जीत के उस शिखर पर पहुंचने वाले हो कि लोग आश्चर्य से भर जाएंगे 1111 urgent god message ✍️

मेरे प्रिय बच्चे क्या तुम्हें पता है वो

समय आ गया है जब तुम इतिहास रचने वाले हो

तुम एक पवित्र आत्मा हो ब्रह्मांड निरंतर

तुम्हें पुकार रहा है अब आध्यात्मिक ऊर्जा

से परिपूर्ण समस्त परमाणु तुम्हें अपने

चारों ओर से घेरे हुए हैं जो निरंतर

तुम्हारे अस्थिर मन को स्थिरता प्रदान कर

लड़ने का साहस देते रहते हैं प्रिय बच्चे

मैं जानता हूं तुम अपने अंतर मन की पुकार

को सुनना चाहते हो कि जब तुम इस कार्य को

आगे बढ़ाओ इसके लिए तुम्हें इस संदेश को

खून सुनना है इसे बीच में छोड़कर जाने की

भूलना ना करना मैं तुम्हें बताना चाहता

हूं कि तुम अब क्या करने वाले हो वह जो

अदृश्य शक्तियां तुम्हारे लिए कर रही है

वोह जिनसे तुम इस स्थूल जगत में देख नहीं

सकते हो या वोह जिनसे तुम्हारा यह मन

तुम्हारी यह बुद्धि यह चित परिचित नहीं है

बच्चे तुम आज जहां पर हो यहां तक यो नहीं

आए हो अपितु तुम यहां पर लाए गए हो इस कली

काल के प्रकोप में केवल वही तुम्हारे इस

मार्ग का अनुसरण करेंगे जिन्होंने कई वर्ष

और कठिन तपस्या की है यह तपस्या केवल इस

जन्म से नहीं है पिछले जन्मों से ही यह

चली आ रही थी ऐसे लोग जिन्होंने धर्म का

चुनाव किया था और जो आज भी धर्म को ही

अपना सत्य मार्ग समझे है वह तुम्हारा साथ

देंगे जैसे अग्नि सूखी घास को लेती है जिस

प्रकार से एक उसी प्रकार से तुम्हारे

लक्ष्य ने भी तुम्हारे आत्म उद्देश ने भी

तुम्हें ढूंढ लिया है अब मूर्त रूप धारण

करके बहुत सी दिव्या आत्माएं तुमसे संपर्क

साधने का प्रयत्न करेंगी वो लक्ष्य जिसे

जानने को तुम अब तक उत्सुक थे वही लक्ष्य

जिसे पाने के लिए तुम्हारा मन निरंतर उ

फाने मार रहा था वो तुम्हें प्राप्त होने

वाला है तुम इतिहास रचने के बहुत ही करीब

आ गए हो निर निरंतर तुम्ह संकेत मिलते

रहेंगे तुम वहां पहुंचने वाले हो जहां

पहुंचना तुम्हारा भाग्य है तुम्हारी यति

है यह शीतल हवाएं तुम्हें संकेत देंगी कि

तुम क्या करने के लिए इस धरती पर जन्म

लियो हो अब तुम्हारे समक्ष ऐसे दृश्य ऐसे

सत्य और ऐसे चेहरे सामने आएंगे जो तुम्हें

विचलित कर सकते हैं लेकिन फिर भी तुम्हारे

भीतर वह साहस होगा जो तुम्हें उनसे लड़ने

की शक्ति उनका सामना करने की पूरी शक्ति

प्रदान करेगा तुम एक पल के लिए भले ही

डगमगा जाओ लेकिन तुम थको ग नहीं तुम

[संगीत]

हारोगेट रूप से तुम्हें मैं थाम लूंगा

मेरे प्रिय मैं अधर्म का विस्तार नहीं

होने दूंगा और वो शक्तियां जो निरंतर

अधर्म का विस्तार करना चाहती है जो

नकारात्मकता को फैलाना चाहती है जो

अध्यात्मिक के मार्ग में चल रहे लोगों को

स नाश कर देना चाहती है मैं उन्हें जीतने

नहीं दूंगा मैं तो उसे ही विजय तिलक

सजाऊंगा जो अध्यात्म के मार्ग का चुनाव कर

अपने जीवन को प्रगति की ओर ले जाना चाहता

है प्रिय इस संसार में भ्रष्टाचार और

अधर्म बढ़ता जा रहा है इस संसार में लोगों

के भीतर अहंकार और आवेग बढ़ता चला जा रहा

है ऐसे क्षण में तुम्हारे मन में यह

प्रश्न उठ सकता है कि तुम एक साधारण

व्यक्ति हो आखिर ब्रह्मांड ने तुम्हारा

चयन क्यों किया है और आखिर इसमें तुम्हें

क्या लाभ है क्या तुम्हें जीवन भर पीड़ा

उठानी पड़ेगी या तुम इससे भी बाहर आ जाओगे

प्रिय बच्चे तुम्हें ज्ञात नहीं लेकिन जो

साधारण शरीर अभी तुम धारण किए हो वो वास्त

में उसके भीतर छुपी तुम्हारी आत्मा इस लोक

से संबंधित है ही नहीं उसका जल उसका

प्रादुर्भाव इस लोक में कभी हुआ ही नहीं

था वो तो सदा से ही अनंत काल से ही तुम

में विरा विमान थी इस संसार में विराजमान

थी खुशियां फैलाने वाली यह दिव्या आत्मा

तुम्हारे शरीर में आई है इसके पीछे का एक

कारण है तुम्हें उस कारण को समझना है और

मैं तुम्हारे उसी कारण को स्पष्ट करने आया

हूं समय बदलता है दुनिया बदलती है जलवायु

बदलती है पृथ्वी अपना आकार आकृति सब कुछ

बदल देती है लेकिन बार-बार तुम्हारी वही

आत्मा नए समय काल में नया शरीर धारण करके

आती है तुम ईश्वर के ही अंश हो तुम अभिन्न

हो तुम अलग नहीं हो तुम अपने पूर्व कर्मों

को नहीं जानते लेकिन मैं जानता हूं कि

धर्म का विस्तार करने में तुमने कितनी

सहायता प्रदान की है कि धर्म के प्रतिपादक

बनके तुम कितना आगे आ जाना चाहते थे धर्म

की मसाल लेकर ही तुमने अपनी सभी जन्मों

में अपना जीवन जिया है लेकिन कुछ लोग ऐसे

थे जो अधर्म का विस्तार करना चाहते थे जो

सदा से ही तुम्हें हराना चाहते थे जो सदा

से यही चाहते आए हैं कि तुम कभी जीत ना

पाओ जैसे एक ही सिक्के के दो पहलू होते

हैं एक सकारात्मक एक नकारात्मक एक धार्मिक

एक

[संगीत]

अधार्वा जीवन में संघर्ष के छड़ गल रहते

हैं वो तुम्हारे जीवन में विपत्तियों का

पहाड़ बनाते रहते हैं लेकिन सारे पहाड़ों

को काट देने वाले वो चट्टान हो तुम तुम उस

नदी की तरह हो जो भी से भी सर पत्थर को भी

काट करर आगे बढ़ जाती है तुम उस चट्टान से

निर्मित वो हथियार हो जो अपने मार्ग में आ

रहे अधर्म के भीषण से भीषण चट्टान को भीषण

से भीषण पहाड़ को भी तोड़ने की क्षमता

रखते हो तुम कभी ना मरने वाले शरीर कभी ना

खत्म होने वाले समय और कभी ना खत्म होने

वाले आनंद के सृजन करता हो तुम स्वयं ही

परम चित आनंद में विलीन होने वाली दिव्या

हो तो मेरे प्रिय तुम भयभीत ना हो तुम अब

प्रगति की उस मार्ग पर आगे बढ़ो जिस मार्ग

पर तुम्हें पीछे धकेलने वाला कोई नहीं

होगा अब वो केवल तुम्हारी तरक्की तुम्हारी

ऊंचाई को देखकर रशा के बादलों से भर

जाएंगे तुम्हारी प्रगति तुम्हारे उठान को

देखकर जलन की अग्नि में तप उठेंगे अब उनके

पास कोई मार्ग शेष ना होगा और तुम इतनी

ऊंचाई पर रहोगे कि उनकी आवाज भी तुम तक ना

पहुंचेगी तुम उस ऊंचाई पर रहोगे कि वह यदि

तुम्हें गालिया देंगे तो भी तुम्हें सुनाई

नहीं पड़ेगा व यदि तुम्हारी तारीफ करेंगे

तो भी तुम्हें सुनाई नहीं पड़ेगा तुम केवल

और केवल परमात्मा की शरण का जीवन होगा तुम

अब उस ऊंचाई को प्राप्त करने वाले हो मेरे

प्रिय वो छड़ बहुत ही जल्द तुम्हारे करीब

होगा लेकिन कुछ बातें हैं जिनका तुम्हें

विशेष ध्यान रखना है सर्वप्रथम तुम्हें

अपने भीतर किसी भी प्रकार के अहंकार को

पनपने नहीं देना है तुम्हारे भीतर जो भी

मानवीय चिंताओं का बोझ है उसे त्याग दो

लगाव मोह और प्रेम तीनों अलग-अलग बातें

हैं तीनों को एक समझने की भूल तुम कभी भी

ना करो प्रिय बच्चे जिसे तुम प्रेम समझ

रहे हो वास्तविकता में वह प्रेम है ही

नहीं वह तो केवल मो का मुखा प ने हुए एक

प्रकार का लगाव है वो प्रेम की चादर ओढे

हुए एक प्रकार का मोह ही है वो मोह के

अतिरिक्त कुछ भी नहीं है तुम्हें समझना

होगा कि तुम्हारे लिए कौन अनजान है कौन है

जिन्हें तुम अपना कह सकते हो और कौन है

जिन्हें तुम अपना नहीं मान सकते हो कुछ

लोग ऐसे होते हैं जो मित्रता का मुखौटा

पहने हुए होते हैं जो तुम्हारे सामने मीठी

मठी बातें बोलते हैं लेकिन तुम्हारे पीठ

पीछे लोगों से तुम्हारी ही बुराइयां करते

हैं जो तुम्हारे पीठ पीछे तुम्हारे ही

खिलाफ षड्यंत्र रचा करते हैं वह जो

तुम्हारे बारे में नकारात्मकता फैलाते हैं

वह जो नहीं चाहते कि तुम जीवन में कभी भी

प्रगति करो वह तुम्हारे आसपास ही है

तुम्हारे अपनों के रूप में तुम्हारे अपने

बनकर तुम्हारी शिकर का लालच दिखाते हुए वह

तुम्हारे बहुत करीब है तुम्हें उन सांपों

को ढूंढना है तुम्हें उन असलियत को समझना

है वरना यह कब तुम्हें डस लेंगे तुम यह

समझ भी ना पाओगे मेरे प्रिय बहुत जल्द

किसी पर विश्वास कर लेना कभी भी अच्छा

नहीं होता जब तुम बहुत जल्द किसी पर

विश्वास कर लेते हो बिना तरक वितरक किए

बिना दिमाग लगाए बिना तार्किक अर्थों में

उसे सोचे हुए तो वहां तुम्हें धोखा मिलने

की संभावना बिल्कुल ही बढ़ जाती है वहां

तुम्हारे हृदय के विखंडित हो जाने की

संभावना बहुत तेजी से बढ़ जाती है मैं

नहीं चाहता कि तुम्हारा दिल टूटे मैं नहीं

चाहता कि तुम जरा भी चिंता में आओ तुम्हें

समझना होगा अपने पराय के भेद को कौन

तुम्हारे लिए महत्त्वपूर्ण है क्या

तुम्हारे लिए अनिवार्य है किनसे मिलना

जुलना तुम्हारे लिए सही है यह तुम्हें

समझना होगा मेरे प्रिय अपने उन

महत्त्वपूर्ण लोगों की एक सूची बनाओ उनकी

सूची बनाओ जो तुम्हारे लिए आवश्यक है साथ

उनकी भी सूची बनाओ जो तुम्हारे लिए

बिल्कुल भी आवश्यक नहीं है और जो लोग

तुम्हारे लिए बिल्कुल भी आवश्यक नहीं है

उनसे किसी भी प्रकार का संबंध साधने की

आवश्यकता नहीं मैं ऐसा नहीं कह रहा कि

उनसे सारे संबंध त्याग दो वो त्याज नहीं

है उन्हें त्यागने की आवश्यकता नहीं है

लेकिन उनसे संपर्क साधने की उनके संपर्क

में आने की उनकी बातों को महत्व देने की

या उनके लिए कोई कार्य करने की आवश्यकता

नहीं है तुम लोगों से घुलो मिलो लोगों से

संपर्क बनाओ किंतु किसे अपना मानना है

किसे अपना नहीं मानना है इस बात के लिए

पूरी तरह से अस्पष्ट रहो पूरी तरह से

अस्पष्ट रहो उन लोगों के लिए जो तुमसे

प्रेम करते हैं पूरी तरह से अस्पष्ट रहो

उन लोगों के लिए जिनसे तुम प्रेम करते हो

उन्हें प्राथमिकता दो उनके छोटे मोटे

गलतियों को नजरअंदाज

करो लेकिन आज के लोग जैसे चाहे जिस भाषा

में चाहे बोल देते हो तुम उनके भावनाओं की

कद्र नहीं करते और क्रिया प्रतिक्रिया के

नियम के अनुसार वह भी तुम्हारी भावनाओं की

कदर नहीं कर पाते जबकि प्रकृति का नियम यह

कहता है कि जिनसे तुम प्रेम करते हो या जो

तुमसे प्रेम करते हो उनकी भावनाओं का सदा

ही सम्मान करना चाहिए उनकी बातों को पूरी

तन्मयता के साथ सुनना चाहिए यदि उनकी कुछ

बातें तुम्हें ता नहीं लगती यदि उनकी

बातें तुम्हें हट पूर्वक लगती हो यदि उनकी

बातें तुम्हारे कानों को अच्छी ना लग रही

हो उस परिस्थिति में भी तुम्हें संयम धारण

करके उनको समझाना चाहिए उनकी बातों को

समझना चाहिए हर बार इस अहंकार में नहीं

होना चाहिए कि तुम ही सत्य कह रहे हो या

तुम्हारी ही बात तार्किक है तुम्हें दोनों

पहलुओं से सोचना चाहिए प्रकृति इसी नियम

के आधार पर चलता है लेकिन आज की परिस्थिति

में वो लोग जिनसे तुम्हारा विशेष संबंध

नहीं है तुम उन्हें झूठा सम्मान प्रदान

करते हो तुम उनकी बातों को तो सुनते हो

उनकी बातों को महत्व भी देते हो और उनके

लिए कार्य करने को भी तैयार हो जाते हो

जबकि वह लोग जो वास्तव में तुमसे प्रेम

करते हैं तुम उनकी बातों को पूर्ण नहीं

सुनते हो तुम उनकी बातों को महत्व नहीं

देते हो यह अलग बात है कि उन पर कोई

मुसीबत आ जाए तो तुम तुम सर्वप्रथम उनका

सहारा बनोगे तुम्हारी प्राथमिकता में

सर्वप्रथम वही लोग होंगे लेकिन क्या तुम

मुसीबत आने का ही इंतजार कर रहे हो क्या

तुम मुसीबत आने की ही प्रतीक्षा में बैठे

हो क्या तुम इसी इंतजार में बैठे हो कि जब

मुसीबत आएगा तभी तुम उनके के लिए अपना

प्रेम जाहिर कर पाओगे मेरे प्रिय विचार

करो कि कहां खोट हो रही है विचार करो कि

ऐसी कौन सी गलतियां है जो तुम्हारे प्रेम

संबंधों को जो तुम्हारे परिवार के साथ

तुम्हारे संबंधों को आगे नहीं बढ़ने दे

रही है जो तुम्हें रोके हुए हैं जो

तुम्हें प्रगतिशील नहीं होने दे रही है

कहीं यह कमी तुम्हारे ही विचारों से तो

नहीं उत्पन्न हो रही है कहीं यह कमी

तुम्हारी ही मानसिकता से तो नहीं उत्पन्न

हो रही है कहीं इस कमी का प्रादुर्भाव

तुम्हारे विचारों में तुम एक सह जीवन की

कल्पना करते हो मैं जानता हूं तुम

अतिशीघ्र धन की कामना नहीं करते तुम उतने

ही धन की कामना करते हो जिसमें तुम्हारा

जीवन सहज रूप से चल जाए तुम्हें वह खुशी

उस प्रकार से हासिल नहीं हो पा रही जैसे

अब तक तुम्हें प्राप्त हो जानी चाहिए थी

जबकि तुम इसके लिए पूरी तरह से योग्य हो

जबकि तुम एक दिव्य आत्मा हो जबकि तुम

पुणता से भरे हुए हो तुम्हारे मन में किसी

के प्रति भेद नहीं है तुम्हारे मन में

किसी के प्रति द्वेष नहीं है तुम्हारे मन

में किसी के लिए भी र्ष बिल्कुल भी नहीं

है तुमने इसका सदा सदा के लिए नाश कर दिया

है और तुम सदा यही सोचते हो कि तुम्हारी

वजह से जैसे किसी को कोई कष्ट ना हो किसी

को कोई तकलीफ ना हो फिर ऐसा क्या है कि

तुम्हारा जीवन पुष्प की भाति खिल नहीं पा

रहा फिर ऐसा क्या है कि तुम्हारा जीवन एक

चक्र में फस गया है ऐसा क्या है कि तुम

भावंड के गर्द में फसते ही चले जा रहे हो

विचार करो कि वह कौन सी कमिया है कहीं तुम

अपने भीतर बदलाव करने में असम रहे हो इसका

विचार करो कि वह क्या है जो तुम नहीं बदल

पा रहे हो मेरे प्रिय यदि तुम इसका विचार

नहीं भी कर पाओगे उस परिस्थिति में भी मैं

अंतत तुम्हें जीत दिला ही दूंगा मैं पुष्प

की भांती तुम्हें खिला ही दूंगा मैं

तुम्हारे नाम को चारों और फैला दूंगा मैं

तुम्हारे यश का गान सबके बीच करा दूंगा

लेकिन क्या तुम इसमें मेरा साथ दोगे क्या

तुम अपना हाथ आ बढ़ाकर मुझे चीजों को तेजी

से करने में मेरी सहायता प्रदान करोगे

क्या तुम मेरे अंश के रूप में स्वयं की

प्रगति का विचार करोगे तुम्हें इसका विचार

करना है अपनी सोच को बढ़ाओ अपने भीतर पनप

रहे दिव्यता को पहचानो तुम्हारे भीतर जो

क्रूरता है जो शत्रुता है जो पशुता है

उसका समापन तो तुम्हें ही करना होगा मैं

तुम्हें जीत दिला दूंगा लेकिन क्या इस जीत

को पचाने में सक्षम रहोगे तुम क्या उस जीत

को अपने मन मस्तिष्क में धारण करके उसकी

शिरोमणी बनाकर उसका मुकुट पहनने को तैयार

हो क्या तुम स्वयं से तैयार हो विजेता लक

लगाने को क्या तुम पहाड़ों की उस ऊंचाई तक

पहुंचने को तैयार हो जहां से कोई तुम्हारे

पैर खींच करर तुम्हें नीचे ना गिरा सके

अपने मन मस्तिष्क में विचार करो कि क्या

वास्तव में तुम जीत के योगी हो मैं तो

कहता हूं तुम्हें जीत हासिल करनी चाहिए

मैं तो कहता हूं कि अब वह समय आ गया है कि

तुम्हें जीत मिलनी चाहिए और निश्चित तौर

पर मंजिल तक पहुंचने से रोक रहे हैं प्रिय

बच्चे अब तुम जब की जीत को हासिल करने

वाले हो तो तुम्हें कुछ बातों का विशेष

ध्यान रखना होगा सर्वप्रथम तुम्हें यह

सोचना होगा कि बड़ी जीत के साथ बड़ी

जिम्मेदारी भी आती है इसलिए मनुष्य जितनी

ऊंचाई पर पहुंचता है उसे अपने वाणी पर

उतना ही ज्यादा नियंत्रण रखना चाहिए उसे

हर किसी की बात बातो पर प्रतिक्रिया नहीं

देनी चाहिए इस जीत में तुम्हें बहुत से

ऐसे लोग मिलेंगे जो तुम्हारी प्रशंसा

करेंगे और बहुत से ऐसे भी लोग मिलेंगे जो

तुम्हारी आलोचना करेंगे तुम्हारी निंदा

करेंगे जो सदा ही तुम्हें कटु वचन बोलेंगे

तुम्हारे बार-बार यह साबित करने की झंझट

में नहीं पड़ना है कि तुम सही हो और तुम

सदा ही सत्य का साथ देते हो इस संसार में

जितने भी बौद्धिक मनुष्य हुए हैं उन्होंने

कभी स्वय के सत्यता को साबित करने के लिए

कोई जोर नहीं लगाया उन्होंने वास्तविक रूप

से अपनी बात रख दी जिसे सत्य मानने का शौक

था उन्होंने उनकी बात को सत्य माना और

जिसे सत्य मानने का शौक नहीं था जो केवल

आलोचना के दूतक रहे हैं वह सदा ही उनकी

आलोचना करते आए हैं इस संसार में बहुत से

बौद्धिक मनुष्यों को जहर पिला दिया गया

बहुत से बौद्धिक मनुष्यों से उनकी यस्म पर

सवाल उठाया गया बहुत से बौद्धिक मनुष्यों

को सूली पर टांग दिया गया बहुत से बौद्धिक

मनुष्यों को फांसी पर चढ़ा दिया गया और

बहुत से बुद्ध पुरुषों को इस संसार ने

स्वीकारा ही नहीं किंतु तुम्हें समझना है

कि तुम्हें क्या सफाई देनी है क्या

तुम्हें अपनी सत्यता को लोगों के समक्ष

प्रस्तुत करना है या फिर अपना कार्य करकर

प्रगति को प्राप्त करना है प्रिय बच्चे

इसका विचार तुम्हें ही करना है क्योंकि

अंत तुम्हारी जीत हो कर ही रहेगी अंतत तुम

वास्तविक प्रेम को प्राप्त ही कर लोगे

लेकिन दो प्रश्न तुम्हें अपने आप से पूछने

हैं पहला प्रश्न यह कि क्या तुम इसे

प्राप्त करने के पूरी तरह से योग्य हो यदि

नहीं भी हो तो अपनी शक्ति को स्वीकार कर

लो और फिर मैं तुम्हें वह शक्ति अवश्य

प्रदान करूंगा कि तुम जल्द ही उसे प्राप्त

करने के पूरी तरह से योग्य बन जाओगे और

दूसरा प्रश्न यह कि क्या तुम्हें सबकी

बातों पर प्रतिक्रिया देनी है क्या

तुम्हें अपने अहंकार को भली भाति करना है

या फिर सत्य का हाथ पकड़कर अध्यात्म के

मार्ग का अनुसरण करना है जब जीत तुम्हें

मिल ही रही है तो फिर यह व्यर्थ की झांझ

में क्यों पड़ना है क्यों किसी को कुछ

साबित करना है क्यों किसी की नजर में

अच्छा या बुरा बनना है क्यों किसी की

प्रशंसा से खुशियों के डोर बांधने हैं और

किसी की निंदा से अपमान का बोझ सहना है

तुम्हें इन बातों का विर नहीं करना है

तुम्हें यह सारी बातें त्याग नहीं है और

केवल और केवल अपने जीवन का विचार करना है

तुम प्रगति के मार्ग पर आ चले हो तुम जीत

के मार्ग पर आ चले हो जब से तुमने

आध्यात्मिक मार्ग का अनुसरण किया है तुम

आगे ही बढ़ रहे हो शायद यह तुम्हें दिखाई

ना दे तुम इसकी गहराई को भाप ना सको तुम

ना समझ पाओ कि तुमने क्या चुनाव किया है

लेकिन मैं आज तुम्हें यही बता रहा हूं कि

तुमने वास्तविक मार्ग का चुनाव किया है

तुमने सत्य के मार्ग का चुनाव किया है और

जब मनुष्य के जीवन में सत्य घुलता है

मनुष्य के जीवन में अध्यात्म घुलता है उस

अमृत को पी रहे हो तुम भी सकारात्मकता के

इस अमृत को अपने मन मस्तिष्क में उतार रहे

हो प्रिय बच्चे तुम जीत को अपने जीवन में

पा रहे हो और यह जीत बहुत ही जल्द तुम्हें

दिखाई भी देने लगेगी दृष्टा की भाति तुम

बहुत ही जल्द इसे देखने वाले हो

प्रिय बच्चे इस जीत को तत्काल आकर्षित करो

इसकी पुष्टि करनी तुम्हारे लिए आवश्यक है

यह पुष्टि तुम्हारे लिए सदा ही जरूरी हो

जाती है अभी इसकी पुष्टि करो संख्या

लिखकर इसकी पुष्टि करो साथ ही तुम्हें यह

बात लिखनी है और इसके साथ ही एक बात कभी

मत भूलना कि परिस्थिति चाहे जैसी भी हो

कोई तुम्हारा साथ दे या ना दे मैं सदा

तुम्हारे साथ हूं मैं सदा तुम्हारे आस पास

ही हूं मैं तुम्हारा हाथ पकड़कर तुम्हें

जीत की राह पर ले जाने के लिए ही आया हूं

मैं तुम्हारे साथ हूं सदा सुखी रहो

तुम्हारा कल्याण होगा

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