सीएम का फैसला- अब मुख्यमंत्री के लिए नहीं रुकेगा ट्रैफिक

नमस्कार मैं नवीन जयसवाल फर पीएम राजस्थान
में आपका स्वागत
है राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा
पहली बार मुख्यमंत्री बने हैं व पहली बार
विधायक

बने और पहली बार किसी सरकारी पद पर पहुंचे
और सीधे प्रदेश में सत्ता के शिखर पर जाकर
बैठे उससे पहले जो दो मुख्यमंत्री

रहे अशोक गहलोत और बसुंधरा राज्य 25 साल
तक प्रदेश की राजनीति यही छाया रहे 25 साल
तक यही दोनों नेता मुख्यमंत्री रहे 1998
में पहली बार अशोक गहलोत मुख्यमंत्री बने
उसके बाद वो तीन बार मुख्यमंत्री रह लिए
और 2003 में वसुंधरा राज्य पहली बार

मुख्यमंत्री बनी और उसके बाद दो बार वो भी
इस कुर्सी पर बैठे और इस बार तीसरी बार भी
जब चुनाव हो रहे थे उसके कुछ महीने पहले
तक मुख्यमंत्री पद के लिए दो ही बड़े नाम
थे वसुंधरा राजे और अशोक

गहलोत
यानी बड़े नाम थे और उनसे पहले बसंरा और
अशोक गहलोत से पहले भी बरत सिंह शेखावत
मुख्यमंत्री रहे उनकी खुद की एक बड़ी
हैसियत थी भाजपा को प्रदेश में उन्होंने

खड़ा किया पार्टी को इस स्थिति में लेकर
आए कि वह सत्ता तक पहुंच सके और फिर खुद
मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे थे यानी
प्रदेश में जितने भी मुख्यमंत्री रहे उनकी
अपने एक बड़ी हैसियत रही
अपना एक कद रहा जिसके बुते वो मुख्यमंत्री

की कुर्सी तक पहुंचे उनका पार्टी में
वर्चस्व था और पब्लिक में अपील थी पार्टी
को भी लगता था कि अगर सरकार का नेतृत्व यह
नेता करेंगे तो पार्टी को फायदा होगा
सरकार को फायदा
होगा लेकिन भजनलाल शर्मा के साथ में यह

सारी बातें नहीं
है 12 12 दिसंबर को जब भाजपा विधायक दल की
बैठक
में फैसला हुआ कि मुख्यमंत्री किसे बनाया
जाएगा और 15 दिसंबर को जब भजनलाल शर्मा ने
मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री पद की शपथ ली
उसके पहले तक प्रदेश के लाखों करोड़ों लोग

भजनलाल शर्मा का नाम भी नहीं जानते थे और
राजनीतिक हलको में भी भजनलाल शर्मा की ऐसी
कोई बड़ी पहचान नहीं
थी अब इसी पहचान का संकट उनके लिए बड़ी
चुनौती है वो मुख्यमंत्री बन गए हैं लेकिन
वसुंधरा राजे या गहल जैसा रुतबा उनका नहीं

है वो एक आम कार्यकर्ता वाली छवि थी जो एक
आम कार्यकर्ता से सीधे मुख्यमंत्री पद तक
पहुंचे अब उन्होंने इसी आम कार्यकर्ता की
छवि को आगे बढ़ाने की कोशिश की है आम आदमी
का मुख्यमंत्री बनने की कोशिश की है

वीआईपी कल्चर से दूर हटकर एक आम आदमी का
मुख्यमंत्री कैसे हो सकता है इसकी कोशिश
में उन्होंने कदम बढ़ाए है और भला शर्मा
ने फैसला लिया

वीवीआईपी कल्चर को खत्म करने का अब वो जब
प्रदेश में अपने ऑफिस से बाहर निकलेंगे
अपने घर से बाहर निकलेंगे सड़कों पर होंगे
तो मुख्यमंत्री के लिए ट्रैफिक नहीं रोका
जाएगा ट्रैफिक जाम नहीं लगेगा वह एक आम

व्यक्ति की तरह एक आम नगर की तरह या एक आम
राहगीर की तरह सड़क पर सफर
करेंगे रेड लाइट पर रुकेंगे ग्रीन सिग्नल
होने का तयार करेंगे हो सकता ने इसके लिए

कई बार ट्रैफिक जाम का सामना भी करना पड़े

पर उन्होंने फैसला लिया है और मुख्यमंत्री
ने खुद ट्वीट करके इसकी जानकारी भी दी
सीएमओ राजस्थान की तरफ से ट्वीट किया गया
है कि मुख्यमंत्री श्री भजन लाल ने उनके
मूवमेंट के समय आमजन को होने वाली परेशानी
को दूर करते हुए लाल बत्ती पर अपना काफिला
रुकवाने का फैसला किया है इसके बाद

बाड़मेर यात्रा के बाद एयरपोर्ट से लौटते
वक्त उनका काफिला ओटीएस चौराहे के पास
ट्रैफिक के पास चौराहे के पास ट्रैफिक के
बीच लाल बत्ती पर रुका यह जानकारी खुद
सीएमओ की तरफ से दी गई
है रेडलाइट

सयो दिखाने की कोशिश करें रेड लाइट
नलाइट
है
सा
लाने की कोशिश कर
रेडलाइट अब तक यह होता है कि जब भी
मुख्यमंत्री का काफिला शहर में निकलता है
तो पहले क्लियर किया जाता है जिनन स्थानों
से जाना होता है वह सारे ट्रैफिक रोक दिया
जाता है लोग इंतजार करते रहते हैं और उसके
बाद सीएम का काफिला निकलता है तब तक लोग

खड़े रहते हैं यह कल्चर लगातार जयपुर में
राग रागीर के लिए परेशानी का कारण बन रहा
था जब जब सीएम का काफिला निकलता था को
दूसरा काफला निकलता है तो जाम की स्थिति

बन जाती थी लोग परेशान होते थे शायद
मुख्यमंत्री ने इस बात को महसूस किया
और अब उनका काफिला जो है कहीं भी किसी भी
लाल बत्ती पर खड़ा हु उसके इंतिहार कर रहा
है उन्होंने इसे फॉलो करना शुरू कर

दिया जनता के लिए राहत की बात है लेकिन
साथ में यह भी माना जा रहा है कि कहीं ना
कहीं मुख्यमंत्री अपनी एक छवि बनाना चाहते

हैं एक अच्छा मैसेज देना चाहते हैं इसलिए
उन्होंने पहल की और माना जा रहा है कि जिस
तरह से वीआईपी कल्चर राजस्थान में रहा या
नेताओं का रहा है सभी के लिए स्टेटस सिंबल
होता है उनके लिए ट्रैफिक रुक जाए उसकी
बजाय भजनलाल एक आम आदमी के सीएम बनने की

कोशिश कर रहे हैं वीआईपी कल्चर से दूर जिस
बैकग्राउंड से वो आते हैं वो शायद उनके
लिए फिट भी बैठता है वसुंधरा राज अशोक गलो
थे तब तक लगातार उनके लिए ट्रैफिक रुकता
था जयपुर में कहीं भी जाते
थे कार्यालय की बात हो चाहे एयरपोर्ट हो

हमेशा ट्रैफिक रुकता रहा है लेकिन अब ये
परंपरा बदल रही है वैसे भजनलाल शर्मा जब
मुख्यमंत्री बने थे तब उन्होंने एक और
फैसला लिया
कि जो दिल्ली की उनकी दौड़ है लगभग सारे
मुख्यमंत्रियों की होती है चाहे
प्रधानमंत्री से मिलना है पार्टी के

वरिष्ठ नेताओं से मिलना है आला कावान से
मिलना है दिल्ली के दौरे लगातार लगते हैं
जयपुर दिल्ली के बीच में और मुख्यमंत्री
हमेशा चार्टर्ड प्लेन का उपयोग करते थे

मगर बलाल शर्मा ने घोषणा की थी कि
वो रेगुलर फ्लाइट से ही दिल्ली जाएंगे
जहां तक संभव होगा ये उनका दूसरा सादगी
भरा फैसला माना जा रहा है हालांकि इस तरह
का फैसला कभी वसुंधरा राज ने भी लिया था
2013 में मुख्यमंत्री ब शुरुआत में
उन्होंने भी कहा था लेकिन बाद में बात आई

गई होगई चाहे ट्रैफिक पुलिस की सुविधा हो
या कोई दूसरा कारण हो मुख्यमंत्री का
काफिला जब भी निकलता रहा है तो उसके साथ
में ट्रैफिक

जाम निश्चित रूप से होता था लेकिन लगता है
कि अब शायद इससे प्रदेश के लोगों को जयपुर
के लोगों को निजात मिल जाएगी तो फिलहाल इस
वीडियो में इतना ही और अंत में बार फिर
आपसे यही कहना है कि 4 पीएम राजस्थान चैनल
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