Bihar के शिक्षकों के साथ अब क्या खेल खेल रहे अधिकारी, Nitish Kumar का आदेश सुनने वाला कोई नहीं भड़के

नमस्कार आप न्यूज़ फाउंडेशन देख रहे हैं
मैं हूं आपके साथ वंदना लगातार शिक्षक जो
हैं केके पाठक के फरमान से परेशान है
दूसरी तरफ सरकार ने जो है शिक्षकों को

अस्वस्थ किया था और टाइमिंग को लेकर के भी
जो सदन में बातें कही गई थी हालांकि अभी
कुछ चीजों में सुधार हुआ है और कुछ चीजें
अभी भी बाकी है क्या है शिक्षकों की

परेशानी और कौन-कौन सी ऐसी अब तक के
शिक्षकों के हित में कदम उठाया गया है
तमाम मुद्दे पर बात कर ने के लिए हमारे
साथ हैं सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से
प्रत्याशी रहे और स्वर्गीय केदारनाथ पांडे
के पुत्र आनंद पुष्कर क्या लग रहा है कि

शिक्षकों की परेशानी को हल किया गया है या
फिर यूं कहे कि अभी भी जो उलझने थी वह
बरकरार है देखिए वंदना जी सबसे पहले तो
बात है कि शिक्षा विभाग ने आज भी उलझन को
क्रिएट करके रखा हुआ है जब बिहार विधानसभा
में बिहार के माननीय मुख्यमंत्री महोदय ने
स्वयं कहा

कि विद्यालय का समय जो है संचालित 10 बजे
से 4 बजे तक किया जाएगा और शिक्षक जो है
15 मिनट पहले आएंगे और 15 मिनट के बाद वह
चले जाएंगे यह दुर्भाग्य की बात है कि अब
तक माननीय मुख्यमंत्री जी के निर्देश के
बाद भी शिक्षा विभाग ने यह टाइम शेड्यूल
को जारी नहीं किया है यह सबसे बड़ा

लोकतंत्र के लिए यह दुर्भाग्य की बात है
एक तरफ आपके ही मीडिया के द्वारा यह
बार-बार प्रचारित किया जाता है कि केके
पाठक जी जब से आए हैं शिक्षा के में सुधार
हो रहा है मैं तो यही सवाल शिक्षा विभाग
के उच्चस्तरीय पदाधिकारी से भी पूछना

चाहता हूं कि आप किस तरह का सुधार कर रहे
हैं आप जो है शिक्षकों को प्रतारक करने के
अलावा आप सुधारात्मक दृष्टि से कोई काम
नहीं कर रहे हैं 2007 में जब स्वर्गीय मदन
मोहन झाजी शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव थे
और हमारे पिता स्वर्गीय केदारनाथ पांडे जी
जब उस समय जीवित थे तो उन्होंने बिहार में

एक आयोग बनाया था जिसमें में आयोग में था
कि समान स्कूल प्रणाली जो है हम लोग बिहार
में इसको लागू करेंगे और माननीय
मुख्यमंत्री जी का भी दिशा निर्देश उसमें
प्राप्त हुआ था एक कमेटी भी बनी थी उस
कमेटी ने अपना रिपोर्ट भी दिया था लेकिन

आज तक वह रिपोर्ट जो है शिक्षा विभाग के
अलबी में बंद होकर पड़ा हुआ है समान स्कूल
प्रणाली का मतलब यही होता है कि अपर मुख्य
सचिव का भी बेटा और एक गरीब इंसान का बेटा
भी सरकारी विद्यालय में पढ़ेगा और जब तक
कि यह दोनों के बच्चे एक विद्यालय में

नहीं पढ़ेंगे तब तक विद्यालय सुधारात्मक
दृष्टि में नहीं जा सकता है आप प्रचार कर
रहे हैं कि हमारे आने के बाद शिक्षक
पढ़ाने लगे हैं तो यह तो गलत रिपोर्टिंग

आपकी है आप ऐसा विद्यालय क्यों नहीं बना
रहे हैं कि आईएस के के पाठक का भी बेटा
जाकर व सरकारी विद्यालय में पढ़े तो आपके
विद्यालय आपके बच्चे जो है कि अमेरिका के
विद्यालय में जाकर पढ़ते हैं और गरीब

इंसान का बेटा जो है शुरू से आज से नहीं
शुरू से सरकारी विद्यालय में पढ़ पता है
मैं भी सरकारी विद्यालय में पढ़ा हूं
हमारे पिताजी स्वयं सरकारी विद्यालय में
पढ़ाते रहे हैं तो जब शिक्षकों की सुविधा

देने की बारी आती है तो सुविधा के नाम पर
आप गुमराह करते हैं कि शिक्षक आपके पढ़ाते
नहीं है तो सुविधा के समय गुमराह करना
शुरू करते हैं और अपने बच्चे को सरकारी
विद्यालय में भेजने में आपको शर्म लगती है

और समान स्कूल प्रणाली की रिपोर्ट को लागू
करने में आपको शर्म लगती है आप क्यों नहीं
समान स्कूल प्रणाली की रिपोर्ट को लागू
करते हैं जब माननीय मुख्यमंत्री महोदय ने
स्पष्ट रूप से जब हमारी भी मुलाकात हुई थी
उन्होंने स्वयं कहा विशिष्ट शिक्षक

नियमावली में संशोधन के लिए आपने देखा भी
होगा मुख्यमंत्री सचिवालय से मुख्य सचिव
को पत्र भी निर्गत होकर गया था कि आमुख
आमुख जो बिंदु मैंने उठाया था तीन जिले पर
पदस्थापन करने की बात यह लोग कर रहे हैं
यह भी कहा जा रहा है विधानसभा में कि इन
लोगों के संवर्ग बदल रहे हैं तो संवर्ग

बदल रहा है यह तो अच्छी बात है तो संवर्ग
बदलने से पद स्थापना का क्या मतलब है अगर
वह शिक्षक सेम विद्यालय में भी रहे और
उनके संवर्ग को अगर आप बदल रहे हैं तो
उसमें पद स्थापित करने की कोई बात होती

नहीं है दूसरी बात है कि बिहार के माननीय
मुख्यमंत्री महोदय ने ऐतिहासिक गाधी मैदान
में हमारे पिताजी स्वर्गीय केदारनाथ पांडे
जी के नेतृत्व में 2020 में शिक्षकों ने

एक बड़ा आंदोलन किया था उस समय शिक्षकों
को माननीय मुख्यमंत्री महोदय ने सेवा सत
नियमावली दी थी वह सेवा सर्त नियमावली में
उनको स्थानांतरण का ऐच्छिक स्थानांतरण का
प्रोविजन भी लाया गया

सरकार का सदन में मेरे पिता स्वर्गीय
केदारनाथ पांडे जी के ध्यान आकर्षण के बाद
सरकार ने स्वीकार किया था कि मैं आपको एक्
का स्थानांतरण लागू करूंगा कई बार यह सवाल
को हमारे स्वर्गीय पिता और बिहार विधान

परिषद के माननीय सदस्य संजीव कुमार सिंह
हमारे अभिभावक और माननीय सदस्य संजय कुमार
सिंह ने इस सवाल को कई बार सदन में उठाया
कि आप जो सेवा सत नियमावली आपने बनाया है
तो वह सेवा सत नियमावली में जो ऐच्छिक
स्थानांतरण का प्रोविजन है आप दे दीजिए तो
हम यहां पर मांग कर रहे थे ऐच्छिक

स्थानांतरण का सरकार का भी बार-बार विभाग
ने जो जवाब बनाकर दिया कि हम आपका ऐच्छिक
करेंगे हम सॉफ्टवेयर बना रहे हैं
सॉफ्टवेयर बन जाएगा तो ऐच्छिक स्थानांतरण
का प्रोविजन लागू करेंगे तो आप जब

सॉफ्टवेयर बना लिए संवर्ग बदल रहे हैं तो
ऐच्छिक स्थानांतरण के जगह पर आप उनका
पदस्थापन पोस्टिंग क्यों करने जा रहे हैं
पोस्टिंग के लिए बात हुई थी क्या
स्थानांतरण के लिए बात हुई थी वो भी
ऐच्छिक स्थानांतरण के लिए बात हुई थी तो
मैं यही कहना चाहता हूं विभाग के

पदाधिकारियों को भी मैं कहना चाहता हूं कि
बिहार के माननीय मुख्यमंत्री महोदय ने जब
स्पष्ट निर्देश दिया है चाहे वह विद्यालय
समय परिवर्तन का हो या ऐच्छिक स्थानांतरण
का प्रोविजन जो 2020 में माननीय

मुख्यमंत्री महोदय ने जो बनाई थी और मैं
भी जब मिला था माननीय मुख्यमंत्री महोदय
को तो मैंने कहा था इन सब सारी बातों को
यथाशीघ्र लागू करना चाहिए और लागू करवाना
चाहिए इसका पत्र निर्गत होना चाहिए ताकि
हमारे बिहार के शिक्षक जो एक मानसिक
प्रताड़ना जो झेल रहे हैं शिक्षा विभाग के

तानाशाही रवैया से उनको कम से कम कुछ
रिलीफ मिल सके यह रिलीफ की बात हम लोग कर
रहे हैं उनको रिलीफ मिल सके प्रमोशन हो
गया है लोग अब लग रहा है कि कुछ नए आते
हैं प्रमुख सचिव शिक्षा विभाग में तो वो

इन तमाम चीजों को देखिए केके पाठक जी भी
है केके पाठक एक नौकर शाह है केके पाठक
कोई जनप्रतिनिधि तो है नहीं नौकर शाह है
और नौकर शाह का सबसे बड़ा दायित्व भी बनता
है और कर्तव्य भी बनता है कि सरकार की जो
कथित बातें हैं उन बातों को लागू करना जब
माननीय मुख्यमंत्री महोदय ने जनता की
अदालत में वह भी विधानसभा में कहा कैबिनेट
की बैठक में भी सबसे पहले जब महागठबंधन की
सरकार थी उस समय भी मुख्यमंत्री ने कहा था
विद्यालय का समय परिवर्तन करने के लिए यह

बातें जग जाहिर हो चुकी है तो जब जग जाहिर
बातें हैं तो ऐसे नौकरशाह के ऊपर तो हम तो
मांग करते हैं कि सरकार को यथाशीघ्र कारवा
करना चाहिए ऐसे नौकर शाह के ऊपर जो बिहार
के माननीय मुख्यमंत्री महोदय की बात को
नहीं मानता है उनको तुरंत उनकी बात को
मानना चाहिए और अभी भी समय देर नहीं हुआ
है विद्यालय के समय में आप यथाशीघ्र

परिवर्तन कीजिए विशिष्ट शिक्षक की जो
नियमावली बनी है उस नियमावली में जो
मूलभूत जो सुविधा देने की बात है उस
सुविधा को आप दीजिए सदन में बार-बार यह
सवाल उठते रहा माननीय सदस्यों ने यह सवाल
को उठाते रहा आप सदन को भी आप अवहेलना कर

रहे हैं जनता की अदालत को आप माननीय
सदस्यों की भी बात को नहीं सुन रहे हैं तो
यह बात कहीं से बिहार के लोकतंत्र के लिए
अच्छा नहीं है अगर नौकर शाह हाबी होते हैं
यह जनता के लिए बहुत दुर्भाग्य की बात है
सरकार को भी अन्य विषयों पर भी संज्ञान
लेना चाहिए मैं आपके माध्यम से भी मांग

करता हूं कि सरकार को यथाशीघ्र कारवाई
करना चाहिए और ऐसे जो नौकरशाह हैं जो
सरकार की बातों को नहीं मानते हैं ऐसे
नौकरशाह के ऊपर उच्चस्तरीय कारवाई होना
चाहिए और सरकार को उच्चस्तरीय यह कारवाई
करना चाहिए बहुत-बहुत शुक्रिया बात करने
के लिए तो आपने सुना कि क्या कुछ कहना था
आनंद पुष्कर का जो पूर्व में प्रत्याशी
रहे हैं सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से
इन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग के जो अप
प्रमुख सचिव हैं तत्काल सरकार उन पर
कारवाई करें अगर सरकार ऐसा नहीं करती है
तो यह आगे आने वाले समय के में शिक्षकों
के लिए और भी ज्यादा जो है परेशानी का
विषय बन सकता है लेकिन अब देखने वाली विषय
होगी कि अप प्रमुख केके पाठक जो शिक्षा
विभाग के सचिव हैं उनको का प्रमोशन हुआ है
तो क्या अब शिक्षा विभाग में सुधार आ
पाएगा या नहीं यह देखने वाले विषय होगी इस
खबर बस इतना ही बने रहिए न्यूज फेशन के
साथ
धन्यवाद

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