लोग क्यों हैरान हो रहे हैं

नमस्कार प्रिय दर्शकों आज एक बार पुनः आप

सभी का स्वागत है श्रोताओं जो स्त्री यह

चार काम बेश्रम होकर करे वह स्त्री बदचलन

होती हैं श्रोता वैसे तो कहा जाता है कि

चरित्रहीन केवल एक स्त्री ही नहीं होती

बल्कि चरित्रहीन एक पुरुष भी होता है

स्त्री केवल अकेले ही चरित्रहीन नहीं बनती

है उसके साथ एक पुरुष को भी भागीदार होता

है और तभी

जाकर वह चरित्रहीन बनती है और इसके लिए

केवल एक पुरुष पत्नी को एक स्त्री को

चरित्रहीन होने पर प्रतारक नहीं करना

चाहिए इसमें पुरुष की भी एक भागीदारी होती

है परंतु श्रोता बंधुओं आज की वीडियो में

हम इस बात को जानेंगे

कि कौन से कार्य करने वाली स्त्री बदचलन

होती है कौन से कार्य करने वाली स्त्री के

लक्षण होते हैं कि वह बदचलन है प्रिय

दर्शक और प्रिय श्रोताओं प्रिय बंधुओं आज

का हमारा यह प्रसंग बड़ा ही वर्धक

[संगीत]

है और बड़ा ही प्रेरणादायक है इसीलिए आज

के इस प्रसंग को आप सभी पूरा अवश्य सुनिए

साथ ही हो सके तो चैनल को सब्सक्राइब

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[संगीत]

भाइयों

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प्रेरणादायक प्रसंग को आप अपने मित्र बंधु

तक अवश्य शेयर कीजिएगा ताकि उन्हें भी इस

ज्ञानवर्धक प्रसन का लाभ प्राप्त हो

[संगीत]

सके तो दर्शक बंधुओं आइए जानते हैं इस

कहानी के माध्यम से जो स्त्री यह चार काम

करे तो समझ जाना चाहिए कि वह स्त्री बदचलन

है चरित्रहीन है श्रोता एक समय की बात है

एक राज्य में एक राजा हुआ करता था उस राजा

का नाम कम राजा था दरअसल वह राजा अपने

राज्य से बहुत प्रेम करता था अक्सर वह रोज

अपने राजा काज के कार्य में व्यस्त रहता

था जिसकी वजह से वह अपनी पत्नी अपनी रानी

को कभी भी समय नहीं दे पाता था जिसकी वजह

से उसकी पत्नी उसकी रानी हमेशा ही उससे

क्रोधित रहती थी श्रोता इसी के चलते रानी

राजा का मिलाप नहीं हो पाता था जिसकी वजह

से रानी अपने ही महल में एक सैनिक से

प्रेम कर बैठती है और श्रोता उसके बाद मैं

रानी को राजा की बिल्कुल भी इच्छा नहीं

होती है और रानी भी नहीं चाहती थी कि मैं

राजा से मिलू क्योंकि वह हमेशा अपने

प्रेमी से ही प्रेम किया करती थी और अपने

प्रेमी से ही मिलना पसंद करती थी श्रोता

एक दिन की बात है जब वह रानी अपने प्रेमी

से कहती है उस सैनिक से कहती है कि हे

प्रिय अब हम कब तक इस तरह छुप छुप कर

मिलेंगे मैं चाहती हूं कि हम दोनों हमेशा

के लिए कहीं एक जगह रहे और अपने जीवन को

एक साथ काटे श्रोता उसके लिए फिर वह सैनिक

उस रानी से कहता है कि महारानी जो आप सोच

रही

हैं यह कदा भी नहीं हो सकता क्योंकि अगर

हम आपको लेकर कहीं जाएंगे तो महाराज हमें

मार डालेंगे हमारा खून कर देंगे हमारा सिर

काट देंगे बिल्कुल ऐसा ही नहीं हो सकता

श्रोता फिर रानी अपने प्रेमी से कहती है

कि अगर राजा ही नहीं रहे तो फिर दर्शक फिर

सैनिक रानी की बात को मान लेता है और

सैनिक रानी से कहता है कि ठीक है यह अब

तुम्हारे हाथ में है कि तुम राजा को किस

प्रकार मारोगे अगर तुम राजा को मारने में

सफल रहे तो मैं तुम्हारे साथ जहां बोलोगे

वहां चलूंगी और हम दोनों खुशी खुशी अपने

जीवन को कहीं और दूर जाकर तीत करेंगे

श्रोता उसके बाद में रानी एक दिन राजा से

कहती हैं कि महाराज बहुत वर्ष हो चुके हैं

मैं कहीं घूमने नहीं गई अब मेरी इच्छा हो

रही है मेरा मन कर रहा है कि मैं कहीं घूम

कर आऊं और महाराज इससे मेरी एक शर्त है

मैं अब सैनिकों के या फिर किसी भी तरीके

की फौज के साथ नहीं जाऊंगी मैं केवल और

केवल आपके साथ ही अकेला जाना चाहती हूं

मैं इस जीवन के कुछ पल आपके साथ अकेले

जीना चाहती हूं दरअसल उसके बाद में राजा

रानी से कहता है कि महारानी मुझे बहुत काम

है राज काज का काम मुझे बहुत संभालना है

मुझे इतना समय नहीं है कि मैं तुम्हारे

साथ कहीं घूमने पर आ सकूं श्रोता उसके बाद

भी रानी अपने बात पर हट कर देती है रानी

राजा से कहती है कि कभी भी अपने मुझे समय

नहीं दिया कभी भी आपने मुझे ठीक तरह से

प्रेम नहीं दिया और आप मुझे प्रेम नहीं

करते इसीलिए आप मेरे साथ जाना भी नहीं

चाहते और श्रोता इस तरह रानी ने राजा पर

कई तरह के

रोप

दी राजा से रानी कहती है कि कहीं आप मेरे

अलावा किसी अन्य स्त्री से तो प्रेम नहीं

करते इसीलिए आप मेरे पास ना तो आते हैं और

ना ही मुझसे मिलना चाहते हैं और ना ही

मुझसे बोलना पसंद करते हैं दुष्ट राजा ने

जैसे ही रानी की एक घटिया तरीके से बातों

को सुनी तो राजा रानी की इन बातों से डरने

लगा और रानी ने अपने इस हट

को हट दे दली और श्रोताओं किसी ने सत्य ही

कहा है बाल हट त्रिया हट और स्त्री हट यह

तीन

हटे बहुत ही खतरनाक होती हैं इन हदों को

कभी भी कोई मानने से इंकार नहीं कर सकता

दरअसल उसके बाद राजा रानी के साथ जाने के

लिए तैयार हो जाता है फिर राजा और रानी

अकेले ही जंगल की ओर जाने लगते हैं फिर

राजा और रानी जंगल में घूमते रहते हैं

राजा राजा नहीं

[संगीत]

है रानी राजा से मीठी मठी प्रेम भरी बातें

करती है और राजा भी रानी से मीठी मठी

प्रेम भरी बातें करता है दर्शक बंधुओ उसके

बाद भी रानी राजा से से कहती है कि महाराज

मुझे बहुत जोर से प्यास लग रही है और मैं

चाहती हूं कि कहीं से ठंडा पानी हो जिसकी

वजह से मेरी प्यास बुझ सके दरअसल उसके बाद

ही वह राजा रानी से कहता है कि प्रिय तुम

ऐसा करो तुम यहीं बैठो मैं कहीं से

तुम्हारे लिए पानी ढूंढ कर लाता हूं परंतु

दर्शक बंधुओं फिर रानी राजा से कहती है कि

नहीं महाराज मैं यहां पर ली नहीं बैठूंगी

मुझे बहुत डर लगता है मैं आपके साथ ही

चलूंगी उसके बाद भी राजा और रानी कहीं

पानी की तलाश में उस पूरे जंगल में ढूंढते

रहते हैं फिर कहीं जाकर एक बहुत बड़ा

तालाब था उसमें पानी भरा हुआ था राजा रानी

से कहता है कि प्रिय तुम यहीं रुको मैं

आगे जाकर तालाब में नीचे जाकर पानी भर करर

लाता हूं और जिससे तुम री प्यास बुझ जाएगी

उसके बाद भी रानी उस तट पर ही खड़ी रहती

है और राजा तालाब के थोड़े अंदर जाकर पानी

भरने लगता है उसके बाद में जैसे ही राजा

अपनी गर्दन को नीचे कर कर और नीचे बैठकर

पानी भर रहा था उस समय रानी राजा के पीछे

से जाती है और राजा को उस बहते हुए तालाब

में तालाब के बहते हुए लहरों में जोर से

धक्का दे दे

और

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