बीजेपी के खिलाफ जनता ने कर दी बगाबत/ PUBLIC OPINION ON ELECTION 2024 AND BJP

तुम्हारा जो 2013 का कानून है वो धूल चाट
रहा है यहां पे कुछ हो नहीं रहा है और तुम
अभी तो और हमारे राशन कार्ड तुम हमसे और
छिन रहे हो ये ऐसी स्थिति पैदा कर देंगे

कि देश में हम लोगों को अभी जो तिल तिल कर
मार रहे ये पूरा जान से मारने प तुले हुए
हैं हम सरकार की इन नीतियों से नीतियों के
शिकार हो चुके हैं अमीरों के लिए

पूंजीपतियों के लिए हाथ मिलाकर तो वाहवाही
पूरे देश में लूटी जा रही है आज जंतर मंतर

पर अमीर नहीं आया जंतर मंतर पर गरीब आया
जिसका घर टूटा रोटी का टुकड़ा जिसके हाथ
में नहीं है हम लोग इसको लेकर 16 माच को
भी यहां पर देशव्यापी ट्रेड यूनियन हड़ताल

करने के लिए सड़कों पर उतर रही
है तबके की बस्तियों के ऊपर हमले कर रहे
हैं बिना पुनर्वास के उनको बेदखल किया जा
रहा है बहाना बनाया जा रहा है कि यह तो

कोर्ट के आदेश हैं पर कोर्ट किस प्रकार के
नेगेटिव बयान नेगेटिव आदेश जारी कर रहा है
इसके कारण क्या है कि यकायक जिस कोर्ट ने
कई अरसे से इन तमाम मजदूर बस्तियों को
स्टे दे रखा था यकायक इस सरकार के आते ही

यह उल्टा आदेश देना क्यों शुरू कर दिया
कोर्ट को अगर लगता है कि इन तमाम लोगों की
यह जमीन नहीं है जहां पर वह रह रहे हैं तो
क्यों नहीं इनको मानवता के आधार पर भी शहर
के अंदर गरीब लोगों का मजदूरों का हिस्सा

मानते हुए उन लोगों को कहीं ना कहीं तो
आवास दिया जाए जमीन दी जाए ताकि वो लोग

अपनी पूर्ण गरिमा के साथ जिंदगी जी सके
जीवन जीने के अधिकार को भला कोई कैसे छीन
सकता है किसी भी कोर्ट ने इनको यह नहीं
कहा कि आप पुनर्वास मत दीजिए आखिर सरकार
पुनर्वास के मामले पर असंवेदनशील होती हुई

क्यों नजर आ रही है यह बेपरवाह और लापरवाह
सरकार जहां मजदूरों की घर को तोड़ने के
लिए अगर कोर्ट एक बार आदेश करता है यमुना
खादर बेला स्टेट जहां पर लोगों को कम से
कम 1010 1515 बार आकर डिमोलिश कर दिया ग

या
उनके मलबे को भी तोड़ा जा रहा है उनके
बर्तन को तोड़ा जा रहा है अरे वह जाएंगे
कहां यह जवाब इस देश की सरकार के पास और
देश की अदालत के पास नहीं है तो लगता है

कि यह पूरा का पूरा देश मानवता से सूख गया
है मानवता से परे हो गया है और इस प्रकार
के असंवेदनशील कठोर बेपरवाह लापरवाह
प्रकार आदेश जारी करके यहां की जनता को
सताया जा रहा है इस देश में सरकार का राज

 

करना जनता को आराम से रखना आनंद से रखना
प्रसन्नता से रखना उनके अधिकारों के साथ
आनंद पूर्ण जीवन जीने का अधिकार देना है
या उनको सताना है यह सवाल सरकार से मीडिया
के साथियों को पूछना चाहिए लेकिन सरकार का
तो यह था ना क्या मैं नारा भी था क्या ना
मैं पिछले चुनावों में भी ये नारा रहा कना
मैं जहां जुी वही मकान फिर परेशान क्यों

देखिए सरकार अपना वोट बटोरने के लिए कि
किस प्रकार से वोट लिया जाए आपको पता है
कि देश की जो जनसंख्या है उसमें गरीब लोग
कितने हैं गरीबों की संख्या कितनी ज्यादा

है किस प्रकार से गरीब लोगों को इस प्रकार
का लालच देकर लुभावने सुहावने और स्वर्णम
नारे लगाकर उनको जो है बहका जाए भटका जाए
उनका दुरुपयोग किया जाए उनके वोट का गलत
इस्तेमाल सरकार द्वारा किया जा रहा है और
इन्हीं लोगों के दम पर जो सरकार आई है आज

इनको अवेद बता रही है आज इनकी बस्तियों को
अवेद बता रही है और अब उनको जो है घर
तोड़ते हुए आप देख सकते इतनी बड़ी संख्या
में लोग यहां पर आए थे उन तमाम लोगों के

पास घर नहीं रहे वो बेगर हो गए तो बेगर के
लिए सरकार का क्या प्लान है वह शेयर करें
सरकार कहां बेगर को सरकार ने आश्रय दिया
कहां उनको पुनर्वास किया सरकार इसका जवाब
दे देश सुरक्षित हाथों में आप कैसी बात कर
रहे हैं परेशान है
जनता देश सुरक्षित हाथों में है यह सवाल
तो एक मजदूर से पूछा जाए किस देश सुरक्षित
हाथों में है या असुरक्षित हाथों में है

जब इस देश में किसी गरीब व्यक्ति का किसी
नाले के किनारे किसी गांव के बाहर किसी
शहर के किनारे पर घर बना हुआ है और वो घर
भी इतनी ऐसी ऐसी जगह पर बना हुआ है जहां

जानवर का रहना भी बहुत मुश्किल है वहां से
भी इंसान को मारकर उसको बुलडोजर उसके
छप्पर पर चढ़ाकर उसकी प्लास्टिक का अगर
तोड़कर अगर उसको बेदखल किया जा रहा है तो
यह सोचना चाहिए कि ये सुरक्षित है या

 

असुरक्षित है इसका जवाब तो आसानी से मिल
जाएगा क्याक समस्याएं हैं और आपकी धरना
प्रदर्शन में देखिए आज हम आए हैं कि इस
देश में जो दिहाड़ी मारने वाला एक मेहनतकश
असंगठित क्षेत्र का मजदूर कहे या संगठित
क्षेत्र का मजदूर कह कम से कम 000 दिहाड़ी
ठ घंटे की होना चाहिए रेप्ट कोस जजमेंट जो
कि इस देश की सबसे सर्वोच्च अदालत दे रही

है और जो कि न्यूनतम मजदूरी के फिक्सेशन
की बात करती है उसके उसको फिक्स करने की
बात करती है मिनिमम वेज को फिक्स करने की
निर्धारण करने की बात करती है आखिर उस
आधार पर क्यों नहीं न्यूनतम मजदूरी त तय
की जाए अब हमको 000 सम्मानजनक मजदूरी
चाहिए यह 00 400 नहीं चलेगी दूसरा जो मांग

आया है कि किस प्रकार से इस देश में जबरन
बेदखली सरेआम हो रही है इसका पुरजोर विरोध
करते हैं और यह फोर्स इविक्शन को रोकने की
मांग करते हैं तीसरी मांग हम कर रहे हैं
कि जिन जिन श्रमिकों के ई श्रम पोर्टल पर

रजिस्ट्रेशन हो गए हैं लगभग लगभग अगर हम
देख के जाएं तो जनसंख्या का एक बहुत बड़ा
तबका ई श्रम पोर्टल पर रजिस्टर हो चुका है
मेहनतकश इस वर्कफोर्स का एक बड़ा तबका ई
श्रम पोर्टल पर रजिस्टर हो चुका है
करोड़ों की तादाद में उनका संख्या है आप

उनको क्यों नहीं पेंशन देना शुरू कर रहे
हैं ई श्रम पोर्टल पर रजिस्टर्ड मजदूरों
को कम से कम
00 पेंशन देना शुरू करना चाहिए यह मांग हम
आज यहां पर हम मांग कर रहे हैं कि इस देश
में कोई भी कानून नहीं है जो हाउसिंग की
गारंटी देता है इसलिए देश की अदालतें भी

ऐसा बयान देती है कि इनका जो है बेदखली कर
दी जाए अगर यह कानून होता तो देश की अदालत
बाध्य होती कानून के तहत और इस प्रकार के
आदेश नहीं दे पाती हम मांग करते हैं

हाउसिंग की गारंटी का कानून बनाए ताकि
किसी भी व्यक्ति को बिना घर के ना रहा जाए
हम आज यहां पर आए हैं और यह मांग कर रहे

हैं किस प्रकार से देश में नरेगा है वैसे
शहरों के अंदर नरेगा की तर्ज पर रोजगार
गारंटी लेकर आए सरकार और यहां पर तो उल्टा
ही हो रहा है कि नरेगा को और पतला करो और
खत्म कर दो पर हम मांग कर रहे हैं कि
शहरों के अंदर रोजगार पैदा किया जाए हम

मांग कर रहे कि बेरोजगार किस प्रकार युवा
लोग उत्तर प्रदेश और बिहार की सड़कों पर
लड़ रहे हैं धरना प्रदर्शन कर रहे हैं
सरकार लाठियां उनके ऊपर बरपा रही है किस
प्रकार से आंदोलन हो रहे हैं उन आंदोलनों

को ध्यान में रखते हुए उनकी मांगों को
पूरा किया हम मांग करने के लिए आए हैं
यहां पे कि ये जो चार श्रम संहिता एं आई
है लेबर कोड आए इनको रद्द किया जाए यह
एंटी लेबर है यह मजदूर विरोधी हम हम लोगों

को संहिता एं नहीं चाहिए हम लोग इसको लेकर
16 मार्च को भी यहां पर देशव्यापी ट्रेड
यूनियंस हड़ताल करने के लिए सड़कों पर उतर
रही है वर्किंग पीपल चार्टर और मजदूर आवास

संघर्ष समिति हम ये समर्थन करेंगे 16
मार्च को क्यों क् हम तमाम यहां पर लोग आए
वो पीड़ित हैं हम सरकार की इन नीतियों से
नीतियों के शिकार हो चुके हैं और हम लोग

भी भारत बंद आहवान को लेकर आगे निकलेंगे
और इसका समर्थन करेंगे हम यहां पर मांग
लेकर आए हैं व जितनी यहां पर महिलाएं इस
देश में काम कर रही हैं और वह महिलाएं जो
अनपेड वर्कर हैं जिनको की काम करने की एवज

में श्रम श्रम की एवज में वेतन ही नहीं
मिलता पैसा ही नहीं मिलता उन तमाम अनपेड
वर्कर के बारे में सरकार सवाल करे सोचे और
सोशल प्रोटेक्शन का जो सवाल है चाहे वह
सामाजिक सुरक्षा हो चाहे व आवास का मुद्दा
हो तत्काल तमाम मजदूरों को असंगठित
क्षेत्र के मजदूरों को पहल करते हुए पहले

सरकार ये तमाम सुविधा मवैया कराए और हम
लोग मांग कर ें कि जिन लोगों के घर तोड़
दिए उन लोगों को एक दिन के हिसाब से एक
परिवार को 000 जो कंपनसेशन देना चाहिए ऐसे

कैसे बिना पुनर्वास के तोड़ दिए दिल्ली
शहर के अंदर जहां 675 बस्तियां हैं स्लम्स
को ड्यूस ने आईडेंटिफाई करके रखा है अभी
जिन बस्तियों को आइडेंटिफिकेशन

बाकी तो अरविंद केजरीवाल को गरने के लिए
केंद्र की सरकार रोज पुलिस और पता नहीं
क्या-क्या बोलते हैं उसको सीबीआई वगैरह
आईडी आईडी सब भेज रही है अब क्या हो गया
है क्यों नहीं ड्यूस की इन

तमाम बस्तियों को जिनको उन्होंने
आइडेंटिफिकेशन
का शिकार दिल्ली का गरीब से गरीब मजदूर हो
रहा है रिक्शा वाला डोमेस्टिक वर्कर घरेलू
कामगार रेक पिकर्स इन तमाम लोगों को

शिकार
बनाया जा रहा है इनकी बस्तियों को तोड़ा
जा रहा है इनका रोजगार छीना जा रहा है
जिसका आज हम लोग विरोध कर रहे हैं क्यों

नहीं जब दिल्ली की सरकार कोर्ट के अंदर
तुगलकाबाद के मामले में कह रही कि हम
पुनर्वास करेंगे तो जमीन क्यों नहीं दे
देते की केंद्र की सरकार तो पता तो लग जाए
कि दिल्ली की सरकार जो बड़ी-बड़ी डींगे
हाक रही है सच है या गलत है अब हम दिल्ली
की सरकार को पकड़े कैसे क्योंकि वो कहती

है कि जमीन केंद्र से लेके आओ घर हम बना
देंगे इन दोनों के मजले में गरीब को किस
प्रकार से रथ के पहिए के नीचे कुचला जा
रहा है कहा जा रहा है कि राम आएंगे गरी

बों
के राम अयोध्या में आए लोगों ने बहुत अपनी
वाहवाही लूट ली पर उनका लाइसेंस ज्यादा
दिन तक नहीं चला अरे असली राम तो हमारे
घरों में बैठा हुआ है जिनके मंदिर को तुम

लोगों ने बुलडोजर चलाकर तोड़ दिया आज हम
गरीब लोगों के लिए कहां पर राम और कहां
कृष्ण कहां अल्लाह है कोई कुछ नहीं गरीबों

के लिए कुछ भी नहीं है केवल अमीरों के लिए
पूजा की व्यवस्था उनके लिए हमारे खाने के
लिए रोटी के टुकड़े नहीं हम भला कहां से

पकवान लगाकर भोग लगा ले सवाल खड़ा हो रहा
है गरीब के लिए व्यवस्था सरकार क्या बना
रही है अमीरों के लिए पूंजीपतियों के लिए
हाथ मिलाकर तो वाहवाही पूरे देश में लूटी
जा रही है आज जंतर मंतर पर अमीर नहीं आया

जंतर मंतर पर गरीब आया जिसका घर टूटा रोटी
का टुकड़ा जिसके हाथ में नहीं है सुबह से
हम लोग भूखे बैठे हुए हैं इधर जांच करवा
ली जाए हमारी हमने पानी के अलावा अगर कुछ
खाया पिया हो तो अगर गरीबी लगातार बढ़ रही

है फिर गरीबी का आंकड़ा क्यों कम होता हुआ
नजर आ रहा है देखिए गरीबी जो कह रहे हैं
कि आंकड़ा बढ़ रहा है तो यही तो पॉलिटिक्स
और यह साजिश जो सरकार रच रही है हरियाणा
के अंदर आप समझ लो किस प्रकार से राशन
कार्ड कैंसिल हो रहे हैं उत्तर प्रदेश के

अंदर राशन कार्ड कैंसिल क्यों हो रहा है
रातों रात एक गरीब जुग्गी के अंदर रहने
वाला अंबालाल अंबानी कैसे बन गया दूसरे
दिन में उसके राशन कार्ड को कैंसिल कर

दिया गया यह कहते हुए कि वो अंबालाल उसकी
फैमिली का इनकम ज्यादा हो रहा है कि कैसे
ज्यादा हो रहा है उसके बेटे को भी ले लिया
उसकी बहू को भी ले लिया उसकी पत्नी को भी
ले लिया और उनको पूछा कितना कितना कमाते
हो उन्होंने बोला साहब कि हम लोग कोई 3000

कोई 4000 उन सब की इनकम को उन्होंने जोड़
लिया वह इनकम जोड़ने के बाद वह रहते तो
अलग-अलग है व अलग-अलग जुग में उनकी इनकम
को क्यों जोड़ा क्योंकि राशन कार्ड एक

होता है जब इनकम जुड़ती है तो राशन कार्ड
कट गया क्योंकि व एक लाख से ऊपर वाले
कैटेगरी में चला गया तो ये जो गरीबी का जो
आकड़ा आप कह रहे हैं कि यह बढ़ रहा है यह

सरासर साजिश है इसको समझने की कोशिश करनी
चाहिए और यह जो गणितीय इनकी कैलकुलेशन है
इसको तोड़ तोड़ के अगर देखोगे तो पता
लगेगा कि गरीबी जो है वो आंकड़ा बड़ा है
आंकड़ा आप सोच रहे गरीबी घटी आकड़ बढ़
नहीं रहा आंकड़ा घट रहा है सर गरीबों की

संख्या बढ़ रही है अब वो आंकड़ा आप जो भी
मान लो उसको गरीबों की संख्या बढ़ रही है
गरीबी बढ़ रही है और यह दिखा रहे हैं कि
गरीबी कम हो रही है तो ये आंकड़ा सरासर

गलत है 25 करोड़ बता रहे हैं लेकिन आज तक
गरीबी रेखा का निर्धारण ही नहीं कर पाए
किस आधार पर वह बता रहे हैं कि 25 करोड़
को हमने गरीबी रेखा से बाहर करें पैरामीटर

अलग बना हां ये जो कह रहे हैं ना एकदम सही
इन्होंने किस प्रकार से कैलकुलेशन की है
कि वोह कैसे कैसे गरीबी की निर्धारण को
करते यही देश की सरकार मोबाइल बांटती है
अरे इनके चोच बाजी तो देख लो एक हाथ पर

मोबाइल बांटेंगे दूसरे हाथ प लैपटॉप
बांटेंगे 80 करोड़ लोगों को तो राशन करें
कि हम दे रहे हैं 80 करोड़ लोग जो राशन पर
जिंदा है वो तो गरीब ही होते हैं गरीब
होते हैं उसके बाद 25 करोड़ और लोगों को

कहां से निकाला है हा वही कि जो 80 करोड़
कह रहे हैं कि राशन पे जिंदा है और वो 80
करोड़ तो गरीब है तभी ना आप राशन तो दे ही
रहे पर सवाल क्या है सवाल मैं ये कह रहा
हूं आपने उसको लैपटॉप दे दिया आपने कहीं

किसी को एक मोबाइल दे दिया और फिर उसके
घरी उसके घर पे आप सर्वे करने जा रहे हैं
आपके पास क्या है कि लैपटॉप है ले आजा
बेटा तू गरीबी रेखा से नीचे नहीं है अब तू
ऊपर आ गया है और ले ले तेरा लैपटॉप वापस
या खाना खाने के लिए हमारे भोजन की

व्यवस्था नहीं हो रही है तुम्हारा जो 2013
का कानून है वो धूल चाट रहा है यहां पे
कुछ हो नहीं रहा है और तुम अभी तो और
हमारे राशन कार्ड तुम हमसे और छीन रहे हो
ये ऐसी स्थिति पैदा कर देंगे कि देश में

हम लोगों को अभी जो तिल तिल करर मार रहे
ये पूरा जान से मारने प तुले हुए हैं हमको
सब लोगों को एकता करनी पड़ेगी और इनको ज
देना पड़ेगा अब चुनाव का माहौल आया है अब
यह जो देखो किस प्रकार से ऊंट जो है पर्वत

के नीचे आता है यह आएंगे गरीबों के पास
में गरीब भी इनको जवाब देंगे छोड़ेंगे
नहीं बहुत बहुत देश मजबूत हाथों में है आप
कैसी बात कर ये तो आप समझ सकते हैं कि
मजबूत है या किस प्रकार के हाथों में है
कमजोर हाथों में है जो अपने मेहनतकश मजदूर

की रक्षा नहीं कर पा रहा है वो कैसे मजबूत
हाथों में होगा वो अडानी और अंबानी के लिए

मजबूत हाथों में है एक गरीब इस समाज के
अंतिम से अंतिम व्यक्ति के लिए देखा जाए
तो यह कोई मजबूत हातो में नहीं है एकदम

निठल्ले लोगों के हाथों में पर राम राज्य
आ गया कह रहे कि अब राम राज्य तो कोई
मुद्दा ही नहीं बचा देश में देखिए राम
राज्य की अगर आप बात करेंगे तो समय कभी
वापस नहीं आता गुजरा हुआ कल कभी वापस नहीं
आएगा तो यह तो भोले वाले लोगों को ठगने
वाली बात है क्योंकि राम थे है हमारे

पूर्वज हैं किसी जमाने में थे अब चले गए
वास कैसे आएंगे क्या आपका गुजरा हुआ कल
वापस आ सकता है तो राम कैसे आ जाएंगे हां
राम जी का मंदिर बना है अच्छी बात है

विरोध नहीं है स्मारक बनना चाहिए लेकिन
भोले वाले लोगों को आडंबर में फसा देना
पकड़ के लाना राम को मोदी जी उंगली पकड़

के लाए राम को गब को रहे तो मोदी जी राम
को उंगली पकड़ के लाएंगे या राम मोदी जी

को लेके आए अब ये समझने वाली बात भगवान है
उसको कोई उंगली पकड़ के ला सकता है तो सवा
सर गलत बच्चा बच्चा बोलेगा कि ये गलत है
बच्चा 2030 तक 5 ट्रिलियन पार कर जाएगी
अर्थव्यवस्था अरे क्या ट्रिलियन पार कर
यहां तो तीन ट्रिलियन अपना जेब में न रुप

नहीं है ट्रिलियन पार कर जाएगी 80 करोड़
लोगों को आप 5 किलो राशन दे रहे हो
ट्रिलियन की बात कर रहे हो कहां गया आपका
कहां गया यह छोटे-छोटे जो हम लोग बच्चे
लेकर घर में झुग में पड़े हुए हैं आप

ट्रिलियन की बात कर रहे हो नेशनल दस्तक की
आपसे गुजारिश है कि अगर इसको बचाना चाहते
हैं तो नेशनल दस्तक को सब्सक्राइब कर ने

के लिए रेड कलर के सब्सक्राइब बटन को
दबाएं फिर बेल आइकन की घंटी दबाएं नेशनल
दस्तक को बचाने के लिए बहुत जरूरी है कि
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