जीत की दिव्य ऊर्जा से भर जाओगे तुम

मेरे प्रिय बच्चे क्या तुम्हें पता है कि

अब तक इस जन्म में तुम्हें इतना संघर्ष

आखिर क्यों करना पड़ा है छोटी से छोटी चीज

के लिए भी तुम्हें अपने जीवन में तरसना

पड़ा है घबराहट तुम्हारे मन में उत्पन्न

हुई है जो चीजें दूसरे मनुष्यों के लिए

प्राप्त करना साधारण सी बात रही है कई बार

उसे प्राप्त करने में भी तुम्हें लोहा

लेना पड़ा है संघर्षों की सीढ़ियां चढ़

पड़ी है आखिर ऐसा क्या है जिसकी वजह से

तुम्हारे जीवन में समस्या बनी रही कभी धन

की कभी प्रेम की कभी सामाजिकता की कभी

महत्वाकांक्षा की हर तरफ से कोई ना कोई

समस्या आती ही गई कई बार इतनी

जिम्मेदारियां आ गई कि तुम उसके बोज तले

दबते चले गए धन तुम्हारे पास कब आया और

कहां चला गया तुम्हें यह तक समझ नहीं

पाए लेकिन आज तुम्हारी सभी समस्याओं को

मैं दूर करूंगा और इसलिए तुम्हें संदेश को

पूरा सुनना

तुम चलना सीख गए थे धीरे-धीरे संघर्ष ऐसा

हुआ कि तुम्हारे जीवन का एक अभिन्न हिस्सा

बनता चला गया यदि तुम्हें आज यह संदेश

मिला है तो इसके पीछे एक बहुत बड़ा कारण

छुपा हुआ है और यही वजह है कि मैं चाहता

हूं कि तुम इस संघर्षों से निजात पा सको

ताकि तुम जीवन का लाभ उठा सको ताकि तुम

आनंद को समझ सको तुम्हारे लिए मैं सफलता

के रश्ते भी अवश्य

बताऊंगा इना ही नहीं तुम्हारे मार्ग को

मैं इतना सुनो योजित कर दूंगा कि तुम्हारी

सभी

समस्याएं एकएक करके स्वतः ही समाप्त हो

जाएंगी जिस तरह से मनुष्य प्रतिदिन आगे

बढ़ता है अपने जीवन को जीता है उसी तरह से

तुम्हारे जीवन में चीजें सही नहीं चल रही

हैं लेकिन अब उसके सही होने का समय आ चुका

है अब वह समय चला गया जब तुम मुश्किलों

में अपनी रातें गुजारा करते थे जब तुम्हें

समझ नहीं आ रहा था कि तुम्हारे साथ क्या

होगा आखिर तुम्हारे साथ यह सब क्यों हो

रहा है अब वह दिन जा चुके हैं अब संघर्षों

के दिन जा रहे हैं अब तुम्हारे लिए

प्रसन्नता से भरे खुशियों के दिन प्रेम से

भरे रोमांचकारी दिन आ रहे हैं इस जन्म से

पहले पिछले कई जन्मों में भी तुम ऐसे ही

संघर्षों से जूझते आए हो तुम अपने शरीर को

कभी प्रेम नहीं दे पाए तुम कभी अपनी मूल

धरना को समझ नहीं

पाए ब्रह्मांड ने तुम्हें आवश्यक ज्ञान और

पर्याप्त संसाधन दिए हैं लेकिन उसका

प्रयोग कैसे करना है उसका तुम्हारे जीवन

में उपयोग कैसे करना है तुम यह नहीं समझ

पाए कई बार तुम्हें आवश्यकता से अधिक ही

प्रदान किया गया लेकिन वह सब इतना अवश्य

रहा कि तुम उसे कभी एक क्रम में बिठा ही

ना सके तुम कभी उसे एक क्रम में समझ ही

नहीं पाए कभी तुम उसके मूल्यों को नहीं

समझ पाए और अपने आप को सीमित करके रह गए

तुम को के उस मेंढक की भाति हो गए जिसे वह

कुआ ही सागर लगने लगा जिसे लगा कि इसके

आगे कोई दुनिया ही नहीं

है जिसे अपनी क्षमताओं पर संदेह हुआ जिसे

अपने काबिलियत पर संदेह हुआ जिसे लगता है

कि उसके पास कोई काबिलियत ही नहीं है

लेकिन तुम्हें काबिलियत कूटकूट के भरी है

केवल यदि आवश्यकता है तो ऐसी गुरु की जो

उस काबिलियत को समझकर व्यवस्थित रूप से

सुनियोजित ढंग से क्रमबद्ध कर सके के ताकि

तुम अपने जीवन भर के अनुभव और ज्ञान का

सदुपयोग कर पाओ जितना अनुभव तुम्हें मिला

है वह अनुभव तुम्हारे जीवन के लिए

पर्याप्त है अपितु दूसरों से अपेक्षा

ज्यादा ही है क्योंकि तुमने ज्यादा

जिम्मेदारियां उठाई है तुम्हें इसका आभास

नहीं किंतु तुम एक बेहद जिम्मेदार

व्यक्तित्व के स्वामी हो तुम दूसरों की

पीड़ा भी समझते हो तुम दूसरों के चालबाज

हों को भी कई बार समझ जाते हो और यही वजह

है कि तुम में आत्म संदेह है आत्मविश्वास

की कमी होना जो तुम्हारे भीतर है तुम उस

बास के बच्चे की तरह हो जो मुर्गों के

झुंड में पला बढ़ा है जिसे अपनी काबिलियत

का जान ज्ञान नहीं जिसे यह नहीं पता कि वह

कितनी ऊंचाई तक उड़ सकता है दूसरे बाजों

को देखकर छुपता रहता है किंतु उसे जिस दिन

यह ज्ञात हो गया कि वह स्वयं भी बाज समान

है वह स्वयं भी बहुत ऊंची उड़ान उ सकता है

वह स्वयं भी इतना ताकतवर है कि वह जिसे

चाहे अपना शिकार बना सकता है तुम्हें

स्वयं पर नाज होगा तुम दूसरों की सहायता

का महत्व तो समझ गए हो लेकिन उसका उपयोग

कैसे करना है कहां करना है यह नहीं समझ

पाए हो किसकी सहायता करनी है किसकी नहीं

करनी है यह नहीं समझ पाए हो और यही वजह है

कि कई बार लोग तुमसे लाभ भी उठाते हैं और

तुम उनके लाभ को समझ कर भी उन्हें जवाब

नहीं दे पाते कई बार तुम उनके लाभ को समझ

नहीं पाते लेकिन ज्यादातर समय ऐसा होता है

कि तुम उनके इरादों को स्पष्ट रूप से समझ

जाते हो लेकिन खुद पर ही संशय उत्पन्न

करते हो और झिझक वस तुम अपनी सभी बातें

स्पष्टता रख नहीं पाते हो तुम प्रसन्नता

के भावों में बहुत सी बातें बोल जाते हो

लेकिन जब तुम में दुखद उत्पन्न होता है तो

तुम अपनी बातों को स्पष्ट रूप से कह नहीं

पाते खासकर उन लोगों के समक्ष जिनको तुमने

जरूरत से ज्यादा आदर और सम्मान दे दिया है

जबकि वह इसके लायक नहीं थे मेरे प्रिय

तुम्हें आत्म शिक्षा की आवश्यकता है वह

शिक्षा नहीं वह विद्या नहीं जो संसार ने

इस समाज ने तुम्हें दी है बल्कि वह विद्या

जो तुम्हें स्वयं से ही विराजमान है वह

विद्या जो तुम्हारे जन्म के साथ ही

तुम्हें मिल गई

थी तुम्हें अपने भीतर झांकना है जब कोई

चीज मनुष्य से दूर होती है तब मनुष्य के

मन में उसके प्रति चाहत उसके प्रति वासना

उत्पन्न होती है लेकिन जब वो चीज उसे

प्राप्त हो जाती है तब वह उसके महत्व को

भूल जाता है ऐसी ही बहुत सी चीजें जो उसे

प्राप्त है किंतु उसे उसका ज्ञान नहीं है

वह उसके भी महत्व को समझ नहीं पाता है तुम

जो ढूंढ रहे हो वह तुम्हारे अलावा इस

संसार में कहीं मौजूद नहीं है किंतु तुम

बाहर ढूंढ रहे हो जिसे तुम बाहर ढूंढ रहे

हो वास्तव में वो तुम्हारे भीतर ही मौजूद

है उसे ढूंढने का प्रयत्न करो तुमने अपने

पिछले कई जन्मों में जितना धन अर्जित किया

था इस जन्म में तुम्हें उससे ज्यादा ही

प्राप्त होगा इतना ज्यादा कि अभी तुम उसकी

कल्पना नहीं कर सकते लेकिन तुम्हें अपने

आत्मविश्वास को बढ़ाना

होगा मैं तुम्हारे लिए सभी मार्ग तो खोल

दूंगा सारे रास्ते प्रशस्त कर दूंगा

रास्तों पर मैं फूल भी बिछा दूंगा लेकिन

अपने कदम तो तुम्हें बढ़ाने ही पड़ेंगे

एक कदम आगे रखना पड़ेगा और हर एक कदम के

साथ एक और कदम तुम्हें आगे रखना

पड़ेगा और तब तुम अपने उस मंजिल तक पा

जाओगे जिस मंजिल को तुम बहुत पहले से पाना

चाहते थे आनंद से भर देने वाला ऐसा दिन जो

कभी समाप्त ना हो खुशियों की ऐसी बरसात जो

सदा बरसती ही रहे एक ऐसा मौसम एक ऐसी ऋतु

जिसमें प्रसन्नता के ही बादल छाए हो जो

कभी परिवर्तित ना हो जब तुम समझ जाओगे कि

जीवन उस सिक्के की भाति है जिसके एक पहलू

पर सकारात्मकता और दूसरे पहलू पर

नकारात्मकता है तो तुम जीवन को गंभीरता से

लेने के बजाय उसके आनंद में डूब जाओगे जब

तुम यह जान जाओगे कि सुख और दुख क्षण भर

की बातें हैं वास्तविक खुशी तो परमानंद

में ही है वास्तविक खुशी तो उस परमानंद

में है जिसे तुमसे कोई छीन नहीं सकता ना

जाति ना देश ना काल ना समय ना कोई मनुष्य

ना ही कोई जीव जंतु ना कोई

आत्मा ना ही कोई शैतान जिसे तुमसे कोई छीन

नहीं सकता जो तुम्हारे मन में बसा हुआ है

उसे तुमसे अलग नहीं किया जा सकता ना जन्म

उसे अलग कर सकता है ना मृत्यु उसे अलग कर

सकती है यह वह है जो सदा से तुम्हारे भीतर

है और मैंने तुम्हें बताया जो चीज पहले से

ही प्राप्त होती है मनुष्य का उसके प्रति

वासना समाप्त हो जाता है जब तक प्रेमी

नहीं होता वह उसी प्रेम के लिए छटपटा रहता

है दिन रात संगीत सुनता है दिन रात स्वयं

को दुख में डालता है विभिन्न प्रकार की

कल्पनाएं बुनता है वह उससे कैसे बात करेगा

वह अपनी बात उसके सामने स्पष्ट रूप से

कैसे कहेगा यदि वह उसे प्राप्त हो जाए तो

उसके साथ अपना जीवन कैसे व्यतीत करेगा इस

तरह की कल्पनाएं वो बुनता रहता है लेकिन

जिस दिन उसे वह प्रेमी प्राप्त हो जाता है

जिस दिन वही उसका का साथी बन जाता है वह

धीरे-धीरे करके उसके महत्व को भूलने लगता

है उसका उससे मोह रह जाता है लगाव रह जाता

है लेकिन प्रेम कहीं ना कहीं क्षीण होने

लगता है वास्तव में प्रेम कभी समाप्त हो

ही नहीं सकता लेकिन जब उसमें कमी आने लगे

तो तुम्हें तत्काल यह समझ जाना चाहिए कि

प्रेम का रूप धारण करके तुम्हारे मन में

बसा हुआ यह शत्रु तुम्हारा मोह है एक ऐसा

लगाव जिससे तुम छूट नहीं पा रहे हो बंधन

का लगाव जिससे तुम निकलना तो चाहते हो

लेकिन तुम निकल नहीं पा रहे हो मेरे प्रिय

बच्चे जो मैं कह रहा हूं उसकी गंभीरता में

जाओ जो मैं तुम्हें बताना चाहता हूं उसके

रहस्य को

समझो केवल तभी तुम जान पाओगे कि वास्तविक

रूप से तुम कौन हो वास्तविक रूप से

तुम्हें क्या चाहिए वास्तविकता में

तुम्हें यह जन्म में क्यों मिला है

वास्तविकता में तुम्हें प्रकृति में समर्थ

होने को विभोर हो जाते हो कभी तुम्हें एक

हाथ पसंद आता है तो कभी वही एक हाथ

तुम्हें काट खाने दौड़ता है अपने भीतर चल

रहे

[संगीत]

प्रतिद्वंदी तब तुम्हारे पास परमात्मा

होगा तब तुम ही परमात्मा होगे तब तुम ही

सूत्रधार होगे तुम ही कंधार होगे तुम ही

सृष्टा होगे तुम ही पालनकर्ता होगे

वास्तविक रूप में तुम ही संधार भी होगे सब

कुछ तुम्हारे ही हाथों में है बस देर है

तो नजरिए की वो नजरिया जो अभी तुम विकसित

नहीं कर पा रहे हो वो नजरिया जिसके विकास

की तुम्हें आवश्यकता है तुम यह समझ जाओगे

कि समस्त ब्राह्माण में जितने भी पदार्थ

उपस्थित है जितने भी तत्व उपस्थित है

जितने भी कण उपस्थित है वो तुमसे ही है वो

तुमसे भिन्न नहीं है वो ऊर्जा जो एक टूटते

हुए तारे में विद्यमान है वो ऊर्जा जो एक

मरते हुए सितारे में विद्यमान है वो ऊर्जा

जो सूरज की रोशनी में है वही ऊर्जा जो

चांद को रोशन कर रही है वो ऊर्जा जो धरती

पर जीवन को बनाए रखी है वो ऊर्जा जो लाखों

करोड़ों वर्ष पहले जो लाखों करोड़ों वर्ष

दूर किसी पिंड में विद्यमान है वही तुम

में भी है तुम किसी दूर बैठे सितारे के

ऊर्जा से अलग नहीं हो तुम और वो तुम और

मैं हम सब अलग नहीं है जब तुम इस भेद को

समझ जाओगे उसके बाद तुम में प्रश्न नहीं

बचेंगे लेकिन इसे समझने के लिए तुम्हें

अपने भीतर झांकना होगा मेरे प्रिय बच्चे

तुम उसे ढूंढो जो एक है तुम उसे समझने का

प्रयत्न करो जो कहीं और नहीं है तुम में

ही है किसी जल में यदि नमक के एक पूरे के

के पूरे भंडार को डाल दिया जाए तो क्या

उससे नमक को पुनः अलग कर पाना संभव है ऐसा

संभव नहीं क्योंकि वह उसी में घुल जाता है

तुम्हारे भी जीवन में जो कुछ भी हो रहा है

वह तुम में ही घुल जाता है वो तुमसे अलग

नहीं होता चाहे क्रोध हो चाहे प्रेम हो

चाहे कोई मनुष्य हो चाहे हीन भावना हो

चाहे श्रेष्ठता का भाव हो चाहे कोई विधता

की बात हो चाहे मूर्द की बात हो वह सब कुछ

तुम हो तुम उस सबसे बन तो रहे हो तुम

निरंतर निर्मित हो रहे हो भोजन के हर उस

एक अंश से जो तुम्हारे भीतर जा रहा है तुम

उससे निर्मित हो रहे हो सूर्य के हर उस

प्रकाश के कण से जो तुम्हारे भीतर जा रहा

है तुम उससे निर्मित हो वह वायु जो तुम

अपने भीतर ले रहे हो तुम उससे निर्मित हो

वह वायु जो तुम इस संसार में छोड़ रहे हो

तुम उससे निर्मित हो वह सब कुछ जो

तुम्हारे आसपास है वही तो तुम्हारा संसार

है तुम्हें अपने संसार को समझना है

तुम्हें समझना है कि तुम्हारे जीवन में

तुम्हारे संसार में क्या महत्त्वपूर्ण है

ना तुम्हारे आध्यात्मिक जगत में ना

तुम्हारे सामाजिक जगत में ना इस लोक में

ना उस लोक में इसलिए व्यर्थ के समाचार

व्यर्थ की खबरों को अपने भीतर जाने मत दो

यदि वो आ भी जाए तो एक पहरेदार की भांती

उन्हें द्वार पर ही रोक दो यदि अनावश्यक

बातें तुम्हारे भीतर जाएंगी तो तुम्हारे

मन में अनावश्यक चीजें ही चलेंगी वो

अनावश्यक चीजें जिनका तुम्हारे लिए कोई

महत्व नहीं है जो तुम्हारे लिए पुतम

महत्वहीन है तुम उन्हें अपने भीतर पंने मत

दो प्रवेश करने मत दो तुम्हारे लिए क्या

महत्त्वपूर्ण है परिवार का वह कौन सा

सदस्य है जो तुम्हारे लिए महत्त्वपूर्ण है

तुम्हारा प्रेम तुम्हारे लिए कितना

महत्त्वपूर्ण है लगाव की सीमा से दूर

पकड़ने छोड़ने के झांझ तो से दूर वो क्या

है जिससे तुम्हें सच्चा प्रेम है तुम कुछ

बनना चाहते हो तुम कुछ करना चाहते हो यह

भाव त्याग कर एक बार यह समझ लो इस जीवन को

जीना कैसे है इस पर विचार करो मनुष्य

सोचता है कि मृत्यु एक मात्र सत्य है

वास्तविकता में इस संसार में कोई भी चीज

कभी मरती ही नहीं मृत्यु सत्य नहीं है

मृत्यु यथार्थ नहीं है मृत्यु समझ का एक

धोखा है मृत्यु एक बेहद से ज्यादा कुछ भी

नहीं है वास्तविकता में इस संसार में कुछ

भी सच्चाई है तो वो है जीवन जीवन यथावत

सत्य है जीवन है संसार के चलने का नाम जब

कुछ नहीं था तब भी यह संसार था जब कुछ

नहीं रहेगा तब भी यह संसार रहेगा आज तुम

हो कल तुम ना रहो यह संसार सदा ही रहेगा

वास्तविकता में अंधकार का इस संसार में

कोई स्थान ही नहीं है अंधकार तो बस इतना

है कि जहां प्रकाश ना हो वहां अंधकार हो

जाता है प्रकाश की अनुपस्थिति अंधकार है

वास्तव में अंधकार का अपना कोई अस्तित्व

नहीं है और यह संपूर्ण संसार प्रकाशमान है

यह संपूर्ण संसार प्रकाश का एक पूरा

पिटारा है किंतु इसे प्रकाश मिलता कहां से

है इसका वह प्रकाश स्तंभ वह केंद्र बिंदु

कौन है तुम्हारे संसार का प्रकाश स्तंभ

तुम हो तुम हो वह केंद्र जो तुम्हारे

संसार को प्रकाश दे रहे हो इस बात को

समझना है इसकी गहराई को समझना है तुम किसे

महत्व दे रहे हो सकारात्मक हो या

नकारात्मक फिर चाहे वह घटा हो या ना घटा

हो यदि तुम उसका निरंतर विचार कर रहे हो

तो वह तुम्हारे संसार में बढ़ते ही जाएगा

मेरी बात को ध्यान पूर्वक सुनना मैं

तुम्हारे संसार की बात कर रहा हूं वह

संसार जो तुम निर्मित कर रहे हो वह संसार

जिसके प्रकाश के केंद्र बिंदु तुम हो तुम

इस सार में जिसे महत्व दोगे वह अपने आप ही

बढ़ता चला जाएगा यह इस प्रकृति का नियम है

यही धारणा है और यही सच्चाई है और जो चीज

तुम्हारे लिए आवश्यक है लेकिन तुम उस पर

विचार नहीं करते वह स्वतः ही घटती चली

जाएगी इसलिए तुम्हें निडर रहना है कि

तुम्हारे लिए क्या सही है क्या गलत

तुम्हें निर्णायक होना होगा फिर यदि

तुम्हारे लिए फैसले गलत भी साबित होते हैं

तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता मैं तुम्हारे

फैसले को सही साबित कर दूंगा जब तुम

प्रयास करोगे तो मैं आगे आऊंगा मैं तुम ही

तो हूं मुझे अलग जानने की भूल ना करना

मुझे अलग देखने की भूल ना करना मैं

तुम्हारा विवेक हूं मैं तुम्हारी चैतन्य

अवस्था हूं मैं वो हूं जो तुम्हें बचाता

हूं जब तुम्हारे पास कोई चीज आती है

तुम्हारी आंखें स्वतः है ही थक जाती है

तुम्हारी पलके तुम्हारी आंखों का बचाव

करती है वो बचा जा मैं हूं उन सभी

उत्कृष्टता में जब तुम्हें प्रेम जन्मा उन

सभी उत्कृष्टता में जब तुम्हें आगे बढ़ने

की ललक आई वहां मैं ही था और मैं ही

रहूंगा मैं ही यथार्थ हूं मैं तुमसे अलग

नहीं हूं इसकी गहराई में उतरना ऊपर सथी

छिछली बातों पर मत जाना लोग क्या कहते हैं

लोग क्या कहेंगे इसका विचार ना करना वह

लोग तुम्हारे द्वारा निर्मित तुम्हारे इस

संसार में जन्म लेते हैं मेरे प्रिय अपने

आप को उन विचारों उन धारणाओं उन मान्यताओं

से ऊपर रखना जो तुम्हें नुकसान पहुंचाते

हो फिर चाहे वह विचार वह धारणा तुम्हें

परमात्मा का भय दिखाकर ही क्यों ना

तुम्हारे भीतर भरा गया हो फिर चाहे वो

समाज ने दिया हो तुम्हारे माता-पिता ने

दिया हो तुम्हारे बुजुर्गों ने दिया हो इस

समाज के बभन जानकार बभन गुरुओं ने क्यों

ना दिया हो जो तुम्हारे राह में बाधक बन

रहा है जो तुम्हें परम आनंद तक पहुंचने से

रोक रहा है है उन सभी धारणाओं का तिरस्कार

कर देना बहिष्कार कर देना और पूर्णता अपने

मन बुद्धि बल का प्रयोग करिए सोचना कि ऐसा

क्या है इस संसार में जो तुम्हारे लिए

उपयोगी है मैं तुम्हें बताना चाहता हूं कि

संसार में कुछ भी अनुपयोगी नहीं है सब कुछ

मुझे से ही निर्मित है सब कुछ मेरे ही

द्वारा जन्मा है जब सब परमात्मा ने ही

जन्मा है फिर चाहे वह क्रोध हो ईर्षा हो

द्वेष हो प्रेम हो राग हो या फिर कोई बुरा

शब्द ही क्यों ना हो कोई बुरा कृति ही

क्यों ना हो यह सब कुछ मैंने ही उत्पन्न

किया है जब यह सब कुछ परमात्मा ने ही

उत्पन्न किया है तो इसमें से कुछ भी बुरा

नहीं है किंतु किसका प्रयोग कहां करना है

यह महत्त्वपूर्ण है और तुम्हें देखना है

कि तुम्हारे संसार के लिए क्या

महत्त्वपूर्ण है तुम्हें देखना है कि ऐसा

क्या है जो तुम्हारे संसार को बेहतर

बनाएगा और ऐसा क्या है जो तुम्हारे संसार

का सर्वनाश कर डालेगा ऐसा क्या है जो

तुम्हारे कर्मों का सटीक सही उचित परिणाम

देगा और ऐसा क्या है जो तुम्हारे कर्मों

का अनुचित बुरा परिणाम देगा जो तुम्हें

रुचिकर ना लगे जो तुम्हें सही ना लगे उसका

त्याग कर देना और जो तुम्हें सही तार्किक

लगे वास्तविक हो केवल उसे ही अपनाना बाकी

यह संसार तुमसे कुछ भी कहता रहे उस पर

अनावश्यक ध्यान मत देना मेरे प्रिय बच्चे

गहराई में उस जीव को आकर्षित करो तुम इतने

करीब हो इतने करीब की बस एक कदम की दूरी

है उसके बाद समस्त संसार तुम्हारे चरणों

में होगा लेकिन उसके पहले तुम्हें झांकना

होगा अपने भीतर देखना होगा कि कोई

तुम्हारे सदैव धन के ही पीछे भागता है और

धन को ही प्राप्त नहीं कर पाता कोई धन का

विचार छोड़कर कौशल के पीछे भागता है और धन

को प्राप्त कर लेता है कोई कौशल का विचार

छोड़कर परोपकार की बातें सोचता है और

सुकून को प्राप्त कर लेता है कोई सुकून का

विचार कर परमात्मा के बारे में सोचता है

और शांति को पा जाता है कोई शांति का

त्याग कर जीवन के महत्व को समझ जाता है और

परम आनंद को प्राप्त हो जाता है और जो परम

आनंद को प्राप्त हो जाता है उसे फिर धन भी

प्राप्त होता है उसे फिर यशस्वी प्राप्त

होता है उसे फिर वहां कुछ प्राप्त होता है

जो उसके विचारों ने छोड़ दिया था वह सब

कुछ प्राप्त होता है जो इस संसार में

प्राप्त होने योग्य है वो कौशल अकश इन

सबसे ऊपर उठ जाता है वह सुख शांति प्रेम

तिरस्कार निंदा मोह लगाव धारणा मान्यता इन

सब चीजों से ऊपर उठ जाता है उसके भीतर फिर

कुछ शेष रह जाता है तो केवल और केवल

परमात्मा तुम उसी राह पर हो तुम उसी मार्ग

पर हो और इस मार्ग पर अब तुम्हें जी जीतने

से कोई रोक नहीं

सकता संसार की चाहे कोई भी ताकत आ जाए

चाहे वह ताकत मायावी हो चाहे वह ताकत

देव्य हो चाहे वह इस लोक की हो चाहे वह

पारलौकिक हो चाहे तुम्हारे पूर्वजों की हो

चाहे किसी देवदूत की हो चाहे किसी देवता

की हो चाहे किसी दानव की हो चाहे दक्ष की

हो चाहे राक्षस की हो चाहे सद्गुरु की हो

दुनिया की कोई भी ताकत तब तुम्हें रोक

नहीं सकती केवल तुम्हा समर्थन कर सकती है

और जो ताकत तुम्हारा समर्थन नहीं करती मैं

उसे तुम्हारे मार्ग से ही हटा दूंगा मैं

उसका वजूद ही समाप्त कर दूंगा क्योंकि तुम

मुझे प्रिय हो क्योंकि तुम सत्य को जानने

के इच्छुक हो क्योंकि तुम इस मार्ग पर आगे

बढ़ना चाहते हो और जो सत्य को जानने का

इच्छुक हो जाता है मैं उसे सत्य से परिचित

अवश्य ही करा देता हूं मैं उसे सत्य तक

पहुंचा ही देता

हूं फिर उस बुद्ध पुरुष के समान हो जाता

है जिसे ज्ञान अज्ञान से कोई फर्क नहीं

पड़ता जिसके पास वह सब कुछ हो जाता है जो

उसके पास हो जाना चाहिए

था

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