त्रिगुणात्मिका सृष्टि हीं संसार हैं।

ओम नमः शिवाय दोस्तों स्वागत है आपका अपने
चैनल
पर देवी और
सृष्टि मतलब स्त्रीत्व
और उनका
विस्तार स्थि गुणों का विस्तार आइए समझते
हैं इन्ह

थोड़ा देवी मतलब
दिव्य स्त्रीत्व गुण वाली
और
सृष्टि और इन्हें आध्यात्म में कैसे समझते
हैं तंत्र हिंदुओं की पूजा और कर्मकांड का
एक महत्त्वपूर्ण अंग

है इसके स्रोत वेद है जहां से यह आते
हैं स्रोत वेद है इतिहास में हालांकि
थोड़े थोड़े अंतर के कारण इसे अनेक शाखाओं
में बांट दिया गया था परंतु इसके मौलिक
सूत्र एक समान ही

रहे और तंत्र साधना की भी तीन प्रमुख
शाखाएं हैं शैव तंत्र शाक तंत्र और वैष्णव
तंत्र तंत्र के प्रत्येक शाखा के अपने आगम
है ऐसा मानते हैं कि आगम ईश्वर की वाणी है
यह वाणिया शिव विष्णु या देवी की आगम शब्द
का प्रयोग पहले वेदों के लिए किया जाता था
परंतु तंत्र शास्त्र के आविर्भाव के बाद

धीरे-धीरे यह शब्द तंत्र के लिए प्रयुक्त
होने लगा और वेदों को निगमों के नाम से
जाना जाने

लगा अन्य आगम की अपेक्षा सात आगम अधिक
लोकप्रिय है शक्ति के आगम जो लिखे गए हैं
वह अधिक लोकप्रिय है सात आगम में देवी
भगवती या शक्ति को पूजा के लिए सर्वोच्च
आदर्श माना गया है

सात पंथ के अनुसार व सर्वोच्च शक्ति है
जिनसे इस जगत की उत्पत्ति हुई
है तंत्र में दार्शनिक सिद्धांत वेद और

सांख्य दोनों से मेल खाते हैं जागृत स्वपन
और सुषुप्ति के साथ तुड़िया अवस्था से भी
पड़े एक स्वतंत्र और अविनाशी सत्य है जो
प्रकृतिक और उसके तीनों गुणों से पूर्णत
मुक्त

है
सबकी अंतरात्मा और सर्वज्ञ होने के कारण
कोई उस सत्य को नहीं जान

सकता योग के द्वारा जिन्हें आत्म बोध हो
गया है वही उसका अनुभव कर सकते
हैं आत्मा ही आत्मा को जान सकता
है वह मन वाणी और इंद्रियों से पड़े है
सूर्य चंद्र और यह दृश्य जगत

उस सत्य से
भी अपना प्रकाश पाते
हैं उन्हीं से अपनी ज्ञान की दिव्य ज्ञान
की यात्रा में मदद मिलती है
दोस्तों ब्रह्म निष्कल और सकल दोनों है जब
हम उसे प्रकृति से स्वतंत्र मानते हैं तब
वह निष्कल

है मतलब निष्कल मतलब
जो चलायमान नहीं है अ प्रकृति से स्वतंत्र
होते ही ब्रह्म चलायमान जैसे शिव
शव उसी प्रकार और देश और काल से भी
पड़े जब उसे प्रकृति सहित मानते हैं तब वह
सकल

है प्रकृति के साथ वह सगुन साकार हो जाता
है जब भी प्रकृति के साथ जब ब्रह्म मिलते
हैं तो व प्रत्यक्ष में दिखते हैं भौतिक
जगत में उनके कार्य दिखते हैं ठीक उसी
प्रकार प्रकृति के साथ वह सगुण और साकार
हो जाते हैं क्योंकि प्रकृति त्रिगुणा
आत्मिका

है और प्रकृतिक से रहित हु निर्गुण है
निराकार है सगुण और निर्गुण का भेद केवल
भाषा ही सीमाओं में उसका वर्णन करने के
लिए है सगुण और निर्गुण मतलब जो प्रत्यक्ष
है और जो प्रत्यक्ष

है और उनकी सीमाओं में उनका वर्णन खलने के
लिए यही इस्तेमाल बहुत सटीक है दोस्तों
वस्तुतः ब्रह्म की शक्ति अभिन्न रूप से
उसके अंदर ही रहती है सच पूछो तो ब्रह्म
और उसकी शक्ति को भी कभी अलग नहीं किया जा
सकता है वह अनंत शक्ति जो चेतना और आनंद
रूपनी है ब्रह्म की अभिव्यक्ति का एक साधन
है वह शक्ति समस्त सृष्टि में उसी प्रकार
व्याप्त है जैसे तिल में तेल या दूध में

घी प्रारंभ में ब्रह्म निष्कल स्वरूप में
था वह एक था उसके भीतर अनेक होने की जब
इच्छा जगी जिससे सृष्टि प्रारंभ हुई
ब्रह्म में शक्ति की इस अभिव्यक्ति को अपर
ब्रह्म कहते

हैं जो तांत्रिक पूजा का आधार है तंत्र के
द्वारा उसके साकार रूप का ध्यान किया जाता
है यह शक्ति रूप देवी देवताओं और व्यक्त
सृष्टि में व्याप्त है सृष्टि के सभी
प्राणी और सभी रूप उसकी विभिन्न
अभिव्यक्ति हैं ब्रह्म के शक्ति रूप से
सबसे पहले नाद उत्पन्न हुआ और नाद से
बिंदु प्रकट

हुआ तंत्र शास्त्रों में ब्रह्मांड की
उत्पत्ति का वर्णन अनेक प्रकार से किया
गया है तंत्र शस्त्र में पुरुष या शिव
तत्व को शंभु सदाशिव महेश्वर आदि अनेक नाम
दिए गए हैं यह विभिन्न नाम एक तत्व के
विभिन्न रूपों में अभिव्यक्ति से संबंधित
है और शक्ति पक्ष को दो प्रकार से देखा
गया है माया और मूल

प्रकृति माया वह शक्ति है जिसके माध्यम से
ब्रह्म सृष्टि कार्य में अपने वास्तविक
स्वभाव को छुपाता
है मूल प्रकृति वह शक्ति है जो एक अन
व्यक्त पक्ष है मूल प्रकृति जो

है ये वो शक्ति है जो एक अन भी व्यक्त
पक्ष है जो जाने जाने वाली नहीं है वह मूल
है जो हिडन है जो हमारे मूल में निवास
करते हैं हमारे सोल में हमारी आत्मा में
उनका निवास है जिन्ह आत्म ज्ञान होता है
वो इससे मिल पाते हैं और मिलते हैं यह नाम
रूप वाली सृष्टि का उपादान कारण है जो ऊपर
वाला आवरण है जो
उपादान ऊपर

के आवरण को दान जो किया गया है समस्त
सृष्टि संचालन में उनका यह अभिव्यक्ति
पक्ष उनका कारण है यह वह स्थिति है जिसमें
तीनों गुण साम्य अवस्था में रहते हैं इस
साम्य अवस्था को अव्यक्त प्रकृति या देवी
कहते हैं तीन गुण प्रकृति में पुरुष की
अभिव्यक्ति
है तीन गुण जो
हैं प्रकृति में जो पुरुष की अभिव्यक्ति
आं
हैं और इस प्रकार के गुण को निधि कहते

हैं मूल प्रकृति वह गर्भ है जिसमें ब्रह्म
का बीज पड़ने से यह ब्रह्मांड उत्पन्न
होता है मूल प्रकृति में रजोगुण के स्पंदन
से उसकी साम्य अवस्था
विछुड़ो का मिश्रण विभिन्न रूप धारण करता

है इस बात को अगर थोड़ी थोड़े से
समझाऊ
तो रजोगुण का जब स्पर्श होता है जब स्पंदन
होता है उनमें वाइब्रेशन होता है तो उसकी
जो साम्य अवस्था है जो सोई हुई अवस्था
होती है समान अवस्था होती है वो र्ब होती
है बछु हो जाती है और विभिन्न अनुपातों
में गु गुणों का मिश्रण विभिन्न रूप धारण
करता है और अलग
अलग अलग

अलग अलग अलग क्षेत्र में अलग अलग मात्रा
में यह गुण का मिश्रण जो
है जब प्रकृतिक ब्रह्मांड से मिलते हैं जब
उनमें उनके गर्भ में जब ब्रह्म का बीज
पड़ता है तो यह अलग अलग स्वरूप में अलग
अलग जग

पर ये अपने विभिन्न स्वरूप को धारण करता
है और सृष्टि तब शुरू हो जाती
है तीन गुणों के विभिन्न संयोग और
प्रतिक्रियाओं से विभिन्न नाम रूपों वाले
ब्रह्मांड की लीला संचालित होती
है पुरुष और प्रकृति शिव और शक्ति संपूर्ण
सृष्टि में व्याप्त होकर जगत का नियंत्रण
और निर्देश करते हैं

यही है हमारे भारतीय परंपरा में विश्व
परंपरा में अपने मूल आत्म विश्लेषण में
अपने मूल आत्म बोध में यही है शिव और
शक्ति जिनसे यह पूरी सृष्टि संचालित होती
है दोस्तों
और विभिन्न प्रकार के अलग अलग जैसे जैसे
कोई बीज पड़ा अगर अगर स्त्री कोई पुरुष से
गर्भवती होती है तो जो मूल

स्वभाव पुरुष का है और जो मूल स्वभाव
स्त्री का है उनके बीच उन उनके बीच जब
मिलते हैं तो व विभिन्न अनुपातों में
अलग-अलग रूप के जैसे एक ही मां-बाप के
संतान अलग-अलग स्वरूपों में होते हैं
अलग-अलग गुण अलग-अलग स्वभाव को धारण किए
ठीक उसी प्रकार जैसे
समय काल देश और रहन सहन खानपान बात
व्यवहार सोच और विचार जैसे जिनके होंगे
वैसे ही सृष्टि में सृजन होगा तो इसी तरह
संसार व्याप्त है और देवी
की परंपरा
में जितनी शक्तियां संचालित हो रही हैं
सृष्टि में सभी उन्हीं की अभिव्यक्ति हैं
ब्रह्म और प्रकृति की शिव और शक्ति की आशा
करती हूं आपको यह बात समझ आई होगी
और कुछ मिला होगा आपको इन ज्ञान
से चलने से पहले अगर वीडियो अच्छा लगा हो
या आपके काम आई हो थोड़ी भी तो जरूर
सब्सक्राइब और लाइक कीजिएगा
वरना नहीं समझ आई हो तो आगे बढ़ जाइएगा तब
तक के लिए ओम नमः शिवाय मिलते हैं आपसे
अपने अगले वीडियो प

Leave a Comment