मोदी और चंद्रचूड़ आए आमने-सामने, सुप्रीम कोर्ट को चुनौती देगी मोदी सरकार?

सीजीआई चंद्रचूर ने 2024 लोकसभा चुनाव के
ठीक पहले मोदी सरकार को अब तक का सबसे
बड़ा झटका दिया एक ही झटके में सुप्रीम
कोर्ट ने मोदी सरकार की सबसे बड़ी स्कीम
को बंद कर दिया सिर्फ इलेक्टोरल बंड को

बंद नहीं किया गया बल्कि इसे असंवैधानिक
बताया गया और यह भी सीजीआई चंद्र चूर्ण की
तरफ से कहा गया कि 31 मार्च तक बताना होगा

कि इस असंवैधानिक तरीके से कितना पैसा
मिला है और कहां से कितना पैसा दिया गया
है तो कायदे से तो मोदी सरकार को बेरा
तैयार करना चाहिए कि पैसा कहां से मिला है
कितना पैसा मिला है लेकिन यह बेरा बिल्कुल

भी नहीं तैयार किया जा रहा है खबरें निकल
कर सामने आई हैं कि मोदी सरकार सुप्रीम
कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले को पलटने की

तैयारी कर रही है बिल लाने की तैयारी कर
रही है जी हां चौक मत यह खबर निकल कर
सामने आई है और इस खबर के बाद से बवाल मच
गया है वहीं चुनाव आयोग की तरफ से बड़ा

बयान भी दिया गया है तो फिलहाल चुनाव
आयुक्त राजीव कुमार ने क्या कहा है मैं
आपको बयान सुनाऊंगा लेकिन उससे पहले खबरें
दिखा देती हूं खबर आप देखिए आज तक की

देखिए इसमें लिखा है कि इलेक्टोरल बंड हुआ
रद्द सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सरकार
तलाश रही है नए विकल्प तो इलेक्टोरल बोर्ड
तो रद्द हो चुका है उसे असंवैधानिक करार
दे दिया गया है सीजीआई चंद्रचूर ने कह

दिया है कि 31 मार्च तक आप यह बताइए कि
आपको कितना पैसा मिला है कहां से कितना
चंदा मिला है यह बताना ही होगा फिलहाल
मोदी सरकार तो बताना चाहती नहीं है इसका

अंदाजा आप इस बात से लगा चुके हैं लगा
सकते हैं कि पहले ही सुप्रीम कोर्ट में कह
दिया था कि पब्लिक को यह जानने का हक नहीं
है कि हमें कितना चंदा मिलता है और कहां

से मिलता है फिलहाल अब आदेश सीजीआई चंद्र
चूर्ण की तरफ से दिया गया है तो यह कह करर
तो मोदी सरकार पल्ला छुड़ा नहीं सकती कि

चंद्र चूर्ण को ये जानने का हक नहीं है कि
कितना पैसा मिला है कहां से पैसा मिला है
इसलिए विकल्प तलाशे जा रहे हैं विकल्प
तलाशे जा रहे हैं और विकल्प में यह भी हो
सकता है कि सत्र बुलाया जाए और बिल लाया

जाए और इस बिल के तहत इलेक्टोरल बंड को
कानूनी करार दे दिया जाए कितना बड़ा खेल
चल रहा है खबर आप देखिए एबीपी की देखिए
इसमें लिखा है कि चुनावी बंड पर सुप्रीम
कोर्ट का फैसला पलट सकती है मोदी सरकार

समझे विकल्प के बाद भी क्या है चुनौती अगर
यह विकल्प अपना लिया गया अगर मोदी सरकार
बिल ले आई तो भी वो फंस जाएगी चारों तरफ

से फंस जाएगी क्योंकि चुनाव नजदीक है अब
इतना आसान नहीं है कि चुनाव आयुक्त की
नियुक्ति पैनल से अध्यादेश लाकर सीजीआई

चंद चूर्ण को जैसे हटाया गया उसी तरीके से
इलेक्टोरल बंड को कानूनी करार दे दिया जाए
अब दो हफ्ते के अंदर चुनाव की तारीखों का
ऐलान होने वाला है अब जब चुनाव की तारीखों
का ऐलान होगा तो अ आप जानते हैं आचार
संहिता लग जाएगी और आचार संहिता के

अंतर्गत अध्यादेश मोदी सरकार नहीं ला सकती
है तो फिलहाल कैसे फंस गई है खबर में
देखिए लिखा भी है कि एनडीटीवी के सूत्रों

के हवाले से पता चला है कि सरकार कई
विकल्पों पर विचार कर रही है इसमें सबसे
प्रमुख तो एक बिल पास करने का फैसला है
जिससे फैसले को पलटा जा सकता है तो सबसे
प्रमुख क्या है बिल ले आइए आसान है बिल ले

आइए और आपकी बहुमत की सरकार है और
इलेक्टोरल बॉन्ड को कानूनी करार दे दिया
जाए लेकिन ऐसा नहीं कर पाएगी क्योंकि
चुनाव नजदीक है जैसा कि मैंने आपको बताया

खैर आगे देखिए इसमें लिखा है कि दिसंबर
में चुनाव आयोग के सदस्यों की नियुक्ति को
लेकर एक नया मैकेनिज्म तैयार करने वाले
बिल को पास किया गया था सूत्रों ने यह भी
बताया है कि सरकार काले धन की वापसी को
लेकर भी चिंतित है उसका कहना है कि अगर

दान दाताओं की पहचान जारी की जाती है तो
यह बैंकिंग के कानून के खिलाफ होगा लेकिन
क्या होगा क्या नहीं होगा वह तो आने वाला
वक्त बताएगा 31 मार्च के पहले पता चल

जाएगा लेकिन अगर इन सब के बीच मोदी सरकार
बिल लेकर आई तो सबसे ज्यादा फंस जाएगी वो
कैसे देखिए खबर में भी लिखा है उसमें लिखा
है कि क्यों सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ नहीं

जाना चाहती है सरकार केंद्र सरकार के
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील
नहीं करने की कई वजहें हैं इसमें सबसे

प्रमुख वजह लोकसभा चुनाव है जिसके लिए कुछ
ही हफ्तों में नोटिफिकेशन भी जारी किया जा
सकता है चुनाव की तारीख का ऐलान होने के
बाद सरकार के लिए संवैधानिक रास्तों के
जरिए अदालत का फैसला पलटना मुश्किल हो

जाएगा एक वजह यह भी है कि सरकार चाहती है
कि जब 2024 में नई सरकार आए तो वह खुद ही
फंडिंग के लिए कोई नई व्यवस्था पेश कर सके

तो 204 में अगर रिपीट हुए तो आप व्यवस्था
ला सकते हैं लेकिन अगर उसके पहले बिल ले

आए तो इतना समय आपके पास नहीं है कि आप
बिल लेकर आइए सत्र बुलाइए और फिर
इलेक्टोरल बॉन्ड को वैद करार दे दीजिए
क्योंकि 31 मार्च तक आपको बताना भी है और
चुनाव के तहत आचार संहिता भी लगने वाली है

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट की तरफ से क्या
निर्देश दिए गए हैं वह भी बता देती हूं
देखिए खबर में लिखा है जागरण की कि 31
मार्च तक चुनावी बॉन्ड का डाटा साझा करने
का निर्देश दिया गया है कोर्ट ने चुनावी
बंड तुरंत रोकने के आदेश दिए हैं अदालत ने

निर्देश जारी कर कहा है कि स्टेट बैंक ऑफ
इंडिया चुनावी बंड के माध्यम से अब तक किए
गए योगदान के सभी विवरण 31 मार्च तक चुनाव
आयोग को दें साथ ही कोर्ट के चुनाव आयोग
को निर्देश दिया है कि 13 अप्रैल तक अपनी

वेबसाइट पर जानकारी को साझा कर दे तो 31
मार्च तक सारा डाटा देना होगा 13 अप्रैल
को चुनाव आयोग को इसको सार्वजनिक करना

होगा इस फैसले पर चुनाव आयोग की तरफ से
बयान भी निकलकर सामने आया है क्या कहना है
राजीव कुवार का बयान सुनिए हमारे दो ही
बेसिक आधार है ट्रांसपेरेंसी
ट्रांसपेरेंसी इंफॉर्मेशन इंफॉर्मेशन

इंफॉर्मेशन सेकंड इवॉल्व इवॉल्व इवॉल्व तो
हमारा सुप्रीम कोर्ट में यही आधार कि वी
आर इन फेवर ऑफ ट्रांसपेरेंसी व्हेन द
ऑर्डर इज कम वी विल टेक एक्शन एज डायरेक्ट
तो सुना आपने ये चुनाव आयुक्त राजीव कुमार

हैं अब सुप्रीम कोर्ट का हंटर चला है तो
खुद भी किस तरीके से बैकफुट पर आए हैं
उनके बयान से अंदाजा लगाया जा सकता है
कहना है कि हमारे तो दो ही आधार हैं एक
इंफॉर्मेशन दूसरा ट्रांसपेरेंसी अब
सुप्रीम कोर्ट ने जो आदेश दिया है जो
ऑर्डर किया है हम उसी के तहत काम करेंगे

आप ट्रांसपेरेंसी की बात कर रहे हैं
इंफॉर्मेशन की बात कर रहे हैं अब यही
इंफॉर्मेशन और यही ट्रांसपेरेंसी को लेकर
जब विपक्ष इन चुनाव आयोग से मिलना चाहता
था तो समय नहीं दिया गया खैर अब मुद्दा वो

नहीं है मुद्दा यह है कि राजीव कुमार को
निर्देश किसी और की तरफ से नहीं सुप्रीम
कोर्ट की तरफ से दिया गया है और सुप्रीम

कोर्ट की बाद चुनाव आयोग काट नहीं सकता है
चुनाव आयोग ने तो कह दिया है कि हम जो
डाटा आएगा उसको सार्वजनिक कर देंगे जैसा
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है वैसा कर देंगे तो
अब अगर ऐसा हो गया तो मोदी सरकार कितनी
बुरी तरीके से फ जाएगी सोचने वाली बात है
क्योंकि पैसा अगर सामने निकल कर सामने आया
और पैसा अगर असंवैधानिक हुआ तो चुनाव भी

असंवैधानिक हो जाएगा ऐसा मैं क्यों कह रही
हूं इसके लिए मैं आपको 2019 लोकसभा चुनाव
के आंकड़े बता देती हूं खबर आप देखिए
एबीपी की देखिए इसमें लिखा है क्या आंकड़े
इसे सुनकर आपकी आंखें भी फट्टी की फट्टी

रह जाएंगी देखिए इसमें लिखा है कि 2019
लोकसभा चुनाव था दुनिया का सबसे महंगा
चुनाव इतने पैसे खर्च हुए थे आप पढ़कर चौक
जाएंगे तो खबर में लिखा भी है कि 2019 के
दौरान करीब 8 अरब डॉलर यानी 55000 करोड़

रुपए खर्च किए गए जिसके बाद इस चुनाव ने
खर्च के मामले में दुनिया भर के देशों के
रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए ये खर्च 2016 के
अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव से भी ज्यादा है

इसमें करीब 6.5 बिलियन डॉलर का खर्च हुआ
था तो कितना खर्च हुआ था आप अंदाजा आंकड़े
से लगा सकते हैं लगभग
55000 करोड़ 2019 में दुनिया में इतना
पैसा कभी चुनावों में नहीं खर्च हुआ जितना

भारतीय जन जता पार्टी ने कर दिया और जब
पैसा नहीं है तो 2024 लोकसभा चुनाव कैसे
पार करेगी मोदी सरकार सबसे बड़ा सवाल यही

खड़ा होता है दावा तो कर दिया गया है अबकी
बार 400 पार अब यह 400 पार कैसे होगा
सोचने वाली बात है फिलहाल मोदी सरकार
तैयारी में तो है कि फैसला पलट दिया जाए
क्या यह फैसला पलट पाएगा सुप्रीम कोर्ट के

इस फैसले के तहत क्या मोदी सरकार फंस
जाएगी इस सवाल के जवाब में इस पूरी खबर पर
इस रिपोर्ट पर और चुनाव आयोग के बयान पर
आप क्या सोचते हैं आपकी क्या राय है हमें
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