परमात्मा का ये संदेश तुम्हें जीत दिलाएगा

मेरे प्रिय बच्चे तुम्हारा हृदय मुझसे हर

दिन कुछ यूं कहता है कि हे प्रभु मैं रो

रहा हूं मैं परेशान हो रहा हूं मैं नादान

हूं कोई है जो मुझे बार-बार रुला रहा है

तड़पा रहा है कोई मेरे दुखों का कारण बन

रहा है इस प्रकार तुम्हारे हृदय की ध्वनि

मेरे कानों में निरंतर बंज रही है मैं सब

कुछ सुन रहा हूं और निरंतर सब कुछ देख भी

रहा हूं मुझसे कुछ भी छुपा हुआ नहीं है मा

मान हृदय ही वह स्थान है जहां परमात्मा

निवास करता है जो सदा मेरी पुकार में

विलीन हो रहा है मेरे प्रिय मैं जानता हूं

कि अभी तुम किन दुखों से गुजर रहे हो मुझे

ज्ञात है कि अभी तुम पर किस तरह का दबाव

डाला जा रहा है मेरे प्रिय अपनी जड़ता और

हृदय की अशुद्धियों के कारण मानव परम

तत्त्वों की अनुभूति कर नहीं पाता है

क्योंकि उसका हृदय पहले से ही वासना क्रोध

लालच कल्पना जलन घड़ा ष आदि से लबालब भरा

हुआ है इन सभी दीवारों के पीछे वह परम

चेतना शांत चित बैठी हुई परमानंद को देख

नहीं पाता है मानव अपनी अज्ञानता के कारण

जिस खुशी की तलाश सारे संसार में करता

रहता है वास्त में वह उसी के हृदय में

छुपी हुई होती है लेकिन वह उसे देख नहीं

पाता है वह आनंद को समझ नहीं पाता है वोह

आनंद जो उसे पहले से ही मिला हुआ है मेरे

प्रि मैं जानता हूं कि तुम भी इसी तरह से

व्याकुल हो तुम्हारा भी मन इसी तरह से

विचलित हो रहा है लेकिन तुम मत घबराओ

क्योंकि मैं आ रहा हूं निरंतर तुम्हारे

लिए तुम्हारी समस्याओं का समाधान करने

तुम्हारे दुविधा को मिटाकर तुम्हें सही

मार्ग पर ले जाने के लिए मेरे प्रिय

तुम्हारे हृदय में जो भावनाएं हैं वह

अव्यवस्थित ढंग से हैं उनका प्रयोग कहां

कैसे कब करना है तुम अभी इससे अनजान हो

लेकिन ज्यादा समय तक ऐसा नहीं रहेगा तुम

यह जान जाओगे मैं तुम्हें यह बता दूंगा

तुम्हें अपने हृदय की आवाज सुननी होगी और

मैं तुम्हें इसके लिए प्रेरित करूंगा

क्योंकि तुम्हारा मन ईश्वर को प्राप्ति

करने के लिए निरंतर तड़प रहा है अब तुम

इसे नजरअंदाज ना करो अपने हृदय की बातों

को नजरअंदाज ना करो क्योंकि तभी तुम अपनी

अनंत शक्तियों से जुड़ पाओगे क्योंकि उस

अनंत की ऊर्जा से ही तुम बने हुए हो

तुम्हारी शक्तियां भी अनंत है तुम्हें इस

दृढ़ रहस्य को जानना होगा तुम आशित हो इसे

पूर्व भव करने के लिए अपने हृदय के कचरे

को साफ करो अपने हृदय में बसे परमात्मा की

आवाज को सुनो स्वयं से बात करने की

प्रक्रिया प्रारंभ करो मेरे प्रिय बच्चे

जब तुम अपने भीतरी मन में उतर कर स्वयं से

बात करना प्रारंभ करोगे केवल तभी तुम यह

जान पाओगे जो मैं तुम्हें बता रहा हूं

केवल तभी तुम यह समझ पाओगे जो मैं तुमसे

कहना चाहता हूं मुझे बहुत अच्छे से ज्ञात

है कि अभी तुम्हारे मन में क्या चल रहा है

तुम निरंतर जीत की तलाश कर रहे हो लेकिन

तुम हर बार उससे पीछे होते जा रहे हो हर

बार उससे दूर होते जा रहे हो हर बार उससे

अलग होते जा रहे हो क्योंकि तुम वह नहीं

देख पा रहे जो निरंतर तुम्हें दिखाया जा

रहा है तुम्हारे आंखों पर विभिन्न प्रकार

की पट्टियां बंधी हुई है यह पट्टियां बहुत

ही अलग अलोक स्वरूप लेकर तुम्हें घेरे हुई

है मेरे प्रिय इसमें समाज द्वारा बहुत

सारे अंतर्मन को भ्रष्ट कर देने वाली

पट्टियां शामिल

है तुम ऐसी मान्यताओं पर जीवन जी रहे हो

जहां सुख मिलना संभव ही नहीं है तुम्हें

सर्वप्रथम अपने भीतर उतर करर अपने आप से

यह पूछना होगा कि वास्त में तुम्हारा हृदय

तुमसे क्या चाहता है वह हृदय जिसमें

परमात्मा बसता है एक बार उसके द्वार खोलो

एक बार उसके भीतर जाकर उससे निकल रहे

प्रकाश को उससे निकल रही ऊर्जा को अपने

भीतर समाने दो फिर तुम यह पाओगे कि

तुम्हारा जीवन उस जल के धारा की भाति शांत

रूप से बहने लगेगा जिसमें अत्यंत गहराई हो

जिसमें कोलाहल ना हो जिसमें ना तो किसी

तरह का शोर हो और ना ही किसी तरह की गंदगी

बसी हो अपने भीतर झांकना होगा तुम्हें

स्वर्ण से पूछना होगा तुम्हें कि तुम्हारे

लिए क्या आवश्यक है लोगों ने तुम्हारे मन

में जो धारणा बनाकर रखी है एक बार उस

धारणा से बाहर निकलो अपने आप से प्रश्न

करो तुम्हारे लिए जो अत्यंत आवश्यक है

उसका विचार करो इसके अलावा जो कुछ

तुम्हारे लिए आवश्यक नहीं है बिल्कुल ही

अनावश्यक है उसका विचार पूरी तरह से त्याग

दो फिर चाहे वह किसी के जीवन से संबंधित

हो या किसी वस्तु से संबंधित हो या किसी

के द्वारा कही गई कोई बात ही क्यों ना हो

तुम्हें उन सब का त्याग करना होगा तुम्हें

गहराई से अपने अंदर झांकना होगा तुम्हें

ध्यान में उतरना होगा शांति से बैठो मेरे

पिर अपने भीतर झांक अपनी सच्चाई को पहचानो

क्योंकि मैं तुम्हें कुछ बताना चाहता हूं

क्योंकि मैं तुमसे कुछ कहना चाहता हूं मैं

तुम्हारे अंतर मन की आवाज बनकर तुमसे बात

करूंगा लेकिन तुम्हें तैयार होना होगा

तुम्हें पहले से ही मिली हुई है बस

तुम्हें उसे अपनाना है उसे स्वीकार करना

है उसका आलिंगन करना है मेरे प्रिय

तुम्हें विचार करना है कि जो लोग तुमसे

वास्तव में सच्चा प्रेम करते हैं क्या तुम

उन्हें वह प्रेम दे पा रहे हो क्या तुम उन

पर बेवजह का क्रोध करते हो क्या तुम उनके

मूल्य को वास्तविकता में समझ पा रहे हो

तुम जो पाना चाहते हो वो पाने के लिए

तुम्हें ना तो किसी की चापलूसी करने की

आवश्यकता है ना ना तो किसी के आगे झुकने

की आवश्यकता है पहले तुम्हें अपने आप से

यह प्रश्न गंभीर रूप में करना होगा कि

वास्तव में तुम्हारा हृदय तुमसे क्या मांग

रहा है वास्तव में तुम्हारे भीतर बसे

परमात्मा का अंश तुमसे क्या कहना चाह रहा

है जो तुमसे तुम्हारा हृदय मांग रहा है वह

समाज द्वारा सिखाया समाज द्वारा आरोपित

किया हुआ नहीं हो सकता वह मौलिक रूप से

तुम्हारे हृदय से ही उत्पन्न हुआ है इसलिए

एक बार अपने भीतर झांक करर अपने आप से यह

प्रश्न करो कि तुम्हें वास्तविकता में

क्या चाहिए तुम्हें अकेले बैठना होगा शांत

चित रूप में बैठना होगा तुम्हें दुनिया भर

के यंत्रों से दूर दुनिया भर के रिश्तों

से दूर अपनों से दूर कहीं शांति से बैठना

होगा और केवल अपने मन से बातें करने होगी

अपने हृदय की आवाज सुननी होगी ऐसा करने पर

तुम्हारे प्रश्नों का तुम्हें उत्तर मिल

जाएगा वह प्रश्न जो तुम्हें खाए जा रहे

हैं वो प्रश्न जो तुम्हारे जीवन में

तुम्हें आगे बढ़ने से रोक रहे हैं जो

तुम्हारे भीतर विचलन पैदा कर रहे हैं उन

सभी प्रश्नों का समाधान तुम्हें मिलने

वाला है कुछ तुमसे दूर नहीं हुआ है बल्कि

तुम्हें और भी ज्यादा मात्रा में दिया जा

रहा है लेकिन तुम्हें समाज की आंखों को

त्याग कर अपने मन की आंखों से उसे देखना

होगा तुम्हारे भीतर विभिन्न तरह की चीजें

विभिन्न तरह की जानकारियां आरोपित की जा

रही है तुम्हारे मन पर विभिन्न तरह के

समाचारों के दर पर लगाए जा रहे हैं और

परिणाम स्वरूप तुम वही चीज आकर्षित कर रहे

हो जो निरंतर देख रहे हो इसलिए मैं चाहता

हूं कि सर्वप्रथम तुम केवल सकारात्मक

चीजों को देखो हर हाल में केवल सकारात्मक

वाक्यों को बोलो चाहे परिस्थिति कैसी भी

हो खुद से कभी भी नफरत ना करो तुम कई बार

स्वयं के लिए नकारात्मक चीजों की मांग

करते हो मेरे प्रिय आवेग में दिया हुआ

तुम्हारा फैसला तुम्हें कहीं नहीं लेकर

जाएगा तुम स्वयं को कमजोर मानते हो तुम

स्वयं को दूसरों पर आश्रित मानते हो

सर्वप्रथम तुम्हें यह कहना यह मानना

छोड़ना होगा ना तो तुम किसी पर आश्रित हो

ना तो तुम्हें किसी की आवश्यकता है एक बार

स्वयं के भीतर आत्मविश्वास गहरा करके देखो

एक बार स्वयं पर आत्मविश्वास लगाकर देखो

एक बार स्वयं को सब कुछ मान करर तो देखो

फिर तुम इतनी ऊंचाई पर पहुंच जाओ

कि वहां से तुम्हें नीचे लाना असंभव हो

जाएगा वह लोग जो नहीं चाहते कि तुम प्रगति

करो व निरंतर तुम्हारे आत्मविश्वास को

तोड़ने का कार्य करते ही रहेंगे लेकिन

तुम्हें उसका विचार नहीं करना है वो उनके

अपने कर्म है और उन्हें उनके कर्मों की

सजा अवश्य मिलेगी तुम नहीं जानते तुम नहीं

देख सकते लेकिन उनके कर्मों की जो सजा

उन्हें मिलने वाली है वो इतनी भयावह है कि

उनकी रूह भी कांप जाएगी और उन्हें इतना

मिलेगा कि बाकी सब जलन से ऐसा जल उठेंगे

कि तुम सोच भी नहीं सकते उनके मन की

ईर्ष्या उन्हें पूरी तरह से तबाह कर देगी

और मैं नहीं कह रहा कि ऐसा तुम चाहते हो

मैं नहीं कह रहा कि परमात्मा कभी ऐसा

विचार भी करता है मेरे प्रिय यह यति का

खेल है यह सत्य का खेल है ऐसा तो होना

सुनिश्चित हो चुका है इसलिए मैं नहीं

चाहता कि उनसे ईर्ष करके तुम अपने कर्मों

को खराब कर लो तुम अपने मन में उत्पन्न हो

रहे ईश्वर के विचार को ना त्यागो और समाज

द्वारा जो तुम पर आरोपित किया जा रहा है

उसमें तुम निर्णायक ना बनो बल्कि अपने

जीवन के फैसलों में निर्णायक बनो निर्णायक

होना तुम्हारे लिए अत्यंत आवश्यक है

क्योंकि यही तुम्हारे आत्मविश्वास को

बढ़ाने का कार्य करेगा तुम्हें अपने जीवन

के फैसलों में निर्णय लेना ही होगा लेकिन

इसके अलावा दूसरों के बारे में किसी भी

तरह की तुम्हें कोई राय नहीं बनानी है ना

ही किसी तरह का दृष्टिकोण रखना है किसी को

भी सही या गलत नहीं मानना है किसी पर भी

तुम्हें टिप्पणी नहीं करनी है तुम्हारा

पूरा का पूरा ध्यान केवल तुम्हारे अपने

जीवन पर होना चाहिए कोई अपने जीवन में

क्या कर रहा है कोई अपने जीवन में क्यों

कर रहा है फिर चाहे वह कोई धनी व्यक्ति हो

या फिर कोई निर्धन हो फिर चाहे वह कोई

प्रसिद्ध व्यक्ति हो या कोई सिद्धि

प्राप्त व्यक्ति हो सभी इस संसार के अंग

हैं सभी इस ब्रह्मांड के अंश है सभी मुझसे

ही उत्पन्न हुए हैं इसलिए तुम्हें किसी के

बारे में किसी भी तरह की कोई टिप्पणी कोई

दृष्टिकोण नहीं रखना है ना ही किसी तरह का

कोई राय बनाना है तुम्हारा पूरा ध्यान

केवल अपने जीवन से संबंधित होना चाहिए

तुम्हारा पूरा ध्यान केवल अपने जीवन पर ही

होना

चाहिए बाकी लोगों के बारे में तुम्हें कुछ

भी नहीं सोचना है तुम्हें अपने संसार को

समझना है तुम्हारा संसार वो नहीं है जो

तुमसे मीलों दूर बैठा किसी अन्य देश को

नियंत्रित कर रहा है तुम्हारा संसार वह भी

नहीं है जो किसी अन्य दूर राष्ट्र में

बैठा किसी तरह की कोई यातनाएं उत्पन्न कर

रहा है या तो यातनाएं सहन कर रहा है ऐसी

टिप्पणी तुम अपने जीवन में बिल्कुल भी ना

बनाओ तुम्हारा पूरा ध्यान केवल अपने आसपास

के वातावरण और पर्यावरण से संबंधित होना

पड़ेगा मेरे प्रिय तुम्हें केवल अपना

विचार करना होगा अपनी प्रगति का विचार

करना होगा यह प्रथम चरण है यह पहली सीढ़ी

है अपने जीत की ओर बढ़ने का इसके बाद अन्य

बहुत सी क्रियाएं तुम्हें प्रगति के लिए

करनी होगी लेकिन जब तुम किसी और को लेकर

कोई राय कोई टिप्पणी नहीं बनाओगे किसी तरह

से निर्णायक नहीं होगे तब तुम अपने जीवन

पर ध्यान केंद्रित कर पाओगे और तभी तुम

प्रगति को प्राप्त कर पाओगे मेरे प्रिय

तुम जीतने वाले हो तुम्हें सोचना होगा उन

लोगों के बारे में जो तुम्हें वास्तविक

रूप में प्रेम करते हैं जिनसे तुम

वास्तविक रूप में प्रेम करते हो तुम केवल

उनका ध्यान करो तुम केवल उनका विचार करो

उन्हें खुश रखने की बात सोचो उन्हें प्रेम

करने की आवश्यकता नहीं है ना ही उन पर कोई

टिप्पणी कोई छीट कासी करने की आवश्यकता है

वह यदि तुम्हें लेकर ऐसा करते हैं

तुम्हारे बारे में ऐसा सोचते हैं तो यह

उनके अपने कर्म होंगे और इसका परिणाम वह

स्वयं ही भुग

देंगे लेकिन तुम्हें इस तरह के कोई भी

प्रक्रिया नहीं अपनानी है इस तरह के किसी

भी कार्य को तुम्हें नहीं करना है मेरे

प्रिय बच्चे मैं चाहता हूं कि तुम जल्द से

जल्द जीत को हासिल कर लो इसलिए मैंने

तुम्हारे जीवन में कुछ अनोखे अदृश्य अधु

वरिष्ट को भेज दिया है वह अब कार्य में लग

चुके हैं तुम्हारे जीवन को बेहतर बनाने के

लिए

तुम्हारे जीवन को सही रूप रेखा देने के

लिए वह इस कार्य में लग गए हैं कि तुम जल

से बाहर निकल सको और तुम पूरे शिद्धत के

साथ इस जीवन को जी

सको पूरी खुशी के साथ पूरे हर्षोल्लास के

साथ इस जीवन को जी सको इसलिए मैं तुम्हारे

जीवन के विभिन्न मार्गों को भी प्रशस्त कर

रहा हूं वह सभी मार्ग जो तुम्हें जीत की

तरफ ले सके मैंने मनुष्य को यह जीवन दुख

भोगने के लिए नहीं दिया है किंतु मनुष्य

ने ऐसी मान्यता अपने मन में मान ली है कि

उसे तो दुख भोगना ही है सुख और दुख एक

दृष्टिकोण है एक नजरिया है जिसे मनुष्य को

बदलना होगा जब वह किसी चीज को दुख की भाति

देखता है तो उसे दुखी होता है जब वह किसी

चीज को सुख की भाति देखता है तो वह सुख

अंततः प्राप्त कर ही लेता है सुख और दुख

तो चुनाव होता है यदि कोई मनुष्य सदैव

सुखी करने का विचार कर ले तो इस संसार में

कोई भी उसे दुखी कर ही नहीं पाएगा यह तो

दृष्टिकोण की बात है मनुष्य का दृष्टिकोण

प्रत्येक जीव के लिए उसका सत्य प्रत्येक

परिस्थिति के लिए भिन्न होता है जब एक

सिंह के दृष्टिकोण से देखो तो उसका जीवन

अमूल्य है उसके लिए उसका जीवन बिल्कुल ही

मूल्यवान है लेकिन यदि तुम सिंह के

दृष्टिकोण से देखो तो यदि वह हिरण को नहीं

मारेगा तो उसके पास उस दिन का भोजन ही

नहीं

रहेगा उसके अपने बच्चे भूखे होंगे क्योंकि

सिंह कुछ अन्य चीज खा नहीं सकता है इसलिए

यह दृष्टिकोण की बात है तुम्हें अपने

दृष्टिकोण में बदलाव करना होगा इस संसार

में क्या सही है इस संसार में क्या गलत है

इस तरह के नजरिए का त्याग करना होगा

तुम्हें यह सोचना होगा कि वास्तव में

तुम्हें नैसर्गिक रूप से क्या सही लगता है

तुम्हें नैसर्गिक रूप से क्या उचित लगता

है और जो तुम्हें उचित नहीं लगता है

तुम्हें उसका त्याग करना होगा यह सवाल

तुम्हें किसी अन्य से नहीं तुम्हें अपने

आप से पूछना होगा तुम्हें समझना होगा कि

तुम्हारे लिए क्या सही है तुम्हारे लिए

क्या गलत है कि वह संसार में कुछ बदलाव कर

सके जिनके भीतर कोई क्षमता थी कि वह जीवन

को सहज रूप से जी सके जिनके भीतर करुणा और

प्रेम बसा हुआ था वह कभी प्राप्त भी कर

सकते हैं और यही कारण है कि उनके जीवन में

दुख सुनिश्चित हो जाता है वो चाकर भी खुशी

को आकर्षित नहीं कर सकते वह चाहकर भी

खुशियां पा नहीं सकते मेरे प्रिय तुम

उनमें से नहीं हो तुम्हें अपने सोच में

बदलाव करना होगा तुम्हें गहराई में उतरना

होगा तुम्हें अपने दृष्टिकोण में बदलाव

करना

होगा सही गलत के मायनों से ऊपर उठना होगा

और अपने जीवन की बागडोर अपने आप संभाल

होगी लेकिन तुम्हें पहले समझना होगा

तुम्हें अपने आप से प्रश्न करना होगा

तुम्हें अपने सही और गलत का चुनाव करना

होगा ना कि समाज द्वारा बताया हुआ सही या

गलत चाहे समाज द्वारा चाहे किसी शास्त्र

में चाहे किसी किताब में चाहे कहीं भी

लिखा हुआ कोई भी ज्ञान तुम्हारे लिए तर्क

संगत तुम्हारे लिए वास्तविक हो यह जरूरी

नहीं है इसलिए तुम्हें सभी तरह के ज्ञान

को त्यागना होगा तुम विशिष्ट हो तुम में

प्रतिभा है तुम में क्षमता है तुम में

सामर्थ्य है जीतने की तुम योग हो तुम

हकदार हो इसलिए तुम्हें अपने भीतर की आवाज

सुननी होगी तुम्हें स्वयं से अपने जीत को

तलाशना होगा तुम्हारी जीत तुम्हें मिल रही

है यह जीत तुमसे कोई नहीं छीन सकता स्वयं

नियति भी यह नहीं छीन

सकती लेकिन तुम्हें अपने कर्मों को सही

रखना होगा ऐसा करना तुम्हारे लिए अत्यंत

आवश्यक है यह तुम्हें जीत दिलाने के लिए

एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण संदेश है तुम्हें

इसको गहराई से सुनना होगा एक नहीं दो नहीं

चाहे अनेकों बार तुम्हें यह सु पड़े लेकिन

तुम इसके रहस्य को समझो इसकी गहराई में

उतरो मेरे प्रिय जो मनुष्य देना जानता है

जो मनुष्य दाता होता है वही प्राप्त करता

है मेरे प्रिय बच्चे तुम रहस्य को समझो

आकर्षण के साथ ही आवृत्ति हों के साथ ही

अपने मन के रहस्य को तुम्हें समझना होगा

और फिर तुम्हें दिव्य प्रकाश की अनुभूति

हो जाएगी मेरे प्रिय सदा याद रखो

परिस्थिति चाहे जैसी भी हो कोई तुम्हारा

साथ दे या ना दे मैं सदैव तुम्हारे साथ

रहूंगा हर हाल में तुम्हारे साथ रहूंगा

तुम समर्थन दिखा रहे हो और समर्थक इंसान

को मैं कभी निराश नहीं लौटने देता तुम

मेरे आने वाले संदेशों की प्रतीक्षा करना

मैं तुम्हारा मार्ग दर्शन करता रहूंगा मैं

आता रहूंगा मैं तुम्हें संकेतों को समझाता

रहूंगा सदा सुखी रहो तुम्हारा कल्याण होगा

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