प्रभु कृपा | भगवान की भक्ति क्या होती है? | Prabhu Kripa |

अनेकों कहानी जिसमें ज्ञान है रोमांच कहीं

सुख है तो कहीं दुख है तो कहीं उसका

निवारण कहीं कठिनाई है तो कहीं अध्यात्म

सब कुछ आपके अपने चैनल नई जीवन पर दोस्तों

चैनल को सब्सक्राइब करले भगवान में आस्था

रखना अत्यंत आवश्यक

है जीवन में सब कुछ अस्थाई

है जिन्हें आप अपना दोस्त कहते हैं वह कब

धोखा दे दे कुछ पता नहीं आप के सगे संबंधी

रिश्तेदार कब कन्नी काट ले यह भी कोई नहीं

जानता इस जीवन में कुछ भी स्थाई नहीं

है सब हमारा साथ छोड़ देंगे एक दिन बस

फर्क इतना है कोई पहले कोई बाद में इस

दुनिया में सिर्फ एक परमात्मा ही है जिनसे

लगाव लगाकर आपको भय नहीं होगा आखिर मैं

किस भय की बात कर रहा हूं हम सबके अंदर एक

भय होता है जो प्राण शक्ति कमजोर होने से

पैदा होता

है जब आत्मबल कमजोर होता है तो घंटे

किसी ना किसी चीज का भय होता है और यह भय

हमें ना तो खुलकर जीने देता है बल्कि हमें

हमेशा तनावग्रस्त रखता

है विद्यार्थी जीवन में कई तरह के भय होते

हैं जैसे अगर मैं कुछ ना बन पाया तो मेरे

मां-बाप अगर छोड़ गए तो बहुत लोगों को

अकेलेपन का भय सताता है है और वास्तव में

अकेलापन इतना ज्यादा परेशान करता है कि हम

फिर इसकी दवाई बाहर ढूंढने लगते

हैं हम किसी के साथ रिलेशनशिप या प्यार

मोहब्बत अफेयर इत्यादि में जाना चाहते हैं

जिससे हमें अकेलापन ना लगे परंतु जब हम

रिलेशनशिप में होते हैं तब कुछ और भय

उत्पन्न हो जाते हैं जैसे पार्टनर कहीं

छोड़कर ना चला जाए कभी धोखा ना दे कहीं

आगे जाकर मुझे या मेरे मां-बाप को परेशान

ना करें शादी ना होने का भय वह अगर शादी

हो जाए तो फिर संतान का भय कहीं संतान

बीमार ना हो जाए संतान की असाम मृत्यु ना

हो जाए संतान का करियर बन जाए या संतान का

विवाह ठीक से हो जाए और उसको अच्छा

पार्टनर मिल जाए हम पूरा जीवन सिर्फ अपनी

संकीर्ण बुद्धि का इस्तेमाल करके कुछ ना

कुछ मांगते रहते हैं और अगर मनचाहा मिल

जाए तो क्षणिक प्रसन्न हो जाते हैं और ना

मिले तो दुखी हो जाते

हैं क्या हमें कोई भी रिश्ता या वस्तु

स्थाई सुख दे सकती

है जब कोई चीज हम चाहते हैं तो हम उसके

लिए तड़पते हैं सपने देखते हैं और फिर जब

मिल जाती है तो कुछ दिन तो प्रसन्नता होती

है पर उसके बाद वह बोझ लगने लग जाती है या

फिर हम उस चीज के गुलाम बनकर रह जाते

हैं जो चीज हमें सुख देने के लिए बनी थी

उसको खोने का भय इतना होता है कि उसके बाद

हम उसके जैसे चौकीदार हो जाते

हैं वास्तव में हम उस चीज को पाना चाहते

हैं जो हमारा मन कहता है कि हम पा नहीं

सकते या फिर जिसकी वैल्यू हमारे मित्रों

या समाज की नजरों में ज्यादा

है जिससे हम उनके सामने उसकी नुमाइश करके

क्षणिक सुख ले सके और किसी भी चीज की

वैल्यू तभी तक ज्यादा होती है जब तक वह

हमारी ना हो जाए पूरा जीवन हम सिर्फ एक

नकली जीवन जीने में खर्च कर देते

हैं वास्तव में हमें चीजें सुख नहीं देती

हमें हमारी मानसिक स्थिति सुख देती

है एक डिप्रेशन के मरीज को आप बड़े से

बड़े होटल में ले जाओ क्या उसे सुख मिलेगा

महंगी गाड़ी उसे दे दो क्या वह उसे

प्रसन्न कर पाएगी

मान लो आपने अपनी कॉलेज लाइफ बहुत एंजॉय

की थी बहुत अच्छा समय बिताया तीन या चार

साल लेकिन अब आप जीवन में कठिन

परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं आप अब

कॉलेज लाइफ को याद करके सुखी होंगे या

दुखी सबसे ज्यादा दोहक क्या देता

है बीता हुआ सुख और उसके वापस ना आने की

संभावना पुराने सुख के बारे में भी

व्यक्ति सोचकर एक घुटन महसूस करता है सुख

को हम कैद नहीं कर सकते और ही भविष्य के

लिए उसका संग्रह कर सकते

हैं सुख केवल एक मनोजा

है आपको एक उदाहरण देता हूं एक बार एक

छोटा बच्चा अपने पिता के साथ मेले में

जाता है वहां जाकर वह बहुत खुश होता है एक

से एक चारों तरफ झूले स्वादिष्ट व्यंजन

चारों तरफ रंगबिरंगी लाइट अत्यधिक प्रकाश

लोगों की भीड़ देखकर व बहुत प्रसन्न होता

है क्या उसे सिर्फ इसीलिए सुख प्राप्त हो

रहा है कि वहां पर वह सब लुभावनी चीजें

मौजूद

हैं नहीं उसे इसीलिए सुख प्राप्त हो रहा

है क्योंकि उसकी मनो सुख लेने वाली

है उसे इसीलिए सुख प्राप्त हो रहा है

क्योंकि पिता ने हाथ पकड़ा हुआ है पिता

साथ

है मान लीजिए अगर उसका हाथ छोड़कर पिता

कहीं दूर चले जाए तो क्या होगा बच्चा

रोएगा चिल्लाएगा उसे भय

लगेगा वह सब लुभावनी चीजें झूले भीड़ लाइट

जो अब तक सुख दे रही थी अब अचानक उसे

डराने लगेंगी

इसी तरह हम भी तभी तक प्रसन्न रह सकते हैं

जब तक हम अंदर से मजबूत हैं जब तक

परमात्मा ने हमारा हाथ पकड़ा हुआ

है हमें शरीर के साथ-साथ आत्मा को भी रोज

भोजन देना होगा जब हम ईश्वर में आस्था

रखते हैं तो हमें कम तनाव होता है भय

धीरे-धीरे चला जाता

है वह सब रास्ते जो पहले बंद थे धीरे-धीरे

खुलने लगते हैं और आपका कोई काम नहीं

रुकता जीवन में स्थाई प्रसन्नता आती है और

हमारा मनोबल चरम सीमा पर पहुंच जाता

है ईश्वर से कभी भी कुछ मांगा मत करो

उसमें आस्था रखो कि जो वो भी देगा अच्छा

ही देगा आप मांगोगे तो अपनी संकीर्ण सोच

से मांगोगे और मिली हुई चीज हो सकता है

आपके लिए सही ना हो लेकिन वह अगर अपने से

देगा तो वही चीज देगा जो आपके लिए उत्तम

होगी हो सकता है हम एकदम से उसकी दी हुई

चीज को समझ ना पाए लेकिन धीरे-धीरे हमें

एहसास हो जाएगा कि जो हमारे साथ हुआ या जो

हमारे लिए उसने संचय किया वही हमारे लिए

अच्छा था इथर से मांगने की बजाय जो पहले

से आपके पास है उसका शुक्रिया किया करो

ऐसा करने से आप देखेंगे कि आपको और ज्यादा

मिलेगा आप सिर्फ कुछ दिन यह चीज आजमा कर

देखो आपको निश्चित ही परिणाम

मिलेंगे एक कहानी आपको सुनाता हूं एक बार

एक बच्चा एक शादी में जाता है वहां पर

विभिन्न प्रकार के भजन के बीच एक मेस पर

बहुत सारी टॉफी और चॉकलेट रखी होती

हैं बच्चे का टॉफी खाने का बहुत मन करता

है जो वहां उस टाल के पास जाता है लेकिन

उसका हाथ उन टॉफियां तक नहीं पहुंच

पाता उसके अंकल वहीं पास में खड़े होते

हैं वह अपने अंकल को बोलता है कि मुझे

टॉफी उठाकर दे दो मेरा हाथ उस बर्तन तक

नहीं पहुंच रहा जिसने टॉफी रखी

है उसके अंकल बोलते हैं कि मैं तुम्हें

गोदी में उठा लेता हूं जिससे तुम्हारा हाथ

वहां तक पहुंच जाए फिर तुम आराम से टॉफी

उठा

लेना लेकिन बच्चा कहता है कि अंकल आप ही

टॉफी उठाकर मुझे दे दो अंकल थोड़े से

हैरान होते हैं और उत्सुकता से बच्चे से

पूछते हैं कि तुम खुद टॉफी लो या मैं

तुम्हें दूं बात तो एक ही है बथा कहता है

कि अंकल आपकी मुट्ठी बड़ी है आप टॉफी लोगे

तो आपके हाथ में ज्यादा आएंगी और मुझे

ज्यादा टॉफी मिल

जाएंगी बच्चे ने जो बात इतनी मासूमियत से

कही उसमें बहुत गहरी सीख

है जब अंकल की मुट्ठी बड़ी है तो भगवान की

मुट्ठी कितनी बड़ी होगी वह अगर किसी को

देने पर आ जाए तो वह व्यक्ति संभाल भी

नहीं पाएगा तुम खुद मांगोगे तो हो सकता है

अपनी परिस्थितियों अपनी नजरों में अपनी

प्रतिभा अपने जरूरतों या और भी बहुत सारी

चीजों का आकलन

करके मांगो और आपको यह भी नहीं पता कि जो

आप मांग रहे हो वह वास्तव में आपके लिए

अच्छा है या

[संगीत]

नहीं हरिवंश राय बच्चन कहा करते थे मन का

हो तो भला मन का ना हो तो और भी भला

क्योंकि मन का अगर नहीं हुआ तो मतलब ईश्वर

की मर्जी से हुआ

है एक छोटा बच्चा हो सकता है सांप को

खिलौना समझकर अपनी मां से उसे मांगने की

जिद करने लगे कि मुझे सांप से खेलना

है लेकिन मां को पता है कि यह जिद ठीक

नहीं सांप काट सकता है और कुछ भी अनहोनी

हो सकती है तो मां उसे नहीं

देगी उसकी मर्जी में खुश होना सीखो आपका

विश्वास अगर दृढ़ होगा तो कहीं कमी नहीं

रहेगी एक आत्मिक शांति एक सुकून जीवन में

हर समय सुख रहेगा हमेशा यह ख्याल आपके

अंदर रहेगा कि मेरी काबिलियत मेरी औकात से

बढ़कर मुझे उसने दिया

है यह समझ आपको धरातल पर रखेगी

सफलता मिलना और उसे पचा दोनों कठिन

है छोटे मोटे दहक भी अगर आपके ऊपर आएंगे

तो उनको भी आशीर्वाद समझकर ग्रहण करो अगर

कभी बुखार हो जाए तो उसका शुक्रिया करो कि

पता नहीं कौन सा बहु बड़ा रोग आने वाला था

सिर्फ एक मामूली बुखार बनाकर मेरा बहुत

भयानक कर्म काट दिया भगवान को पूजने या

मानने का सही तरीका क्या

है यह आपकी व्यक्तिगत पसंद

है आप जिस भगवान को चाहे पूछ सकते हैं

जैसे चाहे वैसे पूजा कर सकते

हैं सब रास्ते अगर श्रद्धा से पालन किए

जाए तो एक ही जगह जाते

हैं पानी को नीर कह लो जल कह लो वाटर कह

लो वो रहेगा तो एक ही चीज ठीक इसी तरह

भगवान के भी नाम अलग-अलग हो सकते हैं

लेकिन वह है एक ही इन बातों में समय नष्ट

मत करो कि कौन से भगवान श्रेष्ठ हैं कौन

सा धर्म श्रेष्ठ है कौन सा पूजा या उपासना

का तरीका श्रेष्ठ

Leave a Comment