Akhilesh Yadav ने Dharmendra Yadav की जगह Shivpal Yadav को क्यों बनाया उम्मीदवार ?

महाभूता सोमवार की यह तस्वीर है
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उस दिन कल्की
धाम मंदिर का शिलान्यास करने संभल पहुंचे
थे पीएम ने पूजा पाठ के साथ संभल की धरती

से इस इलाके में चुनावी शंखनाद किया और
पीएम के इस दौरे का सियासी असर यह हुआ कि
अगले ही दिन यानी मंगलवार को समाजवादी
पार्टी ने संभल से सटे बदायूं लोकसभा सीट

पर अपना उम्मीदवार बदल दिया अपनी
उम्मीदवारी के ऐलान से शिवपाल सिंह यादव
खुश है और पार्टी के फैसले का स्वागत कर
रहे हैं अब राष्ट्रीय पार्टी ने जो निर्णय

लिया है जी उसका स्वागत किस तरह से तैयारी
रहेगी चुनाव को लेकर आपकी पूरी तैयारी
हैद बदायूं सीट पर 1996 से 2019 तक
समाजवादी पार्टी का कब्जा रहा है इस सीट

पर छह बार समाजवादी पार्टी जीत चुकी है
2019 के चुनाव में बीजेपी ने यहां
समाजवादी पार्टी को हराया था बीजेपी की
संघमित्रा मौर्य बदायूं की सांसद हैं

बीजेपी संघमित्रा मौर्य को फिर से
उम्मीदवार बनाएगी या नहीं यह तस्वीर साफ
नहीं है लेकिन मौजूदा राजनीतिक पिक्चर में
संघमित्रा मौर्य की दावेदारी मजबूत बन रही
है वैसे भी संघमित्रा के पिता स्वामी

प्रसाद मौर्य समाजवादी पार्टी से नाता
तोड़ चुके हैं जहां तक बदाई के जातीय
समीकरण का सवाल है तो यहां सबसे ज्यादा 4
लाख यादव वोटर हैं मुस्लिम वोटरों की

संख्या भी 35 लाख से ज्यादा है यादव ओबीसी
वोटर करीब ा लाख हैं वैश्य और ब्राह्मण
वोटरों की संख्या भी करीब ई लाख है दलित
वोटरों की संख्या पौने लाख के आसपास
है श्रीपाल को चुनावी अखाड़े में उतारकर

पार्टी की रणनीति यादव और मुस्लिम समाज को
एक साथ रखकर गैर यादव पिछड़े वोट बैंक में
सेंध लगाने की है क्योंकि माना जाता है कि
शिवपाल यादव की सियासी पकड़ यादवों के

साथ
ही गैर यादव पिछड़े वोटरों में भी है

हालांकि यह कोशिश कितनी कारगर साबित होगी
यह तो वक्त बताएगा फिलहाल अपनी अपनी जीत
के लिए हर दल रणनीति बनाने में जुटा
है

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