मां दुर्गा 🕉️ कोई और है जो तुम्हें बर्बाद करने वाला है

मेरे बच्चे वह जो तुम्हारा हृदय किसी को

दे सकता है वह तुम्हारे हाथ भी नहीं दे

सकता मौन होकर भी जो तुम्हारे व्यवहार से

कहा जा सकता है वह संभावित तुम्हारे शब्द

भी ना का पे जब तुम अपने आसपास के लोगों

की प्रसन्नता में अपनी प्रसन्नता खोज लेते

हो तो दुनिया की कोई शक्ति कभी भी दुखी

नहीं कर शक्ति है कोई भी असफलता परेशान

नहीं कर शक्ति जी प्रकार से हंस दूध में

मिले पानी को छोड़कर

सिर्फ दूध को पी लेट है इस प्रकार से

तुम्हें भी संसार से केवल अच्छे विचार

लेने हैं और बुरे विचारों को छोड़कर आगे

बाढ़ जाना है अच्छे विचारों को आत्मसात

करते हुए

इतने व्यस्त रहो की तुम्हें जीवन में

द्वेष ईर्ष्या डर दुख और पछतावे के लिए

समय ही ना मिले

ऐसा इसलिए क्योंकि जो अधिकतर समय खाली

राहत है इस को सबसे अधिक खालीपन और दुख का

आभास होता है दुख यदि है भी तो भी उसका

आभास तो कम कर सकते हो दुख का आभास कम

होगा तभी तो तुम्हारी ऊर्जा सही दिशा में

ग पाएगी मेरे बच्चे तुम्हारा मां जितना

साफ होगा उतनी ही आसानी से यह संसार की

मझधार पर हो जाएगी मां जितना निर्मल होगा

कर्म भी उतने ही बलवान होंगे वैसे भी इस

संसार के पर आकलन तुम्हारे कर्मों का ही

होगा तुम्हारी संपत्ति का नहीं जब

तुम्हारा विवेक तुम्हारी आदतों पर भारी

पढ़ने लगे तब यह समझ जाना की तुम सही

रास्ते पर हो और तुम्हारी भक्ति तुम्हारी

साधना का मिलन तुम्हें प्रारंभ हो गया

अपने जीवन में आगे बढ़ो और खूब तेजी से

बढ़ो लेकिन संभल कर रहना क्योंकि बहुत से

लोग तुम्हारे गिरने की प्रतीक्षा में भी

बैठे हुए हैं जैसे ही तुम डगमगाए तो वह

अपना सही रूप लेकर तुम्हारे सामने ए

जाएंगे इसके लिए संतुलन बनाए रहना अपने हर

कम पर पूरा ध्यान रखना किसी को खुश करना

हो तो सबसे आसन है उसकी प्रशंसा कर दो

इस संसार में किसी को भी प्रश्न करना है

तो उसकी प्रशंसा कर दो परंतु प्रशंसा करने

के लिए झूठ भी बोलना पड़ता है कोई यदि सच

बोलेगा तो प्रशंसा ही नहीं निंदा भी करेगा

जो निंदा करेगा वही तुम्हें सही मार्ग भी

दिखाएगा जी पर बढ़कर ही तुम एक बेहतर

व्यक्तियों के रूप में उभर पाओगे बड़ा समय

भी लोगों के कई रूप दिखा देता है वह लोग

जो जीजी कहते नहीं थकते थे वह भी तू तो

खाने ग जाते हैं बड़ा समय हर व्यक्ति को

कभी ना कभी अपने जीवन में देखने को मिलता

ही है यही तुम्हें सही लोगों और

परिस्थितियों से परिचित करवाता है यही

तुम्हें तैयार करता है नए मार्ग और लक्ष्य

के लिए बेहतर से बेहतरीन बने के लिए मेरे

बच्चे अपने जीवन में तुम जी भी व्यक्ति से

प्रेम करते हो उससे कुछ प्राप्त करने की

अपेक्षा मत रखो प्रेम तो प्रधान करना

सीखना है प्राप्त करना तो स्वार्थी

व्यक्ति की निशानी है प्रेम में स्वार्थ

का कोई स्थान नहीं है तो मैं भी अपेक्षा

नहीं रखती चाहिए इससे दुख भी कम होता है

और विश्वास भी प्रगंध राहत है और जहां

विश्वास और भरोसा राहत है वहां प्रेम अपने

आप बढ़ता चला जाता है मेरा आशीर्वाद सदैव

तुम्हारे साथ है तुम्हारी मेरी प्रति

श्रद्धा ही तुम्हारी शक्ति है जो तुम्हें

कठिन परिस्थितियों से लड़ने की शक्ति देती

है

तुम्हारी श्रद्धा ही तुम्हें सत्कर्मों की

और मोड रही है यही सत्कर्म तुम्हारे

प्रबंध को भी बदलने वाले हैं

है इससे तुम्हें वह भी प्राप्त होगा जिसकी

अभी तक तुम्हें आशा भी नहीं थी भले ही वह

रिश्तो से संबंधित हो अथवा संपत्ति

स्वास्थ्य आदि से संबंधित सब अपने आप होता

चला जाएगा एक भक्ति हर सांसारिक कार्य में

शारीरिक रूप से लिपट होते हुए भी अपने

आध्यात्मिक स्वरूप में एक दृष्टा की भांति

समस्त सांसारिक गतिविधियों को देखा राहत

है तुम्हें भी इसी तरह सब अपने आप होता

हुआ प्रदर्शित होने लगेगा मेरे बच्चे इस

संसार में तुम जी अवस्था से गुजरते हो

उसके लिए कोई अन्य नहीं हम स्वयं ही

जिम्मेदार होते हैं ना तो तुम्हें कोई

क्रोध दिल सकता है और ना ही तुम्हें कोई

खुश कर सकता है यह सभी भाव तुम्हारे

लेकिन उनका अंत भी हो जाता है लेकिन इन

दोनों ही परिस्थितियों में तुम भावनाओं के

वशीभूत मत हो जाना इससे बचाना है तो मेरा

स्मरण करते रहना मैं यह नहीं कहता की कुछ

भी अनुभूत करना ही बैंड कर दो परंतु

भावनाओं के वाश में मत हो जो उन्हें अपने

वाश में रखो तभी तुम प्रत्येक स्थिति में

अपने लक्ष्य पर पूर्ण ध्यान केंद्र रख

पाओगे मेरे बच्चे अपने जीवन में सदैव ऐसे

लोगों को स्थान दो जो तुम्हारी कैमियो को

देखकर भी तुम्हारा साथ ना छोड़ें तुम्हारी

प्रतिभा देखकर तो समस्त संसार ही तुम्हारा

साथ दे देगा जो तुम्हारी कैमियो को जान

उन्हें समझे उन्हें स्वीकार है और फिर

उन्हें सुधारने में तुम्हारा सहायक बने

वही व्यक्ति तुम्हारे अच्छे समय में

तुम्हारे साथ की योग्य है

ऐसे ही लोग तुम्हारे अपने कहे जान के

योग्य हैं जो तुम्हारा अपना होगा वह मंत्र

तुम्हें खुश करने वाली बातें नहीं रहेगा

वह तुम्हारी आलोचना भी करेगा

निर्णय तुम्हारा है मंत्र खुश होना है तो

प्रशंसा सुनते रहो बेहतर और उत्तम बन्ना

है तो निंदा सनी पड़ेगी अपनी कमियां और

गलतियां बताने वालों की बात सनी पड़ेगी इन

गलतियां को सुधारना पड़ेगा तभी तुम जीवन

में कुछ अच्छा कर पाओगे तभी तुम सही तरीके

से जीवन में आगे बाढ़ पाओगे समस्याएं सभी

के जीवन में आते हैं हम सब अपने अपने

तरीके से इससे लड़ते भी हैं परंतु कई बार

तुम समस्या से हर हुआ और टूटा हुआ महसूस

करने लगता हो ऐसे में होता यह है की तुम

एक समस्या के बड़े में मां ही मां सोच सोच

कर उसे इतना अधिक बड़ा बना देते हो जितनी

बड़ी वह समस्या अल में होते भी नहीं है

जैसे किसी हाथी को उसके सामने खड़ा जीव

अपने कद का दो गुना दिखाई पड़ता है इस

प्रकार से तुम्हें भी वह समस्या डॉगी कठिन

और बड़ी प्रतीत होने लगती है

ऐसा करना छोड़ दो जितनी सहजता से सफलता को

स्वीकारते हो उतनी ही सहजता से समस्या को

भी स्वीकार करो और उसका समाधान करो मेरे

बच्चे सांसारिक संबंधों को निभाना आसन

नहीं है इसके लिए कई बार सहमत ना होते हुए

भी सामने वाले की बात को समझना का प्रयास

करना पड़ता है सामने वाले से कोई भूल हो

जाए तो उसे क्षमा भी करना पड़ता है किसी

को क्षमा करना हमें बड़ा ही बनाता है इससे

हमारे और सामने वाले के मां को शांति भी

मिलती है ऐसी परिस्थितियों को समझना होता

है हर धार्मिकता छोड़ने पड़ती है

मूर्खता की और अग्रसर करती है यही मूर्खता

गहरी से गहरी संबंधों के टूटने का करण भी

बंटी है इस संसार में किसी भी प्रकार का

परिवर्तन कभी पीड़ा दायक नहीं होता है उसे

परिवर्तन का विरोध करना हमें पीड़ा देता

है पीड़ा और क्रोध के समय में जब तुम्हें

कुछ भी ना सूज रहा हो की क्या करना चाहिए

या क्या करना ठीक रहेगा उसे समय कुछ ना

करना ही सबसे उत्तम होगा क्योंकि तुम उसे

समय जो कुछ भी करोगे वह गलत ही होगा मेरे

बच्चे जब तुम सृष्टि की व्यवस्था और अपनी

प्रकृति के विपरीत जान का प्रयास करते हो

तभी तुम्हें अधिक कष्ट और समस्याओं का

सामना करना पड़ता है जो हुआ है जो हो रहा

है जो होने वाला है इन सब का एक करण होता

है कोई उद्देश्य होता है जिससे तुम अभिज्ञ

हो इसका उत्तर भी समय स्वयं ही तुम्हें दे

देगा बस जो भी अच्छा या बड़ा इस संसार से

मिल रहा है उसे स्वीकार करते चलो जीवन को

मोर दो की भांति नहीं जीवंतता के साथ जियो

कष्ट और दुख इस प्रकार से अटल सत्य है जी

प्रकार से सुख दोनों एक दूसरे के विपरीत

होने के साथ ही एक दूसरे के पूरक भी है

इसे भयभीत मत हो प्राकृतिक रूप में इन्हें

स्वीकार करो मेरे अगले संदेश की प्रतीक्षा

करना मेरे बच्चे जल्द ही मिलने आऊंगा मैं

फिर तुमसे

ओम नमः शिवाय

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