बड़ी बहस किसान पर बीजेपी बेनक़ाब! INDIA गठबंधन के लिए बड़ी खबर!

स्वागत है आपका इंडिया की बात में मेरे
साथ हैं भाषा और मुकुल और आज तीन धमाकेदार
मुद्दे आपके

सामने किसान पर अन्य दता किसान पर
पुलिसिया जुल्म और दुख की बात यह कि एक
किसान की मौत और मीडिया में चर्चा तक नहीं
मुद्दा नंबर दो चंडीगढ़ मेयर चुनाव पर

सुप्रीम कोर्ट की भारतीय जनता पार्टी को
जबरदस्त लताड़ क्या यह लोकसभा चुनावों के
लिए मिसाल होने वाली है और मुद्दा नंबर
तीन सीट शेरिंग को लेकर उत्तर प्रदेश और

दिल्ली दोनों जगह पर इंडिया गठबंधन के लिए
बात बनती दिख रही है क्या यह भविष्य के
लिए उम्मीद है यह तीनों मुद्दे होंगे मगर
शुरुआत हम करना चाहेंगे किसान आंदोलन से
जी हां शंभू बॉर्डर पर जिस तरह से टकराव

 

हुआ जिस तरह से पुलिस ने आंसू गैस के गोले
छोड़े ऐसा लग रहा है कि मानो कोई युद्ध चल
रहा है 23 साल के एक किसान एक युवा किसान
को की मौत हो जाती है शॉकिंग बात यह है कि

उस खबर को पूरा गोदी मी छिपा देता है यही
नहीं हरियाणा पुलिस यह भी दावा करती है कि
कोई किसान नहीं मारा गया है और वह अब भी
उसी बात पर बनी हुई है क्योंकि उसके
ट्विटर पर उसने कुछ अपडेट नहीं किया है
पैरामिलिट्री फोर्सेस हरियाणा पुलिस इस

कदर बल प्रयोग कर रही है और दूसरी तरफ
मीडिया ने इस खबर को पूरी तरह से साफ कर
दिया है यह हो क्या रहा है क्या इस

लोकतंत्र में प्रदर्शन का अधिकार नहीं है
क्या इस मुद्दे कापन शुरुआत करें
भाषा अभि साद जैसा कि विपक्ष केने कह रहे
हैं कि जो कुछ हुआ है वह जलिया वाला बाग
कांड की याद दिला रहा है मुझे लगता है कि

जलिया वाला बाग कांड जब हुआ था तब कम से
कम जो मीडिया था जो अखबार थे वह लिख रहे
थे कि यह जुल्म हुआ है लेकिन दुख की बात
यह है कि आज का कॉर्पोरेट मीडिया गोदी

मीडिया पूरी तरह से किसानों को ही खलनायक
बता रहा है और इससे बड़ी त्रास दी भारतीय
लोकतंत्र और भारतीय मीडिया के लिए कुछ और
नहीं हो सकती है अभिसार क्या है इस पर
आपका
पंच
इस मुद्दे पर मेरा पंच यह है कि साफ तौर

पर एक लोकतंत्र के अंदर प्रोटेस्ट यानी
प्रदर्शन को क्रिमिनलाइज किया जाएगा इस
देश का लंबा इतिहास रहा है प्रदर्शन का
सत्याग्रह हमारी आत्मा का हिस्सा है मगर

उसे ही खत्म किया जा रहा है दूसरी तरफ खबर
को ही दबा देना यानी कि सरकार की दोहरी
रणनीति दबाओ और खबर को सामने आने भी ना दो
यह सरकार का पंच है क्या है इस मुद्दे का
पंच बताए
मुकुल

सरकार ने सीधे-सीधे अपने नागरिकों अपने
किसानों के खिलाफ जंग छेड़ दी है पिछली
बार जो तपस्या में कमी रह गई थी वह शायद
इस बार पूरी कर दी जाएगी लेकिन सरकार को

यह समझना चाहिए कि उसका मुकाबला मेहनतकश
जनता से है और उसे टकराव की बजाय बातचीत
और हल की तरफ जाना चाहिए बहुत वाजिब बात
कही आपने कि इस बार तपस्या में कमी रह गई
मैं आपको बतलाना चाहता हूं एक किसान की
मौत होती है शुभकरण सिंह की 23 साल का

किसान वो खबर पूरी तरह से गायब भाषा अरे
कम से कम किसानों पर ही दोष मण देते जी यह
कह देते उन किसानों की वजह से उस युवा
किसान की मौत हुई है मगर इन बेशर्म मीडिया

वालों को देखिए पूरी तरह से इस खबर को छा
गए और खा गए और मैं आपको बताना चाहता हूं
तीन मिसाल मैं आपको देना चाहता हूं यह
देखिए रिपब्लिक भारत एमएसपी की लड़ाई

 

उपद्रव तक आई किसानों का संग्राम पुलिस
हुई परेशान शंभू बॉर्डर पर ऐलान संग्राम
इस तरह की खबरें चल रही थी और देखिए इस
पूरी खबर में अगर आप देखिए सुबह से लेकर
शाम तक पूरी जो खबर चल रही है उसमें यह

बताने की कोशिश हो रही है कि दरअसल यह
किसान नहीं उपद्रवी हैं यह युद्ध करना
चाहते हैं वहां पर किसानों से सवाल पूछा
जा रहा है कि आप जेसीबी क्यों लाए हैं आप
इस तरह के टियर गैस से बचने के लिए बड़े
बड़े चश्मे क्यों पहने यह बता के कि वो
तैयारी से आए हैं यानी यह सारा का सारा
मीडिया यह चाहता था कि किसान बिल्कुल

निहत आए जैसे निहत वो आ रहे थे मतलब आंखों
को कवर करने के लिए भी कुछ ना कर करें
क्योंकि पिछली बार तो द्रोण से आंसू गैस
गिराए गए थे इससे दरअसल अभिसार एक माहौल
बनाने की कोशिश थी कि किसान ही दोषी हैं

और लगातार खबर चल रही थी कि किस तरह से
जाम लगा हुआ है किस तरह से कौन-कौन तत्व
घुसे हुए हैं एक तरह से किसानों को विलन
बनाने के साथ-साथ आप देखिए जो सबसे बड़ी
घटना थी जिस तरह से दौड़ाया गया जो

फुटेजेस आए हैं वो डरा रहे थे और मुझे
वाकई लग रहा था जब शिवसेना के नेता आज उसे
कह रहे हैं कि जलिया वाला भाग कांड की याद
दिला रहा है और उसम वो कह रहे हैं कि उस
समय जनरल डायर था आज जनरल कायर है तो

किसानों से आप बात नहीं कर सकते जबकि
विदेश की जो खबरें हैं वहां पर ट्रैक्टर
लेकर किसान पार्लियामेंट तक जा रहे हैं

अरे आने दीजिए भाई वो आपके लोग हैं आप
चुनते आए हैं उनका पूरा हक है प्र मुल आप
जानते हैं मुझे सबसे हंसी इस बात की आ रही

थी कि वह किसान अगर जेसीबी ट्रैक्टर को
लेकर आ रहा है तो उसे आतंक के प्रतीक के
तौर पर मीडिया पेश कर रहा था तमाम न्यूज
चैनल्स में कि देखो जेसीबी लेकर आ गए अरे
इसी जेसीबी की जय जयकार तुम करते थे जब

मुख्यमंत्री आदित्य की बा
आ और नहीं यही नहीं हम ना भूले कि
जहांगीरपुरी में जब चलाया जा रहा था
जेसीबी तब सुप्रीम कोर्ट का आदेश आया था
उसी जेसीबी पी खड़े होकर शोज कर रही थी और
आज अगर वो किसान शांतिपूर्ण तरीके से उसको
लेकर आगे बढ़ रहा है तो तुम उसे टारगेट कर

रहे हो बुलडोजर न्याय जो इन्होंने एक
शब्दावली दी थी वो बुलडोजर न्याय का
मुकाबला एक तरह से किसान कर रहे हैं तो पर
मैं एक बात कहना चाहता हूं अभिसार और भाषा

यह बड़ा खतरनाक इस समय सरकार और मीडिया ने
लाइन ली है यह एक बंटवारा कर रहे हैं पहले
भी करने की कोशिश की इस बार भी पंजाब
हरियाणा एक तरह से बता रहे कि पंजाब के
किसान है पंजाब और हरियाणा राज्य सरकारें
आपस में टकरा रही हैं टकराव दिखाया जा रहा
है उसके साथ-साथ एक पूरी सिख कम्युनिटी को

टारगेट किया जा रहा है खालिस्तानी बताकर
और इसकी गूंज आपने बंगाल में भी सुनी कि
एक ऑफिसर को जो अपनी ड्यूटी निभा रहा है

उसे खालिस्तानी कहकर
उन्होने आप भी तो संदेश खाली में प्रदर्शन
करने गए थे जो आपका अधिकार है बिल्कुल उस
लिए कोर्ट पर गए कोर्ट पर आप बैठे आप लड़े

आप आगे बढ़े तो लगातार जहां ये विपक्ष में
है वहां तो यह पूरा हंगामा मचा देते हैं
और उसे अपना अधिकार बताते हैं लेकिन

आ रहे थे दिल्ली आ रहे हैं बात करने आप
उन्हें आने दीजिए आप कोई बीच का रास्ता
निकाल सकते थे लेकिन आपने बीच का रास्ता
निकालने की बजाय रास्ते में ही दीवारें

खड़ी कर द तो ये एक बड़ा खतरनाक है और एक
बंटवारा पैदा करने की कोशिश की जा रही है
ये नागरिक कोई और और देखिए यहां पर यहां
पर एक चीज मैं कहूंगी कि मामला सारा पंजाब

का बनाया जा रहा है लेकिन जबक उसी दिन
उत्तर प्रदेश में सारे जो जिलाधिकारी हैं
उनके
2014 से पहले अन्ना बैठते हैं रामलीला
मैदान में अरे अगर आपको लगता है कि वह
सड़क पर ना बैठे मैंने उस वीडियो को देखा

था कि पोलैंड में किसान प्रदर्शन कर रहे
थे वो भी अपना प्रदर्शन कर रहे थे चलिए वो

सड़क ना रोक रहे हो तो कहिए फिर किसानों
को रामलीला मैदान में बैठने दीजिए आप वो
भी नहीं अलाव कर रहे हो नहीं मैं कह रही
हूं दो दिन वो आपके लिए रुक गए आपने कहा
कि वार्ता हो रही है दो दिन उन्होंने अपना
आंदोलन स्थगित किया दो दिन बाद फिर वो
वापस आए और दूसरी बात अभी सार कि आप ऐसा

सीन क्रिएट कर रहे हैं जैसे वो दूसरे देश
से आई हुई सेना है जो इधर आ रही है जबक

जबक जो मीडिया है जिस तरह से सुबह से चला
रहा था कि इनके पास ये है इनके पास वो है
तभी मुझे डर लगने लग गया था कि सारा माहौल
ऐसा बनाया जा रहा है कि जैसे युद्ध छिड़ा
हुआ है और दिल्ली एक सीमा इसमें यह भी नोट

करने वाली बात है ये कोई एक दिन दो दिन की
बात नहीं है 2021 में उनका धरना प्रदर्शन

आंदोलन स्थगित हो गया था और इस वादे के
साथ हो गया था कि ये मांगे पूरी की जाएंगी
सरकार इस पर सहमत हो गई थी 21 से 2024 आ
जाता है इस दौरान भी वो लगातार प्रदर्शन
करते रहे मैंने पहले भी इस बात को कहा था
तो सरकार क्यों नहीं जागी क्यों नहीं बात
की क्यों नहीं कोई गारंटी लेकर आई क्योंकि

मोदी गारंटी जब पूरे देश में चल तो
किसानों को क्यों नहीं मोदी गारंटी मिलनी
चाहिए मैं मैं देखिए मुझे एक और चीज जो
बहुत खतरनाक लग रही है आपने जिक्र संदेश
खाली का किया था वहां पर कितनी आसानी से
खालिस्तानी शब्द का इस्तेमाल कर दिया जाता
है एक आईपीएस रैंक के ऑफिसर के लिए कोई

माफी नहीं मांगता कोई माफी नहीं मा मांगता
पूरा चलता है कि नहीं साहब ये एडिटेड

वीडियो है और वीडियो किसका है साहब न्यूज
18 का है अंबानी का न्यूज़ चैनल है मैं
कुछ और कहना चाहता हूं एक तरफ हम संदेश
खाली में वो देख रहे हैं दूसरी तरफ हम यह
भी देख रहे हैं कि आपको याद होगा पिछले जब

पहली बार प्रोटेस्ट हुआ था तो बाकायदा
एफिडेविट में सरकार ने कहा था कि आंदोलन

में खालिस्तानी खालिस्तानी का प्रवेश हो
गया अर्बन नक्सल कितनी आसानी से इन शब्दों
का इस्तेमाल मुझे लगता है ये बहुत खतरनाक
खेल सरकार खेल र और मुझे लगता है बहुत

सुनियोजित है अभी सार ऐसा ही नहीं कि ऐसे
हीय चीजें आ जा रही हैं ऐसे ही मीडिया
बोलने लग जा रहा है और ऐसे ही सत्यपाल
मलिक के यहां सीबीआई पहुंच जाती है यह
सारी कड़ियां आपस में जुड़ी हुई है
क्योंकि इसमें मैसेज बहुत साफ है कि जो
किसानों के पक्ष में बोल रहा है जो

मजदूरों के पक्ष में बोल रहा है क्योंकि
सिर्फ किसानी की मामला नहीं है हम हमेशा
देखते हैं कि खास तौर से किसान के साथ-साथ

जब भी मजदूर खड़ा हुआ है जो 16 तारीख का
पूरा प्रोटेस्ट था यहां पर आप देखिए कि
सबको उपद्रवी मानते हैं और एक मिडिल क्लास
सिंड्रोम पैदा कर दिया गया है जहां आंदोलन
करना अपराध
वही बीजेपी तमाम गैर बीजेपी इलाकों में
जाकर राज्यों में जाकर आंदोलन करती है
अफरातफरी मचाती है और वो बहुत नॉर्मल होता
है लाइ क कर अपने नेता टी राजा सिंह
महाराष्ट्र में घुसकर भड़काऊ बयान देते
हैं आखिरकार उनके प्रशासन को उनकी सभाओं
को अनुमति देने से इंकार करना पड़ता है आप
दूसरे राज्यों की बात कर रहे हैं उनके
अपने राज्यों में टी राजा सिंह देखिए किस
तरह के भड़काऊ बयान देते हैं मगर मैं यहां
पर जो बात आपके सामने पूछना चाहता हूं कि
अ एक तरफ देखिए आप बातचीत की बात कर रहे
हैं दूसरी तरफ प्रोपेगेंडा है हिंसा है आप
देख रहे हैं किसान के लिए कितनी मुश्किल
भरी चुनौती है ये वो करे तो करे क्या वो
दिखाई दे रहा है उसको कि ये सरकार संजीदा
नहीं है यह सरकार उसकी जान की दुश्मन तक
बनी हुई है जो शहीद जिसे कह रहे हैं किसान
और शहीद हुआ है वाकई जो किसान नौजवान उस
पर भी कई लाख का करीब 18 लाख का कर्ज
बताया जा रहा है यानी कितनी मुश्किलों में
कर्ज में में वो हैं वो खेती कर रहे हैं
खेती का दाम नहीं मिल रहा तो जो एमएसपी है
तो अब हम बार-बार यह कह रहे हैं कि जो
भारत रत्न स्वामीनाथन को देने का मतलब या
चौधरी चरण सिंह को देने का मतलब ये है कि
किसानों को उनकी फसल का वाजिब दाम दिया
जाए तब है भारत रत्न वरना कोई मतलब नहीं
है और देखिए ना इसीलिए स्वामीनाथन की बेटी
मधुरा स्वामीनाथन कैमरे पर आके तमाम लोगों
को संबोधित करती हैं सरकारी आयोजन में और
कहती हैं कि आप किसानों को आतंकवादी और
अपराधी कैसे समझ सकते हैं आपको इनसे
बातचीत करनी होगी और इनकी मांगों को सुनना
होगा लेकिन मोदी जी तो मोदी जी हैं और
किसानों के लिए आप देखि एक चीज हम मुझे
लगता है हमें बार-बार यह भी बोलना चाहिए
कि यह पहली बार है अभिसार जब द्रोण का
इस्तेमाल किया गया आंसू गैस छोड़ने के लिए
तो आप देखिए जिस द्रोण के बारे में मोदी
जी कह रहे थे कि किसानों को बहुत राहत हो
जाएगी आलू पहुंचा सकते हैं यह हो सकता है
उसका पहला इस्तेमाल और पहला प्रोटेस्ट है
जहां पर द्रोण से आप आंसू गैस करते हैं और
एक हमारे सामने आता है कि किस तरह से लोग
गायल है पैलेट गं का भी आरोप लग रहा है
किसान कह रहे हैं कि पैलेट गन भी चलाई जा
रही है किसान जख्मी हुए हैं बहुत सारे कुछ
लापता भी हैं कई जख्मी हैं कई अस्पतालों
में है लेकिन इसका कोई बरा नहीं अच्छा
इसके अलावा और भी कई चीजें सामने उभर कर आ
रही है मसलन प्लेन क्लोज में लोग वहां
खड़े हुए रहस्यमय किरदार कौन है वो क्या
वो पुलिस का हिस्सा है क्या वो प्राइवेट
मिलिशिया है या आरोप भी लगाया जा रहा है
इसके अलावा हम देख रहे हैं जिस तरह से
हिंसा वहां पर है तो पूरी एक तैयारी लग
रही है बड़ा सवाल ये प्रधानमंत्री क्या
उनसे बातचीत नहीं कर सकते अरे राजनीतिक
तौर पर आपी को तो फायदा मिलेगा यह किस तरह
का अहंकार है यह किस तरह की हड धर्मिता है
वही जो मैंने पहले कहा कि पिछली बार
उन्होंने जब कानून वापस लिए कहा मेरी
तपस्या में कुछ कमी रह गई थी इस बार वो
कोई कमी नहीं रहने देना चाहते क्योंकि अब
चुनाव बिल्कुल सामने है तो वो इसे बिल्कुल
कुचल देना चाहते हैं वो बातचीत के रास्ते
में व वो नहीं चाहते कि कोई कहे जैसे
पिछली बार भी कहा मोदी नहीं
झुकता य इस बार जो अहंकार है वो अपनी
पराकाष्ठा पे पहुंचा हुआ है और इसीलिए वो
विभाजन कर रहे हैं कि यह कुछ किसान हैं
बाकी किसान नहीं है और साथ ही साथ देखिए
कि उसी के साथ-साथ आप किसानों से बात नहीं
करते आप गुजरात जाकर एमएसपी और गन्ने की
बात करते हैं ये इससे बड़ा संकट क्या हो
सकता है तो ये इंडिया की बात में हमारा
पहला अहम मुद्दा था और दूसरा मुद्दा है
चंडीगढ़ के मेयर चुनाव चंडीगढ़ के मेयर
चुनाव में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया डीवाई
चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में एक ऐतिहासिक
फैसला सुनाया गया आपको याद है लोकतंत्र का
किस तरह से मजाक रिटर्निंग ऑफिसर जो कि
बीजेपी का सदस्य भी अनिल मसीह उसने किस
तरह से लोकतंत्र का मजाक उड़ाया था अब उस
फैसले के बाद आम आदमी पार्टी और कांग्रेस
के जो साझा उम्मीदवार को विजेता घोषित कर
दिया गया है मगर क्या इससे भविष्य के लिए
एक नई मिसाल एक नजीर कायम होगी क्या इस
मुद्दे का अपन शुरुआत करेंगे
मुकुल अभिसार मेरा कहना है कि चंडीगढ़
चुनाव पर जो फैसला है उसका सबक जो है वो
उम्मीद भी जगाता है लेकिन डर भी पैदा करता
है उम्मीद इसलिए कि सुप्रीम कोर्ट ने एक
अच्छा फैसला दिया डर इसलिए कि लोकसभा
चुनाव जिसमें 97 करोड़ 97 करोड़ मतदाता
हैं यह 36 वोट का मामला था उसमें कौन
निगरानी करेगा कौन निगे बानी करेगा अगर
वोट की चोरी होती है
तो भाषा क्या है इस मुद्दे का
[संगीत]
पंच एक बात बिल्कुल साफ है कि लोकतंत्र की
हत्या हो रही है हत्या कैमरे पर हो रही है
और मिलोर्ड ने देखा और यहां रोकने की
कोशिश की लेकिन 2024 में जो संकट है वह
बहुत गहरा है क्योंकि हम सब जानते हैं कि
चुनाव आयोग कैसा है और उसमें क्या-क्या
तब्दीली मोदी जी ने की है लिहाजा अब सबसे
बड़ा सवाल कैमरा बैलेट ईवीएम और वीवीपैट
का है अभिसार क्या है इस पे आपका
[संगीत]
पंच इस मुद्दे पर मेरा पंच यह है कि चुनाव
आयोग पूरी तरह से पारदर्शी नहीं है वो
पारदर्शिता से काम नहीं कर रहा है विपक्ष
से संवाद नहीं कर रहा है यह फैसला तो जरूर
आया मगर आप और हम जानते हैं कि व्यवस्था
किस तरह से भाजपा के सामने नतमस्तक है
ब्यूरोक्रेट्स किस तरह से भाजपा के नेताओं
के तौर पर के नेताओं के लिए काम करते हैं
मध्य प्रदेश के चुनावों में हमने उसकी
मिसाल देखी इसीलिए यह फैसला महज एक अपवाद
दिखाई देता है अ मुकुल आपने देखा फैसला
आया था उससे पहले देखिए इन लोगों की
खुराफात दिमाग की किस तरह से है तीन आ आम
आदमी पार्टी के जो पार्षद थे व छलांग मार
गए थे इस्तीफा भी दे दिया था मेयर चुनावी
ने क्यों क्यों क्योंकि वो जानते थे कि
अगर मेरिट्ज पर फैसला हुआ जो कि हुआ भी तो
उनके खिलाफ जाएगा तो साहब आप पहले ही
इस्तीफा दे दो ताकि अगर दोबारा चुनाव कराए
जाए तो आपके पास संख्या गणित के हिसाब से
19 पार्षद हैं इंडिया गठबंधन के तीन कम हो
गए खुराफात देखिए खुराफात में प्लानिंग
बकुल कैलकुलेशन पहले भी ये था जब आठ वोट
रद्द किए गए थे तब भी कैलकुलेशन ये था कि
हम जीत जाएंगे अब तीन लाए गए केवल तीन लाए
गए उन्हें यह था कि शायद सुप्रीम कोर्ट
क्योंकि सख्त है तो दोबारा चुनाव का फैसला
दे दे लेकिन उसने सुप्रीम कोर्ट ने बाजी
पलट दी ह हॉर्स ट्रेडिंग का मामला उसके
सामने आ गया यह एक अच्छी बात है लेकिन
मेरा यह था कि मैं अब भी इसे आधा अधूरा
फैसला समझता हूं क्यों क्योंकि हर
भ्रष्टाचार में एक नियम है कि लाभार्थी
कौन है लाभार्थी पर फैसला और सजा होनी
चाहिए उसे संबोधित नहीं किया जा रहा है
महज अनिल वसी जो एक मोहरा है वो तो चुनाव
अधिकारी अपने लिए थोड़ी वोट की चोरी करेगा
उसे क्या होगा वो थोड़ी जीत रहा है जो
लाभार की है उस पर फैसला उस पर अंकुश उस
पर कमेंट तक नहीं आया तो मुझे थोड़ी सी इस
कह रहे हैं कि भाई ये आधा अधूरा फैसला है
या पूरी तरह से वो उससे सहमत नहीं है मगर
मैं आपसे पूछना चाहता हूं पहले इलेक्टोरल
बॉन्ड्स एक ऐतिहासिक फैसला बिलकिस बानों
पर भी सख्त तेवर अपनाए थे सुप्रीम कोर्ट
ने और अब ये चंडीगढ़ मेयर चुनाव क्या ये
कहना सही होगा हालांकि आप और हम उस पर
पहले भी टिप्पणी करते रहे कि इस वक्त
सुप्रीम कोर्ट ही सही मायनों में लोकतंत्र
के लिए आखिरी उम्मीद बनी हुई है या आपको
लगता है कि हम जरूरत से ज्यादा आशावादी हो
रहे हैं अगर मैं देखिए हमारे पास हमारे
पास उसपे उम्मीद करने के अलावा कोई विकल्प
नहीं है क्योंकि लोकतंत्र में बाकी जो
खंबे हैं वह तो लले हैं लेकिन यहां पे
मुझे जो दिक्कत दिखाई दे रही है अभी साथ
कि जो क्रिटिकल इश्यूज हैं जो क्रिटिकल
मुद्दे हैं जैसे इलेक्टोरल बंड्स वाला भी
मसला 6 साल आपके पास रहा लेकिन 6 साल में
आप नवंबर में रिजर्व करते हैं पांच
विधानसभा चुनाव हो जाने देते हैं और तब
होता है मेरा मानना है कि आप यही फैसला
मिलोर्ड महाराष्ट्र में भी कर सकते थे
हॉर्स ट्रेडिंग वहां पर भी हो रही थी बाकी
और राज्यों में जहां सरकारें तब्दीली हुई
वहां भी हो रही थी लेकिन कम से कम एक
संदेश जाना 2024 में बहुत जरूरी है कि
इतना खुला खेल नहीं हो सकता बंड में भी जो
फैसला आया मैंने उसकी तारीफ की लेकिन वहां
भी लाभार्थी कौन है क्या नीतियां बदली गई
उन पर अगर कुछ एक्शन नहीं होगा तो बहुत
जेनेरिक कमेंट किया गया कि भाई उद्योग
घरानों उद्योग घराने जो पैसा देते हैं उस
पैसे के बदली पॉलिसी मेकिंग में उन्हें
फायदा मिलता है इस तरह की बातें फायदा
मिलता है
उ लिस नरीमन को भी याद करना चाहिए अभी
उनका देहांत हुआ तो वो जिस तरह के कानून
विध व्यक्ति और उन्होंने कहा था कि जब इस
तरह का अकूत बहुमत होता है तब किस तरह से
नियम कायदे कानून सरकार बदलती है और आप
देखिए वही तरीका सुप्रीम कोर्ट जिस तरह से
करा क्योंकि वो बार-बार सुप्रीम कोर्ट से
इंगेज करते हुए बोल रहे थे कि आपको एक
स्टैंड लेना होगा नहीं तो लोकतंत्र में
आपकी साख नहीं रह जाएगी बिल्कुल क्या आपको
लगता है कि चंडीगढ़ मेयर चुनावों में जो
हुआ और मैं सुप्रीम कोर्ट के फैसले की की
बात नहीं कर रहा हूं जो हमने देखा खुलेआम
कैमरे पर अ मीडिया का एक धड़ा तो उसे भी
जस्टिफाई कर रहा
था गुल्लू ने बाकायदा शो किया था कि नहीं
साहब सिर्फ आठ पर नहीं 20 के 20 पर
उन्होंने जो है दस्तखत किए
थे आपको लगता है खास तौर से जब क्लोज
कंटेस्ट होंगे हमने बिहार विधानसभा
चुनावों में भी 4 साल पहले देखा था वहां
पर यह जो ब्यूरोक्रेट्स होंगे ये या यह जो
टोटली एक तरफ नतमस्तक अधिकारी होंगे उनका
खतरनाक किरदार सामने यही है सबसे बड़ा
खतरा और मुझे लगता है कि इसे अ सभी
विपक्षी पार्टियों को भी एड्रेस करना
चाहिए सोचना चाहिए कि इसके लिए क्या
रणनीति बनाए क्योंकि देखिए रणनीति नहीं
बनाएंगे तो हर चीज अभी सुप्रीम कोर्ट से
हल नहीं हो सकती एक राजनीतिक दल है एक
हमारी व्यवस्था है लोकतंत्र की तो इसलिए
बहुत जरूरी है कि निगे बानी अ उस परे नजर
रखना क्योंकि वोट चोरी तो यह एक आरोप लगता
रहा है और लोगों को शक भी है बहुत से
लोगों ने बताया कि उनका वोट किस तरह से
उन्होंने दिया किसे किसे पहुंचा या क्या
दिखा तो यह एक बहुत जरूरी क्योंकि य एक
मिनट एक मिनट भाषा यह जो मुद्दा इन्होंने
उठाया है बहुत जरूरी है क्योंकि देखिए
विपक्ष भी मुद्दा उठा रहा है कि भाई ईवीएम
चलिए ईवीएम हैकेबल है नहीं वो एक अलग
मुद्दा है मगर कम से कम वीवी पैड जो एक
जायज डिमांड है कि भाई आप वोट करते हैं तो
मैं चेक कर लूं मैंने किसे वोट किया है और
वो वीवी पट की पशी को मैं एक बक्से में
डाल दूं ताकि कभी कोई विवाद पैदा हो तो
उसका मिलान हो सके अंतिम नतीजा और ये
चुनाव आयोग इसके लिए भी तैयार नहीं है एक
मिनट और यही नहीं ना सिर्फ तैयार नहीं है
आप अ विपक्ष से संवाद करने को तैयार नहीं
है चुनाव आयोग यह कर रहा है भाष देखिए
क्योंकि देखिए चुनाव आयोग कहां खड़ा है और
चुनाव आयोग किस तरह से मैनिपुलेटेड है
मुझे लगता है इसको लेकर संदेह अब लोगों
में भी नहीं रह गया बहुत क्लियर है इसलिए
20224 की लड़ाई बहुत तगड़ी है क्योंकि
बिल्ली की गली में गले में घंटी कौन बांधे
वीवी पैड की डिमांड उठ रही है लगातार इस
पे बात हो रही है कि भाई ईवीएम वोट और
रिजल्ट में डिफरेंस है इवन जो बैले पोस्टल
बैलेट खोले जाते हैं हमने मध्य प्रदेश में
देखा आपने बिहार का जिक्र किया मध्य
प्रदेश में घटना सामने आई थी ना कि पहले
कैसे खोल दिए गए थे विपक्ष के कोई लीडर
वहां नहीं था यानी 2024 में यह बहुत कठिन
राह होने वाली है विपक्ष के लिए सारा
सिस्टम इस समय बीजेपी के पक्ष में यहां तो
बैलेट पेपर थे और कैमरा था तो पकड़ में आ
गया और दोबारा गिनती हो गई अगर कैमरा ना
हो और बैलेट पेपर ना वैसे मैं अपने
दर्शकों को बता दूं कि जो आप वोटिंग दे
देते हैं ना तो व जो ईवीएम की मशीनस होती
है व चुनाव आयोग की निगरानी नहीं होती है
व है पैरामिलिट्री फोर्सेस की निगरानी में
जो केंद्र सरकार को रिपोर्ट करती है वह
केंद्र सरकार जिसे बीजेपी चलाई चला रही है
यही नहीं ईवीएम का जो सोर्स कोड होता है
वह सोर्स कोड चुनाव आयोग को भी नहीं पता
होता वो उन इंजीनियर्स को पता होता है जो
बीएल जैसी कंपनियों में काम करती है जो
ईवीएम बनाते हैं वो बीएल जिनमें भाजपा के
सदस्य मौजूद है डायरेक्टर के पद पर है मगर
मगर यहां पर जो मैं मुद्दा उठाना चाहता
हूं और मुकुल यह मेरा आखरी सवाल इस मुद्दे
को लेकर होगा कि देखिए व्यवस्था पारद
दर्शी नहीं है व्यवस्था को बदलने की जरूरत
है चाहे जो नौकरशाह जिनकी निगरानी में यह
पूरी प्रक्रिया होती है चाहे आपके वीवीपट
का मुद्दा हो इस व्यवस्था को बदलने की
जरूरत है भाजपा इस व्यवस्था को नहीं
बदलेगी क्योंकि इस व्यवस्था से उसे
फायदा तो इसका मतलब ये है कि ये व्यवस्था
तब तक नहीं बदलेगी जब तक सरकार ना बदले जी
जी चुनाव सुधार की तरफ ये सरकार बिल्कुल
उत्साहित नहीं है वह नहीं चाहती चुनाव
उसका यह सुधार यही सुधार है पर मैं कह रहा
हूं कि इसी में से रास्ता निकाल है
क्योंकि चुनाव सामने अब कुछ नहीं बदलने
वाला तो कैसे हो जैसे दिल्ली में आम आदमी
ने अपनी वोटों की निगरानी की जैसे और जगह
वोटों की निगरानी की गई है निगरानी की
व्यवस्था 24 घंटे जब तक वो उसमें है एक तो
हमारे यहां बहुत लंबा चुनाव हो जाता है अब
अप्रैल में शुरू होगा पता चला मई में
चलेगा कई एक एक राज्य में कई कई फेज में
चुनाव होता वोटों की निगरानी करना लिए हो
जाते हैं एक राज्य के तो वो निगरानी भी
मुश्किल हो जाती है पता चला एक महीने से
वोट पड़ा है वहां वो आप दूसरे राज्य में
भी बिजी है तब तक कुछ हो सकता है तो ये
आशंकाएं हैं ये आरोप है और इसका निराकरण
होना जरूरी है इसलिए विपक्ष को और देखिए
इसके लिए बहुत साफ है अभिसार कि बड़े
पैमाने पर लोगों को अपने पक्ष में उतार कर
वोट डलवाना ये जो बूथ लेवल मैनेजमेंट है
अगर ये विपक्ष की पार्टियां नहीं करेंगी
अभी सार कि आपके पास एक गारंटी हो एक
नेटवर्क हो जिसमें बीजेपी अभी अव्वल नंबर
पर है तो वो उसको चैलेंज वहां से कर यहां
पर सिस्टम देखिए सिस्टम नाकामी विपक्ष की
है ना हम व्यवस्था की बात नहीं कर सकते
सिस्टम की बात नहीं कर सते व्यवस्था है
अभी वो तो व्यवस्था बीजेपी के लिए बहुत
माकूल है उसमें वो क्यों तब्दीली चाहेगी
इसीलिए तो वो चीफ इलेक्शन कमीशन के लिए
सुप्रीम कोर्ट के फैसले को रद्द बदल करके
अपना अध्यादेश और और हमें इन मुद्दों की
भी बात करनी चाहिए कि किस तरह से पूरे के
पूरे वोटिंग लिस्ट गायब हो जाते हैं यानी
कि लोगों के नाम वोटिंग रोल से खत्म हो
जाते हैं यह भी अपने आप में एक जो है
चर्चा इसलिए मुझे याद आ गया आपकी बात सेही
अभी हम गुजरात मॉडल गुजरात मॉडल बहुत करते
थे रामपुर मॉडल याद रखिए आप रामपुर मॉडल
वो था कि जिसमें वोट ही नहीं डालने दिया
गया उत्तर प्रदेश का रामपुर जी रामपुर में
वोट ही नहीं लोग पहुंच पाए उनके नाम ही
नहीं थे और उन्हें जाने भी नहीं दिया गया
रोड ही रोक दी गई कि आप नहीं जा सकते
बताइए तमाम तरह का ये नहीं है वो नहीं है
तो अगर ऐसा मॉडल कुछ चला तो फिर भैया क्या
रामराज रहेगा चलिए अब हम रुख करना चाहेंगे
तीसरे मुद्दे का और यह तीसरा मुद्दा बहुत
दिलचस्प है दोस्तों इंडिया गठबंधन में कम
से कम दो राज्यों में सीटों का बंटवारा
दिखाई दे रहा है कई राज्यों में एक तरह से
झटका लगा था दिल्ली को लेकर खबर आई है और
वह खबर मैं आपको बता दूं क्या आई है उस
खबर के मुताबिक अ चार सीटों पर चुनाव
लड़ेगी आम आदमी पार्टी और तीन पर कांग्रेस
खबर क्या है कांग्रेस और आम आदमी पार्टी
के दिल्ली गठबंधन के फॉर्मूले में आम आदमी
पार्टी नई दिल्ली नॉर्थ वेस्ट दिल्ली
वेस्ट दिल्ली और साउथ दिल्ली में चुनाव
लड़ेगी वहीं कांग्रेस पूर्वी दिल्ली उत्तर
पूर्वी दिल्ली और और चांदनी चौक में चुनाव
लड़ेगी और कल ही खबर आई है उत्तर प्रदेश
को लेकर जहां 17 सीटों पर चुनाव लड़ेगी
कांग्रेस और बाकी सीटों पर समाजवादी
पार्टी और जो उसके छोटे मोटे घटक हैं और
यही नहीं मध्य प्रदेश में भी खजराहो में
जो है समाजवादी पार्टी चुनाव लड़ पाएगी तो
यह एक तालमेल तो दिखाई दे रहा है मगर क्या
इससे बात बन पाएगी क्या इस मुद्दे का पंच
बताएंगे
भाषा देखिए अ सार यह एक शुभ संकेत है और
यह शुभ संकेत जुड़ा हुआ है मणिपुर से लेकर
मुंबई तक जो यात्रा कर रहे हैं राहुल
गांधी भारो जोड़ो न्याय यात्रा उससे भी जो
एक वेव पैदा हो रही है या यूं कहिए वे खुद
जनता से कनेक्ट हो रहे हैं उसके साथ यह जो
मुद्दा है सीट बंटवारे का जिसको लेकर बहुत
एप्प्रिहेंशन था बहुत डर था और लगातार
कांग्रेस निशाने पर थी मुझे लगता है
अंदर-अंदर जो बातचीत चल रही है उसका एक
पॉजिटिव संकेत है और खास तौर से दिल्ली का
होना और उत्तर प्रदेश का होना क्योंकि
बिहार में तकरीबन मामला सेट है लिहाजा एक
बढ़ा हुआ कदम मुझे दिखाई देता है अभिसार
क्या है इस परे आपका पंच
इस मुद्दे पर मेरा पंच ये है कि देर आए
दुरुस्त आए कायदे से यह सब आज से दो महीने
पहले हो जाना चाहिए था क्योंकि आपका
मुकाबला एक ऐसी पॉलिटिकल पार्टी के साथ है
जो पूरा एक भोकाल है पूरा एक सिस्टम है
साम दम ंड भेद से जीतना जानती है एजेंसीज
का इस्तेमाल करती है और ऐसे में अगर आप
अपनी हट धर्मिता के चलते अपने ईगो के चलते
आप अगर गठबंधन नहीं कर पा रहे हैं आप
जमीनी हकीकत को देख के गठबंधन नहीं कर पा
रहे हैं और यह मैं कांग्रेस की बात कर रहा
हूं तो यह अपने आप में बता रहा है कि आप
इस लड़ाई को लेकर कितने गंभीर हैं मुकुल
क्या है इस मुद्दे का पंच
हां मैं भी यही कहूंगा कि दिल्ली और यूपी
से अच्छी खबर है लेकिन मेरा कहना ये है कि
हमें हमेशा अपने विपक्ष की ताकत का आकलन
करना चाहिए और अपनी ताकत का आकलन हमारी
हैसियत हमारी वास्तविक स्थिति क्या है तभी
हम लड़ सकते हैं इसलिए सीटों पर अ एक
दूसरे से खींचातानी की बजाय जल्दी से इस
मुद्दे को पूरे देश में सुलझा लिया जाए
543 सीट पर तभी कुछ भला होगा तो भाषा एक
तरह से स्पष्ट हो जाता है कम से कम उत्तर
प्रदेश में प्रदेश की जनता के लिए साफ है
कि एक तरफ इंडिया गठबंधन है जिसमें
समाजवादी पार्टी और कांग्रेस हैं क्योंकि
मैं नहीं भूला हूं गोदी मीडिया ने लगातार
खबरें चलाई थी कि गठबंधन फेल हो गया है
नहीं हो रहा है और वो एक असमंजस पैदा किया
जा रहा है मगर अब स्थिति साफ है एक तरफ
समाजवादी पार्टी और कांग्रेस और दूसरी तरफ
भारतीय जनता पार्टी और यहां मैं बहन
मायावती को भी खड़ा करना चाहूंगा क्योंकि
उनका भी निहायत ही रहस्यमय किरदार होता है
जिस तरह से वो कुछ सीटों पर लोगों को उतार
देती हैं जिससे विपक्ष को नुकसान पहुंचता
है तो प्रदेश की जनता के सामने अ पूरा जो
है थ्योरी एकदम साफ है इक्वेशन एकदम साफ
है जी और मुझे लगता है कि उत्तर प्रदेश
बहुत क्रिटिकल भी है बिहार में मामला तय
है क्योंकि वहां पर पलटू राम पलटी खा चुके
हैं तो महागठबंधन पुराने फॉर्म में मौजूद
है और तकरीबन जो खबरें आ रही हैं उसमें
बता रहे हैं कि एक ब्रॉड सहमति बन गई है
तो हिंदी बेल्ट जो बहुत इंपॉर्टेंट है
वहां पर एक सहमति बनना और सहमति के साथ
आगे बढ़ना बहुत जरूरी है और खास तौर से
दिल्ली मैं दिल्ली इसलिए बार-बार कह रही
हूं क्योंकि अगर दिल्ली में आम आदमी
पार्टी और कांग्रेस क्योंकि यहां पर सीधी
टकरा हट इन दोनों के बीच में थी जिसका
सीधा फायदा सातों सीटें भाजपा के पास अ
अभी तक रही है वहां पर अगर डेंट लगता है
और हम सब जानते हैं कि दक्षिण में तकरीबन
एक समझदारी है केरल को छोड़कर
तो कुछ राज्य बच जाते हैं जहां पर अभी
इंडिया गठबंधन को अपने मजबूत स्थिति करनी
है और यह बात सही है अभिसार कि अब एक
हफ्ते 10 दिन के भीतर अगर यह पूरे देश का
एक रोड मैप नहीं करते हैं तब शायद इंडिया
गठबंधन के लिए बहुत मुश्किल होगी इन्हें
तुरंत ही पश्चिम बंगाल में भी हस्तक्षेप
करके बातचीत करके स्थिति स्पष्ट करनी
चाहिए मुकुल मुझे जो एक और चीज यहां दिखाई
दे रही है आप आपने जिक्र किया था बिहार का
बिहार में तेजस्वी यादव अभी से उतर पड़े
हैं जन विश्वास यात्रा के साथ कुछ लोग कह
रहे हैं कि उनकी निगाह 2025 में उस वक्त
के विधानसभा चुनावों में मगर चलिए उस वक्त
भी हो कुछ ना कुछ असर पड़ेगा और उन्हें
प्रतिक्रिया भी मिल रही है एक तरफ सीटों
का गठबंधन अगर उसमें सकारात्मक पहल और
दूसरी तरफ ये जो यात्राएं निकली जा रही
हैं रोड शोज हो रहे हैं आप जनता के बीच जा
रहे हैं जैसे मीडिया बेशक कवरेज नहीं दे
रहा है मगर वो भी किया जा रहा है आपको
लगता है ये जो दोहरी रणनीति है यह कामयाब
साबित हो बिल्कुल यह कामयाब होगी मैंने
हमेशा कहा कि यात्राएं हमेशा कामयाब होती
हैं वह भले किसी भी संदर्भ में हो और यानी
नेता अगर आपका सड़क पर उतर रहा है तो उसके
एक माने हैं तो चाहे राहुल उतरे चाहे
तेजस्वी उतरे चाहे वह 25 का निशाना हो
चाहे वो 24 का ही हो लेकिन इसका पॉजिटिव
असर पड़ेगा और मैं एक और बात जोड़ना चाह
रहा था कि इंडिया एलायंस तो है ही लेकिन
और भी जो दल हैं और मेरी कुछ लोगों से
बातचीत भी हुई है क्योंकि यूपी में अभी
कहा अखिलेश ने कि यूपी से ही बीजेपी आई थी
और यूपी से ही जाएगी क्योंकि एक बड़ी उसकी
जीत यूपी में हुई थी तो एक जनता की भी
समझदारी जो एक तो बीजेपी का वोटर वोटर है
वो तो वहां जाएगा जाएगा जो लेकिन विपक्ष
को देना चाहता है वो कैंडिडेट को भी
देखेगा और यह देखेगा कौन मजबूत है तो मुझे
लगता है कि वो इंडिया एलायंस हो या बीएसपी
हो या और जगह कोई भी तो वहां भी वोट जा
सकता है इसलिए एक बाद का भी एक ब्रॉडर
एलायंस हो सकता है चुनाव के मैं भाषा आपसे
ये जानना चाहता हूं कि आपको लगता है इन
मामलों में राहुल गांधी को थोड़ा एक्टिव
होने की जरूरत है देखिए एक तो कांग्रेस
में सबसे बड़ी दिक्कत है चीजें सेंट्रलाइज
हैं आपने लोगों को नियुक्त किया हुआ है
अशोक गहलोत अविनाश पांडे मगर फिर जब ये
बातचीत के लिए उतरते हैं तो कहते नहीं
साहब प्रियंका जी करेंगी इनफैक्ट उत्तर
प्रदेश में भी जो घोषणा हुई है ब्रेक थ्रू
हुआ उसमें भी प्रियंका गांधी वाडरा को जो
है क्रेडिट दिया जा रहा है मैं यहां पूछ
रहा हूं राहुल गांधी ब्रेक ले रहे हैं मगर
वो विदेश यात्रा भी जा रहे हैं क्योंकि
उनको कहीं कोई भाषण देना है अरे कम से कम
अभी तो आप यहां रहिए बात कीजिए अपने
क्षेत्रीय दलों से आपको नहीं लगता है कि
राहुल को थोड़ा और एक्टिव होने की जरूरत
है इस मौके पर देखिए मेरा यह साफ मानना है
कि राहुल का एक्टिव होना और राहुल का जमीन
पर उतरना दोनों बहुत जरूरी है जो उन्होंने
यात्रा शुरू की वह एक हिस्टोरिक पहल कदमी
है क्योंकि कांग्रेस जिस तरह से निराश और
हताश थी अगर राहुल गांधी य दूसरी यात्रा
भी नहीं करते पहली यात्रा जो उन्होंने की
कन्याकुमारी से कश्मीर तक उससे कांग्रेस
है जिंदा कांग्रेसियों को लगा बाकी लोग को
लगा कि नहीं लगा और दूसरा ये मणिपुर वाली
यात्रा भी बहुत चैलेंजिंग यात्रा है अमेठी
और बाकी हम सब फॉलो कर रहे हैं आपकी बात
बिल्कुल सही है कि उनके पास इस तरह के
सलाहकार नहीं हैं या इस तरह के नेगोशिएटर
नहीं है क्योंकि पॉलिटिक्स में नेगोशिएट
करने वाले बहुत जरूरी हैं और आप देखिए जो
तस्वीर दिल्ली से आई है कि मल्लिकार्जुन
खड़गे खुद बैठे हैं आप बात कर रहे हैं
वहां दिल्ली में आप बात कर रहे हैं उत्तर
प्रदेश में तो आप डिसेंट्रलाइज करिए लेकिन
कम से कम एक व्यक्ति तो जिम्मेदार हो अब
बंगाल में कौन बात करेगा अध रंजन चौधरी तो
बात नहीं कर सकते
हैं य ये कहना है कि इसमें यह जरूरी है कि
आप एक टीम के तौर पर ऑपरेट करें लेकिन
सेंट्रलाइज होना आज की राजनीति की सबसे
बड़ी खामी और सबसे बड़ी मजबूती है हमारी
टकरा य पर बीजेपी में भी देखिए सेंट्रलाइज
है वहां भी फैसला एक ही व्यक्ति लेगा है
ना आम आदमी पार्टी में भी एक ही व्यक्ति
लेगा तो एक सेंट्रलाइज होने में एक जैसे
कहा खामी भी है और खूबी भी है ये उसके
बिना काम नहीं चलता इसर भाषा यह कह रही है
कि एक व्यक्ति फैसला ले मैंने वो जयराम
रमेश को सुना था उनसे जब पूछा गया न्याय
यात्रा के बारे में तो उन्होंने कहा यह
राजनीतिक यात्रा नहीं है अरे भाई तुम किस
दुनिया में रहते हो यार तुम राजनेता हो
तुम जब यात्रा कर रहे हो इट इज
पॉलिटिकल ययू आर नॉट एन एनजीओ आप एनजीओ हो
क्या मुझे ऐसा लगता है कांग्रेस के कुछ
नेता जो हैं उन्हें ऐसा मुगालते में है कि
भैया हम एनजीओ चला रहे हैं और कुछ लोगों
को लगता है कि वो लेखक है और लेखक म चला
रहे हैं लेख मतलब अजीब और गरीब किस्म के
लोग भरे हुए हैं और कुछ लोगों को लगता है
कि वो अब भी सरकार में है और उनका एक
दबदबा एक च अहंकार भी दिखाई देता है जब आप
एक मिनट जब आप अपने क्षेत्रीय दलों से बात
करते हैं भाषा तो वो अहंकार कांग्रेस में
दिखाई देता है त्यागी अब आप 2014 से पहले
वाली कांग्रेस नहीं है इन राज्यों में आप
जूनियर पार्टनर्स हैं मानिए इस बात को
मध्य प्रदेश में कैसा कमलनाथ ने कहा था जब
आपको पता है कि हम जा रहे हैं एक एला में
और मुझे लगता है कि देखिए इसी क्रम में
अगर यह नहीं सोच रहे होते तो यहां पे 17
वाली जो बात हुई है उत्तर प्रदेश में ये
एक बहुत अहम फैसला है कि आप 17 1617 पे
तैयार 16 पे भी लोग बता रहे हैं कि तैयार
थे एक सीट और अखिलेश ने दी इसी तरह का
फैसला अगर बाकी राज्यों के लिए वह करते
हैं जो कि इस समय वक्त की मजबूरी है और
मुझे लगता है जो खबरें हैं कि कांग्रेस एक
ब्लूप्रिंट के साथ 200 प्लस सीटों प कैसे
कैसे लड़ेगी वो उसने अपने लोगों के बीच और
अपने अलायंस के बीच में एक फ्लोट की 6 63
आपने ले ली समाजवादी ने और 17 ले ली लेकिन
कैंडिडेट का चयन जो पीडीए वो बार-बार कहते
हैं अगर उस हिसाब से नहीं हुआ अब पता चला
कि एक ही परिवार एक ही तरह के लोग ये बहुत
समीकरण ये बहुत काम करेगा मायने है इसके
कि आप पीडीए के कितने उम्मीदवार लेकर आते
हैं हम चलिए बहुत-बहुत शुक्रिया मुकुल और
भाषा आप दोनों का इंडिया की बात में बस
इतना ही इस कार्यक्रम को ज्यादा से ज्यादा
लोगों तक पहुंचाएं अभिसार शर्मा को दीजिए
इजाजत नमस्कार स्वतंत्र और आजाद
पत्रकारिता का समर्थन कीजिए सच में मेरा
साथी बनिए बहुत आसान है दोस्तों इस जॉइन
बटन को दबाइए और आपके सामने आएंगे ये तीन
विकल्प इनमें से एक चुनिए और सच के इस सफर
में मेरा साथी
बनिए

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