माता रानी दुर्गा माँ का संदेश – “मेरी ये बात मानोगे?”

कि मेरे बच्चे अपने शक्तियों को सदा ही उस
दिशा उस उद्देश्य की तरफ रखों जिसे
तुम्हें प्राप्त करना है ना कि उसकी ओर

जिसे तू हो चुके हो अर्थात कुछ छूट जाने
अथवा हो जाने के भय से आगे की तरफ बढ़ना
बिल्कुल मत छोड़ देना असल में जब हम अपने
जीवन में हो चुकी वस्तुओं अथवा लोगों के

असफलता की ओर बढ़ते चले जाते हैं ऐसा
इसलिए क्योंकि यह सब हमारी चीज कि वह
असफलताएं है जो हमें नई ऊर्जा और नई शक्ति
के साथ आगे बढ़ने से रोक रही होती हैं ऐसा
इसलिए मेरे बच्चे क्योंकि हम जैसा सोचते

हैं वैसे ही होते चले जाते हैं जब हम अपनी
असफल आपके बारे में सोच रहे होते हैं तो
अंजाने में हम उसे अपना विचार बना लेते
हैं और यही विचार आगे चलकर तुम्हारे
व्यक्तित्व में उतरते चले जाते हैं विजय

और उसी की होती है जो
सफलताओं के बारे में सोचता है अपनी
असफलताओं से सीख सकता है और आगे बढ़ता
रहता है न कि अपनी असफलताओं का शोक मना कर
बैठा रहता है इस दुनिया में किसी ने यदि
तुम्हारे साथ कुछ भी बुरा किया है तो उसे
उसका फल भोगना ही पड़ेगा लेकिन अगर तुम ही
उसे किस तरह पूरा करने के बारे में सोचने

लगे तो तुम्हें भी तो पूरे कर्मों का फल
भोगना ही पड़ेगा मरण रहे मेरे बच्चे की इस
दुनिया में जीता वही है जो बदला लेने के
बारे में नहीं बदलाव लाने के बारे में
सोचता है अपने हौंसलों की उड़ान को कमजोर
मत पड़ने दूध जो लोग तुम्हारी पूरा हाई कर

रहे हैं कल यही लोग पंक्ति में खड़े होकर
तुम्हारे लिए तालियां बजा रहे होंगे इसके
अतिरिक्त मैं तो तुम्हारे साथ होंगी जब जब
तुम मुझे याद करोगे तब तक मैं तुम्हारे
साथ ही खड़ी मिलूंगी

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