माँ काली जब भोग स्वीकार करती है तो देती है ये संकेत जाने

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मित्रों आज का जो विषय है वह बहुत ही
महत्वपूर्ण है जैसा कि आप सब जानते हैं

मां काली की भक्तों मां दुर्गा की
भक्तिपूर्ण और भी बहुत सारे देवी देवताओं
मैं मानती हूं तो मैं उनको कहीं ना कहीं
प्रसाद आदि देती रहती हूं वह गाड़ी देती
रहती हूं तो आप सभी भी सामान्य रूप से ही
करते होंगे वह जो है आप अर्पण करते रहते

हुए अपने इष्टदेव को तो जो आप वह अर्पण
करते हैं ऐसे क्या संकेत होते हैं जिससे
आप स्वयं जान सकते हैं कि जो आपका भोग है
वह आपके देवता ने स्वीकार किया है या नहीं
किया है या अगर आपने मां काली को सौंप

दिया है तो क्या वह भोग स्वीकार कर रहे
हैं या नहीं तो कुछ ऐसा संकेत होते हैं
जिनके द्वारा प्रेम पहचान सकते हैं कि
माने वह भोग स्वीकार किया है कि
हैं तो चलिए आइए बात करते हैं उन संकेतों

के बारे में जैसा कि आप जानते हैं भोग
देने के कुछ नियम होते हैं वह कई प्रकार
से दिया जाता है एक वक्त तो ऐसा होता है
कि जैसे कि आप किसी मंदिर आदि स्थान पर
जाते हैं और आप जाकर के भोग प्रसाद लेकर
जाते हैं अपने हिस्से के नाम का यह मां
काली के नाम का और वहां आप पंडित जिसे

कहते हैं कि हमें भोग लगाना है तो वह भोग
आप कि जो आप लिखे गए हैं वह मां भगवती को
अर्पण कर देते हैं और वह भोगों अपने पास
रख लेते हैं यह उसमें से थोड़ा-बहुत आपको
दे देते हैं एक भक्त तो यह बताइए तरीका
होता है

दूसरा वह इस प्रकार लगाया जाता है कि जैसे
कि आप अपने घर में मां की पूजा करते हैं
मां काली की पूजा करते हैं और आप उनको
किसी भी प्रकार के भोजन का भोग लगाते हैं
कुछ व्यक्ति मां की सेवा उठाते हैं जैसे

आप ठाकुरजी की सेवा उठाई जाती है इसी
प्रकार से लोग मांस खाने की सेवा करते हैं
उनको नित्य भोजन का भी भोग लगाते हैं और
मां को भोग अर्पण करते हैं एक तरीका यह हो
गया और एक तरीका होता है अंधेरी में भोग
देने का जो व्यक्ति अंधेरी ओम देते हैं
मैं मां को अंधेरे में रख देती हूं तो मां
को अंधेरी में देने का तरीका अलग होता है

मां को अंधेरी में अलग तरीके से भून दिया
जाता है वह मैं आपको वीडियो में बता दूंगी
आने वाली में
तो इन तीन प्रकार से मां को भूख दिया जाता
है मां काली को तो मां काली जब भोग
स्वीकार करती हैं तो कुछ ना कुछ संकेत

देती है लेकिन जो भोग आप मां काली को दे
रही हैं सबसे पहले आपको यह ध्यान रखना
चाहिए जो भोग आप मां को देने जा रहे हैं
वह पूर्णतया शुद्ध होना चाहिए अगर फलों का
मुद्दे रहे हैं तो फल आपको अच्छी प्रकार
से धो लेने चाहिए जो मां के बर्तन है वह
शुद्ध होने चाहिए अगर आप मां काली को भोग
देते हैं तो मां काली के लिए आप यह कोशिश
करें कि उनके दर्शनों कि आप अलग व्यवस्था

करें क्योंकि मां का स्वभाव बहुत अलग है
उनको शुद्धता बहुत पसंद होती है और मां को
अ जो चीज अपनी स्वयं की होती है मां उनका
बहुत ध्यान करती है अगर आप मां के निमित्त
कोई चीज करें कि देखिए कि आप उनका कोई

बर्तन रख दीजिए और उनका कोई वस्त्र रख
दीजिए या कुछ भी आप मां के लिए रख कर
दीजिए और उसके बाद अगर आप उसको प्रयोग में
लाते हैं तो आप मां को जो संकेत है वह मैं
आपको श्रम देंगी कि आपने मेरा बर्तन क्यों
उठाया मेरा वस्त्र क्यों उठाया मेरा
सम्मान क्यों उठाया क्योंकि यह मेरा स्वयं

का अनुभव है इसलिए मांस से संबंधित जो भी
सामग्री और प्रिया समान होता है मैं उसको
अन्यथा बिल्कुल भी प्रयोग नहीं करती केवल
मां के कार्यों में ही प्रयोग करती हूं

इसलिए मैंने मां का जो बर्तन है वह
बिल्कुल अलग रखा हुआ है वैसे भी में मां
को अंधेरी में ही भोग देती हूं वैसे वह
में बिल्कुल नहीं देती क्योंकि जो अंधेरी
में भोग दिया जाता है वह डायरेक्ट मां को
प्राप्त होता है तो इसलिए मैं अंग्रेजी
में ही रोक देती हूं लेकिन मां का जो
बर्तन है वह बिल्कुल अलग है मैंने ए
सेपरेट रखा हुआ है इसलिए अगर आप भी मां को
भूख देना चाहते हैं तो मां के बर्तन कि आप
अलग व्यवस्था करें अंग्रेजी में देना

चाहते हैं तो अंग्रेज़ी के लिए अलग
व्यवस्था करें और अगर आप सामान्य रूप देना
चाहते हैं तो उसके लिए अलग बर्तनों की
व्यवस्था करें-सि
के साथी जवाब लगाते हैं तो जो देवता होते
हैं हमारे वह बिना पर देकर भोग ग्रहण नहीं

करते या नहीं देवता किसी के सामने भोग
ग्रहण नहीं करते वह खाना नहीं खाते तो
आपको यह प्रथम करना चाहिए कि जब आप भोग
रखते हैं तो आपको पता लगा देना चाहिए पांच
मिनट के लिए लगाएं च 2 मिनट के लिए लगाएं
लेकिन वह रखने के बाद आपको पर्दा अवश्य
लगाना चाहिए आपने मंदिरों में भी देखा

होगा कि मंदिरों में भी जब भोजन रखा जाता
है तो पर लगाया जाता है उसमें समय सीमा
होती है कहीं 5 मिनट का लगता है कहीं 10
मिनट का कहीं 15 मिनट पर कहीं आधे घंटे का

एक यह पर्दा आपको अवश्य लगाना चाहिए जहां
पर मां भगवती विराजमान है और जहां पर आप
महाभोग दे रहे हैं तो यह पता लगाना आवश्यक
होता है और अब बात करते हैं कि क्या ऐसे
संकेत मां भगवती देती है जिसके द्वारा पता
लगा सकते हैं कि मां ने भोग स्वीकार किया
है या नहीं किया है लेकिन मित्रों अगर आप
मां का मां काली को नारियल का भोग देते

हैं क्योंकि अब मैं मां काली की ही बात
करूंगी क्योंकि मैं अपनी की सेविका हूं तो
उसी के बारे में बात करती कि अगर आप मां
काली को नारियल का भोग देते हैं और नारियल
भी जो आर्म होल में देते हैं वह पानी वाला

ही नारियल होना चाहिए कभी भी सूखा नारियल
का भोग नहीं दिया जाता है पानी भरे हुए
नारियल का आपको मां को भोगना चाहिए
अगर आप भोग देते हैं और वह देने के बाद आप
देखते हैं जैसा कि आपको नवरात्रि में रख
देते हैं भोग कल जब स्थापना करते हैं
कलेक्ट बैठाते हैं तो नवरात्रि पर नारियल
रखा जाता है अगर उस नारियल का पानी सूख

जाता है सोता ही सूख जाता है यानि जब आपने
रखा था उसमें पानी था लेकिन जब आपने उसको
उतारा क्लच पिसिस तो पानी सुख चुका था या
फिर आपका नारियल चटक चुका था जैसे अटक
जाता है तरह इसकी आ जाती है बीच में अगर

वह चट्टान की जाता है तो इसका अर्थ यह
होता है कि मां भगवती ने आपका भोग स्वीकार
करेंगे है
के
साथ ही
कि अगर आप मां को शराब का मौका देते हैं
दूध का भोग देते हैं तो उसके भी अलग जो
होते हैं साइन होते हैं यह संकेत होते हैं
जिसके द्वारा आप को मां भगवती कि मैंने
भोग स्वीकार कर लिया है अगर आप दूर देते
हैं यह कोई तरल पदार्थ ले

रखे हैं तो
घृत थोड़ा आपको जितना बर्तन में जाते हैं

उसमें थोड़ा कम दिखाई देता है
मेघनाद कि वह कम हो जाता है
वह कम हो जाता है इसको
स्वीकार करू कभी-कभी कुछ तो ऐसे भी हैं
जिनका बिल्कुल
अगर आप को चढ़ाते हैं
ऋतु ऋतु फल का भोग लगाते हैं तो उन्हें का
रूप बदल जाता है जैसे कि अगर आप चढ़ाते तो
आपको थोड़ा हुआ दिखाई दे है और अगर आप ऋतु
फल लगाते हैं तो ऋतु फल में भी आपको
धारियां दिखाई देंगे निशान पड़े हुए दिखाई
देंगे यह सामान ऊपर जो आप वह के लिए जो भी
वस्तु रखते हैं उस पर निशान पड़ जाते हैं
अगर निशान पड़ जाती है तो इसका अर्थ यह है
कि मां भगवती ने आपका भोग स्वीकार कर लिया
है
कि अगर आप भोग रखते हैं जैसे कि आपको पूरी
हलवे का भोग रखते हैं यह सब्जी का भोग
रखते हैं तो उस पर भी क्या होता है जब आप
रख देते हैं कुछ समय बाद जब उठाते हैं तो
पूरी हों पर भी सिलवटें पड़ जाती हैं या
परांठे रखे हैं तो प्राणों पर भी सिलवटें
पड़ जाती हैं तो यह जो संकेत होते हैं यह
संकेत आपको बताते हैं कि मां भगवती
महाकाली का भोग स्वीकार कर लिया कि आपको
लगाते वक्त ध्यान रखना चाहिए और जो लोग
नित्य प्रति लगाते हैं जैसे कि आप
ग्रहण कर सकते हैं आप ग्रहण नहीं कर सकते
तांबूल पर लगा ग्रहण कर सके जो इस तरह की
वस्तुएं होती हैं वह ग्रहण नहीं की जाती
है इसलिए इन वस्तुओं को ग्रहण नहीं करने
चाहिए अगर आप घर में
प्रवाहित कर सकते हैं साथ ही अगर आप भोजन
का भोग लगाते
लगाते हैं जो नित्य प्रति मां की आंख में
उठा कर रखते हैं यानी साधे रहते हैं जैसे
लड्डू गोपाल जी की सेवा होती है उसी
प्रकार से मां को रोज भोग आदि अर्पण करते
हैं तो उनको वह श्याम हमें चाहिए स्वीट
अस्वीकार करना चाहिए और वह संभोग को अगर
आपके परिवार के सदस्य जो है शुद्ध सात्विक
है तो उनको भी
कि वह घुम देना चाहिए लेकिन मां काली के
ऊपर बात होती आपके घर में आपने मां काली
को किस प्रकार से चला रखा है शुद्ध रूप
में रखते हैं या तामसिक रूप में रखते हैं
तो वह बात अलग है लेकिन अगर आप वह जो भोग
मां काली को लगाते हैं तो वह भोग आपको
अपने घर के खाने में लगा देना चाहिए जिससे
कि आपका पूरा भोजन भोग ही बन जाता है
प्रकार से और सभी को उसका हक प्राप्त होता
है और जो लोग इस प्रकार का भोजन करते हैं
उनको मां काली की कृपा स्वत ही प्राप्त
होती है क्योंकि प्रशाद जो होता है वह
केवल प्रसाद ही नहीं होता वह दैव कृपा
होती है जो आपको दिया जाता है और उसी रूप
में देवता आपके ऊपर कृपा करते हैं तो
मित्रों मैं आशा करती हूं मेरे द्वारा दी
गई जानकारी आपको समझ में आई होगी अब अपने
सब्सक्राइब और का प्रश्न लिए हूं
सब्सक्राइब और है मेज़
यह मेरी का पुल आर्मी इन्होंने वह सब कुछ
है व्रत में पूजा कैसी हो
एक व्यक्ति पूजा कैसे माता सुबह करें देर
रात में कुछ नहीं पता कि बच्चे व्रत में
जो पूजा का विधान होता है वह अलग अलग
प्रकार से होता है यानी जैसा भी आप व्रत
करते हैं किसी व्रत में पूजा का विधान
सुबह होता है किसी व्रत में शाम होता है
लेकिन फिर भी अगर आपको ज्ञान नहीं है
अज्ञानता है तो इसके लिए सबसे अच्छा तरीका
यही होता है अगर आप किसी भी विधि विधान को
नहीं जानते हैं तो आपको पूजा शॉप ही करनी
चाहिए क्योंकि सुबह की पूजा होती है
सर्वोत्तम मानी जाती है तो आप उस समय
शुद्ध होते हैं निराहार होते हैं यानी आप
किसी प्रकार का अन्न भोजन नहीं किए होते
हैं निराहार होते हैं और इस्लाम के बाद
पूर्णतया शुद्ध भी हो जाते हैं तो जो सुबह
की पूजा होती है उसका प्रभाव बहुत ही अलग
होता है तो अगर आपको ज्ञान नहीं है तो
आपको पूजा सुबह करनी चाहिए
अगला प्रश्न है गोरखनाथ जी का गोरखनाथ
यादव जी का उन्होंने मुझसे पूछा है सफेद
वस्त्र पहन सकते हैं देखिए जो व्यक्ति भगत
है जो कि लगाते हैं यदि लगाते हैं
सवारियां जिनको आती है वह सफेद व्यवस्थित
पहन सकते हैं जैसे मां काली की सवारी आती
है यह मुर्गा की सवारी शांति देवी के बारे
में बात करूंगी तो वह लोग सफेद वस्त्र पहन
सकते हैं लेकिन उसके साथ में उनको लाल
कपड़ा कुछ साथ में रखना चाहिए अगर
स्त्रियां हैं तो यह चुनरी ले सकते हैं
दुपट्टा ले सकती हैं और दुपट्टा ले सकती
है लाल दुपट्टा ले सकते हैं कोई भी ले
सकती है लेकिन पूर्ण सफेद वस्त्र धारण
करें जो पुरुष तो ले सकते हैं या सफेद
कुर्ता वह सफेद कुर्ता पजामा कुर्ता इस
तरह से मतलब आप कह सकते लेकिन अगर आप मां
भगवती के पूर्ण सफेद बिल्कुल ना
मित्रों मैं आशा करती हूं मेरे द्वारा दी
गई जानकारी आपको समझ में मां भगवती से यही
प्रार्थना करता हूं कि
आपकी सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करें फिर
मिलूंगी अगली वीडियो में तब तक के लिए जय
महाकाल जय महाकाल की
है

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