दबाव में मायावती जल्द आएंगी इंडिया गठबंधन में | Rahul Gandhi | PM Modi

दिखाई देता है यानी इंडिया गठबंधन
देखिए राजीव जी जिस तरह से मीडिया और
भारतीय जनता पार्टी की तरफ से खबरें चल
रही थी कि इंडिया एलायंस टूट गया और उत्तर
प्रदेश में कोई एलायंस नहीं होने जा रहा

है आज मुझे लगता है कि दोनों दलों ने यह
ऐलान करके उनके गाल पर तमाचा मारा है
लेकिन वह कभी अपना पुनरीक्षण नहीं करेंगे
यह हम लोग जानते हैं दूसरा यह कि यह
गठबंधन कितना महत्त्वपूर्ण होने जा रहा है

इसके बारे में अगर आप विचार करें तो आपको
लगेगा कि 1993 में जब कांशीराम और मुलायम
सिंह ने गठबंधन किया था एक साथ वह आए थे
उस समय के पूरे बाबरी मस्जिद विध्वंस के
बाद के सांप्रदायिक माहौल में और अभी 22
जनवरी को व राम मंदिर का उद्घाटन हुआ और

उसमें कोशिश की गई कि उस लहर में बीजेपी
400 पार हो जाए लेकिन सच्चाई यह है कि राम
मंदिर की वजह से बीजेपी को कोई फायदा नहीं
हो रहा है इस बात को नरेंद्र मोदी भी समझ
रहे हैं और

इसीलिए 24 घंटे के भीतर उन्होंने कपूरी
ठाकुर को भारत रत्न देने का ऐलान किया व
इस बात को महसूस कर रहे थे कि जो अति
पिछड़ा है जो दलित है व उनके हाथ से छिटक
रहा है इसलिए उन्होंने यह कदम उठाया था और
इधर वो लगातार नितीश कुमार को अपनी तरफ

लाना हो या जयंत चौधरी को करना हो अशोक
चौहाण को लाना हो यह जो विपक्ष के त
नेताओं को जिस तरह से भारतीय जनता पार्टी
अपने साथ जोड़ रही है वह दिखाता है कि वह
कितनी बेचैन है कितनी डरी हुई है यह नारा
कि 370 हम पार करेंगे 400 एनडीए लेकर के
आएगी यह केवल एक नैरेटिव पैदा करने की

कोशिश है एक लोगों को केवल गुमराह करने की
कोशिश है हकीकत उनको पता है आज जो
डेवलपमेंट हुआ है सपा और कांग्रेस के बीच
का गठबंधन का इसकी बेहद जरूरत थी उत्तर
प्रदेश में और मैं समझता हूं कि यह सपा

कांग्रेस के गठबंधन से ज्यादा लोगों की
उम्मीदों का गठबंधन है लोग देख रहे थे कि
कब यह राजनीतिक दल एक साथ आए अभी लोगों की
यह भी उम्मीदें हैं कि मायावती भी अगर इस
गठबंधन में आ जाए तो बहुत अच्छा होगा
लेकिन राजीव जी यह भी तय है कि जो इंडिया

एयरलाइंस के बाहर रहेगा उसे लोग बीजेपी का
ही सहायक मानेंगे इस बात को मायावती समझे
या ना समझे लेकिन जो भी इस बार बाहर रहेगा
वो साफ भी हो जाएगा और वह हमेशा के लिए उस
पर टैग भी लग जाएगा क्योंकि यह जो लड़ाई
है मैं सिर्फ राहुल गांधी की बात नहीं कर

रहा हूं राहुल गांधी तो खुल कर के कह रहे
हैं बेखोफ हो करके कह रहे हैं क्रांतिवीर
की तरह नाना पाटेकर का डायलॉग मुझे याद आ
रहा था जब मैंने प्रतापगढ़ में उनको
सुना जब वो कहते हैं कि यह कलम वाली बाई
है और यह इनके लिए क्रांति करने के लिए

निकली है यह बुजदिल लोग हैं राहुल गांधी
ने वही कहा कि तुम लोग डरे हुए हो तुम लोग
सोए हुए लोग हो तुम्हारे हक अधिकार छीने
जा रहे हैं तुम्हें तुम्हारी हिस्सेदारी

नहीं मिल रही है तुम्हें तुम्हारी आबादी
तक नहीं बताई जा रही है तो ऐसे में उठ कर
के जागो और उन शब्दों में मुझे कई बार
बाबा साहेब अंबेडकर याद आ रहे थे कई बार
कांशीराम याद आ रहे थे और वो पूरा सामाजिक
आंदोलन स्वाधीनता आंदोलन कि जिसमें लोगों
के भीतर कैसे चेतना पैदा करना है कि अपने
निजी स्वार्थों को छोड़ कर के राहुल गांधी

ने कहा एक नौजवान से कि रोने से रोजगार
नहीं मिला मिलेगा खड़े होना पड़ेगा इस
सत्ता को उखाड़ फेंकने के लिए तो यह जो
क्रांतिवीर राहुल गांधी जिस तरह से आहवान
कर रहे हैं और वो उम्मीदों की जो रेला है
वो जमीन पर दिख रहा है जो लोग लखनऊ में थे
उन लोगों ने बताया मैं तो नहीं गया था

लेकिन उन लोगों ने बताया कि जो दीवानगी थी
राहुल गांधी के प्रति और राहुल गांधी
बेखौफ निडर कोई चिंता नहीं उस व्यक्ति को
कि इतनी भीड़ में कहीं कोई उस उस तरह का
कोई मसखरा ना आ जाए कोई बदतमीजी ना कर दे

 

लेकिन राहुल गांधी जिस तरह से मिल रहे हैं
लोगों से लोग भी उतना ही अपना हृदय लेकर
के उनके सामने है और आज अखिलेश यादव के
साथ जो उनका गठबंधन हुआ है वो मैं फिर से
कह रहा हूं कि 1993 की तरह का गठबंधन होगा

जो बीजेपी को दिल्ली से दूर करेगा वो जो
80 वाली बात कर रही है बीजेपी ना यहां पर
अगर आधी सीटें भी बीजेपी को मिल जाए तो
बहुत बड़ी सफलता होगी और अगर 40 पर इस
गठबंधन ने रोका तो फिर दिल्ली दूर हो
जाएगा इस बात को नरेंद्र मोदी भी जानते

हैं और अखिलेश यादव राहुल गांधी का जो एक
साथ आना है और जो बनारस की सीट कांग्रेस
पार्टी ने ली है मुझे तो यह लगता है या
मैं सोचता हूं कि बनारस से कहीं
मल्लिकार्जुन खड़गे चुनाव लड़ जाए तो
नरेंद्र मोदी क्या करेंगे फिर एक गंगा का

बेटा है और दूसरा दलित का बेटा अगर आ
जाएगा वंचित तबके का बेटा आ जाएगा अंबेडकर
का बेटा आ जाएगा तो लेने के देने पड़ेंगे
नरेंद्र मोदी को जिस तरह से उन्होंने
दलितों पिछड़ों आदिवासियों के
अल्पसंख्यकों के अधिकारों को छीना है
संविधान को तारतार किया है लोकतंत्र को
कमजोर किया है अगर खड़गे साहब उत्तर
प्रदेश में बनारस सीट से लड़ते हैं तो
नरेंद्र मोदी को उल्टे पांव भागना पड़ेगा

और यहीं से
वह गठबंधन मजबूती के साथ दिल्ली की तरफ
गूज करेगा यह भी तय कि प्रधानमंत्री को
अपने सामने रखी हुई नेम प्लेट पर
प्रधानमंत्री भारत लिखना पड़ा व उसमें
प्रेसिडेंट ऑफ भारत लिखा जा रहा था तो
प्रोटोकॉल जो था उसको भी उन्होंने खर

तोड़ा लेकिन यह मोदी जी की अपनी फितरत है
उनको तोड़ने में बड़ा मजा आता है वह देश
हो समाज हो या कोई नियम
हो मान्यताएं हो संविधान हो वह किसी की
परवाह नहीं करते लेकिन इस देश को इतनी
आसानी से तोड़ देना विभाजित कर देना मुझे

लगता है कि नहीं संभव है और यही वजह है कि
दो झटके खाने के बाद ही ऐसे सको मेडिकल
साइंस की भाषा में तीसरा हार्ट अटैक बड़ा
खतरनाक होता है जी तो दो बार तो झटका लग
चुका है देश को लेकिन तीसरा अटैक नहीं
होने जा रहा है उसको संभालने के लिए लोग

तत्पर हैं और उसी का एक आज उद्घाटन हुआ उस
उत्तर प्रदेश में कि जहां से दिल्ली का
रास्ता तय होता है और इसीलिए समाजवादी
पार्टी और कांग्रेस के बीच यह गठबंधन हुआ
और यह इंडिया एलायंस की उस मजबूती को
दिखाता है कि नीतीश कुमार भले ही चले गए

हो या कांग्रेस पार्टी के कई नेताओं को
भले ही तोड़ लिया गया हो लेकिन इससे बहुत
ज्यादा फर्क पड़ने वाला नहीं है हां 1920
का तो फर्क होता है जब पीजेपी के पास पूरा
मीडिया मैनेजमेंट हो आईटी सेल हो तो
निश्चित रूप से व कोशिश करते हैं कि

नैरेटिव ऐसा सेट किया जाए कि जिसके जरिए
इंडिया एलाइंस को आप कमजोर दिखाए लेकिन उस
नैरेटिव को ब्रेक करने के लिए एक ऐसा
व्यक्ति सड़क पर है जो बेपरवाह है किसी भी
परिस्थिति के से जो संघर्ष कर रहा है और
आप जो दृश्य दिखा रहे हैं राजीव जी मुझे
तो यह लगता है कि क्या मोदी जी कभी एक

घंटे के लिए भी इस स्थिति में आ सकते हैं
जो बोलते हैं कि मैं चाय बे करके आया
भिक्षा मांग करके आया और मेरी मां तो
बर्तन मांगती थी मैंने बड़ा गरीबी में दिन
गुजारे हैं लेकिन असल में परीक्षा होती है
जमीन पर और लोगों का दिल ऐसे लोगों से
जुड़ा होता है जो जमीन पर हो मोदी जी आधे
समय तो हवा में उड़ते हैं और आधा समय व आ
आठ करोड़ की गाड़ी में रहते हैं तो उनका

कोई दिल का रिश्ता नहीं है इस देश के साथ
व हमेशा दिमाग से खेलते हैं और मैं तो कई
बार कहता हूं कि ये जो भारत है वो असल में
गुजराती उपनिवेश बन गया है और दूसरा अगर
नाम दे तो वो हिंदुत्ववादी उपनिवेश बनाने
की कोशिश कर रहे हैं लेकिन उसी उपनिवेशवाद

के खिलाफ जैसे कभी ब्रिटिश उपनिवेशवाद के
खिलाफ गांधी नेहरू और अंबेडकर सामने आए थे
भगत सिंह ने कुर्बानियां दी थी वैसे ही
राहुल गांधी सड़क पर आकर के लोगों के
न्याय के लिए वो हाथरस की बेटी के लिए भी
लड़े थे व भट्टा परसोल में भी किसानों के
लिए गए थे और आज सीमा सरहद पर दिल्ली के
किसान वो लड़ रहे हैं और दिल से लड़ रहे
हैं बहुत सारे लोग इस दौर में बदल गए वह

मीडिया जो सच में सरकार की गलत नीतियों को
क्रिटिसाइज करता था आज भोपू तंत्र में बदल
गया लेकिन उस मीडिया के इर्दगिर्द ही उसी
दिल्ली के पास वोह जो किसान
है वो खड़े हुए हैं और और अल्टीमेटम दे
रखा है उन्होंने वो अब उसके लिए तैयार
नहीं है कि मोदी जी वहां सा स किसानों की

जान ले ले और उसके बाद उनको लगे कि मेरी
तपस्या में कमी रह गई और लेना चाहते थे
क्या और किसान शहीद हो जाते उसके बाद आपको
याद आती कि नहीं साहब चलिए अब तपस्या पूरी
हुई 750 नहीं 7 लाख लोग मर गए तो फिर आपको
लगता है कि नहीं अब ठीक है तीन काले कानून

वापस लेने नहीं चा क्या हो रहा था उस
तालाबंदी में लोगों के पैर लहल वान थे
अपने जानवरों को तो तरह ह काल दिया था
वहां पर महिलाएं बच्चे भूख प्यास से दम
तोड़ रहे थे और तब भी मोदी जी को याद नहीं
आ रही थी कि हमारे देश के लोगों के साथ
क्या हो रहा है मोदी जी को कब याद आता है
जब चुनाव नजदीक आता है उस समय वह मन की

बात से लेकर के ना जाने कौन-कौन सी बातें
सुनाने लगते हैं तो जो उन्होंने देश के
लोगों के साथ किया जो छला चाहे वह किसान
हो या नौजवान दो करोड़ रोजगार आप
प्रतिवर्ष दे रहे थे और मिला क्या सड़क पर
पुलिस वालों की लाठियां और और यहां क्या
मिल रहा है वो आंसू गस गैस के गोले तो देश

तो समझ रहा है और इसलिए मैं कह रहा हूं वो
तीसरा झटका सैने के लिए तैयार नहीं है और
यही नरेंद्र मोदी अमित शाह बीजेपी और
आरएसएस के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनने जा
रहा है यही रणनीति यहां तो खुला खेल

फरकाबाद है राहुल गांधी कुछ छुपाते नहीं
है और ना ही किसी तरह की कोई और साजिश
करते हैं वो तो देश बचाने के लिए लोकतंत्र
संविधान बचाने के लिए सड़क पर खड़े हुए
हैं तो उस व्यक्ति का आप क्या छीन लेंगे
क्या लेकर के

जाएंगे जिसने सत्ता का पूरा प्रलोभन छोड़
दिया राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनना
होता तो वो बन गए होते 2009 में ही उनको
कौन रोकता था लेकिन नहीं जो व्यक्ति इस
देश में गरीबों के लिए दलितों पिछड़ों
आदिवासियों के लिए जीना चाहता है और वही
व्यक्ति लोगों के बीच में आता है जो हवा

में उड़ता है जो आठ करोड़ की गाड़ी में
चलता है वो देश के लिए नहीं अपने लिए जीता
है और इस बात को अब देश समझ रहा है और
इसलिए मुझे लगता है कि मोदी जी की कोई भी
रणनीति अब सफल नहीं हो रही है क्योंकि इस
देश के लोग अब तीसरा झटका खाने के लिए
तैयार नहीं है वह जानबूझ कर के हार्ट अटैक
करने के लिए तैयार और यही
आपको

Leave a Comment