जम्मू-कश्मीर में खेल गए PM Modi, चुनाव में मुस्लिमों पर ऐसे भारी पड़ेंगे हिंदू| J&

हुआ है
कि हमारी लड़ाई
कश्मीर के लिए है कश्मीर के खिलाफ नहीं है
फिगरेटिव हूं कि जम्मू एंड कश्मीर के पीए
को आप भारत का हिस्सा नहीं मानते हो क्या
सेक्रेटिव जान देंगे इसके लिए

कि नमस्कार आज आपको बताऊंगा कि
जम्मू-कश्मीर में इस साल ऐसा क्या होने जा
रहा है कि जिससे अब हिंदुओं की ताकत को
पूरा देश देखेगा और यह ताकत कश्मीर के
मुसलमानों पर भी भारी पड़ेगी इसके साथ ही
जम्मू कश्मीर को लेकर दुनिया भर में रोना

रोने वाले पाकिस्तान को भी तगड़ा करंट
लगेगा इसके बाद कुछ जम्मू कश्मीर का जिक्र
भी नहीं कर पाएगा या नहीं बल्कि मुसलमानों
को बरगलाकर राजनीति दुकान चलाने वाले भी
अब सपने में चले जाएंगे दरअसल पीएम मोदी
ने कई ऐसे ऐतिहासिक फैसले लिए हैं जो भारत
के दुश्मनों की नींद उड़ाने वाले ताकि देश

में मौजूद गद्दार और विज्ञान की कमर
तोड़ने वाले स्थापित हुए पीएम मोदी के इन
फैसलों में जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370
और 35 से को हटाने का फैसला सबसे ऊपर माना
जाता है इस फैसले के बाद जम्मू कश्मीर में
पाक परस्ती अलगाववादियों की जेहादी

दुकानों पर ताला लग गया और मेरे को बड़ा
झटका लगा जिन्होंने दशकों तक अपने
राजनीतिक फायदे के लिए हाथी को हिंसा और
नफरत की आग में झोंक रखा जो खाते तो
हिंदुस्तान का है और सारी सुख-सुविधाएं ही

के लेते हैं लेकिन इनका दिल आशिक स्थान
यानी कि पाकिस्तान जैसे यह आदमी बूंद के
लिए धड़कता है आर्टिकल 370 हटने के बाद
लगभग सब कुछ बदल चुका है सौंठ की जमीन कहे
जाने वाला जम्मू-कश्मीर अपने मुख्यधारा

में लौट रहा है घाटी में आतंकवाद अब अंतिम
सांसें गिन रहा है हर सुबह शांति और विकास
का पैगाम लेकर आ रही है और जो भी इस अ
शांति के माहौल को बिगाड़ने की कोशिश कर
रहा है उसके साथ क्या हो रहा है उससे आप

सभी वाकिफ हैं अब बात करते हैं
जम्मू-कश्मीर में पीएम मोदी के ज्ञान से
अब हिंदुओं का कैसे बोल वाला होने जा रहा
है और यहां होने वाले विधानसभा चुनाव में
मुस्लिमों पर हिंदू भारी पड़ेंगे दरअसल

गुजरात और हिमाचल प्रदेश मेरे साथी इस साल
नवंबर-दिसंबर में जम्मू-कश्मीर में चुनाव
हो सकते हैं ऐसा कहा जा रहा है कि
जम्मू-कश्मीर में चुनाव कराए जाने के लिए
चुनाव आयोग ने भी तैयारी शुरू कर दी है

2019 में जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370
हटाए जाने के बाद पहली बात विधानसभा चुनाव
होंगे सबसे बड़ी बात यह है कि पहली बार
प्रदेश में बनने वाली सरकार का कार्यकाल

भी 5 साल का ही होगा अब तक राज्य में
सरकार का कार्यकाल विशेष प्रावधान के तहत
छह साल के लिए होता था अब यह भी जान लीजिए
कि धारा 370 हटने के बाद राज्य में
विधानसभा सीटों का गणित क्या है दरअसल
पहले जम्मू कश्मीर और लद्दाख को मिलाकर
विधानसभा की कुल तथा सीधे थी इसमें चार
सीटें लद्दाखी शामिल थी लेकिन लडाकों पालक

केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के बाद
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में उपस्थित रहेंगे
इसके अलावा परिसीमन के बाद साक्षी से बढ़ी
हैं इस के साथ कुल सीटों की संख्या 90 हो
गई है इसमें जम्मू में 43 और कश्मीर में

47 विधानसभा क्षेत्र बनाए गए अनुसूचित
जनजाति यानी कि एससी के लिए रिजर्व की गई
हैं और यह पहली बार है जब एसटी के लिए यह
इतनी सीटें रिजर्व रखी गई है अब इन
तस्वीरों के खेल से हिंदू बहुल जम्मू और
मुस्लिम बहुल कश्मीर पर कैसे भारी पड़ेगा
का यह भी आपको जानना चाहिए दर्शन अभी

जम्मू कश्मीर के मुस्लिम बहुल वाले कश्मीर
में 40 पीते हैं और बहुमत के लिए 4485
चाहिए हिंदू बहुल जम्मू में 37 सीटें हैं

परिसीमन के बाद एक गणित बदल जाएगा नए
परिसीमन के हिसाब से अब जम्मू-कश्मीर के
कुल लाभ की सीटों में से 43 जम्मू में और
47 कश्मीर लूंगी साथी दो सीटें कश्मीरी

पंडितों के लिए रिजर्व करने का सुझाव दिया
गया है इन बदलावों के बाद जम्मू की 44%
अवधि 48 प्रसिद्ध पर वोटिंग करेगी कछुए
रहने वाले पॉर्न पोषक लोग बची हुई बामन

प्रति टॉपर मतदान करेंगे अभी तक कश्मीर के
56 प्रतिशत लोग
55.45 शक्तिपीठों पर और जम्मू के
43.8 प्रतिशत लोग
44.5 प्रतिशत सुपर फास्ट करते थे आर्टिकल

370 हटाए जाने से पहले जम्मू और कश्मीर की
लोकसभा सीटों का परिसीमन केंद्र सरकार की
ओर से किया जाता था और विधानसभा सीटों का
परिसीमन राज्य सरकार की ओर से
जम्मू-कश्मीर

रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपुल एक्ट
1957 के तहत होता था 2019 में आर्टिकल 370
हटाए जाने के बाद अब जम्मू-कश्मीर
विधानसभा और लोकसभा दोनों सीटों का
परिसीमन अधिकार केंद्र के पास चला गया है
जम्मू-कश्मीर में आखिरी बार परिसीमन 1995

में तब हुआ था जब वह राष्ट्रपति शासन लागू
था तमाम विधानसभा की सीट है क्षेत्र से
बढ़ाकर 87 की गई थी जिन्हें जम्मू की
सीटें 32 से बढ़ाकर
इस और कश्मीर की सीटें हैं बैलेंस से

बढ़ाकर 40 की गई थी 2002 में जम्मू-कश्मीर
की नेशनल कांफ्रेंस सरकार ने राज्य के
परिवहन को 2036 तक के लिए टालने का
प्रस्ताव पारित किया था चलिए अब आपको यह

भी बताते हैं कि जम्मू-कश्मीर में चुना और
इसे पाकिस्तान को तगड़ा समाज कैसे लगा है
और वह जम्मू-कश्मीर को कैसे भूल जाएगा
दरअसल आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद
पाकिस्तान ने यूएन से लेकर दुनिया के तमाम
मंचों पर भारत को घेरने की कोशिश की थी

लेकिन तब भारत ने अपनी कूटनीति के दम पर
पाकिस्तान की इस साजिश को विफल कर दिया था
अमेरिका से लेकर रूस और अरब देशों ने
जम्मू कश्मीर में हुए बदलाव के मुद्दे को
तूल नहीं दिया यहां तक कि कश्मीर के
मुद्दे पर सऊदी को आईसीसी की बैठक की धमकी

देना भी पाकिस्तान को भारी पड़ गया था और
सऊदी ने अपने कर्ज की वसूली शुरू की तो
पाकिस्तान की सारी हेकड़ी निकल गई ऐसे में
अब जम्मू-कश्मीर में कि सरकार बनने से
पाकिस्तान को उचित नीति तौर पर झटका लगेगा
क्योंकि पाकिस्तान लगातार आरोप लगाता रहा
है स्थानीय लोगों की अनदेखी की गई है इससे

पहले जम्मू कश्मीर में 370 हटने के बाद
पंचायत चुनाव भी कराए जा चुका है कुल
मिलाकर साफ है कि जम्मू-कश्मीर में है जो
बदलाव हुए हैं उसके पड़ा हम चुनाव के

दौरान और भी बेहतर दिखेंगे नमस्कार अ
कि अ
[संगीत]

Leave a Comment