: मोदी और किसान…आज हरियाणा से Indirect संवाद!

स्वागत है आप देख रहे हैं कहानी कुर्सी की
और अब हम बात करेंगे किसान आंदोलन की
जिसका दूसरा चरण आप देख रहे हैं सबके मन
में सवाल तो एक ही है क्या यह जो न साल

पहले जैसा किसान आंदोलन था जिसमें दिल्ली
की सीमाएं जो हैं वह एक तरीके से हाईजैक
कर ली गई थी और दिल्ली के अंदर अजीब किस्म

का एक तमाशा हुआ था हिंसा हुई थी क्या वह
सब दोबारा होगा सरकार की पूरी कोशिश है कि
ऐसा ना हो कि नेता वो भी यह कह रहे हैं कि
हम ऐसा कुछ करना नहीं चाहते हमारी कोई
नियत नहीं है कि हम किसी को कोई असुविधा

में डाले लेकिन फिलहाल जो कुछ हो रहा है
बॉर्डर के ऊपर बॉर्डर मतलब यह हरियाणा और
पंजाब का बॉर्डर वो तो बहुत आश्वासन देने
वाला नहीं है अगर वहां पर पत्थर चल रहे
हैं आंसू गैस चल रही है ड्रोन से आंसू गैस

छोड़ी जा रही है ट्रैक्टरों पर पर
ट्रैक्टरों को जैसे जेसीबी मशीन बना कर के

दौड़ाया जा रहा है बैरिकेड खींचे जा रही
हैं तो ऐसा तो नहीं लगता कि वो भी बहुत
शांतिपूर्वक सब करना चाहते हैं और यहां से

ऐसा भी नहीं है कि पुलिस मुख दर्शक बन कर
के देखती रहेगी अगर ये आगे बढ़ने की कोशिश
करेंगे तो और दिल्ली में तो देखिए क्योंकि
केवल सावधानी वश सरकार ने बॉर्डर पर जो है
बैरिकेड लगा दिए हैं अभी किसान बहुत बड़ी
तादाद में है नहीं कल आए थे गाजीपुर
बॉर्डर पर थोड़े बहुत किसान उनको पुलिस ने

इतनी दिक्कत होने लगी लंबे-लंबे जाम लगे
लगने लगे हैं क्योंकि बैरिकेड पुलिस पुलिस
ने खड़े कर दिए हैं अब यह बातचीत चल रही
है इसका नतीजा क्या निकलेगा तीसरे दौर की

बातचीत हुई कल रात को डेढ बजे तक तीन
मंत्रियों ने दोबारा फिर किसान नेताओं के
साथ बात की जिसमें 17 लोग दूसरी तरफ से
शामिल थे अब इस बैठक के अंदर क्या खास बात
पेशकश हुई और उधर से क्या जवाब आया ये तो
मंत्री जानते हैं और केवल वो किसान नेता
जानते हैं लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि
सरकार के पास किसानों को देने के लिए कुछ

है और वो ऑफर जो है उनको किया जा रहा है
अब ये तो बिल्कुल तय है कि वो जो एमएसपी
जिस जैसी एमएसपी की गारंटी वो जिस सूरत

में चाहते हैं वो तो बिल्कुल नहीं दी जा
सकती लेकिन फिर भी सरकार अपनी तरफ से कुछ
ऑफर कर रही है कल की बातचीत में एक एक्स
फैक्टर भी था और व थे पंजाब के
मुख्यमंत्री भगवंत मान हैरानी हुई लोगों

को देख कर के कि आम आदमी पार्टी की सरकार
का मुख्यमंत्री यहां बीजेपी के केंद्रीय
मंत्री और जो आरोप लगाती है बीजेपी की
पंजाब की सरकार ने पूरी खुली छूट दे रखी
थी किसानों को यह ट्रैक्टर लिए धड़ाधड़
धड़ाधड़ पहुंच गए हरियाणा के बॉर्डर तर
बॉर्डर तक और एमएल खट्टर जो हैं वो तो

खुलकर भगवंत मान पर इल्जाम लगाते हैं कि
इन्होंने एक बार भी रोकने की कोशिश नहीं
की ये क्यों नहीं दे देते इन किसानों को
जो एमएसपी मांगते हैं ये केंद्र सरकार से
पहले पंजाब की सरकार तो दे दे वो भगवंत

मान उस बातचीत का हिस्सा थे और ऐसे भी
नहीं तीन घंटा भगवंत मान ने पहले अलग से
होटल में जाकर मंत्रियों से बात की फिर
वहां से निकल कर के ये किसान नेताओं के
पास गए एक घंटा उनसे बात की उसके बाद

मंत्री चल कर के आए किसान नेताओं के पास
भगवंत मान की मौजूदगी में और फिर चर्चा
हुई अब भगवंत मान का इस सारी बातचीत के
अंदर क्या रोल है ये समझने वाली बात है
मैं आपको पहले सुना रहा हूं सरकार के

मंत्री क्या बोले सरवंत सिंह पंढेर जो
किसान नेता हैं वो क्या बोले उसके बाद मैं
आपको दिखाऊंगा भगवंत मान की
बात
पॉजिटिव चर्चा हुई
है

और किसान संगठनों
ने जिन विषयों
पर ध्यान आकृष्ट कराया
है संज्ञान में लेते हुए विस्तार पूर्वक
चर्चा
को हमने करते हुए अगली
तिथि रविवार

को शाम 6
बजे के लिए फिर से आगे की चर्चा को जारी
रखेंगे हर मांग के ऊपर लंबी चर्चा हुई
एमएसपी के ऊपर सबसे ज्यादा चर्चा हुई तो
बड़ा मुद्दा
हम चाहते हैं कि एमएसपी खरीद की गारंटी का

कानून बने और सरकार का कहना भी एक मैकेनिक
सिस्टम बनाना पड़ेगा और इसलिए वह अपनी तौर
से कोई ना कोई इस तरह का समय मांग के को
चाहते हैं कि सरकार में विचार विमर्श हो
और उससे आगे कोई ना कोई बात

हो तीन जिल विच संगरूर खनौरी बडर पटियाला
शंभू भी
आ अपना फतेहगढ़
साहब सेंटल सरकार ने चिठी कढ के क्योंकि उ
दे अधीन आ जा उन्होने सा इंटरनेट बंद
कराता बच्चे दे पेपर ने मैं गल आज मुद्दे

उठाया बच्चे पेपर शुरू हो गया ऑनलाइन
पढ़ाया ने आजकल बच्चे की कसूर
है तो तु सा जिले इर बंद

करते नेता मंत्री कह रहे बातचीत अच्छी हुई
भगवंत मान कह रहे थे कि यह इंटरनेट क्यों
बंद किया हुआ है सरकार ने इसको खोले भाई
भगवंत मान ने इतनी लंबी बात मंत्रियों से
की थी तीन घंटे उसके बाद ने किसान नेताओं
से बात की उसके बारे में वो कुछ बोलते
लेकिन उन्होंने खैर अपनी परेशानी बताई अब

मैं संजीव जी देखें ये अब क्या बात बनेगी
यह तो वही लोग जानते हैं मैं इसकी थोड़ी
आपसे पॉलिटिकल बात करना चाहता हूं भगवंत
मान को इससे पहले भी सरकार ने रोपिन किया

था अगर आपको याद हो जब पंजाब के अंदर वो
एक नौजवान जो है जो बहुत खालिस्तान की बात
करता था उसको पकड़ने की बात थी मैं नाम
भूल रहा हूं हालांकि मैंने इंटरव्यू भी

किया उस शख्स का उसको पकड़ने के लिए भगवंत
मान को ओपन किया गया भगवंत मान ने जो है
पूरा अपना अमला भी लगाया और यह बाद में
खुल के आया किय जॉइंट ऑपरेशन था सेंटर और

स्टेट का इस बार भी ऐसा कल तक लग रहा था
कि शायद कॉन्फिडेंस में लेक पंजाब सरकार
को केंद्र सरकार कुछ ऑफर करना चाहती है
आपको लगता है कि इसकी गुंजाइश है जिस
तरीके के राजनीतिक रिश्ते हैं आम आदमी

पार्टी और बीजेपी के बीच
में
मुझे लगता है इसकी गुंजाइश भी है और इसका
स्वागत भी होना चाहिए क्योंकि देखिए आपको
एक इंटरलॉक्यूटर या एक मीडिएट तो चाहिए

जिम्मेदार व्यक्ति और जिस तरह से अभी आप
ही ने बताया है कि पहले वह कुछ लंबी
उन्होंने वार्ता मंत्रियों के साथ की फिर
मंत्रियों के साथ जो वार्ता हुई उसको लेकर
फिर किसान लीडर्स को ब्रीफ किया तो एक वो
शायद मध्यस्थ की भूमिका निभाने का प्रयास

कर रहे हैं और पंजाबही सबसे ज्यादा
अफेक्टेड स्टेट है
और और पंजाब में आपके भी स्टेक बहुत है और
बीजेपी के अपेक्षाकृत कम है पंजाब में
स्टेक तो यह सारी जो जमीनी स्थिति है उसके

हिसाब से भी एक लॉजिकल सी बात लगती है कि
पंजाब के चीफ मिनिस्टर आप पार्टी के लीडर
को आप कॉन्फिडेंस में लीजिए और इस मामले
को डिफ्यूज कीजिए क्योंकि और दूसरी जो

लार्जर इशू है मुझे तो यह किसानों के
आंदोलन की बात ही समझ में नहीं आती है कि
वह किस चीज की डिमांड कर रहे हैं और बहुत
ही लोकलाइज सा यह एजिटेटर और अ इसकी जितनी
जल्दी इसको मामले को डिफ्यूज करें और कुछ

आम सहमति बने एमएस भी बहुत टेढ़ा मुद्दा
है उसकी लंबी विवेचना का शायद यह मंच भी
नहीं है और आप शायद मेरे से पूछ भी नहीं
रहे लेकिन उन्हें एक ऐसा रास्ता निकालना
चाहिए जिससे कि किसानों को लाभ हो क्योंकि

ये ज्यादातर बड़े किसानों का मुद्दा है जी
और ये मतलब इसमें कई गुथ आं हैं बट एक ऐसा
मैकेनिज्म डेवलप हो जिसके तहत कि फेयर
प्राइस एश्योर्ड हो अभी जैसे एक फार्म
सस्टेनेबिलिटी फंड बनाया था मैं कल कहीं

पढ़ रहा था जो कि जैसे फॉर एग्जांपल प्यास
के भाव जब 50 हो जाते हैं पाच और 50 के
बीच में चलते हैं 50 हो जाते हैं तो वो
सस्टेनेबिलिटी फंड उसको कंज्यूमर को सस्ते
दामों प उपलब्ध हो इसलिए काम में लिया गया
जबकि आपको करना तो यह चाहिए कि जब ₹ दाम

हो प्यास के तो उसको ₹ में आप किसानों से
खरीदे ₹ में तो कुछ ऐसा वाय मीडिया डेवलप
करें बाकी एमएसपी अ श्योर्ड नहीं है कोई
कन्विंसिंग बात नहीं है अगर बाजार के अंदर

बहुत तेज चल रहे है एमएसपी प कौन लेगा सर
चूंकि आपसे आज बात हो रही है ये मुद्दा कल
का था लेकिन जो वीडियो एक चला था किसान
नेता इनका नाम था जगजीत सिंह दलेवाल
इन्होंने कहा कि भाई मोदी का ग्राफ बहुत

ऊपर चला गया किसान राम मंदिर के बाद टाइम
बहुत कम है हमें ग्राफ नीचे लाना है मोदी

का उससे यह बात कहीं लगी कि भाई इसके पीछे
केवल एमएसपी तो मोटिव नहीं है कहीं ना
कहीं यह ये ये एक पॉलिटिकल एजीटेशन भी है
आप मानते हैं और वो बातचीत में शामिल है
बाय दवे देखिए दूसरे हल्के अ हल्के अंदाज
में बोल रहा हूं पूरे सम्मान के साथ आपने

क्या नाम बताया किसान नेता का मैंने भी वो
वडियो सुना था कि ग्राफ बहुत ऊपर जा रहा
है और
नीचे तो जगदीप सिंह जी को पूरी विनम्रता

और सम्मान के साथ संबोधित करते हुए कहना
चाहूंगा कि अरे भा बड़े-बड़े दिग्गज उनका
ग्राफ नीचे करने फेल हो गए यार आप क्यों
परेशान हो रहे हो अपना काम करो किसानों के
लिए आंदोलन करो मतलब यह तो खामा खाई

बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना आपका
अपना एक एजेंट आप हो सकता है पॉलिटिक्स कर
रहे हो जगदीश सि लेकिन किसानों के व्यापक
हित में होना चाहिए देखिए हम सकारात्मक
बात करें जगजीत सिंह और इसमें उसम उलज के
एक ऐसा फार्मूला निकाला जाए क्योंकि
एमएसपी सलूशन नहीं है ये तो मैं कन्विंस्ड
हूं एमएसपी अगर सलूशन होता तो फिर पूरी

सवा स कमोडिटीज और क्रॉप्स पे होता ना तो
वो नहीं है 23 28 की बात चल रही है तो वो
सलूशन नहीं है वो कुछ कुछ एक लॉबी की

डिमांड है और उनका एजेंडा है नहीं इसमें
लेकिन फिर बहुत से लोगों ने यह भी कहना
शुरू किया है कि अगर केंद्र सरकार बिल्कुल
इस बात

में कोई शक नहीं उसको कि यह ये ना हित में
है ना हम दे सकते हैं एमएसपीपी गारंटी
साफसाफ बताए फिर ये बातचीत पहले 17 दौर की
बातचीत फिर अब ये तीन दौर की बातचीत अब हो
गई अब इसमें दो तीन बातें सामने आती पहली

पर यह भी बातें हो रही थी 2006 में
रिपोर्ट सबमिट हुई कांग्रेस ने उस पर
कमेटी बनाई उसको उन रिकमेंडेशन को जानने
के लिए इंप्लीमेंट कर दिया क्या सारे
इकोनॉमिक जो एग्रीकल्चर इकोनॉमिस्ट है वो

मानते हैं कि यह पॉसिबल नहीं है अब बात
आती है किसानों के लिए क्या हो सकता है
सम्मान निधि का जो मामला है उसका यह जरूर
है कि उसमें निधि का अमाउंट बढ़ाया जा
सकता है हो सकता है सरकार उसपे सोच रही हो
कि ऐसा हम कर स मैंने जैसा कहा बहुत कुछ
लोगों ने ये कहा है कि सरकार है समथिंग टू
ऑफर दे दे स अब बात आती है देखिए ऐसा तो
है नहीं कि सिर्फ पंजाब और हरियाणा की
किसान किसान है मध्य प्रदेश के भी किसान
है राजस्थान के भी हैं बाकी जगहों के भी
है साउथ इंडिया के भी है सब जगह किसान है

भाई तो वो तो नहीं आके एजीटेशन कर रहे हैं
यहां पे आखिर क्या हो गया पंजाब किसा 24
फसलो प क्यों ई बाकी बाकी जगहो प क्यों
नहीं दू दू दूध वालो आ उस आऊंगा अब भगवंत

मान जो है वो मुख्यमंत्री जो है वो
नेगोशिएट कर रहे हैं तो ऐसा नहीं लगता
भगवंत मान जी ने पहले एजीटेशन खड़ा करवाया
होगा मैं शक जाहिर कर रहा हूं खड़ा करवाया
होगा इसमें नेगोशिएट करने खड़ा नहीं भी
किया होगा तो पूरा सपोर्ट किया सबसे
ज्यादा स्टेक जो है हम जानते हैं आपका
सबसे ज्यादा स्टेक जो है वो पंजाब में है
अब आप जो है हरियाणा में भी अपनी पार्टी
को बड़ी जोरशोर से खड़ा कर रहे हैं वहां

पे भी एक वो संगठन उन्होंने मजबूत कर लिया
है तो लगता तो ऐसा ही है ना कि यह सारा जो
है ये आपका कहीं ना कहीं इवॉल्वमेंट है

इसमें नहीं और सरकार की मजबूरी है क्या कि
पंजाब के चीफ मिनिस्टर को साथ में लेकर
बातचीत में जाए नहीं अब अगर आपको किसान
आपके दरवाजे पर खड़े हो गए हैं उन्होंने
ब्लॉकेड कर दिया रेल रोकने की बातें हो
रही थी तो ऐसा तो है तो कुछ ना कुछ तो
उनको भी करना पड़ेगा ता इस कंस्पिरेशन
थ्योरी भी चल रही है मैं ओम जी बताऊं आपको
वो यह भी चल रही है कि भारतीय जनता पार्टी
जो है अब अरविंद केजरीवाल के सामने भगवंत
मान को खड़ा करना चाहती है केजरीवाल जी
मैं नहीं कह रहा हूं यह बात जो चर्चाएं
होती है कि देर सवेर शायद उनको जेल जाना

पड़े आम आदमी पार्टी का नेता बन जाएंगे
भगवंत मान तो भगवंत मान को सामने खड़ा करो
जो अजीत जो अजीत अजीत पवार जैसे हो गए और
जो शिंदे हो गए महाराष्ट्र में ऐसे आम

आदमी पार्टी के शिंदे और अजीत पवार बना दो
भगवंत मान को बिल्कुल एमएसपी को लेकर बहुत
स्पष्ट स्थिति है 18 साल हो गया एमएसपी
स्वामीनाथन आयोग की उस रिपोर्ट को आए 10
लाख करोड़ क्या देश इस स्थिति में है कि
वह खर्च कर सकता है इस परे वय कर सकता है
और क्यों करना चाहिए सबसे बड़ी बात है

क्यों करना चाहिए पंगु क्यों बनाना इस तरह
की चीजें क्यों लागू करना जिसमें देश
आत्मनिर्भर होने के बजाय
पंगतांग तक जो बातचीत हुई बहुत सारे ऐसे
मुद्दे और रविवार को और सारे मुद्दों पर
चर्चा होनी है बहुत सारे ऐसे मुद्दे जो
स्वीकार करने योग्य थे वो स्वीकार किए गए
उस मैराथन बातचीत में पाच घंटे की बातचीत

में दो-तीन चीजें और हुई कि दिल्ली की ओर
वो कुछ नहीं करेंगे उनके ऊपर किसी तरह का
बल प्रयोग नहीं किया जाएगा किसान अ
संगठनों ने इस बात को तो माना ही है कि

दिल्ली की ओर कुछ करना अपना रोकेंगे सरकार
ने इस बात को माना है कि किसी तरह का बल
प्रयोग नहीं होगा जो पिछले दिन टियर गैस
के गोले छोड़ने पड़े थे लेकिन अगर स्थिति
इस तरह की बनती है तो ये थोड़ा सोचनी है
फिर भी और हम लोग यह जरूर सोचे कि दो दिन
बाद रविवार की बातचीत में फाइनल नतीजे

इसके य सीरी तस्वीरें हैं शंभू बॉर्डर की
पंजाब हरियाणा बॉर्डर की जो इस वक्त आप
देख रहे हैं भीड़भाड़ अभी भी वहां काफी है
कुछ अफरा तफरी आज भी देखिए वहां पर दिखाई
दे रही है हालांकि किसान नेता यह कहते हैं

कि हम बैठे हैं केवल हम अभी दिल्ली की तरफ
बढ़ने की कोशिश या बैरिकेड हटाने की कोशिश
नहीं करेंगे जब तक हमारी बातचीत चल रही है
बातचीत फेल हो जाएगी तो फिर हम दिल्ली
जरूर बढ़ेंगे जो बात मैंने अभी कई आपको
लगता है इसमें कहीं कोई बीजेपी को कोई

तोड़फोड़ करने की कोशिश आम आदमी पार्टी
में कर रही है देखिए मुझे लगता है फिलहाल
तो पंजाब के अंदर कोई तोड़फोड़ होने की
स्थिति है नहीं बहुत प्रचंड बहुमत आम आदमी
पार्टी के
पा मान साहब को थोड़ा सा ये निश्चित रूप
से देखिए जिस हिसाब से अरविंद केजरीवाल हर

बार भगवंत मान को साथ लेकर जाते हैं चाहे
फिर अयोध्या दर्शन करने जाना हो परिवार के
साथ या महाराष्ट्र में जाना हो या गोवा
में जाना हो या कहीं भी चुनाव प्रचार अभिर
करने जाना हो आप देखिए अभी तीन राज्य के
चुनाव हुए थे पांच राज्यों को उसमें मध्य
प्रदेश राजस्थान छत्तीसगढ़ में भगवंत मान
हर बार साथ में जाते हैं तो मुझे लग रहा
है कि इसमें कोई दोराई नहीं है कि अब

अरविंद केजरीवाल भगवंत मान एक बड़े नेता
बन गए और बड़े नेता है भी अरविंद केजरीवाल
आधी दिल्ली के मुख्यमंत्री पूरा राज्य
नहीं है पंजाब के मुख्यमंत्री है तो इसमें

कोई दोरा नहीं बीजे बीजेपी कहीं कह रही हो
भाई आप ही पार्टी चलाओ इतना बड़ा सूबा आप
चला रहे हो बिल्कुल और मुझे ये भी कहना है
कि देखिए केंद्र सरकार ने एक अच्छा काम
किया अगर भगवंत मान को बातचीत में शामिल

कर रहे हैं देखिए अमृतपाल का जो मामला हुआ
था वारिस पंजाब का जो प्रमुख थे अमृतपाल
का जिस समय खालिस्तान का जो मामला इतना
गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई थी उस समय
बहुत बेहतर कोऑर्डिनेशन गृह मंत्रालय का
और पंजाब पुलिस का रहा था भगवान तीन बार
आके अमित शाह जी से मिले थे उनसे गाइडेंस

लिया था और कैसे जॉइंट केंद्र का और राज्य
सरकार का रहा था जिसके कारण वो पकड़ाई में
आया था तो मुझे लग रहा है कि जिस तरह से
पंजाब के अंदर ये पूरा किसानों का आंदोलन

हो रहा है इसमें कोई दोराई नहीं कि इसके
अंदर राज्य सरकार का पूरा देखिए सर अभी भी
पत्थरबाजी चल रही है वहां पर हम लोग बात
कर रहे थे कि बातचीत चल रही है तो अभी

शांति है बॉर्डर के ऊपर ये बिल्कुल
लेटेस्ट तस्वीरें हैं शंभू बॉर्डर की फिर
एक बार आप देख रहे हैं पत्थरबाजी जो है वो
इस तरफ से कीजी नहीं सरोज जी इसके अंदर
खबर तो ये आ रही है कि 500 से ज्यादा
गुलेल मंगाई गई है पंजाब से अब वो गुलेल
से हमला करने वाले मतलब पत्थर फेंक के वो

थक रहे हैं व बहुत डिस्टेंस तक नहीं जा पा
रहा है तो उनका कहना है कि अगर आज नहीं
निपटे का मामला तो कल से हम गुलेल का इते
फिर देखिए टियर गैस जो है वो शुरू हो गई

है फिर एक बार हंगामा शुरू शंभू बॉर्डर के
ऊपर और इसमें दोनों तरफ से देखिए बातें की
जा रही है किसान ये कहते हैं कि बहुत सारे
किसान घायल हो गए हैं आंखें आंखों पर
पैलेट लग गए हैं पैलेट का इस्तेमाल किया
गया है टियर गैस जो है वो चलाई जा रही है
बिल्कुल और दूसरी तरफ से पुलिस ये कहती है

कि हमारे पुलिस वाले भी जख्मी हो रहे हैं
पत्थरबाजी में पुलिस वाले भी घायल हो रहे
हैं हरियाणा पुलिस ने एक वीडियो भी जारी
किया है जिसमें इस किस्म की उत्पाद बचाने
वालों को उन्होंने आइडेंटिफिकेशन

कारवाई कर रही है हम जानते हैं कि पुलिस
की कारवाया कैसे होती है और अगर उनको सच
में ये ऑर्डर्स हो कि रोकना है तो वो किस
तरह की कारवाई करती है तो ये उनको भी
समझाया गया पुलिस को कि आपको जो है
रिस्ट्रेन रखना है तो ये हमार को

रिस्ट्रेन ही दिख रहा है आसू गैस के गोले
कोई ये नहीं है कि कोई बम के गोले फेंके
जा रहे हैं आसु ज्यादातर फेंकी जाती है
ताकि डिस्पर्स हो जाए लोग लेकिन मुझे लग
रहा भगवान मिनट बोलिए लेकिन बातचीत के जो

निष्कर्ष है और जो दृश्य हैं उसमें अंतर
तो है किसान संगठन इस बात के लिए कल एकदम
पूरी तरह से दावा कर रहे थे कि अब अ किसी
तरह का इस तरह की घटनाएं या इस तरह की
चीजें नहीं होंगी कि जबस्ती जी बल प्रयोग
किया जाए और तो अगर ऐसा लगेगा कि कानून

व्यवस्था के साथ खिलवाड़ हो रहा है या
कानून व्यवस्था टूट रही है तो जाहिर है कि
हल्का-फुल्का बल प्रयोग तो करना मजबूरी भी
होती है जी इसलिए यह जो बातचीत के
निष्कर्ष हैं और जो दृश्य हैं उन दोनों
में अच्छा खासा मेल तो नहीं है
उन

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