Bihar में BJP के हाथ से निकलीं 40 सीटें ? बाप के आगे पिट गया Modi फार्मूला |

उल्टा चश्मा यूसी में दोस्तों आपका स्वागत
है मैं हूं आपके साथ राशिद जहीर 80 सीट
लोकसभा की उत्तर प्रदेश में और 40 सीटें
बिहार के अंदर यह 120 सीटें ऐसी हैं कि

भारतीय जनता पार्टी के लिए केंद्र में आने
के लिए संजीवनी का काम करती हैं पूरा शहर
जानता पूरा देश जानता है पूरी दुनिया
जानती है कि उत्तर प्रदेश के अंदर 2019

में भी और 2024 में भी भारतीय जनता पार्टी
ने बहुत ही मजबूत जीत दर्ज की थी और बिहार
में तो रिकॉर्ड ही कायम हो गया था 40 में
से 39

सीटें लगभग 7त प्रतिशत रिजल्ट उनका था 120
सीटों में किस प्रकार से तेजस्वी यादव
अखिलेश यादव और कांग्रेस आई और बाकी

छोटे-छोटे दल मिलकर भारतीय जनता पार्टी की
इस बेहतरीन जमीन पर किस प्रकार से उसको
उखाड़ने का काम कर रहे हैं यह मैं आपको
बताने के लिए हाजिर हुआ हूं दोस्तों बात

ऐसी है कि समीकरण जब बन जाते हैं ना बिहार
की एक सीट है शायद किशनगंज उस किशनगंज के
बारे में मैं आपको बताऊं वहां पर लगभग 60
फीसद से ज्यादा मुस्लिम है किसी भी सूरत

में वह भारतीय जनता पार्टी जीत नहीं पाती
वजह उसकी क्या है क्योंकि समीकरण
मुस्लिम्स का है एमवाई समीकरण दरअसल बिहार
से ही चला दोस्तों और बिहार के अंदर यह

बात हुई कि आखिरकार यह मुस्लिम यादव का जो
समीकरण है इसके साथ थोड़ा सा अगर ओबीसी
मिल जाता है तो हालात यह होते हैं कि
भारतीय जनता पार्टी को अपनी जीत बचाना

मुश्किल हो जाता
अब मैं आपको थोड़ा सा जातिवाद भी समीकरण
बताऊंगा सीट के हिसाब से भी एनबीटी ने
छापा के लोकसभा चुनाव 2024 यूपी बिहार में

विपक्ष के एमवाई कोट का तोड़ क्या 120
सीटों पर फंस गई बीजेपी इसके अंदर तमाम
आंकड़े व बताए गए हैं कि यूपी और बिहार
में मुस्लिम यादव की अच्छी खासी आबादी है
आरजेडी और कांग्रेस पर करते हैं भरोसा

यहां के मुस्लिम और यादव इंडिया गठबंधन
में सीट शेयरिंग होने से दलों को मुस्लिम
यादव के वोट मिलने का अनुमान मुस्लिम प्लस
यादव वोट की एक जुटता यूपी और बिहार की
120 सीटों पर बीजेपी को देगी टेंशन अभी जो

जातिगत सर्वे हुए हुआ है वहां यादव लगभग
लगभग 17 फीस हो गया है उससे पहले तो 10
फीस माना जाता था लेकिन वह जातिगत सर्वे
जो निकल कर आया नीतीश कुमार और जो है
तेजस्वी यादव ने जो कराया था उसमें पता

उत्तर प्रदेश में तो बिहार में 15 है यहां
मुस्लिम मिसाल के तौर पर 15 है 20 से 20
के करीब है बिहार में 15 पर से ज्यादा है
तो यह लोग बढ़ गए अब इनके दोनों के समीकरण
से होगा यूं कि अगर इन्होंने यानी कि

तेजस्वी यादव की पार्टी और अखिलेश यादव की
पार्टी कांग्रेस के साथ मिलकर और बाकी दलो
से अगर बात चल रही है कुछ ऐसे कैंडिडेट
उतार दिए तो जो उत्तर प्रदेश में 62 प्लस
दो यह दो सीटें जो मिली थी उत्तर भारतीय

जनता पार्टी को उसमें डन डेंट लगने के
100% आसार दिखाई दे रहे हैं एक बात मैं और
भी बता देता हूं एंटी इनकंबेंसी भी एक
फैक्टर होता है और उत्तर प्रदेश के अंदर
भी आप जानते हैं कि भारतीय जनता पार्टी की

है जो मजबूरी में भारतीय जनता पार्टी की
तरफ जाता है वह लोग देना नहीं चाहते लेकिन
चूंकि सामने मुलायम सिंह होते हैं या

मायावती होती है तो उनको नहीं देते लेकिन
कांग्रेस 17 सीटों पर जो इस समय इलेक्शन
लड़ने जा रही है मैंने पिछले एपिसोड में
भी आपको बताया था उन 1 सीटों में अगर
उन्होंने मैं कहता हूं कि कास्ट का ध्यान

रखते हुए ऐसे कैंडिडेट को उतारा जो मैं
पहले कई बार बता चुका जो अपर कास्ट के हो
जो अपने वर्ग में 150000 डेढ़ लाख वोट
लाने की सामर्थ रखते हो तो आप यकीन मानिए
17 में से 12 10 12 सीटें कांग्रेस आई
निकाल देगी यही फार्मूला लागू होता है

 

अखिलेश यादव पर और यह तमाम 120 सीटों में
अगर 30 सीट भी घट गई दोनों जगह को मिलाकर
तो भारतीय जनता पार्टी 330 से 272 पर पर आ

जाती है और अभी तो पूरा देश बचा है मध्य
प्रदेश में उनके जो है घटने के चांस हैं
हरियाणा में घटने के चांस हैं दिल्ली में
घटने के चांस हैं कर्नाटक में घटने के
चांस है तो यह 250 का आंकड़ा नहीं छू
पाएंगे ऐसा भी बुद्धिजीवियों का राजनीतिक
पंडित उनका कहना है मुस्लिम यादव समीकरण
इनको वाकई थोड़ा सा दरकिनार कर दिया गया

था लेकिन कांग्रेस आई का जो एक सर्व समाज
को लेकर चलने का तरीका है कांग्रेस आई
मैंने आपको कई बार बताया कि वह जाति
वाद बातें नहीं करती है धर्मों की बातें

नहीं करती है और उनका जो कैंडिडेट होता है

वह ज्यादातर एक्सेप्टेबल होता है हर एक
वर्क के लिए अगर मजबूत कैंडिडेट खड़े कर
दिए गए तो मुरादाबाद में अजरुदीन जीत चुके
हैं अनु टंडन के फादर थे वहां पर व जी
2009 में तो 22 सीट आ गई थी तो बहरहाल बात

यह है कि पिछड़ों का थोड़ा वोट पर
कंसंट्रेट बिहार के अंदर हो जाए बिहार के

अंदर अति पिछड़ा जो वोट है वह ज्यादातर
दोस्तों 36 फीसद के करीब है वो व जाता है
भारतीय जनता पार्टी में और 23 फीस जो
पिछड़ा वोट है वो जाता है राज तेजस्वी
यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल को अगर
उस 36 फीसद में 57 पर की भी कमी आ गई और

नीतीश कुमार के कैंडिडेट जहां पर खड़े
होंगे वहां अगर कांग्रेस के लोगों को टिकट
मिला तो आप यकीन जानिए जो एंटी नीतीश वहां
हवा बह रही है और तेजस्वी यादव के पक्ष
में जो हवा बह रही है इस बार बिहार का
चुनाव पूरे देश के सामने एक ऐसी नजीर रखने

वाला है कि वो पता चल जाएगा के वाकई यहां
से जेपी या लोहिया क्यों उभरे थे भारत की

बिहार को कहा जाता है उसकी वजह यह है कि
बड़े-बड़े आंदोलन और राजनीतिक बदलाव
सामाजिक बदलाव जो होता है वह बिहार की

जमीन से होता है तो 120 सीटों पर भारतीय
जनता पार्टी वाकई फंस गई है अब आपके जहन
में यह भी आ सकता है कि साहब कांग्रेस आई
क्या करेगी कांग्रेस आई मैं बता रहा हूं
ना कि इन दिनों 10 साल की एंटी एंटी

इनकंबेंसी और अगर मायावती किसी प्रकार से
मौके पर देखकर चौका लगा दें तो आप यकीन
मानिए यह ताबूत में आखिरी कील होगी 22
जनवरी जैसे कितने भी आयोजन कर ले भारतीय

जनता पार्टी अगर मायावती इस गठबंधन के साथ
आ जाती एंड मूवमेंट में जैसा कि लगता भी
है हो सकता है वह आ जाए काशीराम की तमाम
विरासत को बचाने के लिए अगर वह आगे बढ़ गई

अपना जो उनका एंपायर है भाइयों के पास जो
एक अकूत संपत्ति है अगर उसको बचाने में
लगी रही तो काशीराम की तमाम विरासत खत्म

हो जाएगी भारतीय बहुजन समाज पार्टी इस बार
जमी दोज हो जाएगी लेकिन उसके बे उसके लिए
बेहतरीन विकल्प आजाद समाज पार्टी के जो

चंद्रशेखर रावण हैं और खुद कांग्रेस आई के
जो अध्यक्ष है खड़गे साहब वह यहां के
दलितों पर यहां के जाटव पर बहुत ज्यादा
इंपैक्ट छोड़ने वाले हैं और इस तरह के

लोकल अगर
छत्रपुरा की स्थिति मैं आपको बताऊं इस बार
से पिछली बार जो इलेक्शन हुआ था वहां वह
हार्दिक पांड्या था क्या नाम एक जिग्नेश

था इस अल्पेश ठाकुर तोती ये लोकल क्षत्रप
थे इन्होंने भारतीय जनता पार्टी की जमीन
को सिड़क रख दिया था तो जब मोदी जी के

गुजरात के अंदर जमीन को सिड़क है भारतीय
जनता पार्टी के लिए तो यहां लोकल छत्र पकर

चंद्रशेखर रावण जैसे आ गए और मैंने आपसे
कहा ना बहुजन समाज का वोट अगर उन्होंने 10
फीसद भी मतलब 50 पर वोट भी अगर यह बहुजन
समाज पार्टी का वोट ले गए हालांकि अखिलेश
यादव को मिलता है तो आप यकीन मानिए कि

यहां बिहार में और उत्तर प्रदेश में हालात
बिल्कुल ऐसे हो जाएंगे कि जिस चीज को भी

थोड़े दिनों पहले सोच रहे हैं ना सब कुछ
चंगा सी वो सब कुछ चंगा स नहीं मिलेगा
यहीं से उत्तर प्रदेश से कहते हैं ना कि
जाएगा वहां पर प्रधानमंत्री के लिए रास्ता
यहीं से बंद होने का रास्ता वाकई चला

जाएगा जाति समीकरण दोस्तों एक ऐसी चीज
होती है मैं पढ़कर नहीं सुनाना चाहता आपको
क्योंकि इसके अंदर वही आंकड़े हैं जाति

समीकरण एक ऐसी चीज होती है कि इनके आगे
कोई नहीं टिकता एक साहब है वो कह रहे थे

कि भारत जो है वो कृषि प्रधान देश नहीं है
जाति प्रधान देश है आज आज हमारी विडंबना

 

है मैं से बदकिस्मती भी कहता हूं कि हमारे
जो वोटर्स है वह सबसे पहले तो अपना जाति
देखता है धर्म देखता है पार्टी देखता है
देश का नंबर तो बहुत बाद में आता है 1015
साल 20 साल पहले ऐसी स्थिति नहीं थी पहले
देश के लोकतंत्र की संविधान की और पार्टी
की बात हुआ करती थी उसके बाद फिर जाति
धर्म की बात होती थी और फिर जाके अपने
अपने वर्ग की बात होती थी लेकिन अब
सिनेरियो लड़ दिया है भारतीय जनता पार्टी
ने ऐसा आरोप लगता है अब तो देखा जाता है

कि कौन से वर्ग का आदमी है और कौन से वर्ग
को नुकसान पहुंचा रहा है देश के अंदर
तरक्की होगी नहीं होगी यह वाला मसला नहीं
है कौन से वर्क के पेज टाइट हो जाएंगे
बहरहाल ये खबर है मैंने आपको बताई आपको
कैसी लगी अपनी राय कमेंट्स बॉक्स में जरूर

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हाजिर होता हूं जय हिंद

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