सिख IPS अफसर को खालिस्तानी बता दिया? बीजेपी हुई शर्मसार!

पश्चिम बंगाल के संदेश खाली में भारतीय
जनता पार्टी के प्रदर्शन के दौरान भाजपा
के किसी नेता ने एक सिख आईपीएस ऑफिसर
जसप्रीत सिंह को कथित तौर पर खालिस्तानी
कह दिया इसको लेकर दोस्तों जबरदस्त बवाल
मच गया मगर मैं आपसे सवाल पूछना चाहता हूं

इस बात को लेकर आप इतनी हैरत में क्यों है
क्या आप यह बात भूल गए जब किसान आंदोलन
शुरू हुआ था तब बाकायदा भारतीय जनता
पार्टी सरकार ने रिटन एफिडेविट में
सुप्रीम कोर्ट में यह बात कही थी कि
आंदोलन में खालिस्तानी है या खालिस्तानी

बैकिंग है यह बात अलग है कि आज न साल होने
को आ गए मगर आज तक किसान आंदोलन में
खालिस्तानिस हो गया है या खालिस्तानी
समर्थन मिल रहा है इसका कोई सबूत पेश नहीं
कर
पाए पिछले 10 सालों में यही सोच है याद

कीजिएगा 2014 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र
मोदी सत्ता में आए थे तब ये गिरिराज सिंह
क्या कहा था इन्होंने याद है आपको इन्हीं
गिरिराज सिंह ने कहा था कि अगर आप
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल करेंगे
उनकी आलोचना करेंगे तो आप पाकिस्तान चले
जाइए यह उनके शब्द
थे आज की तारीख में जो बाबा साहब अंबेडकर
की बात करता है उसे बोलते हैं जिसकी

दाढ़ी टोपी है उसे पाकिस्तानी कह देते हैं
जिसकी पगड़ी है उसे खालिस्तानी कह देते
हैं जो हक की बात करता है उसे अर्बन नक्सल
कह दो जो तार्किक जो सोच के हिसाब से बात
करता है उसे वामपंथी बता दो यही तो सोच चल
रही है इस देश में और इसके अलावा क्या है
मुझे बताइए आप सबसे पहले दोस्तों मैं इस
मुद्दे पर आना चाहता हूं संदेश खाली में

प्रदर्शन होता है भाजपा के नेता आते हैं
एक ऐसा मुद्दा जो बहुत वाजिब है जो ममता
बैनर्जी की सरकार को कटघरे में रख रहा है
पुलिस और भाजपा के प्रदर्शन कार्यं में
टकराव होता है और फिर अचानक एक सिख ऑफिसर
जसप्रीत सिंह नाराज हो जाता है वो कहता है
कि कि आप मेरी पगड़ी की वजह से मुझे

खालिस्तानी कैसे कह सकते हैं मैं चाहूंगा
जब वो नाराज होते हैं आप उस वीडियो को
देखिए करीब डेढ़ मिनट का वीडियो है और फिर
मैं उसकी चर्चा करता हूं
देख विल टेशन न य क्योंकि मैंने टर्बन
पहना है तो आप लोग ये बोल रहे हैं अगर
मैंने टर्बन ना पहना होता आप मुझे बोलते
लि

रिजन बोल
रिन बो
नी
ने
[प्रशंसा]
[संगीत]
रि
नो बडी मेकिंग कमेंट रिजन ओली यू आर
मेकिंग मैंने पगड़ी पहना तो आप मुझे
खालिस्तानी बोलेंगे क्योंकि मैंने पगड़ी
पहना

है ये आप लोग की हिमत है अगर कोई पुलिस
वाला पगड़ी पहना है तो खालिस्तानी है य आप
लोग कीय आप लोग बोल रहे हैं य आपका लेवल
हैय आप लोग का लेवल है एक पुलिस ऑफिसर
जिसने पगड़ी पहना है उसको आप खालिस्तानी
बोल रहे हैं क्योंकि व अपना ड्यूटी कर रहा
है
दे आर मेकिंग कमेंट्स देर से खालिस्तानी

क्यों मैंने न प इसलिए तो यह था जसप्रीत
सिंह का गुस्सा और जैसे वीडियो वायरल होता
है ममता बैनर्जी इस पर टिप्पणी करती हैं
तमाम पॉलिटिकल पार्टीज इसकी आलोचना करती
है यहां तक की

एसजीपीसी शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक
समिति भी इस पर तल्ख टिप्पणी करती है कि
एक सिख ऑफिसर के साथ ऐसा नहीं होना चाहिए
भाजपा यह तक कहने लगती है कि हमने उस शब्द
का इस्तेमाल ही नहीं किया सबूत दो सबूत दो
सबूत दो तब अचानक वह वीडियो सामने आता है

जिसमें आप खालिस्तानी शब्द सुन सकते हैं
इस वीडियो में आप सुवेंदु अधिकारी को भी
देख रहे हैं अब इस बात के कोई सबूत नहीं
है कि शब्द का इस्तेमाल सुवेंदु अधिकारी
ने किया मगर सिख आईपीएस ऑफिसर का यह कहना
है कि इस शब्द का इस्तेमाल सुवेंदु
अधिकारी ने ही किया है मैं
चाहूंगा आप उस वीडियो का वो हिस्सा देखें

जहां खालिस्तानी शब्द सुनाई देता है
सुने तो दो चीजें यहां पर सामने उभर कर आ
रही है सिख आईपीएस ऑफिसर की नाराजगी कि आप
मेरी पगड़ी की वजह से मुझे खालिस्तानी
नहीं कह सकते हैं जाहिर सी बात है कि
आईपीएस ऑफिसर जो है वह सरकारी तंत्र का
हिस्सा है और ऐसे में भाजपा की तरफ से यह

शब शब्द सुनाई पड़ता है वह शब्द जो मैंने
आपको अभी-अभी सुनाया एक न्यूज चैनल के
हवाले से जसप्रीत सिंह एबीसी पंजाब को
इंटरव्यू देते हैं और यह दावा करते हैं कि
इस शब्द का इस्तेमाल किसी रे गैरे नथु
खेरे भाजपा कार्यकर्ता ने नहीं खुद
सुवेंदु अधिकारी ने किया जो कि एक जमाने
में मुख्यमंत्री पद के दावेदार हुआ करते
थे जिन्होंने ममता बैनर्जी को चुनाव में

भी हराया था सुनिए क्या कहते य पर जसप्रीत
सिंह
जने बहुत ही राजयोग शब्द बोले धन हो के
खालिस्तानी
कता लीडर अगवाई कर आई थ चीफ मिनिस्टर

कैंडिडेट भी रहेने उने नहीं एने
धनता मिस्टर सुद
अकाने और ल वीडियो भी है
है अब जाहिर सी बात है दोस्तों जब ये
मुद्दा बवाल बनता है तो उस पर
प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो जाता है

पश्चिम बंगाल पुलिस कहती है कि हम अपने
पुलिस ऑफिसर के साथ हैं और इस तरह की
शब्दावली का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए
ममता बैनर्जी मुख्यमंत्री उनका बयान आपके
स्क्रीन पर क्या कह रही है ममता बैनर्जी
अंग्रेजी में है मैं फिर इसका हिंदी में
अनुवाद करूंगा ममता कहती हैं टुडे द
बीजेपी
डिविजिवनेस

ओवरस्टेप कॉन्स्टिट्यूशन बाउंड्रीज एज पर
बीजेपी एवरी पर्सन वेयरिंग अ टर्बन इज अ
खालिस्तानी आई वेमेंटली कंडेम दिस ओडेशियस
अटेम्प्ट टू अंडरमाइंड द रेपुटेशन ऑफ आवर
सिख ब्रदर्स एंड सिस्टर्स रेवे फॉर देर
सैक्रिफाइस एंड अनवेवरिंग डिटरमिनेशन टू आ

नेशन वी स्टैंड फर्म इन प्रोटेक्टिंग
बंगल्स सोशल हार्मनी एंड विल टेक स्टर्न
लॉफुल मेजर्स टू प्रिवेंट एनी अटेम्प्ट्स
टू डिस्ट्रक्ट इट इसका का हिंदी में
अनुवाद यह है कि यहां पर ममता बैनर्जी कह
रही हैं कि भारतीय जनता पार्टी की विभाजन
कारी राजनीति ने एक बार फिर संवैधानिक जो

सीमाएं हैं उसे बेशर्मी से लांघा बीजेपी
के मुताबिक हर व्यक्ति जो पगड़ी पहनता है
वह खालिस्तानी है मैं इसकी आलोचना करती
हूं जिसके जरिए हमारे सिख भाइयों बहनों की

अस्मिता पर हमला किया गया है और उन्होंने
यह भी याद दिलाया कि हमारे सिख भाई बहनों
ने इस देश के लिए कुर्बानी दी है लिहाज इस
तरह की बातें कहना सही नहीं
है मैं आपको दो और चीजों की याद दिलाना
चाहता हूं दोस्तों जब किसान आंदोलन हुआ था
आपको याद होगा सत्यपाल मलिक प्रधानमंत्री

से मिलने जाते हैं और कहते हैं कि 700
किसान मर गए हैं आपको याद है ना बकौल
सत्यपाल मलिक प्रधानमंत्री ने क्या कहा था
कि वह मेरी वजह से थोड़ना मरे और आज तक

प्रधानमंत्री ने इस बयान का खंडन नहीं
किया बात वहां नहीं रुकती एएन आई के
मुताबिक जब
प्रधानमंत्री
गए थे
पंजाब और किसानों ने उनके रास्ते को रोक
दिया था तब उन्हें ब्रिज से वापस होना

पड़ा था और प्रधानमंत्री बकौल एनई कहते
हैं कि अपने मुख्यमंत्री को कह देना मैं
किसी तरह से अपनी जान बचाकर आया
हूं किसान संघर्ष कर रहा था आंदोलन कर रहा
था और आप यह कह रहे हैं कि मैं किसी तरह
से अपनी जान बचा कर आया हूं बार-बार इस
तरह की बयानबाजी कर
मैं एक बात स्पष्ट कर दूं दोस्तों यह पहली

बार नहीं हुआ जैसे मैंने कहा बाकायदा रिटन
एफिडेविट में सरकार ने खालिस्तानी शब्द का
इस्तेमाल किया था याद कीजिए शाहीन बाग को
किस तरह से बदनाम किया जाता है यह कहा
जाता है कि भैया 50 रप की बिरयानी के लिए

सब हो रहा है यह झूठ तक बोला गया था कि
वहां पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए गए
थे जहां जहां सीएए को लेकर एनर को लेकर

आंदोलन हुआ जानबूझकर ये कहा जाता था कि
देखिए पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए जा
रहे हैं और सारी खबरें झूठी साबित
हुई आज यह अपने आप में सोचने की बात है और

जिन लोगों को हैरत हो रही है मुझे उनकी
बुद्धि पर तरस आता है हकीकत यह है कि
भारतीय जनता पार्टी ने अपनी मीडिया के
सहारे अपनी गोदी मीडिया के सहारे इस नफरत
को जायज कर दिया है उसे मुख्य धारा का
हिस्सा बना दिया है जहां बहुत आसानी से इस
तरह की शब्दावली का इस्तेमाल होता है जब
आप किसी से सहमत नहीं है तो उसे आप गाली
देने शुरू कर देते हैं उसे एंटी नेशनल तक
बता देते हैं 2014 से पहले ऐसा नहीं होता

था और ऐसा क्यों हो रहा है ऐसा इसलिए हो
रहा है कि जब आप किसी को एंटी नेशनल
आतंकवादी खालिस्तानी बता देते हैं ना तो
सामने वाला आपके साथ फिर बहस नहीं कर सकता
या तर्क नहीं दे सकता क्योंकि आपने तो उसे
एंटी नेशनल बता दिया अब एंटी टी नेशनल को
अपनी बात रखने का कोई अधिकार नहीं है और
आप देख भी रहे हैं मुद्दा सिर्फ एक बयान
का नहीं है मैं चाहता हूं इसकी जांच हो

अगर यह सुभेंदु अधिकारी ने कहा है तो य
शर्मनाक है हालांकि सुभेंदु अधिकारी ने यह
भी कहा है कि मैं जो लोग इस तरह की बातें
कर रहे हैं उनके खिलाफ लीगल नोटिस उन्हें
जारी करूंगा उन्हें अदालत घसीट होंगा मैं

भी चाहता हूं कि दूध का दूध और पानी का
पानी हो मगर उस वीडियो के मुताबिक
खालिस्तानी शब्द सुनाई पड़ता है जो मैं
आपको कहने का प्रयास कर रहा हूं उस पर गौर
कीजिएगा भारतीय जनता पार्टी ने इन शब्दों

को आम कर दिया
है जब भी आप किसी से सहमत नहीं है इस तरह

की शब्दावली का इस्तेमाल करें और साथ
मिलता है गोदी मीडिया का जो बहुत आसानी से
इन शब्दों का इस्तेमाल करता है विपक्ष के
लिए एक्टिविस्ट के लिए उन पत्रकारों के
लिए जो सत्ता से सवाल करते हैं और आपने
गौर किया होगा कि पिछले 10 सालों में
खासकर पिछ पले चार सालों में कितनी आसानी
से आतंकवाद की धाराओं में पत्रकारों को
बंद कर दिया जाता है एक्टिविस्ट को बंद कर

दिया जाता है और दिलचस्प बात यह है कि
पुलीस सालों साल चार शट तक पेश नहीं करती
है आप ईडी की रेड मार देते हैं एक छोटे से
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मगर आज तक आपने

कोई चार शट दाखिल नहीं की आप एक व्यक्ति
को
जो इमरजेंसी आपातकाल के दौरान भी जेल में
था उसे आतंकवाद की धाराओं में जेल में डाल
देते हैं मगर आज तक आपके पास कोई प्रमाण
सामने उभर कर नहीं आया कोई चार शट सामने
उभर कर नहीं आई यही तो सोच है जिसके जरिए
आप आलोचना को बंद करना चाहते हैं सिख
ऑफिसर जसप्रीत सिंह के साथ जो हुआ मैं
आपके सामने खबर क्यों कर रहा हूं कहने को
एक छोटी घटना है मगर आज यह खबर कई अखबारों
के पहले पन्ने पर है क्यों है पहले पन्ने
पर क्यों आज मैं खबर कर रहा हूं मैं इसलिए
कर रहा हूं क्योंकि मैं आपको बतलाना चाहता
हूं कि हम एक समाज के तौर पर क्या होते जा
रहे हैं एक पॉलिटिकल सोच की वजह से भाजपा
तो चुनाव जीतना चाहती है मगर वो चुनाव
जीतने के लिए वो इस तरह की हरकतें कर रही
है वो इस तरह की हरकतें कर रही है जहा
अपने ही नागरिकों को बदनाम किया जाए
उन्हें एंटी नेशनल बताया जाए कभी
खालिस्तानी कभी पाकिस्तानी कभी अर्बन
नक्सल कभी भीम इन्हीं तरह के शब्दों का
इस्तेमाल करो जब आपके पास तर्क नहीं है और
चूंकि आपके पास ताकत है आपके पास एजेंसीज
है हमारे देश में अदालतें भी कभी-कभी बहुत
निष्क्रिय हो जाती हैं ऐसे मामलों में
एक्ट भी नहीं करती हैं तो जब आपके पास यह
सब चीजें होती हैं आप बहुत आसानी से इस
शब्दावली का इस्तेमाल करते हैं मगर मैं
उम्मीद करता हूं एक दिन आएगा जब इस
राजनीति का अंत
होगा इस नफरत भरी इस बांटने वाली राजनीति
का अंत होगा मैं यह भी उम्मीद करता हूं कि
भारतीय जनता पार्टी पुनर्विचार करेगी अपनी
इस राजनीति पर जिसका मकसद सिर्फ देश को
बांटना है और उसके अलावा कुछ नहीं है आप
एक आईपीएस ऑफिसर के बारे में ऐसा कह रहे
हैं कितने शर्म की बात है मैं चाहता हूं
कि मामले की जांच हो दूध का दूध और पानी
का पानी हो अगर सुवेंदु अधिकारी ने यह बात
कही है तो उन्हें जवाबदेह बनाना चाहिए
क्योंकि सिख आईपीएस ऑफिसर का तो यह दावा
है कि यह बात उन्होंने ही कही है अभिसार
शर्मा को दीजिए इजाजत नमस्कार स्वतंत्र और
आजाद पत्रकारिता का समर्थन कीजिए सच में
मेरा साथी बनिए बहुत आसान है दोस्तों इस
जॉइन बटन को दबाइए और आपके सामने आएंगे ये
तीन विकल्प इनमें से एक चुनिए और सच के इस
सफर में मेरा साथी बनिए

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