04.05.2024 को ये तीन दिव्य ऊर्जा शक्ति तुम्हें जीत दिलाएंगी

मेरे प्रिय बच्चे जब अचानक से यह दिव्य

संदेश तुम्हारी आंखों के सामने प्रकट हो

जाए तुम्हारी आंखों के सामने उपस्थित हो

जाए और तब तुम्हें हर हाल में इस संदेश को

आत्म सार करना है क्योंकि उस वक्त मैं

तुम्हारे पास ही बैठा हुआ हूं तुम्हारी हर

उस बात को सुन रहा हूं जो तुम अपने मन में

दोहरा रहे हो जो तुम अपने मन में बोले जा

रहे हो उन सभी विवादों को स्पष्ट रूप से

देख पा रहा हूं जो तुम्हारे भीतर चल रहे

हैं वह सब कुछ मैं भली भाति महसूस कर रहा

हूं जिस भावना को तुम भी महसूस किए जा रहे

हो क्योंकि मैं तुम्हें पूर्ण रूप से

जानता

हूं तुम इस भौतिक शरीर को एक नाम के

द्वारा जान रहे हो मैं तुम्हें समझ रहा

हूं तुम भले ही मुझे ना

समझो तुम्हारे शरीर के भीतर जो है मैं उसे

भी जानता हूं और आज मैं उसकी दुविधा को

शांत करने आया हूं इसलिए तुम्हें हर हाल

में संदेश को सुनते रहना है किसी भी हाल

में किसी भी परिस्थिति में तुम्हें इसे

बीच में नहीं छोड़ना है तुम बहुत सारे

प्रश्न करते हो कुछ पाने की मांग किया

करते हो और इस दुविधा में रहते हो कि कब

वह सब पूर्ण होगा लेकिन जब मनुष्य किसी

चीज की मांग करता है तो अपने अभाव को

दर्शाता है वह इस संसार में इस प्रकार की

आवृत्ति को छोड़ता है जैसे उसके पास वह

चीज उपस्थित ना हो और तब प्रकृति अपने

नियमों के अनुसार उसे वह चीज देती भी नहीं

है सर्वप्रथम उसे पाने के लिए तुम्हें उस

आवृत्ति में आना होगा तुम्हें वह अपनाना

होगा जो अपने आप में परम पूण है जो अभाव

रही जिसे तुम रोज मांग रहे हो मैं तुम्हें

बता दूं वह तुम्हें मिला ही हुआ है लेकिन

तुम उसे देख नहीं पा रहे हो अपनी खुली

आंखों से तुम उसे महसूस नहीं कर पा रहे हो

बस एक विडंबना है जिसकी वजह से वह तुमसे

जरा दूरी पर है व तुम्हारे करब होक के भी

तुम्हारा अपना नहीं बन पा रहा है लेकिन

तुम जब अपनी आंखों से भ्रम की पट्टी को

हटाओ ग तो यह देख पाओगे कि तुम्हें किसी

से मांगने की आवश्यकता ही नहीं है क्योंकि

वह इंसान किसी से क्या मांगेगा जो स्वयं

ही दूसरों को देने के काबिल है और तुम इसे

योग्य हो क्योंकि तुम्हारे पास वह सब कुछ

है जैसे एक सम्राट का पुत्र सब कुछ

प्राप्त कर सकता है क्योंकि सम्राट के पास

सब कुछ हो है और अंत में वह उसकी पुत्र का

ही हो जाता है वैसे ही सब कुछ मेरे प्रिय

बच्चे तुम्हारा ही है जो मेरे पास है वह

तुम्हारा ही है क्योंकि तुम मेरे ही प्रिय

बच्चे हो प्रिय बच्चे जो परमात्मा एक क्षण

में अनेक ब्रह्मांड की रक्षा करने में

सक्षम है क्या उसके लिए तुम्हारे हृदय में

उत्पन्न हो रही छोटी मोटी इच्छाओं को

पूर्ण करना अत्यंत दुर्लभ है नहीं मेरे

प्रिय जरा विचार करो कि परमात्मा तुमसे

क्या चाहते हैं मैं तुमसे जो चाहता हूं

तुम उसका विचार करो अपने वास्तविक स्वरूप

को जानो तुम मेरी प्रिय संतान हो तुम

वास्तविकता हो तुम जीवन हो इस संसार में

जो भी संपत्तियां मौजूद है वो तुम्हारे ही

उपभोग के लिए हैं तुम्हारे ही उपयोग के

लिए हैं तुम नहीं समझ पा रहे हो कि

तुम्हें क्या मिला हुआ है जो तुम्हें मिला

हुआ है तुम उसकी ही कामना में डूबे पड़े

हो तुम जो पाना चाहते हो वह तुम से अलग

नहीं है है बस अपनी आंखें खोलो और मैं

तुम्हें विचार दूंगा उन आंखों को खोलने का

मैं तुम्हें दिव्य दृष्टि प्रदान करूंगा

उसे देखने का जो तुम देख नहीं पा रहे हो

प्रिय बच्चे तुम्हें अपने भीतर उतरना है

गहनता से विचार करना है कि ऐसा क्या है जो

तुमसे छूट रहा है ऐसा क्या है जो तुम

वास्तविक रूप में पाना चाहते हो क्योंकि

जब तुम

इसका विचार करोगे केवल तभी तुम यह जान

पाओगे कि तुमसे कुछ भी अलग नहीं है तुमसे

कुछ भी दूर नहीं है सब तुम्हारी पहुंच में

ही है तुम सदा ही आकांक्षाओं अपेक्षाओं और

दुनिया भर के जंजा वातो में फंसे रहते हो

तुम सदा ही दुनिया भर के प्रतिभा और

दिखावे में उलझ कर रह जाते हो तुम भीतरी

रूप से यह नहीं समझ पा रहे हो कि संसार

में सब कुछ उपलब्ध है लेकिन वास्तविकता

में तुम्हारे जीवन के सत्य को किस चीज की

आवश्यकता है जब तुम अप जीवन का सत्य

समझोगे तभी यह जान पाओगे कि संसार में

बहुत सारे लोगों के बहुत सारे विचार बहुत

सारी कल्पनाएं बहुत सारी आकांक्षाएं

अपेक्षाएं और बहुत सारी चाहते हैं सबकी

चाहत भिन्न भिन्न है तुम्हारी चाहत उनसे

भिन्न है लेकिन मूल रूप में सबकी चाहत धन

पद प्रतिष्ठा प्रेम सम्मान यही है लोग

सामाजिक होना चाहते हैं किंतु तुम्हें

विचार करना है कि तुम्हारे जीवन के लिए

क्या सही है जो सभी चाहते हैं क्या तुम भी

वही चाहते हो या उससे अलग तुम्हारी कुछ

अलग अभिलाषा है तुम्हें अपनी मूल इच्छाओं

को जानना है वह इच्छाएं जो तुम्हें

वास्तविक रूप से आगे बढ़ने को प्रेरित

करती है वह इच्छाएं जो तुम्हारे जीवन को

सार्थकता प्रदान करती है तुम्हें उसका

विचार करना है क्योंकि तुम जो भी मांगोगे

वह तुम्हें मिलने वाला है अब तुम्हारे

जीवन के वह पल शुरू हो रहे हैं जहां से तु

तुम्हारी जो भी इच्छा होगी वह इच्छा अपने

आप ही पूर्ण हो

जाएगी वह इच्छा ऐसे पूर्ण हो जाएगी जैसे

तुम्हारे लिए यहां कोई सामान्य सा कार्य

हो जैसे यहां तुम्हारे लिए रोज की बात हो

जाए मनुष्य के जीवन में जब ऐसा क्षण आता

है यही वह पल होता है जहां उसकी वास्तविक

पहचान की जाती है यही वह पल होता है जहां

उसके चरित्र की पहचान की जाती है जब

मनुष्य के जीवन में यह पल आता है कि उसकी

समस्त इच्छाएं पूर्ण होने वाली होती है तब

उसकी चरित्र की पहचान के लिए उसके जीवन

में ऐसी ऐसी घटनाएं ऐसी चीजें भेजी जाती

हैं जहां उसे तय करना पड़ता है कि उसके

नैतिकता में क्या सही बैठता है और क्या

उसके नैतिकता में सही नहीं बैठता है

क्योंकि यही वह पल होता है जब प्रकृति

अपने नियमों के तहत यह तय करती है कि क्या

मनुष्य को आगे भी यह पल बरकरार रखने में

सहायता प्रदान की

जाए या फिर उससे यह पल छीन लिया जाए सुख

और दुख एक ही सिक्के के दो पहलू होते हैं

जो मनुष्य अपने सुख के दिनों में अपनी

नैतिकता का त्याग नहीं करता है उसके जीवन

में सिक्के का दूसरा पहलू कभी आता ही नहीं

है लेकिन जो मनुष्य अपने सुख के दिनों में

अहंकार के भली भूत हो जाता है अहंकार को

ही सार्थक मान लेता है अहंकार को ही अपना

सौम्य दे बैठता है और जब उसके खुशियों के

पल चल रहे होते हैं तब वह दूसरों की

पीड़ांतक

अपने आप को नहीं तोलता है तब उसके जीवन

में सिक्के का दूसरा पहलू अर्थात दुख इस

प्रकार से बढ़ जाता है कि पुनः सुख के लिए

वह दूसरों से प्रेम दया करुणा की भावना का

त्याग नहीं करता है और अहंकार के वशीभूत

होकर दूसरों को दिखावा नहीं करता है

दूसरों से कुछ अधिपत्य जमाने का प्रयत्न

नहीं करता है तब उसके जीवन में दुख नहीं

आता है तुम्हें इस बात को समझना है मैं

जानता हूं कि तुम्हारे भीतर इतनी करुणा है

इतना प्रेम है दया की ऐसी भावना है कि तुम

कभी भी ऐसा नहीं करोगे जीवन में चाहे सुख

के पल हो या दुख के पल हो तुम स्वयं में

परेशान हो जाते हो तुम स्वयं में व्यथित

हो जाते हो विचलन तुम्हारे मन में बार-बार

आ जाता है तुम इस तरह से परेशान हो जाते

हो कि कई बार तुम्हें लगता है कि अब जीवन

सार्थक रहा ही नहीं अब जीवन में कोई

उद्देश्य बचा ही नहीं अब ना कुछ करने को

बचा है ना आगे बढ़ने की प्रेरणा तुम्हें

नजर आती है लेकिन उन परिस्थितियों में भी

मैंने तुम्हारा आकलन किया है मैंने

तुम्हारी गतिविधियों तुम्हारे चरित्र के

लक्षण को देखा है और मैं तुमसे यह कहना

चाहता हूं गर्व से तुम्हें बताना चाहता

हूं कि तुम उन परिस्थितियों में भी अहंकार

के वशीभूत नहीं हुए उन परिस्थितियों में

भी तुम्हारे भीतर की करुणा दया और प्रेम

समाप्त नहीं हुआ वह प्रेम जो तुम स्वयं

कभी पा ना सके तुम दूसरों पर लुटाने से

पीछे नहीं हटते चाहे तुम्हारे साथ की बात

हो चाहे तुम्हारे परिवार वालों की बात

हो चाहे तुम्हारे अपने सगे संबंधी ही

क्यों ना हो तुम कभी किसी का अहित नहीं

चाहे तुमने सदा यही चाहा कि तुम्हारा जीवन

बेहतर तर तरीके से चलता रहे दूसरों के

जीवन से बहुत ज्यादा ना तुमने अपेक्षाएं

रखी है ना तुम उनके जीवन से बहुत ज्यादा

मतलब रखते आए हो लेकिन वह सभी लोग

तुम्हारे जीवन से बेवजह का मतलब रखते चले

आए हैं जिस वजह से कई बार तुम्हें

मुश्किलों का भी सामना करना पड़ा है कई

बार तुम्हें लोगों की बुरी नजर से भी बचकर

रहना पड़ा है लोग तुम्हारे प्रगति को

देखकर संतुष्टि के भाव में नहीं आए खास

करके वह सभी लोग जो तुम्हें अपना कहते चले

आए हैं और जिन्हें तुम अपना कहते चले आए

हो वह स्वयं नहीं चाहते थे कि तुम उस

प्रगति को प्राप्त करो क्योंकि ऐसा होने

पर उनके मन में हीन भावना उत्पन्न होने

लगती है वह तुमसे प्रतिद्वंदिता करने लगते

हैं उन्हें लगता है कि यदि तुम आगे बढ़ गए

तो वह अपने आप को कमजोर मान बैठेंगे वो

तुमसे बेवजह के

[संगीत]

से कई बार उनके मन में इतनी ईर्ष्या

उत्पन्न होती है इतना जलन पैदा होता है कि

वह तुम्हें देखकर खुश नहीं हो पाते तुम

उन्हें फूटी आंख नहीं

सुहाती और वह अपने मन में कल्पनाएं बुनते

हैं तुम्हें हराने का तुम्हें नीचे गिराने

का जब जब तुम दुख में होते हो वह तुम्हारे

प्रति सहानुभूति दर्शाते हैं वह ऐसा जताते

हैं जैसे केवल वही तुम्हारे सच्चे हि तैसी

हैं जैसे केवल वही तुम्हारे शुभ चिंतक हैं

लेकिन जै ही तुम्हारे जीवन में प्रसन्नता

आती है जैसे ही तुम्हारे जीवन में खुशियां

आती हैं उनके भीतर का अंधकार बढ़ जाता है

उनके भीतर का द्वेष बढ़ जाता है जैसे ही

तुम्हारे जीवन में प्रगति आती है जैसे ही

उन्हें यह समाचार मिलता है कि तुम प्रगति

पर एक कदम और बढ़ा चले हो उन्हें रात को

नींद नहीं आती वह घबराने लगते हैं वह आपस

में इस तरह के वार्तालाप लाप करने लगते

हैं जैसे तुम कित तने बुरे हो जैसे तुम

में कितनी बुराइयां छुपी हुई है लेकिन

मेरे प्रिय बच्चे तुम्हे इन सब से घबराने

की आवश्यकता नहीं है तुम्हें उनकी नजरों

में ना तो बेहतर बनना है ना ही उनसे

सम्मान की अपेक्षा रखनी है क्योंकि जो

व्यक्ति गिरगिट की तरह सदैव रंग बदलता है

वह आस्तीन में छुपे हुए उस सांप के समान

होता है जो दिखावा करता है कि वह तुम्हारा

अपना है लेकिन मौका पड़ने पर सर्वप्रथम वह

तुम्हे ही

डशहरा प्रगति को चाहते हैं जैसे तुम्हारा

साथी तुम्हारा आत्म संगी जो सदैव यह विचार

करता है कि तुम्हारा जीवन प्रसन्नता से

भरा रहे तुम्हारे जीवन में ना तो कभी कोई

विपत्ति आए ना ही तुम्हें कभी दुखों का

सामना करना पड़े जो सदा तुम्हारी खुशियों

की प्रार्थनाएं किया करता है मेरे प्रिय

तुम्हें इसका आभास नहीं या ज्ञान नहीं कि

तुम्हारा साथी तुम्हें लेकर कैसी कैसी

कल्पनाएं बुनता है वह तुमसे यह स्पष्ट रूप

से दर्शा नहीं

पाता लेकिन उसकी प्रार्थनाएं में सबसे

ज्यादा तुम्हारी ही प्रगति का विचार होता

है उसकी प्रार्थनाएं में तुम्हारे

संतुष्टि और सुकून की ही बातें होती हैं

वह अपनी आंखें बंद करके प्रकृति में सदैव

इसी प्रकार की आवृत्ति छोड़ता है जैसे कि

तुम्हें सदा खुशियां मिलती रहे वो ऐसे ऐसी

कल्पनाएं ऐसे भविष्य के विचार बुनता है जो

संभव भी नहीं हो सकते लेकिन उसकी मूल

भावना में केवल यह बात होती है कि तुम खुश

रहो वह सदा यह चाहता है कि उसके माध्यम से

तुम्हें खुशियां मिले वह सदा यही विचार

करता है कि उसके माध्यम से तुम्हारे जीवन

में सालों का नहीं बल्कि यह कई जन्मों का

पुराना संबंध है एक ही ऊर्जा के अंश हो

तुम

दोनों तुम दोनों में कोई भेद नहीं है तुम

दोनों के मिलन से ही इस प्रकार की रचना

होती है जिससे प्रकृति अपने चरम पर

पहुंचती है मेरे प्रिय बच्चे जो मैं

तुम्हें बता रहा हूं इसे जानना तुम्हारे

लिए अत्यंत आवश्यक है इसके रहस्यों को

समझना तुम्हारे लिए अत्यंत आवश्यक है

तुम्हारा आत्म संगी तुम्हारा साथी

तुम्हारे लिए सर्वश्रेष्ठ श्रेष्ठ है वह

तुमसे अत्यंत प्रेम करता है उसके हृदय में

तुम्हारे लिए अगाध प्रेम बसा है ऐसा प्रेम

जो तुम सोच भी नहीं सकते ऐसा प्रेम जो

तुम्हें प्रगति की ओर ले जाएगा ऐसा प्रेम

जो तुम्हारे मन को असीम शांति और सुकून से

भर देगा उसकी प्रार्थनाएं और तुम्हारी

इच्छाएं इतनी प्रबल है कि मुझे तुम्हारी

सहायता अवश्य ही करनी पड़ेगी तुम्हारी

सहायता के लिए मैंने विभिन्न शक्तियों का

चुनाव कर लिया है यह शक्तियां तीन विभिन्न

रूपों में होंगी और यह तीनों शक्तियां

तुम्हारा समर्थन विभिन क्षेत्रों में

करेंगी सर्वप्रथम आर्थिक क्षेत्र में

उन्नति स्पष्ट होगी आर्थिक क्षेत्र की

उन्नति होनी भी चाहिए क्योंकि जब तुम्हारे

जीवन में अर्थ बढ़ेगा तभी तुम्हारा जीवन

सार्थक हो

सकेगा तुम्हारा जीवन इस प्रकार से आगे

बढ़ा है कि उसमें अर्थ का महत्व बहुत

ज्यादा है अर्थात धन का महत्व बहुत ज्यादा

है जिस तरह के जीवन को तुम देखते आए हो

उसमें धन की प्रधानता रही है उसमें धन

मूल्यवान रहा है इसलिए तुम्हारे जीवन में

सबसे पहला जो बदलाव होगा वह धन के क्षेत्र

में होगा और इस बदलाव को सफल बनाने के लिए

एक दिव्य ऊर्जा शक्ति को मैंने तुम्हारे

साथ लगा दिया है और बहुत ही जल्द तुम्हें

उस ऊर्जा शक्ति का एहसास भी होगा क्योंकि

यह ऊर्जा शक्ति साकार रूप में तुम्हारे

समक्ष एक ऐसे रूप में

होगी जिसमें तुम यह समझ पाओ कि तुम्हारे

लिए क्या भेजा गया है अब दूस दूसरी ऊर्जा

शक्ति तुम्हारे प्रेम जीवन तुम्हारे

सामाजिक जीवन को बेहतर बनाने का कार्य

करेगी और ऐसा होना अत्यंत आवश्यक है

क्योंकि तुम्हारे भीतर क्रोध का जो

ज्वालामुखी मिलता है तुम्हारे भीतर जो

क्रोध उत्पन्न होता है उसका समापन होना

अत्यंत आवश्यक है अन्यथा यह क्रोध

अच्छे-अच्छे मनुष्यों को समाप्त कर डालता

है यह क्रोधी है जो ना जाने कितने युद्धों

का कारण बना यह क्रोधी है जो ना जाने

कितने रिश्तों को तोड़ने का कारण बना और

इस क्रोध का तुम्हारे नियंत्रण में कुछ

नहीं होता वह एक कदम स्वतः ही आगे बढ़

जाता है लेकिन तुम्हारे भीतर जो यह क्रोध

जन्म लेता है यह कभी स्पष्ट रूप से फूटकर

बाहर नहीं आ पाता इसलिए इसे स्वतः समाप्त

कर पाना अत्यंत कठिन है इस वजह से

तुम्हारे जीवन में एक ऐसे ऊर्जा शक्ति का

प्रवेश होने वाला है जो तुम्हारे जीवन में

क्रोध को समाप्त कर क्रोध को नियंत्रित कर

तुम्हारे जीवन को संतुलित

बनाए तुम्हारे जीवन को प्रेम रस से भर दे

साथ ही तुम्हारे भीतर समाय कार्य कौशल इस

प्रकार से बढ़ा दे कि तुम जहां भी जाओ

वहां तुम सम्मानीय रहो तुम जहां भी जाओ

वहां तुम्हारा आदर सत्कार किया जाए

तुम्हारी बातों को गहनता से सुना जाए

तुम्हारे विचारों पर अमल किया

जाए इसलिए तुम्हारे सामाजिक कला कार्य

कौशल को बढ़ाने के लिए दूसरी दिव्य ऊर्जा

शक्ति तुम्हारे लिए भेजी गई है इसी तरह से

तीसरी ऊर्जा शक्ति तुम्हारे जीवन के

वास्तविकता से जीवन के सत्य से अवगत कराने

का कार्य

करेगी तुम्हारे आध्यात्मिक अनुभवों को

बढ़ाकर तुम्हें उस मार्ग पर ले जाने का

कार्य करेगी जहां से केवल एक ही चीज नजर

आती है और वह है सत्य जहां से कुछ भी

दोहरे मापदंड नहीं रह जाते जहां से जीवन

की सभी समस्याओं का हल मिल जाता है जहां

से ना तो प्रश्न बचते हैं ना ही उत्तर

बचते हैं ना तो किसी प्रकार की दुविधा

होती है ना ही मन में कोई चंचलता उत्पन्न

होती है जहां यदि कुछ उपस्थित होता है तो

वह होता है केवल और केवल साकार सत्य

मानसिक शांति आध्यात्मिक सुकून एक ऐसा

सुकून जिसके लिए मनुष्य जीवन भर तरसता

रहता है वह सुकून जो ना तो बहुत अधिक

साधनों से प्राप्त हो सकता है ना ही

आध्यात्मिक जागृति से प्राप्त हो सकता है

ऐसा सु सु जो ना प्रेम से प्राप्त हो सकता

है ना ही सामाजिक बंधनों से प्राप्त हो

सकता है ऐसा सुकून जो ना प्रकृति दे सकती

है और ना ब्रह्मांड दे सकता है मैं

तुम्हें ऐसे सुकून को प्रदान

करूंगा ऐसा सुकून जो स्वयं परमपिता

परमेश्वर के अलावा इस संसार में कहीं भी

उपलब्ध नहीं है वह सुकून जिसे प्राप्त कर

मनुष्य इस लोक से हटकर दिव्य लोक का सौम्य

हो जाता है उस लोक में पहुंच जाता है जहां

दुख छू ही नहीं सकता क्योंकि वह वास्तविक

सत्य से परिचित हो जाता है मेरे प्रिय अब

तुम उसी तरह के जीत की तरफ बढ़ चले हो अब

यह तीनों शक्तियां मिलकर तुम्हें उस मार्ग

पर आगे ले

जाएंगी जहां से तुम्हे सत्य का ज्ञान होगा

जहां से तुम सब कुछ अपने खुली आंखों से

स्पष्ट रूप से देख पाओगे जहां प्रेम की

अद्भुत धारा बहती रहती है अब अपने मन को

नियंत्रित करो अपनी आंखें बंद कर इस जी को

स्वीकार करो और उस मार्ग पर आगे बढ़ने के

लिए तीनों दिव्य ऊर्जा शक्तियों को अपनी

सहमति प्रदान करो यह सहमति प्रदान करने के

लिए तुम्हें अभी संख्या

लिखनी है साथ ही यह भी लिखना है कि

मैं सभी दिव्य ऊर्जा शक्तियों को अनुमति

प्रदान करता

हूं कि वह मुझे जीत के मार्ग पर आगे ले

जाएं मैं सौभाग्यशाली हूं मेरे प्रिय

बच्चे तुम्हारा पुष्टि करना अत्यंत आवश्यक

है क्योंकि तुम ही सूत्रधार हो और तुम्हें

इसे गहराई से जानना है तुम्हें इसके रहस्य

को समझना है इसलिए तुम अवश्य ही पुष्टि

करना तुम्हारा पुष्टि करना अत्यंत आवश्यक

है तुम इस बात को अपने मन में गांठ कर लो

और एक बात सदा ही याद रखना कि परिस्थिति

चाहे जैसी भी हो चाहे कुछ तुम्हारे पक्ष

में हो चाहे सब कुछ तुम्हारे विपक्ष में

ही क्यों ना हो मैं तुम्हारा साथ नहीं

छोडूंगा मैं तुम्हारे हाथ को थाम कर

तुम्हें आगे बढ़ाता ही रहूंगा फिर चाहे

संसार की समस्त शक्तियां ही तुम्हारे विरत

में क्यों ना हो

जाए किंतु मेरी शक्ति से बढ़कर इस सृष्टि

में कुछ भी नहीं है इसलिए तुम भय का त्याग

कर मेरा हाथ पकड़कर आगे बढ़ो मैं तुम्हें

निश्चित तौर पर जीत दिलाने वाला

हूं सदा सुखी रहो मेरे आने वाले संदेशों

की प्रतीक्षा करना क्योंकि मैं फिर आऊंगा

तुम्हारे संकेतों को स्पष्ट करने तुम्हें

जीत दिलाने तुम्हें आगे बढने के

लिए सदा सुखी रहो और हमशा खुशिया बा

तुम्हारा क

होगा

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