महाशिवरात्रि पर इस मुहूर्त में करें पूजा, शिव जी कर देंगे धन की वर्षा

महाशिवरात्रि का पावन पर्व हर साल फाल्गुन
महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को
मनाई जाती है इस तिथि पर मां पार्वती और

भगवान शिव शादी के बंधन में बंधे थे इसलिए
इस दिन का हिंदू धर्म में बहुत महत्व होता
है इस दिन विधि विधान से मां पार्वती और
शिव जी की पूजा की जाती है और साथ में

व्रत भी रखा जाता है ऐसा करने से सुख और
सौभाग्य का वरदान मिलता है लेकिन भगवान की
भरपूर कृपा तभी बरसती है जब सही महूरत में
उनकी पूजा अर्चना की जाए तो क्या है इस
बार महाशिवरात्रि की पूजा का सबसे सटीक

मुहूर्त चलिए जानते हैं अगर आपने मुहूर्त
समझ लिया तो आप पूजा को भी समझ लेंगे
क्योंकि मैं बता दूं शिवरात्रि में चार

पहर की पूजा होती है आइए मैं आपको मुहूर्त
बता दूं स्वर्ण नक्षत्र का स्वामी जो है
वो कौन है वो शनि है और सुबह 1051 मिनट से
स्वर्ण नक्षत्र लग जाएगा हम बता दें कि

आपको सबसे पहले तो ब्रह्म मूरत में पूजा
करनी चाहिए ब्रह्म मूरत से बेहतर कोई पूजा
नहीं होती अगर आप सुबह 4:00 बजे उठ के
पूजा करें लेकिन प्रथम पहर की पूजा शुरू
हो रही है 6:2 से रात्रि 928 तक जिसे

प्रदोष काल कहते हैं दूसरा पहर की पूजा
शुरू हो रही है 9:2 से लेके 1231 तक तीसरे
पहर की पूजा शुरू हो रही है रात्रि 12:3
से सुबह 334 तक और चौथे पहर की पूजा शुरू
हो रही है 334 से लेके

637 तक और जिसे हम कहते हैं निशा काल निशा
काल जो सबसे ज्यादा महत्त्वपूर्ण है
शिवरात्रि पर वो है रात्रि 12:7 से लेकर

12:5 तक अब अगर इन्हीं समय पर आप पूजा
करें चारों पहर की पूजा ना भी कर सकें तो
12:7 से लेकर 1255 तक जो निशा काल है वह
सबसे महत्त्वपूर्ण काल है कहते हैं इसी

टाइम पर महादेव का विवाह हुआ था और इसी
टाइम पर महादेव ने जो है चंद्रमा को
दोबारा जीवन दिया था क्योंकि चंद्रमा को
उनके ससुर ने जो है श्राप दे दिया था कि

तुम्हारा क्षीण हो जाए तुम खत्म हो जाओ तो
महादेव ने अपनी शक्तियों से उन्हें
उत्पन्न करक अपने मस्तक पर जगा दी थी तो
अपनी मां के साथ अपने संबंधों को अच्छा

करने के लिए भी इस टाइम पर आप पूजा कर
सकते हैं आप पंचामृत से भगवान की पूजा
करें आप भगवान की गन्ने के रस और शहद से
पूजा करें आप भगवान के ऊपर बेलपत्र अर्पण

जरूर करें आपकी मनोकामना कुछ भी हो विवाह
नहीं हो रहा तो पूजा कीजिए विवाह हो गया
और विवाह में आ रही है परेशानियां तो पूजा
कीजिए और अगर आपको धन की परेशानी है तो

महादेव तो बड़े ही भोले हैं वो भोले किसी
के भी साथ चल देते हैं और आपकी हर
मनोकामना को पूर्ण करते हैं तो ऐसे में
प्रभु की पूजा पाठ बहुत आराधना अर्चना

कीजिए व्रत रखिए और कोशिश कीजिए कि व्रत
का उद्यापन अगले दिन सुब 637 के बाद यानी
9 मार्च की सुबह करें ब्राह्मण को वस्त्र
और भोजन देने के

बाद पौराणिक कथाओं के अनुसार ऐसी मान्यता
है कि भगवान शिव ने जब समुद्र मंथन के
दौरान विष पान किया था तो वह उस विष की
गर्मी से जलने लगे थे उस समय उनकी गर्मी

को शांत करने के लिए देवताओं ने जल दूध और
रंग बिरंगे फूलों सब्जियों का रस उन पर
चढ़ाया था ताकि उनके तपते शरीर को शांति

मिल सके और उनके शरीर की जलन ठीक हो सके
तभी से भगवान शिव पर पर जल चढ़ाने की
परंपरा शुरू हुई थी ऐसी मान्यता है कि
माता पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए
कठोर तपस्या की थी महाशिवरात्रि के दिन ही
पार्वती की तपस्या सफल हुई थी उनका विवाह
भगवान शिव के साथ संपन्न हुआ था इसलिए
महाशिवरात्रि का व्रत महिलाएं अखंड

सौभाग्य की प्राप्ति के लिए भी रखती
है धर्म के जानकारों के मुताबिक साल में
पड़ने वाली 12 शिवरात्रि हों में से यह
सबसे महत्त्वपूर्ण शिवरात्रि है इसलिए इस
दिन आपने अगर महादेव को कर लिया तो फिर

उनकी कृपा बरसते देर नहीं लगेगी कैसी लगी
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