मुझे तुम पर नाज है मेरे बच्चे।।👣 माँ दुर्गा का प्रेम संदेश |

मेरे बच्चे मुझे पता है की वर्तमान स्थिति
से खुश नहीं हो तुम्हें लगता है की
तुम्हारा जीवन दुर्लभ है अपने भाग्य को
कॉस्ट रहते हो तो मेरे बच्चे समझ लो यह सब
तुम्हारे ही विचारों का परिणाम

विश्वास की कमी है तुम्हारे विचारों में
दोष है इसके लिए कोई दूसरा दोषी नहीं
बल्कि तुम खुद को मेरे बच्चे अच्छे विचार
ही तुम्हारे जिंदगी को बेहतर बना सकते हैं
और तुम हो की नकारात्मक विचार ही अपने मां
में लेट हो मेरे प्यार बच्चे तुम्हें ऐसा

बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए विचार जब
शुद्ध रहेंगे तो जीवन विश्वास और समृद्ध
रहेगा आज मनुष्य जाति एक ही रोग से पीड़ित
है यह रोग है गरीबी यह गरीबी क्यों है
इसका उत्तर यही है की मनुष्य को परमात्मा
की शक्ति पर भरोसा नहीं है अपने शक्ति में
भी विश्वास नहीं मेरे बच्चे तुम्हें उसे
परमपिता से पुत्र जैसा रिश्ता कायम कर

ना
होगा
यदि तुम्हें विश्वास है की तुम्हें खाने
की कमी नहीं है तो तुम सब कुछ का सकते हो
तुम्हें यह डर है की खाने को तो कुछ है ही
नहीं तब तुम भूखे रहते हो मेरे बच्चे अगर
तुम्हें ऐसा ही सोचते हो की मुझे खाने को
नहीं है तो तुम्हारा जीवन कभी भी बादल

नहीं पाएगा तुम्हें अपनी शक्तियों पर
विश्वास करना होगा मैंने जो तुम्हें अपनी
शक्तियां दी है उसे तुम्हें इस्तेमाल करना
होगा और वह तभी संभव है जब तुम मुझमें पर
और अपने आप पर विश्वास करोगे मेरे बच्चे
पूर्वक यह मानो की जी वास्तु की सच में
तुम्हें आवश्यकता है वह तुम्हारे पास है

जब तुम चाहोगे उसे प्राप्त कर लोग प्राप्त
करने के लिए वचन और कर्म से प्रियतन करना
पड़ेगा

सफलताएं इस के कम चूमते हैं जिससे सफलताओं
पर विश्वास होता है और जिसे अपनी योग्यता
पर भरोसा होता है मेरे बच्चे तुम्हें अपनी
योग्यता को कम नहीं समझना चाहिए क्योंकि
मैं जानती हूं तुम्हारे योग्यता को मेरे
बच्चे धन वे लोग काम पाते हैं जिन्हें

अपनी धन कमाने की योग्यता पर विश्वास होता
है जो दरिद्रता से कभी ना डगमगा कर कम
रखना है उसके रहन-सहन और कर दल में
दरिद्रता क्लेश मंत्र अंश भी नहीं राहत
उसकी साड़ी शक्तियां इस और मड जाति है
जिधर उसकी मंजिल है संसार में ऐसे बहुत से

लोग हैं जो अपने गरीबी की स्थिति को कुछ
स्वीकार करते हैं और इस में संतुष्टि
अनुभव करते हुए आगे बढ़ाने की प्रयास नहीं
करते हैं ऐसे लोग कितना भी प्रयास करें
सफल नहीं हो सकते क्योंकि वह वर्तमान
स्थिति को उचित मां बैठे हैं और उनकी
आशाएं मिट्टी गई

निर्धनता के भाई से भी लोक निर्धनता के
शिकार हुए देखें जा सकते हैं
मेरे बच्चे बहुत से बच्चों को ही यह पाठ
पढ़ा दिया जाता है वह बेचारे सर दिन केवल
इस शब्द गरीबी को सुनते हैं वे जी और भी
देखते हैं उन्हें गरीबी की प्रेरणा मिलती
है

यही सुनते हैं यही देखते हैं यही सोचते
हैं तो बड़े होने पर यही संस्कार उनकी
सफलता के रास्ते में सबसे बड़ी बड़ा बंटी
है उनके आत्मविश्वास की जेड बचपन में ही
खोखली हो चुकी होती हैं

जो लोग निर्धनता से भाई खाता हैं जो सफलता
नहीं प्राप्त कर पाते या जो आशंकाओं और
भाई से ग्रस्त रहते हैं उनकी आर्थिक दशा
को सुधार अपने की शक्ति भी नष्ट हो जाति
है

वे अपने सर पर पहले से लगे बोझ को और भी
भारी कर लेते हैं और भी समर्थ हो जाते हैं
मेरे बच्चे अगर तुम्हारी परवरिश यदि और भी
भयानक हो गया है या तो होती जा रही है तो
कोई परवाह नहीं करनी चाहिए

अगर उसे स्थिति से स्वयं को हटाइए दूर हटा
दो जब तक तुम्हारे मां में दुख और
दरिद्रता है तब तक तुम कभी समृद्धि शालिनी
नहीं बनोगे किसी की दशा वही होती है जो
उसके मनोभाव होते

जब कोई लड़का किसी परीक्षा की तैयारी कर
रहा होता है और उसे पास होने की आशा नहीं
रहती तो यह निश्चित है की वह पास नहीं हो
सकता क्योंकि जी चीज की आशा होती है वही
तो प्राप्त हो शक्ति है कोई भी नदी अपने
निकालने के स्थान से उसे पर्वत से ऊंची
नहीं उठ शक्ति

जिससे निर्धनता की आशा है या जिसे
निर्धनता की अपेक्षाएं हैं वह कुछ बन ही
नहीं सकता मेरे बच्चे तुम्हें अपने लक्ष्य
की और देखना चाहिए अपने सौभाग्य की आशा
करने चाहिए सुख समृद्धि और विजय पर
तुम्हारा अधिकार है अपने अधिकार को
प्राप्त करो मेरे बच्चे तुम्हारा अधिकार

तुमसे कोई नहीं छन सकता बस तुम खुद अपने
आप को पीछे की और ले जाते हो मेरे बच्चे
कोई भी व्यक्ति निर्धन नहीं माना जा सकता
जिसके पास कोटिया नहीं
अतुल राशि नहीं बल्कि वह निर्धन है जिसके
विचारों में निर्धनता है और जो मां से
दरिद्र है

क्योंकि निर्धनता एक मानसिक रोग है और मां
की दरिद्रता से ही आर्थिक दरिद्रता
उत्पन्न होती है जो लोग करोड़पति बने हैं
उनमें आत्मविश्वास था उनके मां में धनवान
बने के लिए सपना के साथ-साथ वैसी ही आशाएं
थीं

लगन थी आत्मविश्वास था तभी समृद्धि
कंजूस आदमी इतना सुख समृद्धि प्राप्त नहीं
कर सकता जो विशाल
व्यक्ति प्राप्त कर सकता है क्योंकि सुख
और वैभव का वास्तविक रूप वह नहीं जिसे लोग
मां बैठने हैं आत्मा विकास से आंतरिक
ज्ञान से सच्चा सुख प्राप्त हो सकता

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