जैसी करनी वैसी भरनी, Ajit Pawar के भतीजे ने की उनसे बगावत

जय हिंद दर्शकों मैं हूं जितेंद्र दीक्षित
फर पीएम महाराष्ट्र में आपका स्वागत
है 1977 में एक हिंदी फिल्म आई थी जिसका
शीर्षक था चाचा

भतीजा उसमें चाचा थे धर्मेंद्र और भतीजे
थे रणधीर कपूर और उसमें एक गाना था जिसकी
लाइन थी बुरे काम का बुरा नतीजा क्यों भाई
चाचा
अरे हां

भतीजा अच्छा इस गाने के अलावा एक और भी
हिंदी की कहावत है जैसी करनी वैसी
भरनी और एक और कहावत है जैसे को
तैसा और यह सारी कहावत जो है इंसान के
कर्म से जुड़ी हुई है या फिर उस गाने की
लाइन

भी यह मैं आपको क्यों कह हूं आज इस
राजनीतिक चर्चा में मैं कर्म की या
फिलोसोफी की या धर्म की बात क्यों कर रहा
हूं दरअसल सारी बातें महाराष् के मौजूदा
राजनीति परिदृश्य से जुड़ी ई

हैं महाराष्ट्र की सियासत ने दो भों की
बगावत देखी है अपने चाचा के
खिलाफ एक बगावत हुई थी साल 2005 में जब
राज ठाकरे ने अपने चाचा बालासाहेब ठाकरे
की पार्टी से बगावत कर दी

थी शिव छी ि अर् राष् नवनिर्माण
और 2009 में इस पार्टी ने इतनी आक्रमक
तरीके से प्रचार किया कि शिवसेना का ही
अस्तित्व खतरे में नजर आने लगा हालांकि
सीट सिर्फ 2009 के विधानसभा चुनाव में 13
ही जीत पाए थे राज ठाकरे लेकिन उसने कई

सीटों पर शिवसेना के उम्मीदवारों को हराने
का काम किया था और सियासी गलियारों में तो
चर्चा शुरू हो गई थी कि क्या नई शिवसेना
एमएनएस होगी राज ठाकरे की
पार्टी

दूसरी बगावत हमने देखी साल 2023 जुलाई में
जब अजीत पवार ने बगावत कागुल बजा दिया
अपने चाचा शरद पवार के

खिलाफ और पार्टी के एक बड़े धड़े को लेकर
निकल गए और फिर महाराष्ट्र की जो
सत्ताधारी पार्टियों का गठबंधन था बीजेपी
और शिवसेना का उससे जुड़
गए सरकार
शिल्य अजीत पवार ने उन

शरद पवार के साथ
में यह बगावत
की जिन शरद पवार ने एनसीपी को गठित किया
था और जिन्होंने उंगली पकड़कर अजीत पवार
को राजनीति में चलना सिखाया
था 1999 में कांग्रेस से बाहर निकलकर ही
शरद पवार ने अपनी अलग पार्टी बनाई थी

एनसीपी और चूंकि वह शरद पवार के भतीजे थे
इसलिए राजनीति में कद हासिल कर पाए इतनी ज
जल्द उनका ग्रोथ होता
गया यहां तक कि साल 2019 में जब एक दिन
अचानक उन्होंने गुपचुप

शपथ ले ली थी देवेंद्र फडणवीस के साथ जाकर
उप मुख्यमंत्री पद की और फडणवीस
मुख्यमंत्री बन गए थे उसके बाद भी चूंकि
वह शरद पवार के भतीजे थे इसलिए उनको माफ
कर दिया गया फिर से पार्टी में ले लिया

गया और ना केवल पार्टी में लिया गया बल्कि
उनको जो मौजूदा
तबकी महाविकास आड़ी की सरकार थी उद्धव

ठाकरे वाली उसमें उनको उप मुख्यमंत्री
बनाया गया सरकार की तिजोरी की चाभी उनको
दे दी गई वित्त मंत्री भी बना दिया
गया अगर कोई और होता तो क्या इस तरह का
सलूक उनके साथ पार्टी करती या उनको पार्टी

वापस भी
लेती शरद पवार की बहुत बड़ी गलती मानी
जाती
है लेकिन इसके बावजूद
अजीत पवार ने फिर से कांड कर दिया

2023
में फिर अपने चाचा से उन्होंने बगावत कर
दी और इस बार बहुत ही ज्यादा नुकसान उठाना
पड़ा शरद पवार को पार्टी का नाम ही उनसे
छिन गया चुनाव आयोग ने आधिकारिक पार्टी
भतीजे अजीत पवार की बता दी चुनाव चिन्ह भी

दे दिया घड़ी भी उठाकर अजीत पवार को दे दी
यानी कि जिन शरद पवार ने पार्टी बनाई व
पार्टी से बाहर और उनके भतीजे पार्टी के

असली हकदार हो
गए और विधानसभा में स्पीकर ने भी कुछ ऐसा
ही फैसला सुना दिया विधानसभा के पटल पर भी
असली एनसीपी जो है अजीत पवार की ही हो
गई तब अजीत पवार ने अपने चाचा के साथ में
बगावत की अपने चाचा से अलग हुए तो अब वही
अजीत पवार के साथ भी हो रहा

है अजीत पवार जिनके चाचा
हैं वो भतीजे यानी कि योगेंद्र पवार वो भी
अब अपने चाचा से अलग हो गए

अजीत पवार अपने चाचा शरद पवार से अलग हुए
योगेंद्र पवार अपने चाचा अजीत पवार से अलग
हुए दरअसल योगेंद्र पवार जो है अजीत पवार
के सगे भाई श्रीनिवास के बेटे
हैं और हालही में इन्होंने अब राजनीति में
एंट्री की है और राजनीति में एंट्री करने

के बाद इन्होंने कहा कि य अजीत पवार के
साथ में नहीं जाएंगे इनकी वफादारी इनकी
लॉयल्टी अजीत पवार के चाचा शरद पवार के
साथ होगी और वो उन्हीं के लिए काम करेंगे
ऐसा इन्होंने स्पष्ट कर दिया

है तो देखिए कर्म का
खेल कि वहां पर अजीत पवार अपने चाचा से
अलग हुए तो यहां पर उनका अपना भतीजा उनसे
अलग हो
गया वैसे युगेंद्र पवार के बहाने एक और
पवार की एंट्री हो गई है राजनीति
में पहले से ही महाराष्ट्र की राजनीति में
पवार परिवार से पांच लोग थे एक तो खुद शरद

पवार दूसरा फिर उनके भतीजे अजीत
पवार उनकी बेटी सुप्रिया
सुले फिर उनके पोते रोहित पवार और एक है
पार्थ
पवार अजीत पवार के

बेटे हालांकि पार्थ पवार की राजनीति में
एंट्री तो करा दी गई थी पिछले चुनाव में
2019 में मावल लोकसभा सीट से अजीत पवार ने
उनको चुनाव
लेकिन बुरी तरह से हार गए वहां से
वह और तब से लाइमलाइट में नहीं थे वही

दूसरी तरफ रोहित पवार जो पोते थे शरद पवार
के उनको कर्जत जामखेड़ से विधानसभा का
टिकट मिला और वह विधायक चुने गए और वह
काफी सक्रिय नजर आ रहे हैं हाल ही में
उन्होंने एक महाराष्ट्र व्यापी यात्रा भी

की जिससे कि काफी चर्चा में रहे
वो और अब तो यह कहा जा रहा है कि एक और की
एंट्री होने वाली है सातव पवार की एंट्री
होने वाली है महाराष्ट्र की राजनीति में

और यह पवार होंगी सुनेत्र
पवार अजीत पवार की पत्नी जिन्ह की अजीत
पवार बारामती में अपनी चचेरी बहन के खिलाफ
उतारने की सोच रहे
हैं सुप्रिया सुले के खिलाफ सुप्रिया सुले

वहीं से दो बार से सांसद
है और वहां इस बार माना जा रहा है कि ननन
भाभी के बीच में मुकाबला
होगा सुले शरद पवार गुट की तरफ से रहेंगी

और अजीत पवार की तरफ से उनकी पत्नी
सुनेत्र
पवार तो देखते हैं क्या होता है
महाराष्ट्र की सियासत
में पवार वर्सेस पवार की लड़ाई काफी
दिलचस्प होगी जिस पर की हमारी नजर बनी
रहेगी इस खबर पर आपका क्या सोचना है कमेंट
बॉक्स में लिखकर जरूर बताइएगा मुझे

उत्सुकता रहेगी आपके विचार जानने की और
अगर आपने अब तक इस चैनल को सब्सक्राइब
नहीं किया है तो सब्सक्राइब कर
ले जय
हिंद

Leave a Comment