Amitabh Bachchan की सलाह पर Rajiv Gandhi ने बदला था वित्तमंत्री, फिर क्यों टूटी थी दोनों की दोस्ती?

जिसके खाने पर बनते थे मंत्री जिनके साथ
मानते थे छुट्टियां जिनकी दोस्ती के होते
थे चर्च इस अमिताभ से क्यों अलग हुए राजीव
भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और कांग्रेस

के तत्कालीन अध्यक्ष राजीव गांधी और साड़ी
के महानायक अमिताभ बच्चन के बीच की दोस्ती
किसी से छुपी नहीं है कहा जाता है की
दोनों परिवार साथ-साथ छुट्टियां बिताते थे
और हर सुख दुख साथ मिलकर बताते थे फिर
अचानक ऐसा क्या हो गया की बच्चन और गांधी
परिवार के बीच इतनी तल्ख़ियां ए गई

ज्यादातर लोग मानते हैं की ऐसा राजीव
गांधी की मौत के बाद हुआ मगर दोनों
परिवारों को करीब से जन वाले कहते हैं की
शुरुआत राजीव गांधी के जीते जी ही हो गई
थी ऐसा ही एक के साथ बॉलीवुड बेनकाब की इस
कड़ी में हम आपको सुनने जा रहे हैं तो

चलिए शुरू करते हैं किताब में दवा लेखक
वरिष्ठ पत्रकार और पूर्व सांसद संतोष
भारतीय ने अपनी किताब वीपी सिंह चंद्रशेखर
सोनिया गांधी और मैं में राजीव और बिग बी
के बीच लोगों की इसी तल्खी को उजागर किया
है जो दोनों परिवारों के बीच 1989 के बाद
आनी शुरू हो गई थी यह वह दूर था जब राजीव
गांधी सत्ता से बाहर थे और विपक्ष के नेता

का पद संभल रहे थे अपनी किताब में संतोष
भारती ने दवा करते हुए लिखा है की एक बार
पूर्व पीएम राजीव अमिताभ से इतने नाराज हो
गए थे की उन्हें सांप तक का दिया था
अमिताभ के लिए तीखे शब्द संतोष भारतीय की
किताब वीपी सिंह चंद्रशेखर सोनिया गांधी
और मैं के मुताबिक दोनों के रिश्तों में

दरार आने तब शुरू हुई जब विश्वनाथ प्रताप
सिंह भारत के प्रधानमंत्री बने ये दाल की
इतनी बाढ़ गई की एक बात और राजीव गांधी ने
उन्हें सांप तक का दिया था भारतीय के
शब्दों में राजीव तब विपक्ष के नेता थे और

अमिताभ उनसे मिलने आए थे जब अमिताभ चले गए
तो राजीव ने कहा ही इसे एन स्नेक मतलब वो
एक सांप है पुस्तक में दवा किया गया की इस
घटना के वक्त तब के एक पत्रकार के रूप में
वहां कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला भी मौजूद
थे अमिताभ ने बदलवाया वित्त मंत्री संतोष
भारतीय की किताब वीपी सिंह चंद्रशेखर

सोनिया गांधी और मैं में 1987 की उसे
महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम का भी
उल्लेख है जब तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव
गांधी ने उसे वक्त के वित्त मंत्री
विश्वनाथ प्रताप सिंह से फाइनेंस
मिनिस्ट्री छन ली थी और रक्षा मंत्रालय का
जम्मा सोप दिया था लेखक ने दवा किया है की
इस फैसला के पीछे अमिताभ बच्चन थे जबकि

राजीव गांधी ने इसके लिए पाकिस्तान से जंग
का बहन बनाया था उनके मुताबिक उसे समय जंग
के हालात भी नहीं थे सत्ता पर बच्चा दे
फैक्ट संतोष भारतीय की पुस्तक वीपी सिंह
चंद्रशेखर सोनिया गांधी और मैं के मुताबिक
इसकी पृष्ठभूमि अंडमान में छुट्टियां के
दौरान तैयार की गई थी जब राजीव गांधी का

परिवार भी वहां छुट्टियां मनाने आया था और
बच्चन परिवार भी इस दौरान अमिताभ भी वर्मा
यानी की म्यांमार से वहां पहुंचे भारतीय
के अनुसार
राजीव गांधी समझ नहीं का रहे थे की कैसे
वीपी सिंह की शैली को बदलें क्योंकि
उन्होंने ही वीपी सिंह को बेखौफ आगे

बढ़ाने का निर्देश दिया था अधिकांश
उद्योगपति राजीव गांधी के पास वीपी सिंह
से बार-बार वित्त मंत्रालय लेने का निवेदन
भेजना लगे अरुण गांधी भी राजीव गांधी को
बार-बार यही सलाह दे रहे थे सरकार के
फसलों में अरुगादी का ही दिमाग झलकता था
ये भी दवा किया गया की चूंकि अमिताभ बच्चन

राजीव गांधी के दोस्त थे इसलिए जो
उद्योगपति प्रधानमंत्री से संपर्क नहीं कर
का रहे थे उन्होंने अमिताभ बच्चन से
संपर्क बना लिया पुस्तक में दवा किया गया
है की राजीव गांधी ने कभी भी वीपी सिंह से
किसी उद्योगपति की सिफारिश नहीं की इस
पूरे किस पर आपकी क्या राय है हमें कमेंट
क्षेत्र में बताइए और बॉलीवुड के ऐसे ही

किस्म के लिए बने रहिए जनसत्ता के साथ
नमस्कार
[संगीत]

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