ट्विटर ने बोला सच, सरकार बंद करा रही है अकाउंट

नमस्कार मैं रवीश कुमार भारत सरकार के
नोटिस से
कहेगी तो उसे कानून का पालन करना पड़ेगा
लेकिन

है जिस काम से वह खुद सहमत नहीं क्या आप
तब भी नहीं देखेंगे कि किन खातों को बंद
किया जा रहा है और ऐसा करना सही है या
नहीं क्या इसका बचाव करने के लिए भी आपके
पास तर्क हैं जब भी किसी का अकाउंट बंद
होता है हल्ला मत जाता है कि
किए जाते हैं इस पर आज

और मानते हैं कि ऐसे पोस्ट पर भी
अभिव्यक्ति की आजादी लागू होनी चाहिए अब
आप बताइए इसके बाद क्या बच जाता है एक
बहुराष्ट्रीय कंपनी दुनिया भर के सामने यह
बात बता रही है कि उससे डर दिखाकर वह काम
कराया जा रहा है जिससे वह सहमत नहीं कंपनी
कह रही है कि अभिव्यक्ति की आजादी

लोगों को बोलने से रोका जाएगा क्या इसमें
भी भारत की जनता को कुछ गलत नहीं दिख रहा
गोदी मीडिया में सरकार से कोई सवाल नहीं
केवल भक्ति है भजन है मीडिया में आप अपनी
बात रख नहीं सकते तो लोग कहां जाएंगे क्या
लोगों ने चुप रहने की आदत डाल ली है

समझौता कर लिया है उन्हें इसके खतरे का
बिल्कुल अंदाजा नहीं कि उनकी आंखों के
सामने क्या हो रहा है एक ग्लोबल लेवल की
कंपनी को भारत सरकार नोटिस भेजकर अकाउंट
बंद करवाती है क्या सरकार नहीं सोचती होगी
कि मदर ऑफ डेमोक्रेसी के फादर ऑफ पावर की
क्या प्रतिष्ठा रह जाएगी क्या आप

प्रतिष्ठा की भी परवाह नहीं है केवल सत्ता
और कुर्सी रहनी चाहिए एक कंपनी के
कर्मचारी की निगाह में सरकार की क्या
प्रतिष्ठा रह जाती होगी जब उन्हें सिर्फ
आदेश का पालन करना पड़ता होगा और किसी
नौजवान का

है हमने कोर्ट में याचिका भी दायर की है
जो अभी लंबित है इसमें भारत सरकार के
ब्लॉक करने के आदेशों को चुनौती दी गई है
हमारी नीति है कि हम जिनके अकाउंट पर रोक
लगाते हैं उन्हें सरकार के नोटिस की
जानकारी देते हैं कानूनी कारणों से हम

सरकार के आदेश को प्रकाशित नहीं कर सकते
लेकिन हम मानते हैं कि इन्हें सार्वजनिक
करना पारदर्शिता के लिए अनिवार्य है अगर
यह नहीं बताया जाए तो फैसला लेने में
मनमानी होने लगेगी और जवाबदेही नहीं रहेगी

इस अपराध बोध को एक कंपनी ढो नहीं पा रही
होगी उसे भी लग रहा होगा कि बहुत ज्यादा
हो रहा है अब और नहीं तो क्या भारत सरकार
में बैठे अफसरों मंत्रियों और
प्रधानमंत्री को नहीं लगता कि बहुत ज्यादा

हो चुका है रुकना चाहिए क्या प्रधानमंत्री
को याद नहीं कि उन्होंने अमेरिकी कांग्रेस
में क्या बोला था जब वे बहस और चर्चा को
लोकतंत्र के लिए जरूरी मानते हैं तब फिर
उनकी सरकार इस तरह से लोगों के अकाउंट बंद
कराने में क्यों लगी है खासकर ऐसे लोग जो
उनकी नीतियों पर सवाल उठाते हैं जन
आंदोलनों पर रिपोर्ट करते हैं

डेमोक्रेसी इ द
आइडिया ट
वेलकम्स डिबेट एंड डिस्कोर्स
डेमोक्रेसी इ द
कल्चर ट गिव्स
विंग टू थॉट एंड

एक्सप्रेशन भी वाइजमैन ने प्रधानमंत्री
मोदी को यह कहा था उस वाइजमैन को खोजा जाए
खोज कर लाया जाए ताकि वही वाइजमैन
प्रधानमंत्री को उनकी बात याद दिला सके कि
पत्रकारों किसानों के

लोगों का अकाउंट बंद किया जाएगा
गया हंसराज मीणा के पक्ष में प्रकाश
अंबेडकर ने भी ट्वीट किया है और हंसराज के
खाते को बहाल करने की मांग की है
इसलिए अब यह ट्वीट भारत में नहीं दिखेगा
मगर आज

सुजीत फूल तेजवीर सिंह अंबाला रमनदीप सिंह
मान हरपाल संघा अशोक दनौदा के अकाउंट बंद
कर दिए गए जिनसे सरकार बात कर रही है उनके
भी खाते बंद करवा देती है यही नहीं 21
फरवरी को जब किसान मजदूर मोर्चा के नेता
दिल्ली कूछ की बात कर रहे थे उस वक्त कृषि
मंत्री अर्जुन मुंडा ट्वीट करते हैं कि

सरकार बातचीत करना चाहती है लेकिन जिन
नेताओं के लिए यह ट्वीट किया गया था उनके
तो अकाउंट ही बंद कर दिए गए थे वे चीख रहे
थे कि उनके असली अकाउंट बंद करा दिए गए
हैं नकली अकाउंट खोलकर उन पर अनाप शनाप
लिखा जा रहा है ताकि उन्हें बदनाम किया जा
सके देखिए हमारे फु अकाउंट र हैंडल बंद
किए गए हैं हमारे नाम पर जितने भी लीडर्स

है फेक अकाउंट फेक फेसबुक आईडिया खोलकर
पोस्ट डाली जा रही है हम कृपया आपके
माध्यम से अनुरोध करेंगे पूरे देश को कि
उन पर यकीन मत करें हमारे र हैंडल हमारे फ

प बंद पड़े हैं और डुप्लीकेट चीज जाके
भड़का सामग्री सरकार के द्वारा डाली जा
रही है और यहां शरारती तत्व सरकार के
द्वारा भेजे जा चुके हैं हमें सभी को इस
मोर्चे की रक्षा करने पड़ेगी और इसको

पीसफुली ढंग से चलाना पड़ेगा आप जानते हैं
कि गोदी मीडिया किसानों को किस तरह से पेश
कर रहा है किसानों को अगर अपनी बात रखनी
हो तो वे कहां जाएंगे बाजार में जो उगाते

हैं उसकी कीमत नहीं है और सरकार से जब
बोलने जाते हैं उस आवाज के लिए कोई मंच
नहीं है मीडिया रिपोर्ट है कि किसान
आंदोलन के दौरान 177 अकाउंट बंद किए गए
हैं इनमें वो पत्रकार भी हैं जो अपने
बाकी इनके पुराने ट्वीट दूसरे देशों में

देखे जा सकते हैं मंदीप पुनिया लगातार
किसान आंदोलन की रिपोर्टिंग कर रहे हैं इस
बार आंदोलन के दिल्ली पहुंचने से पहले ही
उनका अकाउंट बंद करवा दिया गया इसलिए
मंदीप किसी और के अकाउंट पर अपनी रिपोर्ट
डालते हैं 21 फरवरी को शंभू बॉर्डर पर हुए
टकराव का पूरा ब्योरा रात 10 बजे

और बाहर आकर छापी प्रेस फ्रीडम का हाल यह
है कि किसानों के प्रेस ग्रुप पर रोज सवाल
किया जाता है कि आज किस-किस का अकाउंट बंद
हुआ बात सिर्फ
डिमांड और डायरेक्शन इन योर कंट्री तो

हमें यह समझना चाहिए कि यह डिमांड क्या है
और यह डायरेक्शन क्या है इसमें एक शक्ति
है जो सेक्शन 69a ऑफ द इंफॉर्मेशन
टेक्नोलॉजी एक्ट में जिसे ब्लॉकिंग
डायरेक्शंस इश्यूड बाय द सेंट्रल

गवर्नमेंट बोली जाती है पर जिस तरीके से
इसने इसको सरकार ने इस्तेमाल किया है मेरे
हिसाब से गैर संवैधानिक है क्योंकि इसमें
कोई भी पारदर्शिता नहीं है ट्रांसपेरेंसी
नहीं है और इसमें कोई भी नेचुरल जस्टिस

नहीं है इसका मतलब है कि जो भी किसान
आंदोलन के नेता हैं जो भी पत्रकार हैं
उन्हें अपना पक्ष रखने की कोई भी अवसर
नहीं दिया गया है जबकि और उनको यह ऑर्डर
भी नहीं दिया गया है कि क्या क्या रीजंस
है क्या मतलब सरकार ने क्या पाया कौन सी
ट्वीट उनकी इलीगल उन्होंने पाई जिसके वजह

से उनका पूरा अकाउंट बंद कर दिया गया मेरे
हिसाब से इसके वजह से ये हमारा जो
फंडामेंटल राइट टू फ्रीडम ऑफ स्पीच एंड
एक्सप्रेशन है जो आर्टिकल 191 ए ऑफ द
कांस्टिट्यूशन ऑफ इंडिया में उसका उल्लंघन
है क्योंकि फंडामेंटल राइट टू फ्री स्पीच
एंड एक्सप्रेशन रीजनेबल रिस्ट्रिक्शंस को

में मतलब सीमित कर कर सकते हैं मतलब
एब्सलूट नहीं है कुछ कारण ऐसे हो सकते हैं
कि सरकार बोल सकती है कि हम सेंसरशिप
लाएंगे पर उसको करने की जो प्रक्रिया होती
है वह एक संवैधानिक तरीके से करनी चाहिए
जिसमें दूसरे व्यक्ति जिसको आप कुछ बोलने
नहीं दे रहे उसको एक लीगल अपॉर्चुनिटी एक
फुल फ्लेज हियरिंग नेचुरल जस्टिस

ट्रांसपेरेंसी यह सारी चीजें दी जाए और
इसमें एक और चीज है जो हमें देखनी चाहिए
जिसमें जो आम जनता है उसको भी इससे काफी
सूचनाएं मिलती है उसको काफी इंफॉर्मेशन
मिलती है तो दे राइट टू रिसीव इंफॉर्मेशन

व्हिच इज आल्सो अ पार्ट ऑफ आर्टिकल 191 ए
इज वायलेट बिकॉज ऑफ दिस
एक अपनी ऑफिशियल स्टेटमेंट पब्लिश करी है
जिसमें उन्होंने बोला है कि वह भारत सरकार
के इन आदेशों का उल्लंघन नहीं करेंगे उनका
पालन करेंगे पर वह यह आदेश किसी तरीके से
लीगली चैलेंज भी कर रहे हैं जिसमें
उन्होंने कर्नाटका हाई कोर्ट में एक अपील
दारजी

गई डाली गई है और अगर हम देखें सेक्शन 69a
और यह ब्लॉकिंग शक्ति का दुरुपयोग किसानों
के खिलाफ ही नहीं नहीं हो रहा पत्रकारों
के खिलाफ भी काफी हो रहा है जिसमें कैरवान
का एक पूरी न्यूज़ स्टोरी को ब्लॉक किया
गया है और कैरवान ने इसमें स्टेटमेंट डाली
है कि वह भी इसको हाई कोर्ट में एक अर्जी

डाल के एक इसको लीगली कंटेस्ट करेगी 2017
में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था मुक्त और
जीवंत प्रेस लोकतंत्र के लिए बहुत जरूरी
है बाकायदा उन्होंने ट्वीट किया था आप
देखिए भी कि आज के दौर में सोशल मीडिया
बातचीत और सूचनाओं के आदान प्रदान का

सक्रिय माध्यम बनकर उभरा है इसके कारण
प्रेस की आजादी में और जान आई है क्या
लिखते समय प्रधानमंत्री मोदी को ध्यान
नहीं रहता या परवाह ही नहीं होती कि जो
लिख रहे हैं उस पर आगे चलकर अमल भी करना
है 5 साल बाद उन्हीं की सरकार इस जरूरत और
जान को कुचल रही है और एक ग्लोबल कंपनी

पूरी दुनिया को यह बात बता रही है
फाइनेंशियल टाइम्स ने 2014 में
प्रधानमंत्री बनने पर नरेंद्र मोदी को
भारत का पहला सोशल मीडिया पीएम लिखा था
बीबीसी और अन्य जगहों पर यह रिपोर्ट भी
हुआ अप्रैल 2023 में उसी

सोशल मीडिया पर क्या हो रहा है सबके सामने
है क्या प्रधानमंत्री मोदी को पत्रकारों
के
नहीं है बल्कि जीने के अधिकार पर भी हमला
है कोई पत्रकार
youtube4 लोग जो पत्रकारिता कर रहे हैं
लिख रहे हैं बोल रहे हैं उन्हें भूखा मार

दिया जाए ऐसा कर दिया जाए कि उन्हें कोई
नौकरी ना दे वे सोशल मीडिया के जरिए
पत्रकारिता से अपना घर ना चला सकें क्या
लोग इसे भी सही मानते हैं इसमें भी किसी
को खुशी मिलती होगी इंटरनेट पर पारदर्शिता
और बराबरी की वकालत करने वाले वकील अपार
गुप्ता ने लिखा है कि यह प्री सेंसरशिप है

यानी कुछ होने से पहले ही सेंसर कर दो
पिछली बार जब मीडिया किसानों की बात ठीक
से नहीं रख रहा था तब किसानों ने
अपने बयानों की प्रेस रिलीज
हमारे

पहले चरण में भी अनेक अकाउंट बंद किए गए
थे कैरवान का भी अकाउंट बंद हुआ था उस समय
सरकार ने कई अकाउंट को खालिस्तान समर्थक
और पाकिस्तान से चलने वाला बताया था
मस् से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने
कहा कि हम पूरी धरती पर अमेरिका लागू नहीं
कर सकते
के बीच का नहीं है यह जनता और सरकार के
बीच का मामला है
ज्यादा तेज रफ्तार से आगे बढ़ती जा रही है
अब तो अभिव्यक्ति के साथ-साथ आजीविका पर
भी हमला हो रहा है नमस्कार मैं रवीश कुमार

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