैं रोज मैं देख रहा हूं लाखों लाखों लोग

इंतजार करते हैं कि अभय दवे जी की बात हो
मैं आपके मुंह पर तारीफ नहीं कर रहा लेकिन
जो विश्लेषण आपका होता है जो आपकी

राजनीतिक पिछले दिनों का अनुभव है वो
बेमिसाल है मतलब लोगों के जो कमेंट आ रहे
हैं मैं देख रहा हूं बहुत दीवान है लोग
आपके और मुझे भी बहुत कुछ सीखने को मिलता

है आपसे बात करके आज मैं बात ये तो आप आप
लोगों की मेहरबानी है कि आप इस तरह सोचते
हो आप सवाल भी तो अच्छे पूछते हैं चर्चा
भी अी करते हैं बहुत इनसा किस्म की चर्चा
होती है तो उसम फिर दिमाग से अच्छी बातें
भी निकलती है हम लोग तो सर जब पत्रकारिता
शुरू कर रहे थे तब से आपको सुनते थे हम

कहते कितना अच्छा बोलते टीवी चैनलों प जिस
बड़े चैनल पर खोलो तो उसम आपका सबसे अलग
विशेषण आप नजर आता था आज बात शुरू करूंगा
सर मैं उत्तर प्रदेश से प्रधानमंत्री जी
अपने निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी में गए हर
बार की तरह लंबे चौड़े भाषण दिए राहुल

गांधी पर हमला किया और लंबी लंबी योजनाओं
की बात करी प्रधानमंत्री जी ने कहा था कि
जब वह सत्ता में आएंगे तो दो करोड़ नौकरी
हर साल देंगे बाद में उन्होंने अपनी नौकरी
की परिभाषा बदल दी और कह दिया पकौड़े तलना

भी तो एक रोजगार होता है लेकिन पढ़े लिखे
नौजवान जो परेशान थे उनको लगा हम इतने पढ़
लिख के कैसे क्या केवल पकौड़े लेंगे मैंने
तो अभ जीी गांव में जब भी गया हूं तो
मैंने दर्जनों ऐसे नौजवानों को देखा है जो
जाड़ की सुबह 4 बजे उठ के मैं तो कभी नहीं

उठ पाता सोच भी नहीं पा सकता लेकिन 4 बजे
उठक दौड़ लगाते थे ऐसे हजारों लोग है
खासतौर से मेरठ की तरफ आप चले जाइए या और
बाकी और मुजफ्फरनगर के जाइए सुबह चार बजे
उठके दौड़ लगाते थे कि हम सेना में जाना
है फौज के एक जुनून था दीवानगी थी

पूर्वांचल के कई जिलों में ऐसा लगता था
लेकिन उनको फिर नौकरी के नाम पर चार साल
का अग्निवीर थमा दिया गया अभी 10000 की
लोगों की पुलिस की भर्ती निकली थी उत्तर
प्रदेश में

70 80 लाख लोगों ने आवेदन किया सोचिए
10000 के और सरकार इतना इंतजाम नहीं कर
पाई कि उनको शिफ्ट में एग्जाम करा लेती
कोई व्यवस्था कराती लोग ट्रेनों में लटक

लटक के आए सड़क पर सोए एग्जाम दिया हर बार
की तरह पता चला पेपर लीक हो गया राजस्थान
में पेपर लीक को लेकर बीजेपी ने मुद्दा
बनाया था बहुत बड़ा मुद्दा बनाया था आज जब
प्रधानमंत्री बनारस में भाषण दे रहे थे तो
नौजवान इकट्ठे हुए और लखनऊ में मांग कर
रहे थे कि पेपर लीक हुआ है इसकी जांच कराई

है परीक्षा निरस्त कराई है अभ्यार्थी जो
आए हैं एक शहर से लखनऊ तक आने जाने में जो
300 400 500 मिनिमम खर्च होते हैं वभी
बहुत बड़ी समस्या है किसी परिवार के लिए
00 400 इकट्ठा करना जुटाना फॉर्म भरना

फॉर्म की फीस लगाना उन परे इतनी बेरहमी से
आज लाठियां चलाई गई है उत्तर प्रदेश में
एक आप तो आप उनको नौकरी नहीं दे रहे हो
फिर जब वो बांग कर रहे हैं तो उन पर
लाठियां चला रहे हो लाठिया टांग के पुलिस
भर के ले गई और बहुत दूरी को इडन उसके

 

आसपास जाने कहां फेक आई और बहुत चोट वोट
लगी है तो प्रधानमंत्री जी को यह जरासी भी
अपने अंदर शर्मिंदगी महसूस नहीं हुई कि वह
उत्तर प्रदेश में हैं नौजवानों ने भरोसा

करके उनका साथ दिया था आज उन पर लाठियां
चल रही हैं कोई जिक्र नहीं मंदिरों के
उद्घाटन बड़ी बड़ी बातें प्रधानमंत्री के
अंदर ऐसी सोच क्यों हो गई है अभय जी देखिए
प्रधानमंत्री की तो और राष्ट्रीय स्वम
सेवक संघ की दोनों की थीसिस है कि लोगों

को किसी भी किस्म का आंदोलन करना ही नहीं
चाहिए उनके पास रोजगार हो या ना हो उनके
पास आमदनी के साधन हो या ना हो वह सुरक्षा
सामाजिक सुरक्षा उनके पास हो या ना हो
पेंशन हो या ना हो उन्हें कोई आंदोलन करना
ही नहीं चाहिए कोई भी आंदोलन जो कि

संविधान द्वारा चुनी गई सरकार के खिलाफ है
वह आंदोलन अनुचित है वह अवांछनीय आंदोलन
है ऐसे किसी भी आंदोलन के साथ सरकार कोई
हमदर्दी नहीं रखती किसी भी मांग के साथ
सरकार कोई हमदर्दी नहीं रखती यह बाकायदा

इन लोगों की एक थीसिस है जिस थीसिस के
आधार पर ये गवर्नेंस का अपना मॉडल बनाते
हैं उत्तर प्रदेश की सरकार भी तो इसी
थीसिस के व्यापक दायरे की दायरे का हिस्सा
है वो अलग से तो है नहीं तो जाहिर है जो
भी व्यक्ति आंदोलन करेगा उसको नहीं बख

जाएगा उसके खिलाफ लाठी चार्ज भी होगी उसको
ट्रक में भर के कहीं दूर पटक दिया जाएगा
उनकी गिरफ्तारियां भी होंगी और उनके ऊपर
मुकदमे भी लगाए जाएंगे और अगर उनके आंदोलन
से कोई सरकारी संपत्ति का नुकसान नुकसान
हो गया तो उनसे हरजाना भी वसूला जाएगा अभी
देखिए हरियाणा सरकार ने कारवाई शुरू कर दी
है किसान नेताओं के खिलाफ आंदोलन के दौरान

जो कुछ भी नुकसान हुआ है उसका पूरा हरजाना
किसान नेताओं से बदलने की पूरी कारवाई
शुरू हो चुकी है हरियाणा में इस वक्त और
यह लखनऊ में भी हो चुकी है और दूसरे
प्रदेशों में भी भाजपा शासित प्रदेशों का
यही गवर्नेंस का मॉडल है इन लोगों का

बिल्कुल
ये बेरोजगारी समाप्त करना इनकी ड्यूटी है
लेकिन यह बेरोजगारी समाप्त करने की बात कर
के आए सत्ता में उसके बाद इन्होंने
स्वरोजगार की चर्चा शुरू कर दी पकौड़े
तलना उसी का हिस्सा है स्वरोजगार की चर्चा
शुरू कर दी और स्वरोजगार देने के इनके पास
तरीके नहीं है फिर इन्होंने एक स्किल

मंत्रालय बनाया जो पूरी तरी मोदी सरकार का
सबसे ज्यादा फ्लॉप बहुत से मंत्रालय फ्लॉप
है लेकिन यह मंत्रालय सबसे ज्यादा फ्लॉप
है इसमें बहुत भ्रष्टाचार हुआ था स्किल
सेंटर बने थे उस भ्रष्टाचार के कारण इस

मंत्रालय के तत्कालीन मंत्री को बाद में
ड्रॉप भी किया गया मंत्रिमंडल से कहा नहीं
गया लेकिन सब लोग जानते कि वो करप्शन के
कारण ही ड्रॉप हुआ तो ये जिस चीज की तरफ
आप इशारा कर रहे हैं मोदी ने इसका जिक्र
नहीं किया और ये लखनऊ में हो रहा था बनारस
में वो डींगे मार रहे थे आदतन तो ये एक

इनकी इनकी पूरी एक नीति इनका मॉडल है
पूरा उसका दूसरे मोदी जी को इस मामले में
महारत हासिल है कि वो हमेशा एक फील गुड
नैरेटिव चलाते रहते हैं उनके भाषणों में
ये शब्द आपको अक्षर मिलेगा गर्व से कहो कि

ये हुआ है गर्व से कहोगे हम वहां पहुंच गए
हैं गर्व से कहोगे ये हो गया ये आप लगातार
एक ये एक फील गुड नैरेटिव लगातार चलाते
रहते हैं विज्ञापन अदान चल ही रहा है
अखबारों में टीवी के ऊपर आप जो उत्तर
प्रदेश सरकार के विज्ञापनों ने टीवी के
दूसरे सरकारों के विज्ञापनों से जबरदस्त

होड़ ले रखी है बहुत बहुत देर तक विज्ञापन

आता रहता है आप सो जाएंगे इतनी देर तक
उनका विज्ञापन चलता रहता है आप सोचिए
कितना जबरदस्त पैसा इन विज्ञापनों के ऊपर
खर्च हो रहा होगा जहां तक पेपर लीक होने

का सवाल है यह एक राष्ट्रीय समस्या बन गई
है बीजेपी की सरकार है इस राष्ट्रीय
समस्या में विशेष रूप से योगदान दे रही है
जहां तक मेरी जानकारी य है कम से कम यह
तीसरा पेपर लीक है अभी हाल फिलहाल उत्त


प्रदेश
में तो इसी से अंदाज लगा सकते हैं कि
10000 रिक्तिया थी उन 100 हज रिक्तियों
में 70 8 लाख लोगों नौजवानों
ने अब नौजवानों ने आवेदन किया था इससे आप
अंदाज लगा लीजिए कि बेरोजगारी की स्थिति
कितनी भयानक है और कितनी बुरी है और सरकार

के पास इस इसका हल करने का कोई तरीका नहीं
है अगर आपकी गर्ज है तो आप अप्लाई कीजिए
फॉर्म खरीदिए आने जाने का पैसा खर्च कीजिए
वहां रहेंगे उसका खाने पीने का पैसा खर्च
कीजिए और करके चले ये तो ये तो पेपर लीक
की वजह से य गड़बड़ हुआ अगर मान लीजिए

पेपर लीक नहीं होता इम्तिहान हो जाते कब
उसका नतीजा आता कभी-कभी तो नतीजे के लिए
ही वर्षों इंतजार करना पड़ता है लोगों को
यह पुलिस की रिक्तियां थी शायद इसमें

नतीजा आ जाता जल्दी लेकिन आमतौर पर सारे
देश में रोजगार की स्थिति यह है खास तौर
से बड़े-बड़े उत्तर बड़े प्रदेशों में
इम्तहान हो जाता है इंटरव्यूज तक हो जाते
हैं और तो और कभी-कभी लोगों के पास चयन
होकर उनके पास नियुक्ति पत्र भी पहुंच

जाते हैं वो अपने नियुक्ति पत्र लिए बैठे
रहते हैं वर्षों तक उनको उनको चार्ज लेने
के लिए बुलाया नहीं
जाता उनको कोई जगह का अलॉटमेंट नहीं होता
आपको ध्यान होगा कि हमारे आपके मित्र है
रवीश कुमार उन्होंने एनडीटीवी ऊपर बहुत

लंबे बहुत लंबी एक सीरीज की थी जो सब
इन्हीं सब कारणों का इही सब कारणों का
बयान करती थी तो ये तो एक मॉडल है और जिस
मॉडल को इस इस मोदी सरकार ने और भाजपा
सरकारों ने हम सब लोगों के ऊपर थोक दिया
है अभ जी मुझे बताइए य 70 8 लाख जो नौजवा


आए आप इनको बताएंगे जब इनसे कहेंगे कि
देखो हमने इतना भव राम मंदिर बना दिया
हमने इतना बड़ा काशी कोरिडोर बना दिया हम
दिए जलाते हैं तो क्या यह नौजवानों के
मंदिर में मंदिर और दिए याद आएंगे अपनी
नौकरियां याद आएंगी और फिर वोट वो क्या

सोच के करेंगे नहीं देखिए ये तो जो राम
मंदिर मामला था राम मंदिर का शोर तो अब
गुम हो चुका है राम मंदिर का शोर पूरी
तरीके से दब चुका है दरअसल अब राम मंदिर
की कोई भी चर्चा नहीं करता राम मंदिर बन

के दर्शन कराएगा और ना उसकी अब चर्चा भी
खत्म हो चुकी है पूरी तरीके से सरकार को
जो श्रेय मिलना था वो मिल चुका है मैं ना
तब मानता था ना अब मानता हूं राम मंदिर के
ऊपर वोट नहीं पड़ेंगे अगर मोदी जी ने यह
गलती की राम मंदिर के ऊपर वोट मांगने की

तो उनको बहुत बड़ा नुकसान होने वाला है और
वो जानते हैं कि राम मंदिर पर वोट नहीं
मांगना होगा इसलिए व राम मंदिर पर वोट
मांगे ग भी नहीं तो मुझे नहीं लगता है कि
राम मंदिर इन चुनाव में कोई बड़ा फैक्टर

बनने वाला है ज्यादा से ज्यादा यह हो सकता
है कि बीच बीच में मोदी जी की तरफ से
भाजपा की तरफ से यह दावे होंगे भाई हमने
बायदा किया तो हमने राम मंदिर बना दिया

हमने इतना बड़ा तीर्थ स्थल बना दिया एक
बहुत बड़ा वो होगा टूरिस्ट एक धार्मिक
पर्यटन का एक केंद्र बनेगा अयोध्या वगैरह
वगैरह इस प्रकार की इस प्रकार की बातें की
जाएंगी और उसके अंदर जो एक तरह का पूंजी

का खुला खेल हो रहा है उसको धार्मिक
पर्यटन का केंद्र बनाने में किस तरीके से
वहां पर जमीनों का जमीनों जमीनों के के
मालका बदले गए हैं उनकी खरीद फक्त हुई है
जमीनों के कीमतें बढ़ी है वहां बड़े-बड़े

बड़ी-बड़ी कॉलोनी बन रही है और सब हो रहा
है तो वो एक अलग शोध का और चर्चा का विषय
है अमिताभ बच्चन भी अयोध्या में दो दो बार
आ रहे हैंस राम मंदिर बना और दूसरे दिन से
ही उन्होंने दूसरे दिन से ही उन्होंने
लीला ग्रुप का एक विज्ञापन शुरू कर दिया

था और उसके अंदर जब मैंने विज्ञापन देखा
तो मैं देख के हैरत में पड़ गया उसके अंदर
1200 या शायद 12 1300 स्क्वायर फीट का जो
जो फ्लैट था वो करोड़ रुपए का था दो तीन
करोड़ रुपए का था हा दोती करोड़ का था
केला नहीं है जो कहा गया है ना कि राम नाम

की लूट मची है लूट मचे स लूट अंतकाल
पछताएगा प्राण जाएंगे छूट आप देखो जैसे ही
मंदिर की जमीन का मामला हुआ मंदिर की जमीन
खरीदने में करोड़ों रुपए की हेराफेरी का
मामला सामने आया मैंने 4 पीएम के फ्रंट
पेज पर तीन चार फुल फुल पेज स्टोरियां करी

जो जमीन अभय दुबे जी पा करोड़ में संजय
शर्मा को भेज बेच रहे हैं संजय शर्मा
ट्रस्ट के लिए वही जमीन एक घंटे बाद 18
करोड़ में बेज दे रहे हैं सीधा सधा तराय
का नाम आया चंपत राय जी को भी छोड़ दीजिए

भारतीय जनता पार्टी के स्थानीय विधायक
भारतीय जनता पार्टी के मेयर जमीन घोटालों
में लंबा चौड़ा नाम आया इसके अलावा जो

अफसर तना थे डीमएस पी आईजी डीआईजी कमिश्नर
निचले स्तर सबने जमीन लूट कर ली वहां पर
जमीनों की भयंकर लूट हुई वो जो सर्कलेट
होता है वो बढ़ाया नहीं गया यानी पूरी

अयोध्या को लूटने में लग गए लोग जब हम
लोगों ने लगातार छापा चोरियां चलाई अे जी
एक राजस्व परिषद के एक पीसीएस अफसर को
इसकी जांच दी गई कि पूरे लूट की जांच करिए
मैंने आरटीआई में पूछा है सरकार से कि वोह

जांच रिपोर्ट कहां है मेरी आरटीआई का जवाब
नहीं मिला अभी तक मुझे क्योंकि वह जांच
रिपोर्ट आनी नहीं है सारे सारे इतने बड़े
नाम है जो जमीन घोटाले में तो अभे जी मैं
जानना चाहता हूं जो राम मंदिर जिसको आप

राम मंदिर बनाने को सबसे बड़ा टारगेट
बताते हो प्रोजेक्ट बताते हो भगवान राम की
बात करते हो उस अयोध्या में इतनी बड़ी लूट
हुई एक भारतीय जनता पार्टी की नेत्री है
अभय जी उनके पति शिक्षा विभाग के मामूली

अफसर हैं वहां जो उन्होंने होटल बनाया
होटल की कीमत 100 करोड़ रुपया मैंने पूरा
होटल और पूरी कहानी छाप दी उनके पतिदेव ने
मुझे नोटिस दे दिया मान हानी का मैंने और

डिटेल से छाप दी हंगामा हुआ पति तो
सस्पेंड हो गए लेकिन कारवाई कुछ नहीं हुई
तो इनको ईडी इनकम टैक्स ऐसे लोगों को
दिखाई नहीं देता है अयोध्या को भी ऐसे
लूटते हैं जांच रिपोर्ट आती है कोई शरम
वर्म नहीं आती है देखिए आप जो बात कह रहे

हैं आप देखिए चंपत राय और इस किस्म के लोग
यह तो इस खेल के न्यू कमर्स है जिस खेल का
आप जिक्र कर रहे हैं यह इस खेल के न्यू

आंदोलन शुरू हुआ था उस वक्त से चल रहा है
आपको ध्यान होगा राम जन्मभूमि आंदोलन के
लिए बहुत बड़े पैमाने पर करोड़ों करोड़ों
रुपए का चंदा जमा हुआ था उस चंदे को इनकम

टैक्स के एक कमिशनर हुआ करते थे मैं उनका
नाम भूल रहा हूं अब हम लोगों के व बीच में
नहीं है बाद में वो बहुत टीवी पर भी आया
करते थे बहुत चर्चित व्यक्ति थे उन्होंने
इनको इनको नोटिस दिया था कि भाई आप उसका
हिसाब किताब दीजिए उस आमदनी का वो चकि इन

लोगों का एक तरह का इन्होने डिस्कोर्स
बनाया है नए देश में और एक तरह का दबदबा
है बीच में उस वक्त 6 साल तक अटल बिहारी
वाजपेई की सरकार रही बीच में कांग्रेस
सरकार रही उसने भी इस बात के ऊपर जोर नहीं

दिया तो अशोक
सिंघल थे उस वक्त इस सब चीजों के इंचार्ज
तो वो सब इस मामले ये सब लोग उस इनकम
टैक्स के मामले में फसे रहे लंबे अरसे तक
तो इनका मानना यह है कि हम राम मंदिर बना
रहे हैं और किसी की कोई मजाल नहीं है कि
हमारी जो आर्थिक गतिविधियां है उनके ऊपर
उंगली
रखे अगर कोई उंगली रखता है इनके ऊपर तो ये
फौरन कहते हैं कि भाई ये राम काज के खिलाफ
है तो वो वो इनकम टैक्स कमिशनर जो थे अभी
नाम याद आ जाएगा तो मैं बताऊंगा बहुत ही
प्रचलित नाम है अभी आपके आपके दिमाग में

भी उनका नाम आ सकता है बहुत उनकी चर्चा
हुई थी तो उन्होंने इनको नोटिस दिया था और
उसमें यह लोग बिल्कुल उनके हाथ फसे हुए थे
कितनी बातें कहीं जाती है कि लोग अशोक
सिंघल के घर पर थे और अंदर के कमरे में गए
तो उन्होने क्या देखा मतलब इसके बारे में

कोई इसका कोई कोई सीमा नहीं है जो बातें
कही जाती है यह खेल इसमें करोड़ों करोड़ों
अरबों रुपए का खेल है इसके अंदर और वो राम
जनू आंदोलन के जमाने से चल रहा है और इस
वक्त यह खेल अपने पूरे शिकर पर
है अच्छा अ इसकी भी छोड़ दीजिए जब वो राम
मंदिर की बात करते हैं मुलायम सिंह पर

गोली चलाने का आरोप लगवा हैं उस जमाने में
प्रमुख सचिव हुआ करते थे सचिव हुआ करते थे
मुख्यमंत्री के मुख्यमंत्री का सचिव पूरी
कमांड रखता था और व मतलब मुख्यमंत्री को
जिले के सब डीएम एसपी सिर्फ उसके संपर्क

में रहते थे अयोध्या में जब गोली चली तो
डीएम तो ऑफकोर्स सीधा मुख्यमंत्री थोड़ी
पूछेगा सर क्या हालात है वो तो सचिव
मुख्यमंत्री का पल टू पल कवर कर लेगा कि

क्या करना है वोह निर्देश देगा गोली चली
मुख्यमंत्री के जो डीएम थे सीधे
मुख्यमंत्री के सचिव के निर्देशों का पालन
कर रहे थे उनके निर्देशों के पालन में
गोली चल गई और उस मुख्यमंत्री के सचिव का

नाम था निपेंद्र मिश्रा तो इ यह भी नहीं
रहा इन्होंने मंदिर ट्रस्ट का अध्यक्ष ही
उसको यानी राम मंदिर ट्रस्ट का मुख आदमी
वो बना जो बलायम सिंह का सचिव था एक तरह
से गोली चलाने का जिम्मेदार था इस उम्र
में पहले उसको अपना सचिव बनाया

प्रधानमंत्री जी ने फिर मंदिर ट्रस्ट का
अध्यक्ष बनाया और इस उम्र में और तोहफा दे
दिया बेटे को बीजेपी का एमएलसी बना दिया
तो यहां कुछ य कोई नैतिकता वकता नहीं है
पर देखिए ये आप आप आप जो आप जो बात
नैतिकता वगैरह की कर रहे हैं इस बात को

सुनके तो लोग अकेले में मुस्कुराते होंगे
तो मेरा कहना यह है जो नृपेंद्र मिश्रा जी
है नृपेंद्र मिश्रा जी रिटायरमेंट के बाद
में विवेकानंद फाउंडेशन में चले गए जहां
पर ये भी थे जो आजकल सुरक्षा सलाहकार है

ना ल साहब हा हा वो थे तो वो और भी उसम के
बड़े रिटायर्ड अफसर बुद्धिजीवी यह
राष्ट्रीय सम सेवक संघ का संगठन जब
नरेंद्र मोदी की 2014 में सरकार बनी तो इस
सरकार का जो जो जो कोर ग्रुप बना अफसरों
का पीएमओ के अंदर प्रधानमंत्री के दफ्तर

में कोर ग्रुप बना वो विवेकानंद फाउंडेशन
से आया हुआ था प्रधानमंत्री के प्रिंसिपल
सेक्रेटरी कौन बने दप मिश्रा बने और
सुरक्षा सलाहकार का भी नाम आपने खुद ले ही
लिया तो मिश्रा को प्रिंसिपल सेक्रेटरी

बनाने के लिए
नरेंद्र मोदी की 2014 वाली सरकार को कानून
में परिवर्तन करना पड़ा संशोधन करना पड़ा
वो उस सरकार का पहला संशोधन या उस सरकारने
किलिए आप इससे अंदाज लगा मिश्रा का महत्व
सरकार के लिए कितना
है गोली चलवाई होगी अके आदेश से तो उसको य

लोग मानते होंगे उन्होने बड़े अच्छे दव का
निर्वाह किया सही बात
है कि उनके कने गली चला द उनके कहने में
गोली चला दी तो हमारे कहने में पता नहीं
क्या कर देंगे हा बात सही है अरे अभय जी
वहां पर एक कार सेवक को चार गोलिया लगी थी

बच गया और बाद में वो गुंबद उसके ऊपर गरा
उसकी 17 18 हड्डिया टूटी वो मुझसे
इंटरव्यू करते करते रो पड़ा कह रहा हमारे
संगी साथी सबको गोलिया लगी मर गए हमारे
पता नहीं रामचंद्र जी ने कैसे बचा लिया
मेरे को 1 हड्डिया टूटी और बोले आज दिल
दुखता है कि उसी जिस आदमी ने गोली चलवाई
वो ट्रस्ट का अध्यक्ष बना हुआ है क्योंकि
वो निप मिश्रा के चेयरमैन और नियमत की
ट्राई का चेयरमैन सीधे कोई पद नहीं ले
सकता कुछ सालो तक तो अध्यादेश ला गए लेकिन
इससे भी मजे की बात मैं आप दर्शको को आज
खुलासा करूं कि जो अ जी ने बताया कि
विवेकानंद फाउंडेशन डवाल साब नि मिश्रा एक
बना हुआ है यह लोग कैसे लोगों को फसाते
हैं इनको लगा कि चलो 4 पीएम चैनल बहुत
देखा जा रहा है बहुत सुना जा रहा है तो यह
कैसे करीब लाते हैं अभ जी अभी करीब पाच छ
महीने पहले गुजरात प इस फाउंडेशन का
फंक्शन हुआ मेरे पीछे पड़े बाका
कि मैं उस फाउंडेशन के उस कार्यक्रम में
आऊ एक कोर ग्रुप में पैनल में मुझसे
बातचीत करने के लिए मुझे रखा गया बाकायदा
फोन आप कौन सी फ्लाइट से आएंगे होटल
करेंगे गाड़ी करेंगे मैंने के हाथ जोड़
मैं कहा सर मैं बड़ा व्यस्त हूं मैं आ
नहीं पाऊंगा तो यहां पर ऐसे चारा डाला
जाता है कि अगर कोई व्यक्ति एक्टिव है तो
उसे भी अपने संघ लाओ उससे भी बातचीत करो
और ये संघ का मैंने चकि काम भी किया
विद्यार्थी परिषद में यह संघ का बड़ा
प्रचलित आईडिया है संघ कहता भी है बीजेपी
के लोगों
कि भाई कोई दुश्मन भी है तो उसके घर आना
जाना शुरू तो करो चाय पियो अब मैं आपको
बहुत मजेदार बात बताऊं कि उत्तर प्रदेश
में एक कार्यक्रम हुआ और उत्तर प्रदेश के
कुछ जिलों के कुछ बड़े चुनिंदा लोग बुलाए
गए अमित शाह जी ने उस कार्यक्रम में मुख
भूमिका करी और विषय ता कि मीडिया से
रिश्ते कैसे किए जाए ये कुछ साल पहले की
बात है तो उसम बाकायदा स्लाइड लगाई गई उस
स्लाइड में लगाया गया प्रिय हमारे प्रिय
सहयोगी मीडिया सबसे ऊपर नाम ऑफकोर्स दनी
जाग का होना था सुधीर चौधरी के चैनलों का
होना था फिर मध्यस्थ मीडिया उसमें अमर
जाला था और शायद एक कोई और अखबार था फिर
लिखा कि खिलाफ मीडिया तो उसमें मैं था एक
नाम और थे एक दो लोग और थे तो उसमें एक
सहयोगी ने कहा कि साहब देखिए वो हम लोग ये
नहीं कर पाए उनका वो नहीं कर पाए मतलब कि
आप विध्वंसक कुछ नहीं कर पाए कि भाई सिर्फ
जांच करा के रह गए संजय शर्मा की तो अमित
शाह जी ने एक अच्छी बात कही मैं मानता हूं
कि अमित शाह वाकई संघ के आदमी है और फिर
ये प्रस्ताव आया कि भाई बीजेपी के कार्य
ऑफिस में एक कक्ष होना चाहिए
हमें ऐसे लोगों को लाइज करना चाहिए जब वो
आते हैं तो उनका स्वागत सत्कार करना चाहिए
बुलाए हम मान लीजिए किसी को जो विरोधी
वाले व नाश्ता अच्छ हैम शाह जी ने कहा कि
यार तुम क्यों पागल हो रहे हो देखो अखबार
वाले लेट काम करते हैं देर तक जगते काम
करते हैं सुबह देर तक जगते हैं तो तुम्हे
अगर अ वालो से दोस्ती करनी है तो ज वो जगे
तो मुझसे पहले उनके घर पहुंच जाओ कि आज
चाय पीने आए पकोड़ी खाने आए हैं रिश्ते
ऐसे बनाना शुरू करो तो मैं मैं इस बात की
मैं उनकी प्रशंसा करूंगा कि अगर कोई में
आपने प्रणम मुखर्जी को उन्होंने बुला ही
लिया ना वो संघ के जो प्रणम मुखर्जी
जिंदगी भर वो बीजेपी की मुखालफत करते रहे
आखिर में वो संघ के कार्यालय में चले ही
गए तो उनकी ये पॉलिसी है कि जो विरोध में
उसको भी अपने आप बुला लो जो फस जाए अगर
मैं गुजरात जाता तो पता नहीं क्या डोभाल
साहब के बेटे थे वो कौन-कौन थे क्या क्या
मुझे भी घुट्टी पलाई जाती पता नहीं मेरा
मन भी कह मैं तो दूर से नमस्ते कर लेता
हूं खैर ये विषय से अलग हम लोग चले गए
विषय से अलग नहीं है आपने आप आप जिसका
जिक्र कर रहे हैं इसकी राष्ट्रीय
स्वयंसेवक संघ में एक पुरानी परंपरा है
यह परंपरा 50 और 60 के दशक से चल रही है
इसका एक इतिहास है और उस इतिहास के जनक जो
है बाकायदा ये ऑन रिकॉर्ड है जो बात मैं
कह रहा हूं मैं गप्प नहीं बाढ रहा हूं वो
श्री दत्तोपंत ंगड़ी थे अच्छा दत्तोपंत
ंगड़ी ने एक पुस्तका लिखी थी कि उस
पुस्तका का मकसद यह था कि मीडिया के साथ
किस तरह व्यवहार किया जाना चाहिए अच्छा जो
जन हा और क्या उसम ये तक बा 60 के दशक में
क्याक में समोसा चाय खिलाया जा सकता था
उसके अंदर ये था कि भाई आप उनको सही वक्त
पर बुलाइए उनको ठीक से चाय पिलाइज खिलाइए
उनको मिठाई खिलाइए उनका ठीक से स्वागत
सत्कार कीजिए ये सारी बातें निर्देशों के
तौर पर उस पुस्तका में लिखी हुई है अच्छा
तो इसमें यहां तो देखिए य इसमें किस तरह
से जो पब्लिक ओपिनियन है उसको कैसे बनाया
जाता है उसको कैसे सेट किया जाता है उसको
कैसे उसका
एप्रोप्रियेट पुराना टास्क मतलब पुराने
जमाने से ही चल रहा है इनके य ये कोई नई
बात नहीं है अब येक मीडिया का साइज बहुत
बढ़ गया है मीडिया बहुत महंगा भी हो गया
है कैपिटल इंटेंसिव गेम है मीडिया उसम
हजारों हजारों करोड़ रुपए लगे हुए हैं उस
वक्त तो ये सब होता नहीं था तो अब तो जब
जैसे ही नरेंद्र मोदी नरेंद्र मोदी का
सबसे बड़ा अफसोस गुजरात के मुख्यमंत्री के
तौर पर क्या था उनका अफसोस यह था कि वो
मीडिया को सेट नहीं कर पाए और मीडिया ने
उनके खिलाफ माहौल बना दिया कि इन्होंने जो
है 2002 में मुसलमानों के नर संधार में
चुपचाप बैठे रहे और एक उसको बढ़ावा देते
रहे नरेंद्र मोदी यह मानते थे कि गुजरात
के मुख्यमंत्री के तौर पर सबसे बड़ी
विफलता यह है कि मीडिया का प्रबंधन ये
नहीं कर पाए इसलिए जैसे ही ये
प्रधानमंत्री बने इन्होंने पहला काम ये
किया कि उन्होंने कहा मीडिया को प्रबंधित
किया
जाए और इतनी खूबी के साथ उन्होंने मीडिया
को प्रबंधित किया इसकी कोई सीमा नहीं है
मैं आपको बताऊं भारत के इतिहास में मीडिया
का सरकारी करण इतना आद्यो पान नीचे से ऊपर
तक 360 डिग्री हुआ है मीडिया का मीडिया का
जो सरकारी गरण हुआ है उसकी कोई सीमा
नहीं तो यह बहुत ही जबरदस्त और यह बात जब
1977 में पहली बार बीजेपी वाले सत्ता में
आए थे और लाल कृष्णवानी जो नरेंद्र मोदी
के गुरु थे वो जब सूचना एवं प्रसारण
मंत्री थे तब उन्होंने क्या किया आज जो
आपको बड़े पैमाने पर मीडिया में बड़े बड़े
पदों पर जो लोग दिखते हैं वो उन लोग उन
लोगों का उद्गम कहां प है उन लोगों का
उद्गम वहां पर है लाल कृष्ण अडवाणी के
जमाने में है जब अडवाणी जी का लेटर लेकर
खत लेकर ये लोग जाते थे नौकरियां लेने के
लिए टाइम्स ऑफ इंडिया में रमेश जैन से
मिलते थे इंडियन एक्सम जाते थे तो सब जगह
बड़े अखबारों में पत्रिकाओं में उस जमाने
में टीवी चैनल तो टीवी के न्यूज वगैरह
होते नहीं थे केवल प्रिंट मीडिया ही था सब
जगह संघ के लोगों को जो सेट किया गया है
फिर वो लोग सब धीरे-धीरे बड़े बड़े पदों
पर पहुंचे इसमें एक बहुत ही मशहूर घटना
हुई है हिंदी के एक बड़े अखबार में जो कि
आईटीओ से निकलता था राष्ट्रीय अखबार है तो
उसमें एक एक सज्जन अडवाणी जी का पत्र लिख
के पहुंचे रमेश जैन के पास मैं उनका नाम
नहीं बताऊंगा आप जानने वाले इस बात को
जानते हैं और उन्होने रमेश जैन को पत्र
दिया रमेश जैन ने पत्र पड़ ठीक है आप घर
जाइए आपको हर महीने सैलरी पहुंच जाया
करेगी र ने कहा उन्होने कहा नहीं नहीं मैं
घर नहीं आऊंगा मैं काम करने आया
हूं मैं नौकरी करूंगा मैं काम भी
करूंगा तो वह वहां पर रहे फिर वो उस अखबार
के रेसिडेंट एडिटर बने और और दूसरे बड़े
पदों पर पहुंचे और अपने दूसरे लोगों को भी
उन्होंने लगाया पूरा देखिए रिपोर्टिंग से
लेकर डेस्क वर्क से लेकर सब एडिटर से लेकर
और रेजिडेंट एडिटर तक चीफ एडिटर तक स्पेशल
करेस्पॉन्ड ब्यूरो यूरो सब जगहों पर
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की राजनीति से
प्रभावित उसका समर्थन करने वाले लोग जो आज
आपको कदम कदम पर दिखाई पड़ते हैं उसकी
शुरुआत दत्तोपंत ंगड़ी और लाल कृष्ण अडवाण
के प्रयासों में निहित
है अगर बहुत बड़ा नेटवर्क है आप इसकी
कल्पना नहीं कर सकते दत्तो जी बहुत बड़ा
नेटवर्क है
चिल्लाहट वगैरह करते हैं ना ये सब वही से
आए
हैं सब जदा चिल्लाता है पता चला उसका जो
चाचा है वो भी मीडिया में बहुत बड़ा हस्ती
थी और चाचा का जो ताऊ है वो भी मीडिया में
बहुत बड़ी हस्ती रखता था ये बहुत बड़ी
दुनिया है इन लोगों की अगर दत्तो पं जी
जिंदा होते तो मैं उनसे जरूर पूछता कि यह
आपके यह ख्याल अब क्यों भूल गए हैं उत्तर
प्रदेश के लोग बजाय मेरे यहां फूल लेकर
आते मिठाई लेकर आते उन्होंने मेरे खिलाफ
वार्तिक अपराध अनुन की जांच करा दी ईडी को
चिट्टी भेज दी इनकम टैक्स को भेज दी हमला
करा दिया मकान खाली करा दिया विपन उस वक्त
न लोगों कल्पना भी नहीं थी कि ये लोग
सत्ता में इतने आ जाएंगे और स्थाई रूप से
जम जाएंगे सता में आने के लिए संघर्ष कर
रहे थे सत्ता में आने की योजनाए बना रहे
थे आज तो लगता है हम वक्त के शंशा है अब
अब कै के तो अब अब अब डंडे से ठीक किया
जाएगा लेकिन इस इसका विकृत रूप देखिए आप
क्या हो गया मैं नाम नहीं लेना चाहता था
लेकिन एक सबसे तेज चैनल उसके जो मुख चेहरा
है उसकी छवि इतनी खराब आज उत्तर प्रदेश
में जब यह कि नौजवान प्रदर्शन कर रहे थे
तो उस चैनल का युवा रिपोर्टर है बड़ी
अच्छा रिपोर्टर है बड़ा बहादुर रिपोर्टर
है एवीपी में भी था पहले अब आज तक में है
वहां नौजवानों ने उ उसकी गलती कुछ नहीं है
लेकिन माइक की आईडी देखी तो लोगों में
गुस्सा इतना है अभय जी वहां पर चिल्लाने
लगे नौजवान गोदी मीडिया वापस जाओ वापस जाओ
मतलब हाथापाई होते होते बची उससे उ चैनल
की मोदया बिहार में गई तो मैडम के सामने
वापस जाओ गोदी मीडिया वापस जाओ तो आज मैं
कल चाय पी रहा था एक जने मुझसे बोले ये
चौधरी साहब अगर द द गनर लेकर ना निकले तो
पब्लिक दौड़ा ले उनको हम लोग भी बोलते हैं
हम लोग लाखों लोग देखते हैं हम तो कभी
डंडा लेकर भी नहीं सोचते आराम से पब्लिक
के बीच में जाते हैं पब्लिक सेल्फी लेती
है घूमती है खुश होती है हमारे साथ और
इनके भाई के लोग ना ये जो जनता है इस जनता
का रिएक्शन मीडिया के प्रति इतना घणा से
इतने गुस्से से हो जाएगा जी ये रुकेगा
कहां प जाके देखिए यही कारण है यही कारण
है कि जो
कमर्शियल खबरिया चैनल है उनकी टीआरपी
गिनती जा रही है बहुत लोगों ने उसको देखना
ही बंद कर दिया मुझसे बहुत लोग कहते हैं
कि भाई 4 पीएम प आपको देखते हैं हम आपको
नई परख पर देख लेते हैं हम आपको आनंद
वर्धन जी के शो में देख लेते हैं तो लेकिन
हम वो आजकल जो जिन चैनलों को जिन चैनलों प
मैं जाता हूं बहुत से लोग उनको देखते नहीं
है तो स्थिति ये है कि खासतौर 4 पीएम तो
बहुत ज्यादा लोकप्रिय हो रहा है बहुत लोग
मुझसे कहते हैं और आपसे मिलने की इच्छा भी
रखते हैं शुक्रिया शुक्रिया सर मेरे को
बड़ा अच्छा लगा कि बड़े बड़े योग लोगों का
फोन आता है एक वाइस चांसलर उनका फोन आया
इस तर बहुत लोग फोन आते हैं अव जी आज हम
लोगों ने वैसे ही अलग विष की बात करी मुख
बात पूछना भूल गया मैं आपसे अरविंद
केजरीवाल के संग लगभग समझौता त ममता
बनर्जी
का यानी इंडिया गठबंधन जो टूट य भी कहा जा
रहा है ये भी कहा जा रहा है आति ने भी
अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कह दिया सौरव
भारद्वाज ने भी अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस कह
दिया है दो-तीन दिन में केजरीवाल को
गिरफ्तार भी कर लिया जाएगा अरविंद को
गिरफ्तार भी कर लिया जाएगा देखिए हम लोग
तो ये बात एक तकरीबन एक महीने से
अनौपचारिक रूप से जानकार लोगों के बीच में
चर्चा चल रही थी कि ईडी वगैरह का जो दबाव
संबंध वगैरह ये सब जो अदालत वगैरह सब चल
रहा है य इसीलिए है केजरीवाल को ये मैसेज
देने के लिए है कि आप दिल्ली में कोई
समझौता मत कीजिए देखिए 2014 में भी दिल्ली
में कोई समझौता नहीं था 2019 में भी कोई
समझौता नहीं था अबकी बार समझौता है
हो रहा है तो पहली बार बीजेपी को दिल्ली
में चुनौती का सामना करना पड़ेगा बीजेपी
को विशेष कवायत करनी पड़ेगी पुराना नतीजा
निकालने के लिए वह निकाल पाएगी कि नहीं
निकाल पाएगी यह समझौता ही उसके मन में
संदेह पैदा करने के लिए पर्याप्त
है तो यह और अब चक इन लोगों ने धमकी की
परवाह किए बिना समझौता कर लिया है तो हो
सकता है कि वो आतिशी का और सौरभ की बात
सही हो और अरविंद को गिरफ्तार कर लिया जाए
अ जी अगर अरविंद केजरीवाल गिरफ्तार होते
हैं तो इससे आम आदमी पार्टी कमजोर होगी या
मजबूत होगी देखिए आम आदमी पार्टी में
नेतृत्व की कमी नहीं है और अरविंद
केजरीवाल ने तो पहले ही जन रायशुमारी करके
ये तय कर लिया है कि वो मुख्यमंत्री पद से
इस्तीफा नहीं देंगे तो जेल में
बैठकर मुख्यमंत्री पद संभालेंगे और यहां
पर उनकी जो नौजवान नेतृत्व कारी पंक्ति है
इसमें आतिशी सबसे ऊपर है सौरव भारद्वाज है
और भी कई लोग हैं वो सब अपना काम करेंगे
आम आदमी पार्टी की जड़ें दिल्ली की राजनीत
में काफी कह रही तो इसका मतलब कि दिल्ली
की सातों सीटों
पर भाजपा को इस बार लोहे के चनेज चवाने
पड़ेंगे चुनौती बहुत तगड़ी मिलेगी जो
देखिए सबसे दोनों पार्टियों के समझौते का
पहला फायदा तो ये होगा कि अल्पसंख्यक वोट
जो 2014 में 2019 में छितर गया था वो सब
एकता बद्ध होकर
मिलेगा जब अल्पसंख्यक वोट इतने बड़े
पैमाने प मिलेगा तो फिर दूसरे वोट भी उससे
आकर लोगों को लगागा भाई ये जीतने के जीतने
का इनका माहौल बन रहा है हां गरीब लोग झकी
झोपड़ी वाले अभी मैं दिल्ली पड़ेगा
दिल्ली आया हूं तो जिस टैक्सी से आया था
वो टैक्सी ड्राइवर केजरीवाल की बहुत तारीफ
कर रहा था हां वो टैक्सी ड्राइवर में
अरविंद केजरीवाल बहुत लोकप्रिय है अभी से
नहीं वो 2013 से बहुत लोकप्रिय
है तो इसका मतलब जो इंडिया गठबंधन टूटते
हुए नजर आ रहा था वो फिर बहुत मजबूत हो
गया राजनीति के इसमें क्या मतलब समझ जाए
उसकी गाड़ी उसकी गाड़ी फिर से चल पड़ी है
थोड़ा देर से चली थोड़ा धीमी चल रही है और
जो काम उन्होने पहले करने चाहिए थे अभी तक
नहीं किए न्यूनतम साझा कार्यक्रम वगैरह
बनाने काम नहीं किया है वो सारी उसकी खा
उसकी वजह से माहौल और हवा बनाने में उन्ह
दिक्कत होगी लेकिन तालमेल तो उन्होने कर
ही लिया है जो मुख्य काम होता है गठबंधन
का वो उन्होंने कर लिया समाजवादी पार्टी
ने इशारों इशारों में जयंत को मैसेज किया
है कि वापस आ जाओ ई देखिए जयंत चौधरी तो
आजकल सटाए हुए हैं खामोश है उनको यह
उम्मीद नहीं थी कि व उधर इधर जाएंगे और
उधर किसान आंदोलन शुरू हो जाएगा यह बहुत
दिक्कत हो जाएगी उनको तो ये तो ये तो इस
वक्त तो परेशानी है ना अभी जैसे ही
पश्चिमी उत्तर के किसान भी गाजीपुर बॉर्डर
की तरफ पूछ करते हैं अगर मान लीजिए तो जैन
चौधरी को तो बहुत संकट होने वाला
है दूसरे भारतीय जनता पार्टी में का जो
जाट नेतृत्व है उसके लिए भी बहुत संकट की
घड़ी है व जैन चौधरी के एनडीए में आने से
खुश नहीं है भाई भाजपा के जो राष्ट्रीय
भाजपा के प्रादेशिक अध्यक्ष है वो जाट है
संजीव बालियान जाट है और भी कई सारे जाट
नेता भाजपा के साथ है बहुत लंबे अरसे से
तो वो ये सीधा संदेश है कि भाई तुम तुम
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जाटों को नहीं ल
सकते हमें जयंत की जरूरत
है तो ऐसे मौके पर इनको क्या पागल कुत्ते
ने काटा था जो सतपाल मलिक के और छापे
पड़वा दिए जाट उनको भी अपना नेता मानते
हैं नहीं देखिए वो तो देख जो लोग जो इनकी
आलोचना करेगा जो उनका विरोध करेगा उसके
ऊपर छापे तो पड़ेंगे तो बिल्कुल त
बात यह तो बिल्कुल तय बात है कोई भी हो तो
व सतपाल मलिक को भी जो है सबक सिखाए बिना
मानेगी नहीं अपनी तरफ से खास बात मजे की
बात ये है ये जो मुकदमा कायम हुआ था सतपाल
मलिक के कहने प ही कायम हुआ था कहने प ही
कायम हुआ
था मुझसे इंटरव्यू में उन्होने कहा कि
सुबह सुबह 6 बजे मैं सो के भी नहीं उठा
राम माधव बिना मुह धोए सीधे आ गए कि आपने
वो फाइल की तो नहीं है 00 करोड़ रुप मिल
रहे थे मुझे मैंने फाइल कर दी थी मैंने
कहा मैंने कल ही कैंसिल कर दी और लेकिन
देखि राम माधव उसके बाद गायब हो गए सीन से
अनिल अंबानी राम माध पर आरोप लगा उसके बाद
ममा गायब हो गए एक आखरी सवाल ममता बनर्जी
भी अब शामिल होती हुई नजर आ रही है इंडिया
गठबंधन
इसका मतलब कि अरजन चौधरी अगर उल्टी सीधी
हरकत ना करते और उल्टे सीधे बातें नहीं
बोलते तो पहले इतना झगड़ा नहीं होता
उन्होंने कहा हम दो सीट देंगे उनसे बात
करनी चाहिए थी बजाय इसके इस तरह की
बयानबाजी जो उन्होने की तो वो मुझे जो खबर
मिल रही है उससे य है दो सीट तो पहले भी
देने को तैयार थे दो सीट कांग्रेस की है
ही कांग्रेस को पाच सीट तक मिल सकती है
375 का जो है ना एक एक अनुपात वहा पर बन
सकता है और इसम शायद एक य भी भूमिका है कि
संदेश खाली के सवाल पर भाजपा जो वहा दबाव
बना रही है शायद उस वो भी इन चीजों की
प्रतिक्रिया भी होती है गट जोड़ों के ऊपर
तो फिर से सोचा होगा कांग्रेस ने और
तृणमूल कांग्रेस ने कि भाई गठजोड़ कर लिया
जाए तो ठीक रहेगा तो बहुत नुकसान हो जाएगा
भाजपा को बंगाल में देखि भाजपा तो बंगाल
में समस्याओं को भाजपा ने पिछली बार जो 18
सीट जीतली थी तब जीतली थी जब ममता बनर्जी
मुगालते में थी वो अपने खिलाफ एंटी
इनकंबेंसी को समझ नहीं पाई अब तो एंटी
इनकंबेंसी का उन्होने काफी दूर कर दिया
उसका शमन कर दिया है इस बार तो बंगाल में
भाजपा को खासा नुकसान होने वाला है तो
इसका मतलब आसान नहीं
है तो मतलब आखरी बात की 400 छोड़ो 272 भी
आसान नहीं है दो देखिए हमेशा 272 सीटें
प्राप्त करना एक ऐसी पार्टी को जिसका
दक्षिण भारत में कुछ भी नहीं है जो उत्तर
पूर्व में भी एक तरह से दूसरी पार्टी के
दलबदल किए हुए लोगों पर निर्भर है केवल
पश्चिमी भारत मध्य भारत और उत्तर भारत के
आधार पर बहुमत पा लेना कभी भी आसान नहीं
होता है ठीक बात है बपा दो बार से प्राप्त
कर रही है ये सही बात है उसकी वजह है
विपक्ष बिखरा हुआ है अब एकजुट हुआ है तो
परेशानी होगी जी बहुत-बहुत शुक्रिया अय जी
आज बहुत सारी बातें की हमने आपसे थैंक यू
तो ये थे अभय दिवेद जी उन्होने आज बताया
कि विश्व हिंदू परिषद और आरएसएस किस तरह
काम करता है मैं भी इस जुंगल में जाते
जाते बचा कुछ महीने पहले ही मुझे बड़े
प्यार से आमंत्रित किया जा रहा था मतलब
चारा डाला जाता है आप फसो या ना फसो यह
आपकी काबिलियत है मुझे इंतजार रहेगा आपकी
राय का बताइएगा यह साक्षात्कार कैसा लगा
चैनल को जवाइन कीजिएगा सब्सक्राइब करिएगा
बने रहिएगा साथ शुक्रिया थैंक
यू

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