छप्पर फाड़ कर जीत मिलेगी अब तुम्हें

मेरे प्रिय बच्चे यह दिव्य संदेश तुम्हारी
आत्मा को झंझर कर रख देगा इसे तभी सुनो जब
तुम अपना जीवन बदलना चाहते हो क्योंकि यह
तुम्हारे जीवन को पूरी तरह से बदल कर रख
देगा यह तुम्हारी कायरता को समाप्त कर
देगा यह तुम्हारे भीतर के भय को दूर कर
देगा यह दिव्यता से भरा हुआ संदेश
तुम्हारे लिए आया है मेरे प्रिय बच्चे तुम
यह कैसे भूल सकते हो कि इस धरा पर इस
मृत्यु लोक में निरंतर चल रहे इस युद्ध के
एक वीर योद्धा हो तुम तुम ही वह योद्धा हो
जो सब कुछ सहते हुए भी विजय को प्राप्त
करेगा यहां पर हर व्यक्ति के लिए महायुद्ध
रचा गया है तुम किसी भी स्थिति का दोष
दूसरों पर नहीं दे सकते क्योंकि तुम स्वयं
ही स्थिति को परिवर्तित करने का रखते हो
तुम ही वह वीर योद्धा हो तुम जहां जिस
परिस्थिति में हो उसी परिस्थिति में लड़ते
हुए तुम्हें विजय हासिल करना है और यही
तुम्हारा कर्तव्य भी है अध्यात्म मनुष्य
को कर्तव्य विहीन हो जाना कभी भी नहीं
सिखाता है ईश्वर ने तुम्हें जिस परिस्थिति
में भेजा है उसे स्वीकार करते हुए हर
विपत्ति को हर हार को हरा देना ही
तुम्हारा कर्तव्य है मेरे प्रिय मेरे साथ
ऐसा क्यों हो रहा है दुर्भाग्य मेरा पीछा
क्यों नहीं छोड़ता या फिर मेरे जीवन में
आखिर इतने संकट क्यों है
यह सब कायरता से भरे हुए वाक्य हैं जो
बोलना यहां तक कि जिसका विचार करना भी
तुम्हें शोभा नहीं देता तुम्हारे पास जो
विवेक है तुम्हारी जो भुजाएं हैं और जो
तुम्हारी आंखें हैं उन्हें ईश्वर का
निर्देश प्राप्त होता रहता है और यही
तुम्हारे लिए पर्याप्त है तुम अपने
साथ-साथ सृष्टि का भी भला कर सकते हो जिस
प्रकार से सूर्य पूर्ण सृष्टि को प्रकाश
देता है उसी प्रकार से तुम भी सबको
प्रकाशित कर सकते हो लेकिन क्या कभी सूर्य
प्रश्न करता है कि जलती अग्नि का श्रृंगार
मेरे ही भाग्य में क्यों आया स्वर्ण हो
लोहा हो या मिट्टी हो अग्नि में तपे बिना
कोई भी स्वरूप धारण नहीं कर सकता ना ही
कोई मूल्य को प्राप्त कर सकता है तो यदि
तुम्हारे जीवन में संघर्ष की अग्नि
प्रज्वलित हो रही है तो तुम बेवजह के
प्रश्न क्यों कर रहे हो क्यों ना समय जाया
कर रहे हो उन प्रश्नों के ऊपर जिनका कोई
मूल्य नहीं है वास्तविकता में तुम क्या
बदल सकते हो तुम्हें इसका विचार करना
चाहिए शिक्षा प्राप्त करने का धर्म है
विद्या को ही ईश्वर मानते हुए अपना
सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देना और अपने आश्रित
लोगों का पालन करना ही एक सच्चे सामाजिक
व्यक्ति का वास्तविक धर्म है मेरे प्रिय
बच्चे जब तक तुम स्वयं को ही करता स्वयं
को ही कार और स्वयं को ही कर्म फल नहीं
स्वीकार कर लेते तब तक तुम्हारा भाग्य कौन
बदल सकता है मेरे प्रिय तुम्हें अपने भीतर
हिम्मत रखनी होगी सर्वप्रथम पूर्ण
जिम्मेदारी अपने कंधों पर तुम्हें धारण
करना होगा चाहे विजय हो या पराजय हो तुम
अपने जीवन की संपूर्ण जिम्मेदारी स्वयं पर
उठाओ तुम्हारा चयन किया गया है तो तुम में
अवश्य ही कुछ बात होगी और यदि तुम में बात
है तो तुम्हें उसे ढूंढना होगा उसे निखार
होगा उसका भरपूर प्रदर्शन करना होगा
निर्बलता और निराशा की चूरियां निकालकर
फेंक दो और साहस का आभूषण धारण कर लो तुम
योग्य हो तुम सदा से ही योग्य थे तुम ही
संसार में ना कभी दुखी होने आए थे और ना
कभी दुखी रहोगे चोट तो वही खाते हैं ना जो
युद्ध का अभ्यास करते हैं बैठकर दर्शक
बनकर तमाशा देखने वाले कभी भी घायल नहीं
हुआ करते किंतु विजय भी उनके पक्ष में कभी
नहीं आती तुम गिर रहे हो तुम चोट खा रहे
हो तुम्हें धक्का लग रहा है इसका अर्थ यह
है कि तुम प्रयत्नशील हो तुम प्रयास कर
रहे हो और व्यक्ति का यही प्रयास कब
परमात्मा बनकर उसे परम पवित्र आत्मा बना
देता है इसे वह स्वयं भी नहीं जान पाता है
मेरे प्रिय बच्चे तुमने संघर्षों की एक
श्रृंखला देखी अपने जीवन में ऐसे-ऐसे
संघर्षों से तुम्हारा सामना हुआ है जिन
संघर्षों के बाद एक सामान्य मनुष्य टूटकर
बिखर जाता है किंतु तुम फिर भी डटे रहे
तुमने हार नहीं मानी चाहे परिस्थिति कैसी
भी रही हो तुमने झुकना स्वीकार नहीं किया
परिस्थितियों के चलते भले ही तुम भौतिक
रूप से कहीं पर भी झुकने को तैयार क्यों
ना हो गए किंतु तुम्हारे भीतर वह आग जलती
रही तुम्हारे भीतर एक ज्वाला धधकती रही
तुम हमेशा से ही आगे बढ़ने को तत्पर रहे
तुम्हारा मन इस संसार में बहुत सी
गतिविधियों में उलझा रहा फिर भी तुम्हारी
आत्मा कहीं ना कहीं तुम्हें यह चोट देती
रही कि तुम कुछ तो अनुचित कर रहे हो कि
तुम कहीं तो सही मार्ग पर नहीं जा रहे हो
बहते पानी के जैसे तुम्हारा जीवन चलते
रहना चाहिए फिर भी यदि तुम्हें कहीं ठहराव
महसूस होता है तो तुम यह समझ पाते हो कि
तुम्हारे वन में कुछ ऐसा है जो उचित नहीं
जा रहा मेरे प्रिय चाहे परिस्थिति अच्छी
हो या बुरी सदैव नदी के जल के समान बहते
रहो क्योंकि यदि तुम जीवन रूपी धारा के
विपरीत जाने का प्रयत्न करोगे तो अंता
कहीं पहुंच तो नहीं पाओगे बल्कि तुम्हें
दुखों का बहुत ज्यादा सामना भी करना
पड़ेगा दुख रूपी लहरों की चोट तुम्हे घायल
कर देगी लेकिन यदि तुम इस दुनिया में
जीतना चाहते हो इस दुनिया में विजय को
हासिल करना चाहते हो तो तुम्हें इस जीवन
रूपी धारा के साथ बहना होगा तुम्हें अपने
मस्ती में रहते हुए अपने कर्तव्यों का
पालन करना होगा इस दुनिया में क्या सही है
क्या गलत है इसका ज्यादा विचार ना किया
करो बल्कि अपने विवेक का इस्तेमाल करो
तुम्हें स्वतः ही ज्ञान हो जाएगा क्या
उचित है क्या अनुचित है किसी दूसरे को
दोषारोपण ना करो कोई क्या कर रहा है कोई
क्या नहीं कर रहा है किसे क्या करना चाहिए
किसे क्या नहीं करना चाहिए में अपना समय
जाया ना करो जो जैसा भी कर रहा है वह अपने
विवेक के अनुसार कर रहा है तुम अपने विवेक
का इस्तेमाल करो अपने बुद्धि का इस्तेमाल
करो और अपने सामर्थ्य और बल को पहचानकर
उसी दिशा में आगे बढ़ते रहो यदि तुमने सही
दिशा का चयन कर लिया तो मैं तुम्हें इतना
आगे लेकर जाऊंगा कि तुम उसकी कल्पना भी
नहीं कर सकते जीतना केवल तुम्हारी झोली
में आकर गिर जाएगी बल्कि तुम्हें इतना
मिलेगा कि तुम उसे संभाल नहीं पाओगे तुम
बांटते बांटते थक जाओगे किंतु तुम्हारा यश
तुम्हारा धन तुम्हारी समृद्धि और प्रेम
कभी समाप्त नहीं होगा तुम्हें दूसरों से
भी बेनत प्रेम मिलेगा इतना कि तुम्हारा मन
भी उससे भर जाएगा मेरे प्रिय बच्चे तुम इस
संसार में विजय प्राप्त करने ही आए विजय
तिलक तुम्हारे माथे पर ही सजेगा विजय
मुकुट तुम अवश्य ही धारण करोगे जीत की
माला को अपने गले में पहनकर तुम अपना नाम
रोशन करते रहोगे तुम्हारे यश का गुंगा हर
जगह होगा लेकिन तुम कभी भी भयभीत ना होना
कभी भी डरना नहीं यह मत सोचना कि तुम कभी
अकेले हो क्योंकि मेरा आशीर्वाद सदैव
तुम्हारे साथ है सदा सुखी हो तुम्हारा
कल्याण हो मेरे प्रय बच्चे तुम्हारी
प्रगति होगी जय माता दी जय भोलेनाथ

Leave a Comment