संविधान बदला..अब चुनाव की जरूत नहीं !तानाशाही काल शुरू ? विश्लेषण With वानखेड़े

तीन दिन में ऐसी कुछ घटनाएं हुई
जिससे आने वाले 2024 का आगाज क्या
होगा इसका एक इसकी तस्वीर मैं आपके सामने
पेश करना चाहता हूं इन दो खबरों को
विश्लेषण
करके

सबसे पहले आज की खबर ले तो चंडीगढ़ के
मामले में जो सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय
दिए और उस निर्णय से एक बात तो तय हो
गई
कि चंडीगढ़ का

मॉडेल 2024 के चुनाव में कैसा काम
करेगा और इसका डिटेल विश्लेषण प्रज्ञा जी
के साथ शो में आपने उल्टा चश्मा प देखा भी
हो
लेकिन यह तो सरकार कैसी बनेगी 20224 में
उसका

विश्लेषण सरकार बनने के बाद क्या
होगा इसका एक ट्रेलर हाल ही में भाजपा का
जो कार्यकारिणी की अधिवेशन हुआ राष्ट्रीय
कार्यकारणी का दिल्ली में
उसमें एक

झलक सरकार 2024 में बनने के बाद मोदी जी
की क्या होगा यह दिखी जिसको मैं विले
करूंगा भारतीय जनता पार्टी
में जो संविधान था भारतीय जनता पार्टी का
उसमें पार्टी के जो राष्ट्रीय अध्यक्ष
होते हैं उनका
चुनाव चुनाव की एक प्रक्रिया

होती है यह
बात अलग है 1980 में जब जनसंघ
से जनता पार्टी में जाकर फिर वापस भारतीय
जनता पार्टी का पुनर जन्म हुआ

तब से लेकर आज तक वहां चुनाव जरूर हुए
राष्ट्रीय अक्ष के लेकिन निर्विरोध रूप से
एक बात अलग है कि भारतीय जनता पार्टी पूरे
जीवन भर आज भी कांग्रेस को इसलिए कोसती है
कि वहां अंतरिक लोकतंत्र नहीं है वहां एक

परिवार का कब्जा है वही यह काम करते हैं
लेकिन कांग्रेस में भी अपवाद है
1997 और 2023 में बाकायदा कांग्रेस
अध्यक्ष पद के लिए चुनाव हुए घमासान हुआ
और लोग चुनाव जीत

गए इसके पहले राष्ट्रपति उम्मीदवार को
लेकर भी सत्ता और संगठन में बहुत संघर्ष
हुआ नीलम रेड्डी रेड्डी के खिलाफ जो
कांग्रेस के उम्मीदवार थे इंदिरा गांधी ने
अपना उमी उरवी गिरी उतारा और उनको जितवा
के लाया यह संघर्ष वहां पर भी

हुआ लेकिन भारतीय जनता पार्टी में ऐसा
संघर्ष कोई होते हुए दिखाई तो नहीं देता
लेकिन जब सब कुछ संघ के कहने पर और संघ
द्वारा अनुमोदित उम्मीदवार
ही बिना विरोध का निर्विरोध चुन के आता है
लेकिन निर्विरोध सही एक चुनाव की

प्रक्रिया तो थी कहने के लिए तो अंतर
लोकतंत्र था लेकिन यदि पीटीआई न्यूज
एजेंसी की खबर को सही माने क्योंकि बाकी
गोदी मीडिया कोई भी इसको कवर करने को
तैयार नहीं है भारतीय जनता पार्टी ने अपने
राष्ट्रीय कार्यकारणी के अधिवेशन

में पार्टी के संविधान
में बदलाव किया और यह बदलाव करते हुए यह
निर्णय लिया कि अब पार्टी के अध्यक्ष का
चुनाव नहीं
होगा पार्टी के अध्यक्ष की नियुक्ति होगी

और वो नियुक्ति पार्लियामेंट्री बोर्ड
करेगा
अब यह प्रस्ताव पारित भी हुआ और
जो बदलाव होना था संविधान में वो भी बदला
गया अब सवाल ये उठता है कि इस बदलाव के

पहले क्या इस पे कोई कार्यकारणी में
राष्ट्रीय कार्यकारिणी में बहस हुई कोई
विचार विनिमय हुआ चर्चा हुई
और फिर सर्वसम्मति से य प्रस्ताव पारित
हुआ इसके बारे में पीटीआई भी मौन है बाकी
कोई बात करने को तैयार नहीं अब पार्टी में

सर्वोच्च बॉडी जो है व पार्लियामेंट्री
बोर्ड हो गया और उस पार्लियामेंट्री बोर्ड
में नियुक्ति कौन करता है के अब नरेंद्र
मोदी जी के हाथ में है 2014 के बाद धीरे
धीरे

पार्टी का पूरा कब्जा नरेंद्र मोदी और
अमित शाह का हो गया और
संघ जो पार्टी चलाता था वो पीछे रह गया
पार्टी में जो वरिष्ठ थे वह मार्गदर्शन

मंडल में चले
गए और संघ दर्शक की भूमिका में
बनार एक टीम मार्गदर्शक मंडल आडवानी जी
मूल्य मनोर जोशी जी जैसे
वरिष्ठ जिस मार्गदर्शन मंडल को अभी तक कोई
मार्गदर्शन नहीं मिला कि वह किसको
मार्गदर्शन करें ना उनकी कोई मीटिंग ई हां
वो मार्गदर्शन मंडल में गए तो मात्र दर्शक

के मंडल दर्शक की भूमिका में संघ आ गया यह
भी तय है अब पार्लियामेंट्री बोर्ड पर लोग
को नियुक्त
करेंगे तो
वो पार्लियामेंट बोर्ड त करेगा और

पार्लियामेंट्री बोर्ड में वर्तमान में
कब्जा उन्ही लोगों का है जो मोदी जी के
रबर स्टैंड है क्योंकि जो वहां वजन वाले
व्यक्ति थे उसम यरप्पा छोड़ दिया तो कोई
वजन वाला व्यक्ति दिखता नहीं कुछ
उम्मीदवारों के नाम तो ऐसे थे कि जब

पार्लियामेंट बोर्ड में उनका नाम आया तो
लोगों को ढूंढना पड़ा कि ये किस राज्य से
आते हैं और इनका राजनीतिक वजूद क्या है
पार्लियामेंट्री बोर्ड वो इतने सीनियर
लोगों का था जो कई पुराने राष्ट्रीय

अध्यक्ष थे उनको पार्लियामेंट बोर्ड से
नजरअंदाज किया गया और बहुत ही जूनियर
लोगों को या जो सीनियर जो बिल्कुल घर बैठे
थे जिनको सिर्फ नाम के लिए वहा लाया गया
वो लोग पार्लियामेंट बोर्ड में है अब वो
लोग तय करेंगे और उस बोर्ड में नरेंद्र
मोदी जी भी है और अमित शाह जी भी है ये दो
लोग तय करेंगे कि अगला अध्यक्ष कौन

होगा यदि हम इस बात को मैं बारबार कहता हू
ट्रेनर के रूप में देखें तो आप समझ सकते
हैं कि 2024 में में यदि अबकी बार 400 पार
और 370 के आकड़े की बात करते हैं और इ

 

सी
तादाद में भारतीय जनता पार्टी सत्ता में
आती है तो फिर आप मान लीजिएगा
प्रधानमंत्री का चयन भी ऐसे ही
पार्लियामेंट वोट करेगा और इस देश की
सरकार भी पार्लिमेंट वोट तय करेगी और ऐसा
ही कुछ सिस्टम आएगा जिसमें अब चुनाव भी

नहीं होंगे और यह सरकार निरंतर काम करती
रहेगी क्योंकि कई मंदिर बनाने हैं 1000
साल का प्रोजेक्ट
है 1947 207 उस में आता है विश्व गुरु
बनना है कई ऐसे बड़े प्रोजेक्ट है लॉन्ग
टर्म प्रोजेक्ट जिसके लिए चुनाव इस देश
में जरूरत नहीं यदि यह संविधान में बदला


किया गया तो आश्चर्य नहीं होगा क्योंकि
पार्टी के संविधान में यह बदलाव करके
लोकतंत्र पार्टी के अंदरूनी जो लोकतंत्र
था उसकी समाप्ति की घोषणा भाजपा ने कर दी
जब पार्टी के अंदर की लोकतंत्र की समाप्ति

की घोषणा हो सकती है तो इसी तादाद में जब
आप सत्ता में आएंगे 2024 में तो फिर देश
में भी लोकतंत्र की समाप्ति की घोषणा करने
में किसी को परहेज नहीं
होगा सवाल ये है कि यदि राष्ट्रीय अध्यक्ष
का चुनाव नहीं होगा तो राज्य की इकाइयों
के अध्यक्ष कैसे होंगे जिला अध्यक्ष के
कैसे हो तो अब इलेक्शन कमीशन को भी यह
देखना होगा कि पीपल्स रिप्रेजेंटेटिव एक्ट
राजनीतिक दलों में चुनाव जरूरी है या फिर

ऊपर से नॉमिनेशन जरूरी यह मामला पेचीदा है
लेकिन इलेक्शन
कमीशन क्योंकि चुनाव आयोग भी एक रबर स्टम
बन चुका है तो यह सब अलग अलग मुखौटे है

जिसके पीछे एक ही व्यक्ति है जिसका नाम
नरेंद्र मोदी जी चुनाव आयोग हो सरकार हो
भारतीय जनता पार्टी हो उनके अध्यक्ष हो
पार्लियामेंट बोर्ड सब कुछ नरेंद्र मोदी
है तो कुल मिलाकर जिस हिसाब से भारतीय
जनता पार्टी के अध्यक्ष के चुनाव को

निरुक्त करके उनकी नियुक्ति पर आ गया अभ
इस देश में ऐसा ही कुछ संविधान में बदलाव
भी होगा जिसमें देश का प्रधानमंत्री

नियुक्त होगा और नियुक्ति कौन करेगा खुद
को ही खुद नियुक्त करें तो आश्चर्य नहीं
होगा हम क्या मल या चाइनीज मॉडल की तरफ जा
रहे हैं क्योंकि विकास के नाम पर देश की

सुरक्षा के नाम पर राष्ट्रवाद के नाम पर
और हिंदुत्व के नाम पर यह सारी चीज जायज
ठहरा जाएगी यह छोटा सा ट्रेलर मैंने आपको
दिया य जो घटना है छोटी घटना य क रिपोर्ट
भी नहीं पीटीआई के सिवा किसी अखबर वालों
ने इसको छापने या इसको रेखांकित करने का
प्रयास भी नहीं किया क्योंकि के लिए बहुत

छोटी चीज है लेकिन प्रजातंत्र और लोकतंत्र
में विश्वास रखने वाले इस देश के संविधान
में विश्वास रखने वालों के लिए यह बहुत
बड़ी घटना है जो शायद आपसे दूर थी इसलिए
आपके सामने लाने का प्रयास आज इतना ही कल
फिर आऊंगा किसी विषय के साथ तब तक के लिए

नमस्कार देखते रहिएगा य चैनल उल्

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