Airstrike On Pakistan: Abhinandan को अगर नहीं लौटाता Pakisatan तो 9 मिसाइलें कर देती काम तमाम

भारत और पाकिस्तान के बीच कत्ल की रात
कैसी थी किस तरह से पाकिस्तान के विदेश
मंत्री के पांव थरथरा रहे थे और क्यों

भारत ने अपनी मिसाइलें पाकिस्तान पर तांदी
थी ये तमाम ऐसे घटनाक्रम है जिसके गवाह
रहे हैं पाकिस्तान में भारत के पूर्व

राजनी अजय बिसारिया जिनकी किताब इस वक्त
काफी चर्चा में है और इस पुस्तक के साथ इस
वक्त हम मौजूद भी हैं एंगर मैनेजमेंट यह
वर्ड सर आपने जो दिया है भारत और
पाकिस्तान के संबंधों के टर्म में यह अपने

आप में काफी कुछ बया करता है और उस वक्त
किस स्थिति को दर्शाता है जब ऐसा लगता था
कि भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध छिड़
ही जाएगा तो सबसे पहले इस टॉपिक से शुरू
करते हैं कि आपने वर्ड क्यों दरअसल चूज

किया तो इस इसके पीछे सोच ये थी कि एंगर
का एक थीम गुस्से का क्रोध का ये इस
रिलेशनशिप में रहा है ना केवल अब मगर पूरे
इतिहास में पूरे 76 सालों में चाहे वो आप
युद्ध की बात करें आतंकवाद की बात करें

पाकिस्तान का जो क्रोध है कि कश्मीर वापस
नहीं मिल पाया और इसमें कई
फैसले जो पाकिस्तान की तरफ से हुए वह
जल्दबाजी में हुए गुस्से में हुए 1965 का
जो युद्ध था बिना सोचे समझे ठीक तरह वह

छेड़ा गया तो और एक दूसरी थीम रही है
मैनेजमेंट की कि भाई हम इस इस इस प्रॉब्लम

को सुलझा नहीं सकते इस मसले को हम सुलझा
नहीं सकते तो इसको हम मैनेज करें किसी तरह
से कि जिससे कि बहुत ज्यादा कठिनाइयां ना
पैदा हो दोनों देशों के लिए तो इनको जोड़
के एक तरह से एक शीर्षक हमने चुना तकरीबन

पा साल होने को है साल 2019 और 26 फरवरी
पुलवामा के हमले ने दरअसल भारत को पूरी
तरह से ला दिया था इतनी बड़ी संख्या में
इंडियन फोर्सेस इससे पहले हुए किसी भी
आतंकी घटनाक्रम में शायद ही मार
और उस वक्त जो तनाव पैदा हुआ उस तनाव को
हमने देखा कि किस तरह से एक युद्ध की पूरी

पृष्ठभूमि तैयार हो चुकी थी आपके हवाले से
मैं दर्शकों को बताना चाहूंगा कि किस तरह
से दरअसल इस पुलवामा हमले के बाद
डिप्लोमेसी और दोनों ही देशों के बीच
डिफेंस और साथी गवर्मेंट की स्थिति दिखाई
दे
रही जी तो पुलवामा एक बहुत ही इंडिया के
लिए एक बहुत ही टोमेट घटना थी भारत में
बहुत ज्यादा आक्रोश था उस पर और एक एक

सेंस पैदा हुआ था कि अब हम अब बहुत हो गया
अब हम और नहीं चाहते इस तरह की घटनाएं और
कुछ करना पड़ेगा इसकी पृष्ठभूमि में
पहले सर्जिकल स्ट्राइक्स हो चुके थे 2016
में और यह आवश्यक हो गया था क्योंकि

पॉलिसी मेकर्स वही थे कि हम उससे भी
ज्यादा करें क्योंकि उससे भी ज्यादा यह
सीरियस मामला
और इसीलिए 2019 में फैसला हुआ कि एक जो
भारत करेगा पुलवामा के बाद व बालाकोट होगा

और पहली बार 1971 के बाद भारतीय वायु सेना
इंटरनेशनल बाउंड्री को क्रॉस करके
पाकिस्तान गई यह अपने आप में ही एक बहुत
ही बड़ा स्टेट ये हिंट उस वक्त के रक्षा

मंत्री जनरल विपिन रावत ने आपको दिया था
कि कुछ बड़ा हम करने जा रहे
ची आर्मी स्टाफ थे उस सबसे बड़ी बात कि
पाकिस्तान की संप्रभुता को इस तरह से
तारतार करते हुए उसकी एयर स्पेस में
भारतीय वायु सेना का प्रवेश और फिर अपने
टारगेट को अचीव करके वापस आना पाकिस्तान
ने शायद सपने में नहीं सोचा होगा कि इस
तरह से भारत रिट करेगा बिल्कुल तो

पाकिस्तान में पूरी तैयारी थी कि पुलवामा
के बाद कुछ होगा तो उनके पास एक उसका
अनुभव था 2016 का और उनको लग रहा था कि कि
कुछ उसी प्रकार की चीज होगी कुछ सर्जिकल
स्ट्राइक्स होंगे मगर भारत ने एक एलिमेंट
ऑफ सरप्राइज से एक उससे भी आगे कदम लिया
और इस इस वजह से यह पाकिस्तान को काफी
हिला दिया इस मामले में और उसके लिए
आवश्यक हो गया कि वह एक कार्यवाई करें जो

अपने लोगों को दर्शा सके कि हमने भी उसी
तरह की कुछ कारवाई करी उस वक्त भी भारत
में आम चुनाव होने वाले थे और पाकिस्तान
ने पूरी तरह से कोशिश की थी दरअसल पुलवामा
हमले को एक भारत के इंटरनल इशू खासतौर पर
जम्मू कश्मीर के दायरे में समेट देने की

और इसलिए वो कह रहे थे कि चुनावी माहौल
में हुआ हमला है और इसके लिए जैश मोहम्मद
जिम्मेदार नहीं है पाकिस्तान जिम्मेदार
नहीं है लेकिन इस रिटोरिक को आप लोगों ने

अपने डिप्लोमेटिक एफर्ट्स के जरिए जो
खारिज किया ये किस तरह से डिप्लोमेटिक
फ्रंट पर एक बड़ी जीत मानी जा सकती है
मेरे ख्याल से यह एक सफलता है भारतीय
डिप्लोमेसी की क्योंकि यह जो नैरेटिव बनता
है पाकिस्तान में जो बयानिहान है कि यह तो

साफ फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन था हमारा इसमें
कोई लेना देना नहीं आपने खुद ही किया होगा
यह चाहे मुंबई हो चाहे पठानकोट हो कई
टेररिस्ट अटैक्स में यह बात चलाने की
कोशिश करते हैं और पाकिस्तान के अंदर कई
लोग इस बात को सुनने और मानने को तैयार
हैं कि उनकी ब्रेन वाशिंग हुई है मगर
पाकिस्तान के बाहर
इस बात को कोई नहीं मानता भारत जब आगे
जाकर कहता है दुनिया को कि यह एक टेररिस्ट
अटैक है तो दुनिया उस बात को मानने को
तैयार है और पाकिस्तान के जो कई करीबी
मुस्लिम देश हैं वेस्ट एशिया में वो भी इस
बात को अब समझते हैं और पाकिस्तान को यह
मशवरा देते हैं कि ऐसा ना करें तो अब कुछ

ये बदला है और इसकी वजह से यह भारतीय
कूटनीति और भारतीय लीडरशिप की सफलता भी
माननी चाहिए लेकिन उस वक्त जब भारत ने
पाकिस्तान की एयर स्पेस में जाके और इतने
बड़े एयर स्ट्राइक को अंजाम दिया तो हमें

मालूम था कि पाकिस्तान भी टेट करेगा जैसा
कि आपने स्वयं लिखा है तो हमारी उस वक्त
की तैयारी क्या थी क्योंकि जब पाकिस्तान
ने रिट किया तो काफी मिस हैपनिंग भी हुई
और जाहिर है कि हमारा जो विमान है हमारा
फाइटर जेट है उसको हमारे पायलट लेकर
पाकिस्तान के एर स्पेस में एंटर कर ग और
उसके बाद जो हादसा हुआ वो आपने बखूबी लिखा
है देखिए युद्ध में हादसे होते हैं इसमें
पाकिस्तान ने एक किया कि भारत तो

पाकिस्तान में काफी डीप चला गया था
पाकिस्तानी एयरक्राफ्ट 34 किलोमीटर ही
अंदर आए वो भी एलओसी के और इंटरनेशनल
बाउंड्री को नहीं क्रॉस किया उन्होंने तो
पाकिस्तान की तरफ से एक नॉमिनल सी कारवाई
थी कि भाई हम अपने लोगों को बता सके कि
हमने भी कुछ किया है और इस तरह की कारवाई

के
के अगेंस्ट प्रिपरेशन 100% हमेशा नहीं हो
सकता तो कुछ ना कुछ कारवाई होगी जिसमें
कुछ ना कुछ रिजल्ट्स आएंगे मगर भारतीय

वायु सेना तैयार थी और वह जल्द ही
स्क्रैंबल हुई और उसने उनको बाहर किया

आपने लिखा है कि जो आर्टिलरी फायर शुरू
किया उस वक्त पाकिस्तान ने उससे ऐसा लग
रहा था कि वो हमें एंगेज कहीं और करना
चाहते हैं लेकिन दरअसल उनकी स्ट्रेटजी कुछ
और है और वो स्ट्रेटजी की सामने भी आए और

उस क्रम में जब भारतीय वायुसेना ने जवाब
दिया और उस वक्त अभिनंदन वर्धमान जिस तरह
से एंटर करते हुए पाकिस्तान की सीमा में
चले गए और पाकिस्तान के ए1 के एक मिसाइल
ने उनके एयरक्राफ्ट को डैमेज किया और फिर
वो नीचे उठे उसके बाद किस तरह से तेजी से
घटनाक्रम बदलता हुआ देखिए ये मिलिट्री
स्ट्रेटेजी में होता है कि आप कुछ

डिसेप्शन ट्राई करें क्योंकि आप आपको एक
सरप्राइज और स्पीड का एलिमेंट जरूरी होता
है तो यह सब हुआ मगर
इसके बाद जो पुलवामा और बालाकोट के बाद जो

घटनाएं हुई वह फोकस चला गया था हमारे
पायलट जो पायलट कैदी था और जिनेवा
प्रोटोकॉल्स के अनुसार अगर आप किसी
भी प्रिजनर ऑफ वर को ले उसको आपको वापस
करना होता तो भारत
ने कई तरह से वो दबाव डाला पाकिस्तान पर
कि उसको तुरंत वापस किया जाए और उसमें
हमारी कोर्स डिप्लोमेसी
काम आई और सफल हुई क्योंकि बाहरी देशों को
भी हमने कहा और डायरेक्टली पाकिस्तान को
भी यह संदेश भेजा गया कि आपको वापस करना
है नहीं तो हम इस मामले को एस्केलेट कर
सकते तो फिर वो कत्ल की रात कैसी थी जिसका
जिक्र प्रधानमंत्री मोदी ने भी किया जिसका
जिक्र आपने भी अपने किताब में किया है जी
और यह साफ है और इसके इसका विवरण करने के
लिए मैंने पाकिस्तानी सोर्सेस को ही कोट
किया है तो पाकिस्तान में पब्लिक डोमेन
में में भी ये बात करी कि नौ मिसाइल्स
तैयार थी उनके आने के लिए और यह बातचीत
हुई अ पाकिस्तान ने भारत को बोला कि आप ये
मिसाइल्स भेजने वाले थे पाकिस्तान ने अ
अन्य देशों को यह कहा कि भारत के मिसाइल्स
तैयार हैं और और भारत को रोका जाए तो भारत
ने तो ये अनाउंसमेंट नहीं किया अ कि यह
घटनाक्रम घटने वाला है मगर पाकिस्तान को
यह मैसेज साफ थी और पाकिस्तान ने
अपने फैसले किए और अपना बर्ताव बदला तो
क्या भारत का जो रि टेशन की तैयारी थी
भारत जिस तरह से अपनी मिसाइल्स को
पाकिस्तान की तरफ हम कहे तो टारगेट कर
चुका था दूसरी तरफ डिप्लोमेसी का जो
टारगेट था वो भी हम देख रहे थे कि पी फ
नेशन से लेकर और तमाम जो नॉन परमानेंट
मेंबर्स है उनको भी हमने इंगेज किया
पाकिस्तान को नेट करने के कोशिश की गई ये
दोनों मिलकर किस तरह से बाध्य करते हुए
दिखाई दिए इमरान खान को जिसके चलते उन्हे
आके अपने पार्लियामेंट में स्पीच देना
पड़ा हम अब इसको कल डाउन कर रहे जी इस
दबाव का असर हुआ और इसी वजह से पाकिस्तान
की आमी ने यह सुझाव दिया अपने
प्रधानमंत्री को और यह बात कही एक अपने
पार्लियामेंट में एक क्लोज डोर मीटिंग में
जिसमें बात हुई थी कि उनके पैर कांप रहे
थे और सर पर पसीना था तो यह बात पाकिस्तान
तक पहुंची कि भारत कुछ करने वाला है और
करने का इरादा रखता है तो अगर आप उस पायलट
को वापस ना भेजे और सही सलामत ना भेजे तो
भारत यह स्टेप्स ले सकता है आप तैयार है
इसके लिए कि नहीं पाकिस्तान का जवाब था हम
तैयार नहीं न्यूक्लियर डॉक्ट्रिन की बात क
जाती है क्या वाकई न्यूक्लियर डॉक्ट्रिन
जैसी स्थिति उस वक्त पैदा होती क्या
न्यूक्लियर वेपन को लेकर भी उस वक्त के
खतरे भारत और पाकिस्तान के बीच मेरे विचार
में कोई खतरा नहीं था कुछ पाकिस्तान की जो
हम सेबर टलिंग कहते हैं वो कभी-कभी बात
करते हैं मगर यह साफ था कि उस समय यह
मामला उस लेवल तक एस्केलेट हुआ ही नहीं था
तो ऐसा कोई मेरे ख्याल में डर नहीं था और
ऐसा कोई होने की आशंका नहीं थी इस क्योंकि
हम यह सब कन्वेंशनल लेवल पर कर रहे थे तो
इसको तो यह कन्वेंशनल वॉर में भी नहीं
बदला था तो न्यूक्लियर की बात तो बहुत बाद
में आती है हमारे पायलट की जो वापसी हुई
उसके बाद से किस तरह से आप देख रहे हैं कि
भारत और पाकिस्तान के रिश्ते जो हैं
हालांकि अब भी खटास पूर्ण है अब भी वही
क्रॉस बॉर्डर टेररिज्म हम झेल रहे हैं
लेकिन उसमें कुछ चेंजेज आपको दिख रहे हैं
तो उस उस घटना के बाद पाकिस्तान में कुछ
बदलाव आया कि पाकिस्तान की सोच में कुछ
बदलाव आया कि देखिए इतने करीब आ गए हम एक
बहुत बड़ी प्रॉब्लम के दूसरा एफएटीएफ का
जोर कि उसमें हम ग्रे लिस्ट से ब्लैक
लिस्ट में ना चले जाएं और और तीसरा कुछ नई
सोच हो रही थी कि यह पॉलिसी अब महंगी पड़
रही है मतलब हम सोचते थे कि कुछ इससे नहीं
होता करते रहे मगर अब महंगी पड़ रही तो
फिर प्रयास यह था पाकिस्तान की की ये सोच
बदले
और मगर यह बहुत धीरे-धीरे बदलता है
क्योंकि पुरानी आदतें बहुत मुश्किल से
जाती तो क्या इसी का परिणाम था कि
पाकिस्तान ने और पाकिस्तान के आईएसआई ने
भारत को आगाह किया कि अलकायदा कुछ बड़ा
करने वाला है इस तरह के इनपुट स्न पहले
कभी नहीं देता पहले भी हुआ है होता रहा है
म पब्लिक डोमेन में नहीं होता और
डिप्लोमेटिक लेवल पर नहीं होता
ये आपस में इंटेलिजेंस एजेंसीज कभी-कभी
ऐसी सूचना शेयर करती हैं मगर यह हमेशा
नहीं होता तो यह एक नई बात थी कि उन्होंने
कहा और इससे यह अनुमान लगाना ठीक होगा कि
वह नहीं चाहते थे कि एक और पुलवामा जैसी
घटना हो जाए इसके लिए नहीं तया पा साल का
वक्त गुजर चुका है हम देख रहे हैं कि इस
तरह के घटना क्रम को दोहरा तो पाकिस्तान
की कोई भी आतंकवादी संगठन नहीं सका लेकिन
जो छिटपुट घटनाए और लगातार उसका दौर जारी
है अभी हम देख रहे हैं किस तरह से जम्मू
कश्मीर में खासतौर प जम्मू के इलाके में
लगातार टारगेट किए जा रहे हैं तो क्या
पाकिस्तान की रणनीति ये है कि कोई बड़ा
नहीं करना है पर छोटे छोटे इस तरह के
आतंकी घटनाओ को अंजाम देते रहना इस इस तरह
का आशंका है कि एक है कि भारत का जो थ्रश
होल्ड है रिटन का उसके नीचे काम करें कि
आप छुटपुट घटनाएं करते रहे जिससे कश्मीर
में यह बात ना जाए कि सब कुछ ठीक हो गया
सब कुछ नॉर्मल हो गया है मगर आप कुछ ना
कुछ करते रहे मगर इतना ना करें कि भारत
क्रोधित होकर कुछ रिटेल करे तो उस लेवल पर
आप नहीं एस्केलेट करना चाहते एक आखरी सवाल
आपसे पूछूंगा कि पाकिस्तान भी अब एक और
चुनाव के क्रम में जा रहा है फिर से देख
रहे हम नवाज शरीफ आ चुके हैं और उस वक्त
के जो प्रधानमंत्री है उस इलाको के पीछे
हैं उनकी पार्टी पूरी तरह से नेस कर दी गई
है किस तरह से पाकिस्तान में होने वाला जो
अगला चुनाव है व भारत के साथ संबंधों को
निर्धारित कर देखिए जब भी पाकिस्तान में
चुनाव होते हैं नया नेतृत्व आता है नई
लीडरशिप आती है और तो कुछ आशा होती है कि
कोई नई सोच आए कुछ नए सिरे से इस इस
रिलेशनशिप को आगे ले जाने की कोशिश करें
और जब भारत और पाकिस्तान दोनों में चुनाव
के बाद नई सरकारें आएंगी तो फिर और भी
ज्यादा हमारी प्रो है कि कुछ ठीक हो कुछ
रिश्ते सुधरे इस सब में जरूरी है कि
आतंकवाद नहीं हो कोई कोई घटना आतंकवाद की
नहीं तो मेरे ख्याल में एक कॉशस ऑप्टिमिस
एक थोड़ी सी आशा की किरण है कि 2024 में
जब दोनों तरफ चुनाव हो जाए तो हम कुछ
रिश्ते आगे बढ़ाए तो जाहिर है भारत की
पॉलिसी रही है टॉक एंड टेरर कैन नॉट गो
टूगेदर तो टेरर की नीति से अगर पाकिस्तान
अपने आप को बदलता है है तो दोनों ही देशों
के बीच फिर से बातचीत बहाल हो सकती है
रिश्ते पटली पर लौट सकते हैं लेकिन येय जो
किताब आप हमारे ठीक पीछे आप देख रहे हैं
एंगर मैनेजमेंट यह एंगर भारत और पाकिस्तान
के बीच तब तक जारी रहेगा जब तक कि
पाकिस्तान अपनी टेरर की नीति यानी आतंक की
नीति नहीं बदल देता और मैनेजमेंट का तरीका
यही होगा कि वो अपनी आतंक नीति बदल दे और
तभी दोनों ही देशों के बीच जो डिप्लोमेटिक
रिलेशंस है पीपल टू पीपल कनेक्ट है वो फिर
से बहाल हो सकता है मुझे लगता है सर आप
सहमत होंगे इस बात से बिल्कुल बिल्कुल ठीक
बात क धन्यवाद न्यूज नेशन पर बातचीत करने
के लिए और अपने विचारों धन्यवाद थंक य

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