यही तो है प्यारे, चंदे का धंधा |

नमस्कार मैं रवीश कुमार कांग्रेस पार्टी
ने आज वित्त मंत्री को पत्र लिखकर पूछा है
कि क्या कंपनियों पर छापे डलवा करर उन्हें
मजबूर किया जा रहा है कि वे दूसरे दलों को
चंदा ना दें केवल बीजेपी को चंदा दें
वित्तमंत्री कांग्रेस के आरोपों का क्या
जवाब देंगी अभी तक तो उन्होंने इलेक्टोरल

बॉन्ड को रद्द किए जाने के फैसले पर भी
कुछ नहीं कहा है वित्तमंत्री को बताना
चाहिए कि इलेक्टोरल बॉन्ड जैसा असंवैधानिक
कानून उनकी सरकार क्यों लेकर आई थी कोर्ट

के आदेश के अनुसार बैंकों से सारी
जानकारियां कब तक चुनाव आयोग तक पहुंच
जाएंगी इस काम के लिए उनका मंत्रालय क्या
कुछ कर रहा है मगर कोई जवाब नहीं हम आज के
वीडियो में कांग्रेस के इन आरोपों की बात
करेंगे लेकिन पहले सवाल प्रधानमंत्री से
सुप्रीम कोर्ट के फैसले को आए हुए सप्ताह
भर हो गए प्रधानमंत्री मोदी ने अभी तक इस
पर क्यों नहीं कुछ कहा है इलेक्टोरल बंड

ने भारत की राजनीति को एक तरफा बना दिया
यह कानून कहीं से पारदर्शी नहीं था कोर्ट
ने इसे रद्द कर दिया मगर प्रधानमंत्री
मोदी ने एक शब्द नहीं कहा है इस कानून की
डिजाइन ही ऐसी थी कि विपक्ष आर्थिक रूप से

कमजोर हो जाए और दूसरी तरफ बीजेपी के पास
इतना पैसा आ जाए कि उसके प्रचार तंत्र और
चुनावी तंत्र का कोई मुकाबला कर ही ना पाए

इस इलेक्टोरल बंड ने भारत की राजनीति को
लंबे समय तक के लिए कमजोर कर दिया है और
जब यह चोरी पकड़ में आ गई इसे रद्द कर
दिया गया तो क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र

ब भी
उनसे सवाल पूछा जाता है वे किसी भव्य
कार्यक्रम में नजर आने लग जाते हैं जहां
उनकी लोकप्रियता प्रचंड नजर आती है मगर
सवाल उनकी लोकप्रियता को लेकर नहीं है

सवाल है कि संवैधानिक पद पर रहते हुए या
असंवैधानिक काम उन्होंने क्यों किया इसकी
नैतिक जिम्मेदारी कौन
लेगा जब से इलेक्टोरल बंड आया है तब से

कहा जा रहा था कि इसके जरिए कॉरपोरेट को
कंट्रोल किया जा रहा है ताकि चंदे का पैसा
किसी दूसरे दल को ना जाए सारे आंकड़े
बताते हैं कि सिस्टम से सबसे अधिक चंदा
बीजेपी को मिला

6500 करोड़ रुपए मिले हैं और अब यह बात
सामने आ गई है कि उन कंपनियों ने भी

बीजेपी को चंदे दिए हैं जिन पर ईडी और
आईटी विभाग के छापे पड़े कांग्रेस ने
इन्हीं बातों को लेकर वित्तमंत्री को पत्र
लिखा है ऐसी 30 कंपनियां हैं जिन पर छापे
पड़े और जिन्होंने बीजेपी को 335 करोड़

रुपए का चंदा दिया है मोटे तौर से बात यह
है कि
201819 और 2020 2 वित्तीय वर्षों में इन

चार वर्षों
में करीब 30 निजी कंपनियों के
खिलाफ ईडी की कार्रवाई की शुरुआत हुई
सीबीआई की जांच की शुरुआत हुई इनकम टैक्स
की जांच की शुरुआत हुई करीब 30 कंपनी
इसके नाम भी इलेक्शन कमीशन के वेबसाइट पर
मौजूद
है आप देख सकते हैं यह प्रकाशित भी हुआ है

कुछ कंपनियों के नाम 30 कंपनियां
है जिनके खिलाफ ईडी सीबीआई और इनकम टैक्स
छोड़े गए हैं और इनसे इन चार सालों में
बीजेपी पार्टी को
335 करोड़
रुपया चंदा मिला
है एक करोड़ नहीं 10 करोड़ नहीं 100 करोड़
नहीं
35 करोड़ रुपया और यह डिक्लेयर्ड है यह
घोषित किया गया है बीजेपी की ओर से और यह

सब जानकारी इलेक्शन चुनाव कमीशन के
वेबसाइट पर आपको मिल जाएगा 30 कंपनियां है
इन चार साल
में 335 करोड़ रुपया चंदा बीजेपी को मिला

है और हम समझते हैं यह मानना है बिल्कुल
साफ सपूत है कि यह हफ्ता
वसूली और कुछ नहीं

है कुछ ऐसी कंपनियां हैं जो 2018 के पहले
कभी बीजेपी पार्टी को चंदा नहीं दी
थी 2018 के बाद उन्होंने चंदा देना शुरू
किया कुछ ऐसी पार्टिया हैं जिन कुछ ऐसी
कंपनिया हैं जिनके
खिलाफ जो कार्रवाई शुरू की गई है वह
कांग्रेस पार्टी को चंदा दिया करते थे

पहले व कांग्रेस पार्टी को भी चंदा देना
बंद कर दिए
हैं कंपनियों के खिलाफ जो कार्यवाई करनी
है आप कीजिए अगर कोई कानून का उल्लंघन हुआ
है तो जरूर कार्यवाई होनी चाहिए
पर धमकी
देकर ईडी के द्वारा धमकी देकर सीबीआई के
द्वारा धमकी देकर और इनकम टैक्स के द्वारा

 

धमकी देकर उन्हीं कंपनियों से उन्हीं निजी
कंपनियों से चंदा देना मैं समझता हूं यह
बिल्कुल साफ दर्शाता है कि मूल मकसद क्या
था ईडी सीबीआई और इनकम टैक्स की जांच का
मूल म मकसद यही था हफ्ता वसूली यह
ब्लैकमेल की राजनीति का एक मिसाल

है
कंपनियों को डराकर चचंदा लेना और डराकर यह
भी कहना कि किसी और को नहीं देना है यह
काम खतरनाक है इलेक्टोरल बंड ने बीजेपी को
आर्थिक महाशक्ति के रूप में स्थापित कर
दिया है सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत चार

हफ्ते के भीतर जब सारी जानकारियां चुनाव
आयोग की वेबसाइट पर आएंगी कि किस कंपनी ने
किस पार्टी को कितने करोड़ रुपए दिए हैं
कितनी बार दिए हैं तब सब कुछ साफ हो जाएगा
वकील कपिल सिब्बल कहते हैं कि सरकार को
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करना
पड़ेगा मगर जिस तरह की चुप्पी है उससे कोई

दावे के साथ नहीं कह पा रहा कि ऐसा होने
ही जा रहा है न्यूज़ मिनट ने अपने दम पर
आप दर्शकों के सहारे और सहयोग से
पत्रकारिता करने का काम किया है इसकी
वेबसाइट पर तीनों रिपोर्ट मौजूद है न्यूज
मिनट की धन्या राजेंद्रन रागम कार्तिकेयन

की यह रिपोर्ट उन तमाम सवालों को सही
साबित करती है जो इलेक्टोरल बंड को लेकर
पूछे जा रहे हैं न्यूज़ मिनट ने बताया है
कि जिन 30 कंपनियों ने 4 साल में बीजेपी
को 335 करोड़ रुपए दिए हैं उनमें से 23

कंपनियां ऐसी हैं जिन्होंने छापा पढ़ने के
बाद बीजेपी को
187 करोड़ रुपए का चंदा दिया उसके पहले यह
कंपनियां बीजेपी को चंदा नहीं देती थी यही
नहीं इन 23 कंपनियों में से कम से कम चार
ऐसी हैं जिन्होंने कार्रवाई के चार महीने

के भीतर कुल नौ करोड़ रुपए का चंदा दिया
इनमें से कम से कम छह कंपनियां ऐसी हैं
जिन्होंने पहले भी भाजपा को चंदा दिया था
लेकिन छापेमारी के बाद के महीनों में चंदे
की रकम और बढ़ गई छह अन्य कंपनियां ऐसी

हैं जिन्होंने कुछ साल पहले भाजपा को चंदा
दिया था लेकिन एक साल चंदा रोक दिया और
रोकते ही उन्हें केंद्रीय एजेंसियों की
कार्रवाई का सामना करना पड़ा न्यूज़ मिनट
और न्यूज़ ल्री ने थोड़े महीने पहले
इन्वेस्टिगेशन हमने शुरू किया था हमने

क्या किया कि यह जो इलेक्टोरल डोनेशंस है
हमने बीजेपी का लिस्ट ईसीआई वेबसाइट से
उठा के हमने यह देखा कि फॉर एग्जांपल द
न्यूज़ मिनट जो हमारे हेड ऑफिस बेंगलुरु
में हमने साउथ इंडिया के कंपनीज के बारे

में पढ़ा हमने देखा कि किन-किन कंपनियों
ने एक करोड़ एक करोड़ रुपए के ज्यादा दिया
है बीजेपी को तो वो लिस्ट हमने बनवाया
2018 से लेकर 2023 तक उस लिस्ट को बनवाने
के बाद हमने यह देखने की कोशिश की कि ये
सारे कंपनीज के मालिक कौन है उसमें लगभग

40 पर बीजेपी लीडर्स जैसे कि राजी
चंद्रशेखर पीसी मोहन यह सब लोकल यहां के
लीडर्स हैं उन लोगों ने उनके कंपनियों के
द्वारा डोनेशंस दिए हैं यह सब लीगल है तो
हमने उनको इस लिस्ट से हटा दिया फिर जो 60
पर कंपनीज है उसमें थोड़े से कंपनीज हम को

पता नहीं कि उन लोगों ने क्यों दिया लेकिन
कॉर्पोरेट देते हैं पॉलिटिकल डोनेशंस तो
उसमें कोई शंखा नहीं थी फिर ऑलमोस्ट 30 टू
40 पर कंपनीज जब हमने देखा हमको यह मालूम

पड़ गया कि एक पैटर्न है अगर फॉर एग्जांपल
2018 को एक कंपनी पे रेड होता है या

इन्वेस्टिगेशन शुरू होता है इ इनकम टैक्स
के और ईडी का अगर इन्वेस्टिगेशन या रेड
होता है तो वो तुरंत ही कुछ महीने बाद
बाजपा को पैसे देते हैं नहीं तो एक अ एक

साल के बाद पैसे देते हैं फॉर एग्जांपल एक
कंपनी है यहां पर सालार पुरिया नाम की
बेंगलुरु में एक कंपनी है उन लोगों ने
202122 में ऑलमोस्ट फ सिक्स करोड़ दिए हैं
उनकी कंपनी के तरफ से और उनके सब्सिडरी की
तरफ से तो हमने जब देखा कि क्यों यह पैसे

दे रहे हैं क्योंकि 2014 से जब बाजपा
एक्चुअली फर्स्ट टाइम गवर्नमेंट में आए तब
से लेकर ये सालारपुरिया ने 2021 2020 तक
नहीं दिया था तो हम यह जानने की कोशिश कर

रहे थे क्यों इस इस बार क्यों दिया तब
हमें पता चला कि 2018 को एक एक और कंपनी
हीरा ग्रुप नाम के एक कंपनी है हैदराबाद

में उनके ऊपर ईडी ने एक इन्वेस्टिगेशन
शुरू किया था और ईडी उस समय सालारपुरिया
को भी इन्वेस्ट कर रहे थे शायद इसीलिए
सालारपुरिया ने डोनेट किया ऐसे बहुत सारे
कंपनी है फ्यूचर गेमिंग सर्विसेस व
कोयंबतूर की बेस्ड है उनका ओनर का नाम उस

कंपनी का ओनर का नाम है सैंटियागो मार्टिन
वो यहां के लॉटरी किंग माने जाते हैं उनकी
कंपनी पे रेड हुआ अगले ही साल उन्होंने
100 करोड़ 100 करोड़ दिया प्रूडेंट
इलेक्टोरल ट्रस्ट को यह प्रूडेंट

इलेक्टोरल ट्रस्ट जो है वो दिल्ली में
बेस्ड है वो उनके पैसे से ऑलमोस्ट 80 टू
90 पर बीजेपी को ही देते हैं सो फ्यूचर
गेम्स क्या करते हैं 100 करोस ट्रस्ट में
डालते हैं और ट्रस्ट बीजेपी को देते हैं

और हमने दो और बात देखी क्या क्या यह
कंपनियां कांग्रेस को पैसे दे रहे थे सो
इस 30 में हमने सिर्फ तीन कंपनियों को
देखा है जो कांग्रेस को भी पैसे दे रहे थे
हमने यह भी देखा कि 2014 से अब तक इन
लोगों ने कितने बार दिया तो वो लोग सिर्फ

उस उसी साल जब उनका रेड हुआ था उसी साल दे
रहे थे बाकी साल नहीं दे रहे थे बीजेपी
बोलते है कि वो भ्रष्टाचार के खिलाफ है
उनके उनके पार्टी भ्रष्टाचार के खिलाफ है

तो यह सारे कंपनियां अगर भ्रष्ट है और
आईटी और ईडी इनके खिलाफ एक्शन दे रहे हैं
तो वही बीजेपी को भी पैसे दे रहे हैं तो
यह थोड़ा सा अजीब जरूर है अब आप बताइए
क्या इससे शक नहीं गहराता है कि छापा
पड़ने के बाद अगर कंपनियां बीजेपी को चंदा

दे रही हैं चंदे की राशि बढ़ा दे रही हैं
तो छापे का मकसद क्या हो सकता है क्या
छापों से डराकर इन कंपनियों को मजबूर किया
गया कि वे केवल बीजेपी को चंदा दे विपक्ष
के किसी दल को ना दे मध्य प्रदेश स्थित एक

सबसे तेजी से दान दिया कंपनी के प्रमोटरों
को जमानत मिलने के कुछ ही दिनों बाद यह सब
काम हो
गया क्या आप चाहते हैं कि भारत के
लोकतंत्र के डिब्बे में कोई सवारी ही ना
बचे केवल ट्रेन रह जाए और ट्रेन का

ड्राइवर रह जाए बाकी यात्रियों से खाली या
लोकतंत्र का डिब्बा क्या आपको डरावना नहीं
लगता अगर इसकी सीट पर अलग-अलग विपक्षी दल
नहीं होंगे तो आगे की लोकतंत्र की यात्रा

भूतहा हो जाएगी मेरी इस बात को लिखकर अपने
पर्स में रख लीजिए वैसे भी उसमें अनाज
खरीदने के पैसे तो है नहीं यह सवाल बेहद
गंभीर है अगर यह सब होता रहा तो भारत

के
लोग लोकतंत्र में कोई विपक्षी दल बचेगा ही
नहीं और बिना विपक्ष के लोकतंत्र रहेगा भी
नहीं भारत का लोकतंत्र इस बोगी के बाहर भी
उजाड़ की तरह नजर

आएगा कभी किसी राजनीतिक दल का खाता बंद
नहीं हुआ है किसी पर इनकम टैक्स का नोटिस
इतनी भारी मात्रा में नहीं आया है और इस
तरह किसी निजी कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई
नहीं की गई है ताकि उनसे आप हासिल
करें तो

हमने इसकी
जांच की मांग की
है हमने सवाल भी उठाए हैं वित्त मंत्री से
जो आप

पढ़ेंगे तो हमने तीन सवाल उठाए हैं एक
सवाल तो यह है कि क्या आप आपने तो
अर्थव्यवस्था पर श्वेत पत्र प्रकाशित किया
क्या आप हफ्ता वसूली पर एक श्वेत पत्र
प्रकाशित करेंगे

क्या जनता को विश्वास में लेंगे कि आपके
पार्टी को चंदा मिला है कहां-कहां से चंदा
मिला है और यह विषय और भी महत्व रखता है
क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि
इलेक्टरल बॉन्ड

परियोजना हमारे संविधान के खिलाफ
है दूसरा जो सवाल हमने उठाया है कि आप अगर
जैसे कि आप दावा करते हैं कि आप
का फाइनेंसिंग दल का फ पार्टी का

फाइनेंसिंग बिल्कुल पारदर्शिता से होता है
आपको कोई छुपाने की जरूरत नहीं है अगर यह
बात सही है कि जो जो जानकारी आई है चुनाव
आयोग के

वेबसाइट में जो जानकारी ली गई है इन न्यूज
पोर्टल के द्वारा क्या उसका आप खंडन
करेंगे क्या आप उसका खंडन करेंगे कि इस
कंपनी ने जिसके खिलाफ सीबीआई ईडी और इनकम
टैक्स की जांच हो रही है उसी कंपनी से
आपको यह चंदा नहीं मिला है क्या आप यह
इससे इंकार कर सकते हैं कि पिछले चार

सालों में 335 करोड़ रुपया बीजेपी के खाते
में आया है यह इलेक्टरल बंड के द्वारा
नहीं यह ईडी बंड है सीबीआई बंड है इनकम
टैक्स बंड है इलेक्टरल बंड नहीं यह

कंपनियों के नाम भी सब लोग जानते हैं इस
वेबसाइट के माध्यम से और तीसरा सवाल जो
हमने कहा है कि अगर आपकी नियत साफ है अगर
आपने कुछ गलती नहीं की है कि क्या आप एक

सुप्रीम कोर्ट द्वारा मॉनिटर्ड
जांच को स्वीकार करेंगे क्योंकि न्यूज
लांड्री और न्यूज मिनट ने मिलकर चुनाव
आयोग के रिकॉर्ड केस फाइलों और वित्तीय
विवरणों की जांच की है इस पड़ताल से
सुप्रीम कोर्ट की बात भी सही निकली जो

अदालत ने 15 फरवरी के अपने आदेश में कहा
है कोर्ट ने कहा है कि चुनावी बंड योजना
से परस्पर लेन देन वाली व्यवस्था को
बढ़ावा मिलता है हर रिकॉर्ड उठाकर देखिए

बीजेपी को ही ज्यादा चंदा मिल रहा है
चुनावी ट्रस्ट से जो चंदा मिलता है उसमें
भी 70 प्र से अधिक की राशि बीजेपी को मिल
रही है बीजेपी को पिछले 10 वर्षों में
विभिन्न ट्रस्टों के माध्यम से

93 करोड़ रुपए से अधिक का चंदा मिला है
क्या यह भयानक नहीं है कि जिन 32 कंपनियों
ने चंदा दिया उनमें से केवल तीन कंपनियों
ने कांग्रेस को चंदा दिया है यह आंकड़े
वित्तीय वर्ष 201819 से 20222 के बीच के

हैं यही नहीं 2013 और 2023 के बीच 10
वर्षों में कांग्रेस को इलेक्टोरल
ट्रस्टों के जरिए जो रकम मिली है उसकी
राशि भाजपा को 1 साल के भीतर मिली राशि से
भी कम है एक बार फिर से समझिए जो कांग्रेस

को 10 साल में मिला उतना बीजेपी को 1 साल
में मिला यह अंतर आया है तो जाहिर है
कांग्रेस आर्थिक महाशक्ति बन चुकी बीजेपी
से मुकाबला नहीं कर पाएगी कांग्रेस का

कहना है कि यह सब हुआ है इलेक्टोरल बंड और
छापों के जरिए कंपनियों पर दबाव डालकर यही
नहीं ऐन वक्त में कांग्रेस पार्टी के खाते
जब्त कर लिए गए कांग्रेस ने आरोप लगाया है
कि बैंकों को मजबूर किया गया कि पार्टी के
खाते से पैसे सीधे सरकार के पास पहुंच

जाएं आज मुझे बड़े दुख के
साथ आप सब लोगों को और आप लोगों के माध्यम
से देश की जनता को यह सूचित करना पड़ रहा
है कि भाजपा की सरकार

ने सभी अपनी अपोजिशन पार्टीज के खिलाफ और
मुख्य अपोजिशन पार्टी के खिलाफ आर्थिक
आतंकवाद शुरुआत कर
दी हमारे

6588 करोड़
6588 करोड़ के ऊपर परसों भाजपा की सरकार
इनकम टैक्स अथॉरिटीज ने डाका डाल करके
हमारे पार्टी के कार्यकर्ताओं के पैसे जो
उन्होंने अपनी स्वेच्छा से हमारे को

मेंबरशिप के माध्यम से एनएसआई के
स्टूडेंट्स ने अपनी जेब खर्ची काट
करके मेंबरशिप के माध्यम से क्राउड फंडिंग
जिसका 95 पर 00 से कम हम लोगों के पास में

आया था वह पैसा हम लोगों के बैंक अकाउंट
में जो जमा था उस परे डाका डाल कर के चोरी
करके वह पैसा मोदी सरकार अपने पास में
लेकर के चली गई

मैं बताना चाहूंगा यह पांच अकाउंट्स है
जिससे कि पैसे लिए गए
हैं मैंने आपको बताया था पिछली बार कि
हमने इनकम टैक्स एपलेट ट्रिब्यूनल में
अर्जी लगाई है इनकम टैक्स एपलेट ट्रिबल
में हम लोग 14 तारीख को उसी दिन चले गए थे

जब हमारे बैंक्स में फ्रीज करने का नोटिस
आया था और एपलेट ट्रिब्यूनल ने हमारे 21
तारीख को हियरिंग लगाई थी कल दोपहर को

2:30 बजे की उससे ठीक एक दिन पहले इनकम
टैक्स के ऑफिसर्स बैंक में जा जा कर के एक
एक बैंक के ब्रांच में जाकर के वहां पर
धमकी दे दे कर के मैनेजर्स को कि यह पैसा

हम आपसे पर्सनली वसूल करेंगे अगर आपने
हमारे को नहीं दिया ऐसा कह कह करके
उन्होंने पांच बैंक्स के ब्रांचेस से
65.0 करोड़ 65 करोड़ 88 लाख

8474 उन्होंने इन बैंकों से वसूल कर लिए
डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से कंपनियों पर
छापे डालकर उनसे चंदे की रकम ली जा रही थी
चंदे की रकम दूसरे दलों को ना जाए इसकी
व्यवस्था की जा रही थी इससे विपक्ष को
आर्थिक रूप से लाचार कर दिया गया दूसरी
तरफ विपक्षी नेताओं के यहां छापे डालकर

उन्हें भयभीत कर दिया गया वे कांग्रेस और
दूसरे दल छोड़कर बीजेपी में भागने लगे
पैसा और नेता दोनों का पलायन बीजेपी की
तरफ शुरू हो गया कांग्रेस के इन आरोपों पर
वित्त मंत्री के जवाब का आप इंतजार करते

रहिए आम आदमी पार्टी का यह आरोप हवाहवाई
कैसे लग सकता है कि विपक्ष का गठबंधन
तोड़ने के लिए गिरफ्तारी का भय दिखाया जा
रहा है आम आदमी पार्टी ने आज आरोप लगाया
कि कांग्रेस के साथ गठबंधन को रोक ने के
लिए पहले ईडी का डर दिखाया गया अब सीबीआई

का डर दिखाया जा रहा है हम सब देख रहे हैं
के पिछले दो ढाई महीने से एकएक करके एक एक
करके अब सात बार अरविंद केजरीवाल जी को

जनता पार्टी शासित केंद्र सरकार को समझ
में आ गया है कि वह ईडी के माध्यम से
अरविंद केजरीवाल जी को गिरफ्तार नहीं कर
पा रहे हैं तो

अब भारतीय जनता पार्टी शासित केंद्र सरकार
सीबीआई को सामने लेकर आ रही है और अब
सीबीआई के माध्यम से अरविंद केजरीवाल जी
को अरेस्ट करने की कोशिश करने वाली
है हमारे पास विश्वसनीय सूत्रों से यह खबर
है कि सेक्शन 41 ए सीआरपीसी में सीबीआई का

नोटिस या तो आज या तो मंडे को अरविंद
केजरीवाल जी को आएगा और उस नोटिस के बाद
अरविंद केजरीवाल जी को गिरफ्तार कर लिया
जाएगा सीबीआई के द्वारा और एक बार सीबीआई
ने गिरफ्तार कर लिया तो जैसे मनीष
सिसोदिया जी को विजय नायर जी को सीबीआई की
गिरफ्तारी के बाद कुछ ही दिनों में ईडी
द्वारा भी गिरफ्तार कर लिया जाता

है हमें बार-बार एक ही संदेश आ रहा है कि
कांग्रेस के साथ अलायंस मत करो सीट
शेयरिंग मत करो इंडिया अलायंस दूर हट जाओ
वरना अरविंद केजरीवाल जी को सीबीआई द्वारा
आने वाले कुछ ही दिनों में गिरफ्तार कर
लिया जाएगा सितंबर 2022 में इंडियन

एक्सप्रेस के दीप्ति मन तिवारी ने अपनी
रिपोर्ट में दिखाया था कि 2014 के बाद से
राज नेताओं पर ईडी के केस में चार गुना की
वृद्धि हुई और जिन नेता ओ के खिलाफ कारवाई
हुई उनमें से 95 फीदी विपक्ष के नेता हैं
2024 का चुनाव आपके सामने है विपक्ष

आर्थिक रूप से कमजोर किया जा चुका है
विपक्षी दलों को राजनीतिक रूप से तोड़
दिया गया है गोदी मीडिया विपक्ष को बराबर
की जगह नहीं देता है विपक्ष मैदान में
खड़ा नजर नहीं आए इसका सारा इंतजाम चुनाव
शुरू होने से पहले कर दिया गया है चारों
तरफ आप को भाजपा के ही पोस्टर और प्रचार
नजर आएंगे चुनाव शुरू होने से पहले हाथ

पांव बांधकर विपक्ष को तालाब में फेंक
दिया गया है ताकि वह डूब ही जाए नमस्कार
मैं रवीश कुमार

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