मां दुर्गे का शुभ संदेश

मेरे बच्चे तुम्हारे पड़ाव का अंत आज
निश्चित है जो कुछ भी तुमने देखा है जो
कुछ भी तुमने सुना है और जो कुछ भी तुमने
शाह है उन सभी का अंत आज निश्चित है आज
तुम्हारे अंदर की ज्ञान को तुम्हें बाहर

लाना होगा इसलिए अपने सुख और आनंद की
प्रताप के लिए इस संदेश को अंत तक सुना
यदि तुम अंत तक सनोज तो तुम्हें आज एक ऐसी
चीज सीखने को मिलेगी जो आज तक तो मैं कभी
नहीं मिली आज तो मैं बहुत बड़ी खुशखबरी
मिलने वाली है क्योंकि आज मैं तुमसे बेहद
प्रश्न हूं पर फिर भी मैं तुम्हें जीवन की

वह सच्चाई बताने जा रही हूं जिसे तुम्हें
सुना होगा और सुनकर अपने जीवन को सुधारना
शुरू होगा इसलिए अपने माता को ध्यानपूर्वक
सुना ताकि तुम्हें जीवन में कभी किसी के
आगे झुकना ना पड़े मेरे बच्चे तुम जीवन
में खुशियां ढूंढना चाहते हो किंतु यह

क्यों नहीं भूल जाते हो की खुशी तो
तुम्हारे आसपास है और वह तो मैं तभी दिखे
शक्ति है जब तुम छोटी-छोटी चीजों में भी
खुशियां ढूंढो जैसे एक बच्चा अपनी मां से
साड़ी खुशी ढूंढ लेट है ऐसे ही तो मैं भी

साड़ी खुशियां हर जगह मिल शक्ति हैं बस
उन्हें महसूस करने की कोशिश करो किंतु
मेरे बच्चे तुम अक्सर उन चीजों में खुशी
देखते हो जो चीज काफी बड़ी होती हैं या
फिर जो तुम्हारी ख्वाहिश है
किंतु जब तुम्हारी हर ख्वाइश पुरी नहीं
होती

है तो तुम उदास हो जाते हो किंतु तुम यह
भूल जाते हो की यदि तुम खुशी को अपने मां
की इच्छाओं के रूप में देखने की कोशिश
करोगे तो तुम कभी खुश नहीं हो सकते आज मैं
जो तुम्हें खुशी देने जा रही हूं उसे खुशी
को महसूस करने के लिए तो मैं स्वयं के
अंदर कुछ बदलाव करने होंगे और यह खुशी
तुम्हें केवल उन्हें लोगों से प्राप्त

होगी जो तुम्हारे जीवन में है और जींस
तुम्हारा जीवन जुड़ा हुआ है मेरे बच्चे
यदि तुम कुछ नियमों को अपने जीवन में अपना
लोग तो तुम्हारा जीवन स्वर्ग से भी अच्छा
हो जाएगा और उसके लिए केवल तुम्हें कुछ

बताने जा रही हूं ऐसी चीज तुम्हारी जीवन
को बर्बाद करती हैं
यदि तुम इन चीजों को छोड़ दो तो स्वयं ही
तुम्हारा जीवन ठीक होने लगेगा और जी खुशी
की तलाश कर रहे हो वह तुम्हें प्राप्त हो
जाएगी अपने अंदर तीन चीजों का निर्माण करो
वह तीन चीज हैं जो तुम्हारे भीतर फाइल पाप

का नस करेंगे और यदि तुमने इन तीन चीजों
को अपने जीवन में अपना लिया तो मेरा यकीन
करो तुम्हारा जीवन पाप से मुक्त हो जाएगा
पहले चीज स्वयं की प्रतिव्यशास्त्र मेरे
बच्चे यदि तुम स्वयं के प्रति विश्वास
जागृत कर लोग तो तुम्हारे मां में जितनी

भी शंकाएं हैं और जो भी डर है वह स्वयं
समाप्त हो जाएगा
अगर विश्वास है तो तुम किसी भी चीज को
हासिल कर सकते हो फिर चाहे वह कितनी भी
कठिन क्यों एन हो दूसरी चीज प्रेम है यदि
तुम अपने अंदर प्रेम का बी भिगे तो मेरा

यकीन करो इस संसार में किसी भी प्रकार का
दुख तुम्हारे अंदर नहीं रहेगा क्योंकि
जहां प्रेम राहत है वहां नफरत की चीज
स्वयं ही समाप्त हो जाति है यह तुम भी
जानते हो की प्रेम वह भाषा है जो जानवर को
भी समझ में ए जाति है
तो वह भी तुम्हें कभी नुकसान नहीं देगा
बल्कि तुम से भी वह उतना ही प्रेम करेगा
जितना तुम उससे करोगे और तीसरी सबसे हम

चीज में है जो हर मनुष्य में पी जाति है
और उसका नाम क्रोध है मेरे बच्चे तुम्हें
यहां पर क्रोध का त्याग करना है यदि तुमने
क्रोध का त्याग कर लिया

ठंडा दिमाग से कम ले सकते हो क्योंकि जो
मनुष्य क्रोध में आकर कोई फैसला या कार्य
करता है तो वह आगे चलकर पछताते हैं उन्हें
उसे समय क्रोध के चलते कुछ समझ नहीं आता
किंतु बाद में जब उन्हें समझ में आता है
तब तक बहुत डर हो चुकी होती है इसलिए मेरे
बच्चे विश्वास प्रेम और अनुरोध का त्याग

यह तीनों चीज जी दिन तुम्हारे अंदर ए गए
उसे दिन ऐसा कोई भी कार्य नहीं है जो तुम
ना कर सको अब यह तुम्हारे ऊपर है की तुम
किस प्रकार से कार्य कर सकते हो और किस

प्रकार से कार्य नहीं कर सकते स्वयं की
शक्तियों को पहचान के लिए तुम्हें अपने
भीतर इन तीन चीजों का निर्माण करना होगा
मेरे बच्चे तुम जब कभी भी अपने घर में
अन्य बनाते हो और यदि वह
बर्बाद मत करना बल्कि उसे किसी गरीब इंसान
को या फिर गौ माता को मिला देना ऐसा करने
से तो मैं पुण्य प्राप्त होगा और मेरे

बच्चे वह अन्य भी बर्बाद नहीं होगा कभी भी
खाने को बर्बाद करके को अन्नपूर्णमा का
अपमान मत करना जी घर में अन्नपूर्णमा का
अपमान होता है वहां खाने की कमी सदा बनी

रहती है इसलिए मेरे बच्चे तुम अपनी माता
की इस बात को स्मरण रखो की तुम्हारा जीवन
खुशियों में लेने के लिए यह गन अति आवश्यक
संसार

हमें कोई परेशान ना करें हमारा दिल ना
दुखाए हम पर कभी कोई क्रोध ना करें किंतु
हम यह भूल जाते हैं की इन चीजों की शुरुआत
पहले हमें स्वयं के ऊपर करनी होगी स्वयं

क्रोध करना बैंड करना होगा दूसरों को
परेशान करना बैंड करना होगा तब जाकर हमें
भी खुशी मिलेगी और यह सब चीज तभी संभव है
जब तुम्हारे मां में शांति हो यदि
तुम्हारे मां में शांति नहीं है तो तुम
कुछ भी प्राप्त नहीं कर सकते और यदि
तुम्हारा मां शांत है तो इस संसार की

प्रत्येक चीज में तुम्हें शांति का अनुभव
होगा और वह शांति तो मैं खुशी प्रधान
करेगी जी खुशी की तलाश हर इंसान करता है
सभी चीज करना प्रारंभ कर डॉग
उसे दिन से तो मैं पूर्ण शांति की प्रताप
मिलने लगेगी और वह शांति तुम्हारे जीवन को
पूर्ण रूप से बादल देगी यदि तुम्हारे पास
पैसे भी हैं और साड़ी सुख सुविधा भी

Leave a Comment