मैं आज तुम्हें एक गुप्त विधा देने आई हूँ

मेरे प्रिय कैसे हो तुम किसी उलझन में उलझे हो किस खुशी से खुश हो रहे हो मनुष्य का जीवन मनुष्य का जीवन सब दिन समान

होता है केवल उसकी अनुभूति करने की क्षमता बढ़ती और घटती है मेरे प्रिय में अपने बच्चों को कभी दुख तकलीफ और अशांति या

पीड़ा नहीं देती अपने मन को शांत तुम मेरे परम भक्त तुम अपने मन को एकाग्र कर लोगे कर पाएगा वह किसी को प्राप्त नहीं होगी यह तुम्हारा भविष्य बहुत उज्ज्वल है बहुत सुंदर है बड़ा की मालिक बनोगे तुम अपार संपत्ति प्राप्त होगी तुम्हें परंतु सच्चा सुख तुम मेरी

भक्ति में ढूंढते हो मेरे प्रिय तुम मुझे अति प्रिय हो तो मेरी संतान हो और आज मैं तुम्हें अपनी भक्ति का वरदान देता हूं अकेला मत समझना तुम्हारी मां हर पल तुम्हारे साथ है किसी चीज की कमी तुम्हारा भाग्य बदल कर रख दूंगी सदा सुखी रहो मेरे प्रिय

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