तुम्हारा एक बहुत बड़ा रहस्य खुलने वाला है क्योंकि

आज इन्हीं सुंदर नेत्रों के लिए यह खत
लिखा गया है यहां तक पहुंच गए तो समझ लेना
अब वहां जाने वाले हो जीवन एक नए मोड़ के
लिए करवट लेने को तैयार है मेरे बच्चे
तुम्हारे हृदय से बह रही प्रेम की सुंदर
बूंदे मुझे प्रत्येक क्षण स्पर्श कर रही

हैं क्योंकि तुम एक दिव्य आ मा हो
तुम्हारी पवित्र ऊर्जा बढ़ती जा रही है
जिसके फल स्वरूप जो तुम्हारा अर्ध स्वरूप
है वह तुम्हारे निकट पहुंच रहा है मेरे

प्रिय जिस प्रकार एक चुंबक दूसरे चुंबक को
आकर्षित करता है उसी प्रकार तुम्हारा
दिव्य प्रेम तुम्हें आकर्षित कर रहा है
तुम्हारे हृदय में प्रेम के लिए जो पवित्र

भावनाएं उत्पन्न हुई है वह उसी चुंबकीय
आकर्षण का फल है जिस प्रकार तुम अपने
दिव्य प्रेम के बिना अधूरे हो उसी प्रकार
तुम्हारा दिव्य प्रेम तुम्हारे बिना पूर्ण
कैसे हो सकता है आज तुम्हें मैं वह सत्य
बताऊंगा जिसे जानकर तुम खुशी से झूम उठोगे

वह सत्य है तुम्हारे दिव्य प्रेम के मिलने
का समय मेरे प्रिय तुम दोनों के मिलने का
समय मैंने निर्धारित कर दिया है वह
तुम्हारे जीवन में अप्रत्यक्ष रूप से तो
पहले ही प्रवेश कर चुका है किंतु मैं
तुम्हें वह समय बता रहा हूं जब वह

प्रत्यक्ष रूप से तुम्हारे निकट होगा
ध्यान से सुनो जब तुम्हारी शक्ति मणिपुर
चक्र केंद्रित होगी जब अनाहत चक्र में
ऊर्जा बढ़ने के कारण तुम्हारा हृदय
अत्यधिक करुणा से भर जाएगा और हरा रंग
तुम्हें आकर्षित करने लगेगा जब तुम इतिहास
में हुई घटनाओं को जीवन का अनुभव समझकर

प्रसन चित मन से आगे बढ़ो खेत ठीक उसी समय
तुम्हारे जीवन में आर्थिक लाभ होने
प्रारंभ हो जाएंगे तुम्हारी चेतना का स्तर
ऊपर उठ चुका होगा उसी दिन उसी माह में वह
प्रत्यक्ष रूप से तुम्हारे सामने आएगा
क्योंकि जब तक तुम दोनों की यह आध्यात्मिक

यात्रा एक स्तर पर नहीं आती जब तक
तुम्हारा मिलन पंच आयम में संभव नहीं हो
सकता इसे इस प्रकार समझो जैसे कलाकार अपनी
रचना को पूर्ण करने के लिए उसके दो भागों
को अलग-अलग तब तक घिसते हुए तैयार करता है
जब तक वह दोनों एक समान सुंदर रूप में

नहीं आ जाती जैसे कि दोनों टुकड़ों के रूप
में आते हैं वैसे ही कलाकार उसे जोड़कर
अपनी रचना को नाम देता है यदि वह ऐसा ना
करें तो क्या होगा उसकी कोई भी रचना सुंदर
नहीं बनेगी कोई भाग छोटा तो कोई बड़ा रह
जाएगा क्योंकि जोड़ने के बाद उसमें ज्यादा
घिसाई संभव नहीं मेरे प्रिय बच्चे ऐसे ही
तुम दोनों मेरी ही सुंदर रचना हो जब तक
तुम दोनों की ऊर्जा को मैं एक स्तर पर
नहीं ले आता तो उसे मैं पहले ही कैसे जोड़

सकता हूं तुम ही बताओ मेरा ऐसा करना उचित
है या अनुचित मैं तुम्हें यह स्पष्ट बता
रहा हूं कि जो तुम्हारा दिव्य प्रेम है
उसकी ऊर्जा का स्तर तुमसे कहीं ऊपर उठ
चुका है उसकी यात्रा तुमसे पहले प्रारंभ
हुई थी किंतु प्रसन्नता की बात यह है उसने
जितनी यात्रा कई बरसों में तय की तुमने

उसे कुछ माह में ही पूरा किया है बस कुछ
कदम और तुम्हें आगे बढ़ाना होगा अपनी
चेतना के स्तर को उसके चेतना के स्तर के
समान लाना होगा मेरे बच्चे जैसे ही
तुम्हारी ऊर्जा का स्तर उसकी ऊर्जा के
स्तर से मेल खाएगा तुम दोनों स्वयं अपने
आप ही जुड़ जाओगे मेरे प्रिय क्या तुम

तैयार हो अपनी ऊर्जा को ऊपर उठाने के लिए
यदि हां आज से हर दिन 5 मिनट अपना ध्यान
अनाहत चक्र पर केंद्रित करते हुए प्रेम की
ऊर्जा को जीवन में आमंत्रित करो अपने आप
से बहुत ज्यादा प्यार करो अपने आप को
रचनात्मक चीजों से जोड़ो देखो तुम्हारा
जीवन चमत्कार बन जाएगा और हर वक्त तुम्हें
आनंद की अनुभूति होगी मेरे बच्चे यदि आज
तुम्हें मेरा संदेश प्राप्त हुआ है तो

इसका अर्थ है तुम्हारी मांगी हुई खुशी
तुम्हें देने जा रही हूं दिल को जो चीज
अच्छी लगती है यदि वह प्राप्त हो जाए तो
दिल खुश हो जाता है और जो दिल को अच्छी
नहीं लगती वह प्राप्त हो तो दिल दुखी हो

जाता है लेकिन कुछ हृदय की ऐसी अधूर
इच्छाएं होती हैं जो हृदय उन्हें पूरा
होता देखना चाहता है और तभी उनको पूरा हो
में रुकावट आने लगती हैं और मन बेचैन हो
उठता है ऐसे में मेरे बच्चे का किसी काम
में दिल नहीं लगता और केवल वही बात दिमा


के अंदर घूमती रहती है मेरा बच्चा बहुत
ज्यादा इस बात से परेशान हो जाता है कि
आखिर वह कार्य पूरा क्यों नहीं हो रहा वह
मेरी इच्छा अधूरी क्यों है ऐसा मैं क्या
करूं जिससे कि वह मेरी अधूरी इच्छा पूरी
हो जाए क्योंकि जब दिल खुश नहीं रहता तो

किसी भी काम में मन लगना असंभव है किसी भी
काम में मन लगने के लिए दिल का खुश रहना
बहुत जरूरी है लेकिन आज मैं कुछ ऐसी बातें
बताने वाली हूं जिसके सुनते ही तुम्हारा
मन भी लगेगा काम में और तुम्हारा हृदय भी
प्रसन्न हो जाएगा तुम्हारे मन की इच्छाओं

को पूर्ण जरूर करूंगी यदि तुमने सच्चे मन
से पूरी श्रद्धा से और मेहनत से किसी
कार्य को लगन लगाकर किया है तो मैं आज
तुमसे वादा करती हूं कि तुम्हारा वह कार्य
जिसके लिए तुमने पूरी ईमानदारी और मेहनत
के साथ उस कार्य को किया है मैं उसे अवश्य

पूर्ण करूंगी लेकिन तुम भी इस बात को बहुत
अच्छे से समझ लो कि जिस पर तुमने इतनी
इतनी मेहनत कर दी है और तुमने इतनी
ईमानदारी से काम को किया है तो वह काम भी
तुम्हारी मेहनत के सामने छोटा पड़ रहा है

इसलिए उससे भी बड़ा और उससे भी ऊंचा
तुम्हें मुकाम हासिल होगा मैं आज खुद
तुमसे यह वादा करती हूं कि तुम उससे भी
ऊंची जिसके लिए तुमने कार्य किया है उससे
भी बड़ी खुशी को तुमको प्राप्त होगी एक

कार्य जैसे-जैसे तुम यह करोगे वैसे-वैसे
सच में तुम्हारे अंदर वह शक्ति विराजमान
होती चली जाएगी जिससे तुम्हारा मन शांत
रहने लगेगा और यदि तुम्हारा मन शांत रहने
लगेगा तो तुम निश्चित ही अपने कार्य को मन

लगाकर कर पाओगे क्योंकि यदि अशांत मन से
कार्य करोगे तो कोई कार्य हो नहीं पाएगा
और खुशी प्राप्त होने के पहले ही या वह
किसी कार्य को प्राप्त करने के पहले ही
तुम बिखरने और टूटने लगोगे सुबह जब तुम

प्रातः काल उठते हो तो अपने नित्य क्रिया
से निवृत होकर पूजा के समय ओम शांति ओम
शांति ओम शांति ओम शांति का 41 बार
उच्चारण करो जैसे-जैसे तुम प्रतिदिन इसका
उच्चारण करोगे वैसे ही इसका असर तुम्हारे
मस्तिष्क और पूरे शरीर पर होने लगेगा और

तुम्हारे दिमाग में शांति उत्पन्न होने
लगेगी शांत मन खुश रहता है क्योंकि खुशी
को पाने के लिए सबसे पहले मन का शांत होना
जरूरी है मेरे बच्चे यदि तुम्हें मनुष्य
का जीवन मिला है तो उसे दुखी रहकर व्यतीत

मत करो बल्कि खुश रहकर गुज ारो इस पृथ्वी
पर मनुष्य को ही इतनी दिमागी शक्ति मिली
है जो हर चीज को सोच सकता है समझ सकता है
और हर काम को दिमाग से कर सकता है लेकिन

यदि तुम उदास हो जाओगे तो तुम्हारा दिमाग
भी काम करना बंद कर देगा और तुम जो सही कर
रहे हो उसे भी कर नहीं पाओगे तुम्हारी
बड़ी से बड़ी खुशी को मैं पूरा करूंगी अगर
तुम मुझसे एक वादा करो कि आज के बाद तुम

कभी उदास नहीं होगे तो मैं भी तुमसे एक
वादा करती हूं हर खुशी तुमको प्राप्त होगी
बाकी मेरे ऊपर छोड़ दो और सब सही होगा और
अच्छा होगा मेरे बच्चे कभी रोना मत इस बात
पर विश्वास रखना कि तुम्हारी हर खुशी मैं
पूरी करूंगी तुम्हारी हर इच्छा पूरी

करूंगी जीवन में तुम्हारी एक कोई इच्छा
अधूरी नहीं रहेगी मेरे बच्चे रोने से
तुम्हारे अंदर नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न
होती है और सकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है
जिससे तुम्हारे हृदय में विराजमान नहीं रह
पाऊंगी मेरे अगले संदेश की प्रतीक्षा करना

ओम नमः शिवाय

Leave a Comment