मोदी को रोकने के लिए किसान के नाम पर स्टंट !

किसानों से तीसरे राउंड की मीटिंग में भी
कोई सलूशन नहीं निकला संडे को चौथे राउंड
की एक बार फिर से बैठक होगी बात जहां खत्म
हुई वहां से आगे बढ़ाई जाएगी तब तक किसान
शंभू बॉर्डर पर ही डटे रहेंगे दिल्ली कूछ

पर फिलहाल किसानों ने ब्रेक लगा दिया है

के ऊपर है तो किसान नेताओं पर भी है देश
का किसान सच में क्या सोच रहा है वो किसके
साथ खड़ा है और अगर वोट देना पड़ा तो फिर
यह किसान किसे वोट देगा यह सब हम आपको
समझाएंगे इस रिपोर्ट
में लोकसभा चुनाव से सा दिन पहले किसानों
को सड़क पर लाने वाला कौन
है मोदी के खिलाफ शंभू बॉर्डर पर किसानों
को भड़काने वाला कौन

है क्या 24 के चुनाव में किसान आंदोलन से
बीजेपी को नुकसान
होगा मोदी को रोकने के लिए विरोधी किसान
2.0 लेकर
आए फर्क सिर्फ इतना है कि किसान के नाम पर
आंदोलन करने वाले संगठनों के नाम बदल गए
हैं किसान भाइयों के चेहरे पर मास्क लगाकर

रुमाल के पीछे चेहरा छिपाकर ट्रैक्टर को
बुलडोजर की तरह चलाने की ट्रेनिंग देकर
भेजने वाला कौन है
जाट किसान नेता राकेश टिकैत इस बार के
किसान मार्च में नहीं है गुरनाम सिंह चंरी
भी किसान आंदोलन 2.0 से अलग है 2020 में
सिंघु बॉर्डर पर तंबू गाड़ने वाले लेफ्ट
के हन्नान मोल्ला भी इस बार सीन में नहीं

दिख रहे इस बार पंजाब के किसान नेता जगजीत
सिंह दलेवाल और सरवंत सिंह पंडेर के हाथ
में कमांड
है
कहा जा रहा है कि किसान एमएसपी को लेकर
गुस्से में है यदि किसान इतने गुस्से में
ही है तो फिर पहले आंदोलन करने वाले किसान

नेता क्यों नहीं आए जहां तक बात एमएसपी की
है पिछले 10 साल में प्रमुख खाद्यान का
न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी 40 से
60 पर तक बड़ा ही है अगर आपको कोई डाउट है
तो यह आंकड़ा देख

लीजिए 201415 में गेहूं का एमएसपी 00
प्रति क्विंटल था जो 2024 25 में बढ़कर
275 प्रति क्विंटल हो गया है इसी तरह धान
का एमएसपी ₹1 360 प्रति क्विंटल से बढ़कर
2183 हो गया है मक्का का ₹10 प्रति
क्विंटल से बढ़कर
90 हो गया है इसी तरह अरहर मूंग जौ चना
मसूर दाल और सरसों के भी एमएसपी में
बढ़ोतरी हुई

है जिंदाबाद 2014 के बाद कृषि पर बजट
आवंटन भी बढ़ा है और इसके साथ-साथ किसान
परिवारों की औसत आय भी बढ़ी
है यूपीए के समय कृषि पर बजट आवंटन 27000
करोड़ रुपए था मोदी सरकार ने इसे 1.24 लाख
करोड़ रुपए तक
पहुंचाया 201314 में किसान परिवारों की

औसत आय
6426 थी 201819 में किसान परिवार की आमदनी
बढ़कर
10218 हो गई यानी 5 साल में 000 की मासिक
वृद्धि इस बार भले ही डल्ले वाल और पंडेर
फ्रंट पर दिख रहे हैं लेकिन इनका बैक

सपोर्ट किसके पास है आखिर यह किसकी भाषा
बोल रहे
हैं ग्राफ बहुत मंदर दे करके
नुकसान ग्राफ न
बहुत मका बड़ा थो ग्राफ
ब थो
ग्र इनकी भाषा को समझिए मोदी का ग्राफ कम
करना है दिल्ली कुछ करो दिल्ली को रो य
कोई किसान का नारा तो नहीं हो सकता इसके
पीछे दिमाग किसी और का ही है किसानों को
तो सिर्फ मोहरा बनाया जा रहा है ऑर्डर तो
कहीं और से आ रहा है तभी तो हरियाणा के

सीएम मनोहर लाल खट्टर को कहना पड़ा कि
किसानों ने तो आक्रमण जैसा माहौल बना
दिया सीधा-सीधा पॉलिटिकल एक स्टेटमेंट है
ये और पॉलिटिकल स्टेट में इस प्रकार से
कोई एक प्रदर्शन करके और वो भी एक इस
प्रकार का एक खतरनाक दृश्य बना कर के उस
प्रदर्शन करने से क्या जनता मोदी जी से

दूर हट जाएगी बल्कि यह तो उसमें और बढ़ा
रहे हैं देखा जाए तो आज आम जनता में यह

मैसेज जा रहा है कि यह तरीका ठीक नहीं
लोकतांत्रिक तरीका नहीं है मैं अपने पंजाब
के किसान भाइयों को यह निवेदन करता हूं
केंद्र वाली बातें कब तय हो कब नहीं हो
पहले तो स्टेट गवर्नमेंट में हमारी तरफ
देख ले जो कुछ हम कर रहे हैं हमने इतने
सारे किसानों के लिए काम किए हमारा किसान
संतुष्ट है यही बातें कम से कम पंजाब
सरकार को मनवा ले हम 14 फसले अपनी ये एमसर
खरीदते हैं वहां दो फसलें सेंटर वो तो

खरीदनी खरीदनी क् सेंटर का एक मैंडेट है
धान है और गेहूं है तीसरा अगर कह सकते तो
गन्ना है गन्ने पर को भी अशोर प्राइस के
ऊपर लेते हैं हमारी मिले हैं सरकारी हैं
या कॉपरेटिव करती हैं इसके अलावा पंजाब
में तो आप कोई फसल नहीं
खरीदते अगर ऐसा नहीं होता तो किसान आंदोलन
में कांग्रेस का झंडा लेकर घूमने वाले इस
प्रदर्शनकारी का वीडियो क्यों वायरल
[संगीत]
होता बढ़िया सर च लगी आपको सर मेरे एक आंख
में और दोनों हाथों पर छ लगे हुए गोलि अगर

ऐसा नहीं होता तो राहुल का फोन कॉल
प्रदर्शनकारियों के मोबाइल पर क्यों
जाता पुलिस वालोने ड गो हिट स्पीकर ऑन
करके कैमरे के सामने राहुल का फोन किसान
को क्यों पकड़ाया जाता अरे भाई आपकी आख
दिख रहा है आपको ठीक से आ डमेज हो गई है
नहीं डैमेज तो नहीं है सर ऊपर जो पलक होती

है उसके ऊपर चोट राहुल ने हालचाल पूछा वो
तो ठीक है मगर वह चाहते तो प्राइवेटली भी
कॉल कर सकते थे चोट लगी आपको सर मेरे एक
आंख में और दोनों हाथों प छर्रे लगे हुए
हैं गोलि के सर उन्होंने ऐसा नहीं किया
क्योंकि वो चाहते थे सब कैमरे पर

दिखे भैया मैं ना ये आर्मी में थे गुरमीत
सिंह यहां इस हॉल में काफी लोग एडमिट हैं
और एक गुरमीत सिंह से आपकी बात करवाता हूं
भैया हेलो फार्मर है फार्मर यह फार्मर है
एक्स आर्मी मैन है फार्मर है इसके इससे
बात इनसे बात करवाता हूं भैया हॉस्पिटल

में हूं
बलेट ये एक मिनट करें
आप सत श्री काल जी कैसे आप बढ़िया सर कहां
चोट लगी आपको सर मेरे एक आंख में और दोनों
हाथों पर छर्रे लगे हुए हैं गोलियो के
सर अच्छा पुलिस वालों ने मारे पुलिस वालों
ने डायरेक्ट गोली हिट की है
जी अच्छा आंख में तो नहीं लगी ना आंख में
सर डायरेक्ट एक छर्रा लगा हुआ है बाकी हाथ
दोनों हाथों प है जी अरे भाई आपकी आंख दिख
रहा है आपको ठीक से या आंख डमेज हो गई है
नहीं डैमेज तो नहीं है सर ऊपर जो पलक होती
है उसके ऊपर
चोट सवाल है कि इन किसानों के पीछे छिपकर
मोदी विरोधी चिंगारी कौन भड़का रहा
है किसान आंदोलन का राजनीतिक फायदा किसे
मिलने वाला

है मोदी सरकार किसानों के कूद करने से
पहले ही लगातार उनसे बात कर रही थी लेकिन
बात नहीं
बनी इसके बाद किसान ट्रैक्टर ट्रॉली और
लाउड स्पीकर के साथ दिल्ली के लिए निकल
पड़े ऐसे में हरियाणा सरकार से पहले पंजाब

सरकार का फर्ज था कि किसान को रोके और
बातचीत के लिए
मनाए ऐसा करने की बजाय पंजाब पुलिस ने
उन्हें नहीं रोका उल्टे आगे बढ़ने का
रास्ता क्लियर कर
दिया पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार
है वहीं से मोदी के खिलाफ दिल्ली चलो वाला
नारा बुलंद
हुआ पंजाब में 2019 के चुनाव में कांग्रेस
को 40 दि % वोट शेयर के साथ आठ सीटें मिली
थी यानी केरल के बाद पंजाब ऐसा राज्य था
जहां कांग्रेस ने सबसे ज्यादा सीटें जीती
थी अकाली दल को 27.4 5 पर वोट के साथ दो
सीट मिली बीजेपी को 973 पर वोट शेयर के
साथ सिर्फ दो सीटें मिली आपको 7.38 पर वोट
के साथ एक सीट
मिली 20202 में संयुक्त किसान मोर्चा के
बैनर तले 500 से ज्यादा किसान संगठनों ने
केंद्र के तीन कृषि कानूनों के विरोध में

आंदोलन
किया इसके तुरंत बाद 2022 में पंजाब में
विधानसभा चुनाव हुए सबसे ज्यादा फायदा
किसे हुआ यह आप देख सकते
हैं आम आदमी पार्टी ने पंजाब की कुल 117

सीटों में से2 पर जीत दर्ज की आपको
42.1 पर वोट मिले कांग्रेस
में मजबूत है लेकिन राम लहर में दिल्ली की
सात सीटों पर बीजेपी को हराना संभव नहीं
है ऐसे में आपका पूरा फोकस पंजाब पर है
कमोवेश कांग्रेस की भी यही स्थिति है
कांग्रेस को भी पंजाब किसान आंदोलन के
बहाने उम्मीद नजर आ रही
[संगीत]

है कांग्रेस और आम आदमी पार्टी दोनों को
पता है कि पहले किसान आंदोलन के बाद पजाब
को छोड़कर जिन चार राज्यों में 2022 में
विधानसभा चुनाव हुए किसानों ने इन चुनावों
में बीजेपी के बहिष्कार की घोषणा की थी
लेकिन किसानों की इस अपील का जनता पर कोई
असर नहीं हुआ
था

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